Generated by All in One SEO v4.9.4.1, this is an llms.txt file, used by LLMs to index the site. # आब-ओ-हवा My WordPress Blog ## Sitemaps - [XML Sitemap](https://aabohawa.org/sitemap.xml): Contains all public & indexable URLs for this website. ## Posts - [Blog](https://aabohawa.org/blog/) - [आज दुनिया की चुनौतियाँ और सत्याग्रह](https://aabohawa.org/modern-global-challenges-and-satyagraha-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - सत्याग्रह केवल रणनीति नहीं, यह संघर्ष का नया दर्शन था, जो दक्षिण अफ्रीका की धूल-भरी सड़कों पर जन्मा और भारत की गर्म मिट्टी में खिलकर दुनिया भर में फैल गया... - [राग दरबारी: पिता ने मुझे दी, मैंने बेटे को...](https://aabohawa.org/raag-darbari-book-travelling-to-generations-writes-sharad-devsthale/) - जब भी किसी ने पूछा है कि तुम्हारी मनपसंद किताब कौन सी है, बिना एक पल गंवाये 'राग दरबारी' ही कहा है मैंने... - [कुत्ते](https://aabohawa.org/kutte-vyangya-by-aditya/) - सुना है अफ़रातफ़री के दौरान गलगोटिया के नान बॉयोलॉजिकल कुत्ते ने सरकार को ही काट लिया। शायद वह अपना विदेशी नाम (ओरियन) रख दिये जाने से नाराज़ था! - [महाप्राण: व्यक्ति से कवि होना](https://aabohawa.org/mahapran-poetic-journey-of-suryakant-tripathi-nirala-by-yatindranath-rahi/) - डॉ. रामविलास शर्मा कहते हैं ‘जुही की कली’ को अगर निराला की पहली रचना मान भी लिया जाये, तो भी साफ़ दिखता है कि यह कविता इसी वेदना के अनुभवों से उपजी... - [अवधूत कौन है?](https://aabohawa.org/who-is-avdhoot-of-kabir-das-writes-hazari-prasad-dwivedi/) - कबीर के अवधूत को लेकर हज़ारी प्रसाद द्विवेदी का यह लेख अनेक भ्रांतियां दूर करता हुआ, एक निष्कर्ष तक पहुंचता है... - [मातृभाषा दिवस: कल, आज और कल](https://aabohawa.org/international-mother-language-day-how-it-matters-wrtites-pramod-dixit-malay/) - वास्तव में मातृभाषा दिवस को बांग्लादेशी विद्यार्थियों की अपनी भाषा की रक्षा के लिए छठे दशक के मध्य में पाकिस्तानी सरकार के विरुद्ध संघर्ष में देखा जाना चाहिए... - [क्या हैं नवगीत और कैसे?](https://aabohawa.org/navgeet-kya-hain-aur-kaise-navgeet-par-char-navgeet/) - नवगीतों का रंग-रूप और चाल-चरित्र क्या होता है? इस विषय पर नवगीतकार ख़ुद क्या महसूस करते हैं! - [अमेरिका में भारत](https://aabohawa.org/america-mein-bharat-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - अमेरिका में भारत की उपस्थिति किसी एक घटना, स्मारक या एक प्रवासी समुदाय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समय के साथ निर्मित एक विस्तृत सांस्कृतिक, वैचारिक और... - [कला ऋषि एल.एन. भावसार स्मृति शेष](https://aabohawa.org/kalarishi-bhavsar-smriti-shesh-writes-subhash-arora/) - कला गुरु उमेन्द्र वर्मा एवं कला मित्र वीरेन्द्र नागवंशी से 14 फरवरी को आदरणीय कलाऋषि एल.एन. भावसार के संसार से विदा होने का दुखद समाचार मिला... - [उर्दू शायरी की ‘डेवलपमेण्ट टाइमलाइन’](https://aabohawa.org/urdu-shayri-ki-development-timeline-writes-deepak-roohani/) - उर्दू-शायरी से यदि कोई ऐसा शायर प्रस्तुत करना हो, जो कि सही मायनों में उत्तर आधुनिकता की कसौटी पर खरा उतरता हो तो बेशक फ़रहत एहसास साहब का नाम लिया जा सकता है... - [एआई की होड़, क्या आर्म्स रेस जैसी?](https://aabohawa.org/ai-companies-on-their-way-to-the-arms-trade/) - पाक्षिक ब्लॉग ए. जयजीत की कलम से.... एआई की होड़, क्या आर्म्स रेस जैसी? इन दिनों दुनिया की तमाम बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां और विकसित देश मुख्य तौर पर दो क्षेत्रों में ख़र्च एवं निवेश कर रहे हैं। पहला रक्षा क्षेत्र और दूसरा आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस (एआई)।हर देश को अपनी सुरक्षा की चिंता - [प्यार के दिन ख़ूनख़राबे की तस्वीर!](https://aabohawa.org/film-of-bloodshed-on-the-day-of-love-blog-by-bhavesh-dilshad/) - साफ़ दिखायी दे रहा है क्रूर, वीभत्स और भयावह हिंसक दृश्यों वाले सिनेमा को पूरा उद्योग प्रमोट इस तरह कर रहा है, जैसे यह कोई फ़ॉर्मूला हो या कामयाबी की गारंटी... - [एक नज़्म, एक शेर, एक प्ले, एक तस्वीर, और फ़ज़ल ताबिश](https://aabohawa.org/ek-nazm-ek-sher-ek-ple-ek-tasveer-aur-fazal-taabish/) - पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से.... एक नज़्म, एक शेर, एक प्ले, एक तस्वीर, और फ़ज़ल ताबिश एक नज़्म, एक शेर, एक प्ले और एक तस्वीर के साथ फ़ज़ल ताबिश साहब मेरी यादों में ऐसे मेहमान हुए कि फिर कभी लौटे ही नहीं… इसे मैं इस तरह भी कह - [ध्वनि से अर्थ तक: लेखन की आंतरिक यात्रा](https://aabohawa.org/dhwani-se-arth-tak-lekhan-ki-aantrik-yatra-blog-by-sanjeev-jain/) - यदि आपने कभी महसूस किया है कि लिखते समय कुछ भीतर काँपता है और वही असली लेखन है, तो यह शृंखला आपकी है... - [मध्य प्रदेश के यादगार चेहरे](https://aabohawa.org/eminent-faces-from-madhya-pradesh-blog-by-deeksha-manish/) - मध्य प्रदेश 70वें साल में प्रवेश कर चुका है। मध्य प्रदेश के बारे में सामान्य ज्ञान के साथ ही कुछ विशिष्ट जानकारियां, बातें और विमर्श हम इस ब्लॉग में पढ़ेंगे... - [खुसरो पाती प्रेम की बिरला बांचे कोय](https://aabohawa.org/khusro-paati-prem-ki-birla-baanche-koy-essay-by-shashi-khare/) - प्रश्न उठता है कि प्रेम क्या है? उपनिषदों और महान धार्मिक ग्रन्थों में उल्लिखित कोई गंभीर दर्शन है या सामान्य मानव मन को उद्वेलित और गतिमान रखने वाला कोई भाव? - [अंक - 45](https://aabohawa.org/edition-45/) - आब-ओ-हवा – अंक - 45 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में मिर्ज़ा ग़ालिब की याद का एक ख़ास पन्ना। विश्व रेडियो दिवस गया, प्रेम का दिन आया और शिव को समझने का दिन एक बार फिर आ रहा है। प्रासंगिकता के चलते इन तीनों पहलुओं - [मक़बूल... फ़िल्म की ज़मीन और आसमान](https://aabohawa.org/maqbool-plot-and-cult-status-of-vishal-bhardwaj-movie-blog-by-maanas/) - मक़बूल के प्रदर्शन से पहले कलात्मक सिनेमा के चहेतों को यह भनक लग गयी थी कि कुछ बेहतरीन आने वाला है। वजह थी मक़बूल का पोस्टर, जिस पर एक से एक दिग्गज कलाकार... - [कसौटी पर कितने खरे माधव कौशिक?](https://aabohawa.org/kasauti-par-kitne-khare-madhav-kaushik-blog-by-gyan-prakash-pandey/) - तक़रीबन दर्जन भर ग़ज़ल संग्रह के रचनाकार डॉ. माधव कौशिक किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। ग़ज़ल की दुनिया में आपका आला मुकाम है। पेशे से भाषा अधिकारी... - [सोनाबाई और उनके मौन का विस्तार](https://aabohawa.org/sonabai-and-expansion-of-her-silence-blog-by-shampa-shah/) - अंबिकापुर और रायपुर से निकलने वाले पत्र-पत्रिकाओं में उनके बारे में लेख छपे। लेकिन सोनाबाई को डर सताये रहता था कि कहीं कोई फिर से बाहर जाने के लिए न बुला ले... - [आयुर्वेद पर फैसला बिना सुनवाई?](https://aabohawa.org/why-judgemental-on-ayurveda-without-hearing-it-blog-by-alok-tripathi/) - आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था से जुड़े कई लोग तर्क देते हैं कि आयुर्वेद के पास पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं, इसलिए इसे मुख्यधारा की चिकित्सा शिक्षा या नीति... - [तंग नज़रों से ही देखें इस गुज़रते दौर को](https://aabohawa.org/tang-nazaron-se-hee-dekhen-is-guzarate-daur-ko/) - पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से.... तंग नज़रों से ही देखें इस गुज़रते दौर को यह समय लीडरों की बदमिज़ाजी, बेहयाई और बेशर्मी को सामने लाता दौर है। वैसे भी लीडर हमेशा चर्चा में ही रहे हैं। कभी बहुत बेहतरी के लिए कभी कमतरी के लिए। कभी दरियादिली के लिए - [कविता थेरेपी और मनोचिकित्सा](https://aabohawa.org/poetry-therapy-and-psychiatry-blog-by-rati-saxena/) - पाक्षिक ब्लॉग (गतांक से आगे) रति सक्सेना की कलम से.... कविता थेरेपी और मनोचिकित्सा अधिकतर पोएट्री थेरेपी के प्रयोग के बारे में भ्रांति होती है। लोग सोचते हैं कि थेरेपिस्ट मनोचिकित्सक होते हैं। मनोचिकित्सक एक अलग विधा है, दरअसल मनोवैज्ञानिक भिन्न-भिन्न क्षेत्र के हो सकते हैं। एक सूचना के अनुसार क़रीब - [इल्म, तजुर्बा, थ्योरी और अख़्तरुल ईमान](https://aabohawa.org/ilm-tajurba-aur-akhtarul-iman-blog-by-saleem-sarmad/) - मुझे एक किताब मिली 'सरो-सामां', अख़्तरुल ईमान की नज़्मों का संकलन... शायद किताबें भी अपने पाठक के इल्म और तजरुबे को परखती हैं फिर वो उनके हाथ आती हैं... - [राजस्थान में मरुस्थल रोकने में अरावली का महत्व](https://aabohawa.org/importance-of-aravalli-in-preventing-desertification-in-rajasthan/) - पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... राजस्थान में मरुस्थल रोकने में अरावली का महत्व अरावली पर्वत शृंखला भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है, जो गुजरात से दिल्ली तक लगभग 800 किलोमीटर में फैली हुई है। हाल ही में यह खनन, संरक्षण और पहाड़ियों की नयी - [सिल्क गौहर, इंशा का अजीबो-गरीब प्रयोग](https://aabohawa.org/silk-gauhar-insha-ka-ajeebo-gareeb-prayog/) - पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... सिल्क गौहर, इंशा का अजीबो-गरीब प्रयोग “सिल्क गौहर” पहली उर्दू किताब है, जो बिना किसी बिंदी वाले उर्दू अक्षरों से बने शब्दों में लिखी गयी है। इसे इंशाअल्लाह ख़ान इंशा ने लिखा था, जो एक मशहूर उर्दू शायर और लेखक थे और हमेशा कुछ - [पंचवाक्य: जहाँ ठहरकर चोट करता है व्यंग्य](https://aabohawa.org/panchavaaky-jahaan-thaharakar-chot-karata-hai-vyangy/) - पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से.... पंचवाक्य: जहाँ ठहरकर चोट करता है व्यंग्य व्यंग्य साहित्य केवल हँसी-मज़ाक या तात्कालिक मनोरंजन की विधा नहीं है, बल्कि वह समाज के अंतर्विरोधों, विडंबनाओं और विसंगतियों को उजागर करने का एक सशक्त साहित्यिक माध्यम है। अपनी प्रकृति में यह जितना सहज और - [भोपाल और मिर्ज़ा ग़ालिब](https://aabohawa.org/bhopal-and-mirza-ghalib-book-excerpt/) - 1857 के ज़माने में ग़ालिब आर्थिक तौर पर बहुत परेशान थे। जब उनकी परेशानी का हाल भोपाल नवाब सिकन्दर जहां बेगम को मालूम हुआ तो उन्होंने ग़ालिब को भोपाल बुलाना... - [इतिहास से कम नहीं रामचंद्र गुहा के संस्मरण](https://aabohawa.org/memoirs-by-ramchandra-guha-saamne-aate-hi-nahin-blog-by-namita-singh/) - 'सामने आते ही नहीं' रामचंद्र गुहा की संस्मरण पुस्तक 'द कुकिंग ऑफ़ बुक्स' का हिंदी अनुवाद है। इस साहित्यिक पुस्तक का हिंदी अनुवाद हृदयेश जोशी ने किया है... - [अर्द्धनारीश्वर](https://aabohawa.org/ardhanarishwar-writes-mangla-anuja/) - शिव का वह स्वरूप जिसमें उनके शरीर के दाहिने आधे अंग में वे स्वयं तथा बाहिने ओर पार्वती का रूप रहता है। वैद्यकशास्त्र के अनुसार 'अर्द्धनारीश्वर' एक अंजन भी... - [बदली-बदली नज़र आती है दुनिया आवाज़ की](https://aabohawa.org/duniya-aawaz-ki-world-radio-day-writes-dinesh-pathak/) - पाश्चात्य विद्वानों ने रेडियो को थिएटर ऑफ़ द माइंड कहा है क्योंकि इसके ज़रिये कानों तक पहुंचे शब्द और स्वर श्रोता के मस्तिष्क में एक अलग छवि की रचना करते हैं... - [एक शहर में सपने बिकते हैं... शानी का निबंध](https://aabohawa.org/ek-shahar-mein-sapne-bikte-hain-by-shani/) - गुलशेर ख़ान शानी (16 मई 1933—10 फ़रवरी 1995) हिंदोस्तानी साहित्य के बावक़ार नाम रहे हैं। काला जल, सांप और सीढ़ी, सब एक जगह जैसे अफ़सानों और उपन्यासों... - [अली अब्बास उम्मीद के मिसरों पर कहे गये शेर](https://aabohawa.org/poets-recite-poetry-in-memory-of-ali-abbas-ummeed/) - प्रोग्राम के आख़िरी हिस्से में तरही महफ़िल मुनअक़िद की गयी। मरहूम अली अब्बास उम्मीद के दो मिसरों पर शोअरा ने अपनी ख़ूबसूरत तख़्लीक़ात पेश कीं... - [एआई का झोला-छाप क्लिनिक](https://aabohawa.org/ai-ka-jhola-chhaap-clinic-vyangya-by-mukesh-aseemit/) - अख़बार में विज्ञापनों के मायाजाल में फंसी इस ख़बर पर नज़र पड़ी- "ए.आई. नीम हकीमी..चैट जीपीटी से परामर्श लेकर खाने का नमक बदला, ख़तरे में आयी जान"! - [अमेरिका: पार्किंग का चक्रव्यूह](https://aabohawa.org/parking-problem-in-america-learning-for-india-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - अमेरिका को 'पहियों पर चलने वाला देश' कहा जाता है। न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी जैसे महानगरों में पार्किंग अब केवल सुविधा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चुनौती बन गयी है.... - [पेंटर उकेरता यादें और फोटोग्राफर क्षणभंगुरता!](https://aabohawa.org/creative-aspects-of-painters-and-photographers/) - पंजाब कला भवन में एम.एस. रंधावा स्मृति कार्यक्रम के अंतर्गत प्रख्यात पेंटर मदनलाल और पंजाब गौरव अलंकरण विभूषित छायाकार देव-इन्दर की कलाधर्मिता पर कला-विमर्श... - [प्रेमचंद की अल्पचर्चित कहानियां: नया नज़रिया](https://aabohawa.org/premchand-ki-alpcharchit-kahaniyan-naya-nazariya-review-by-asmita-singh/) - आनंद प्रकाश की आलोचना की सबसे बड़ी ख़ूबी यह नज़र आती है कि वह चाहे जिस विषय को उठाएं, उसमें एक नवीन दृष्टिकोण अवश्य रहता है, जो पाठक की चेतना को कुरेदता है... - [साठोत्तरी साहित्य: विद्रोही चेतना, विमर्श और द्वंद्व](https://aabohawa.org/post-nehruvian-era-hindi-literature-notes-by-vivek-ranjan-shrivastav/) - साठोत्तरी साहित्य भारतीय रचनाकाल का वह कालखंड है, जो नेहरूवादी 'रोमांचक समाजवाद' के अवसान के मोहभंग की कठोर ज़मीन पर खड़ा हुआ। 1960 के बाद... - [रब्त](https://aabohawa.org/rabt-vyangya-by-mudit-revatati/) - रब्त बिठाने में तो अमूमन हर आदमी मशग़ूल है, पर रब्त बैठे तब ना! क्या ग़ज़ल और क्या ज़िंदगी, रब्त की कमी तो रह ही जाती है। इन आलोचकों को कौन समझाये? - [उत्तराखंड में नफ़रत के ख़िलाफ़ मोर्चा](https://aabohawa.org/stand-agains-hate-spreading-in-uttarakhand/) - उत्तराखंड में हाल ही हुई चर्चित सांप्रदायिक घटना के बाद प्रेस के सामने जो चिंताजनक हालात बन रहे हैं, उनके संबंध में एक चिट्ठी मिली है... - [मोबाइल गेम्स, डार्क इकोनॉमी... रास्ता क्या है?](https://aabohawa.org/mobile-games-addiction-dark-web-safety-tips-by-vivek-ranjan-shrivastav/) - गाज़ियाबाद की घटना ने डिजिटल डेथ ट्रैप से जुड़े सवाल फिर उठाये हैं। मासूमों की जान जा रही है और गेम संचालक किस तरह का कुत्सित व्यापार कर रहे हैं? - [दलाई लामा के मेडिटेशन को ग्रैमी अवॉर्ड](https://aabohawa.org/grammy-award-to-dalai-lama-audiobook-meditation/) - मनोरंजन जगत के शीर्ष पुरस्कारों में से एक दलाई लामा को कैसे मिला? चीन इससे क्यों बौखलाया? स्टीवन स्पीलबर्ग भी क्यों ग्रैमी पुरस्कार की ख़ास सुर्ख़ियों में रहे? - [नौकरशाह रंधावा क्यों हैं आज भी प्रासंगिक?](https://aabohawa.org/why-ms-randhava-is-still-remembered/) - सम्मेलन में पंजाब के कबीना मन्त्री तरुणप्रीत सिंह सोंद और शाम की सभा में राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने रंधावा के योगदान को याद किया... - [कहानी के बदलते स्वरूप](https://aabohawa.org/changing-patterns-of-hindi-kahani-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - विषय और शिल्प की विविधता के कारण, 'अच्छी कहानी' के पैमाने बदल गये हैं और अक्सर विवादास्पद रहते हैं। विहंगम दृष्टि डालें तो हिंदी कहानी के साहित्यिक मूल्यों... - [अमेरिका में लिखने-पढ़ने की संस्कृति](https://aabohawa.org/reading-writing-and-book-culture-in-america-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - अमेरिका में पुस्तक व्यवसाय एक परिपक्व उद्योग के रूप में विकसित हुआ है। पुस्तक प्रकाशन केवल व्यवसायिक गतिविधि नहीं बल्कि संगठित सांस्कृतिक व्यवस्था है... - [वो अदम जिनका दम भरती है हिंदी ग़ज़ल](https://aabohawa.org/adam-gondvi-jinka-dum-bharti-hai-hindi-ghazal-blog-by-gyan-prakash-pandey/) - दुष्यंत पर लेख प्रस्तावना बन चुका है, अब मैं समकालीन ग़ज़लकारों की बात करूंगा। कौन नहीं जानता दुष्यंत के बाद कथित हिंदी ग़ज़ल के द्वितीय पूज्य अदम गोंडवी हैं... - [व्यंग्य का विश्वरूप: विदेशों में व्यंग्य लेखन का अध्ययन](https://aabohawa.org/vyangya-ka-vishwaroop-study-of-satire-writing-worldwide-blog-by-arun-arnaw-khare/) - स्पष्ट होता है कि विश्व की लगभग सभी प्रमुख भाषाओं में व्यंग्य की सशक्त उपस्थिति रही है तथा उसकी भूमिका भी नैतिक प्रहरी, विद्रोह तथा मानवीय विवेक की रही है... - [सोनाबाई... अपने अकेलेपन से मौलिक प्रतिशोध](https://aabohawa.org/story-of-creative-lonliness-of-sonabai-rajwar-blog-by-shampa-shah/) - नहीं, सोना बाई ने अपने घर में यह सुंदर जालियां, यह जानवर, पक्षी, मानव आकृतियां इसलिए नहीं बनाये थे कि एक दिन लोग आकर उनसे इन सबके बारे में पूछें अथवा... - [सेहत आयात नहीं होती: सही भोजन कैसे चुनें?](https://aabohawa.org/you-cant-import-health-pick-appropriate-food-blog-by-alok-tripathi/) - उदाहरण के लिए, मैंने सेब की तुलना शरीफ़ा और बैंगन से की और पाया कि समान मात्रा में ये दोनों उससे अधिक लाभकारी हैं... - [सुबह और सांझ के माथे पर ग़मों की गठरी](https://aabohawa.org/subah-aur-sham-ke-maathe-gham-ki-gathri-blog-by-ashish-dashottar/) - शाइरी सहर के उजियारे को शाम के अंधेरे में धकेलने वालों पर उंगली उठाती है। शकील बदायूंनी भी इसी तकलीफ़ देती सांझ तक पहुंचती सहर की चिन्ता करते हैं... - [दिल चाहता है... अनेक परिभा​षाएं गढ़ने वाली फिल्म](https://aabohawa.org/dil-chahta-hai-movie-that-defined-cinema-many-ways-blog-by-maanas/) - फ़रहान अख़्तर ने अपनी पहली फ़िल्म बनाने से पहले यह समझ लिया था कि वास्तविक किरदार कितने प्रभावशाली होते हैं और उन्हें कैसे गढ़ा जाता है... - [अंक - 44](https://aabohawa.org/edition-44/) - आब-ओ-हवा – अंक - 44 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में महात्मा गांधी और माखनलाल चतुर्वेदी जैसे पुरखों को विनम्र प्रणाम। साहित्य के पद्म पुरस्कारों का जाएज़ा। लता मंगेशकर के पांचवे अवसान दिवस के संदर्भ में उनके अंतिम साक्षात्कार के अंश विशेष रूप से। शायर - [महात्मा गांधी: विचार दर विचार](https://aabohawa.org/mahatma-gandhi-decoded-by-thoughts-writes-vivek-mehta/) - गांधी अपने पूर्वजों की सीख पर चले। जैन धर्म के सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह के सिद्धांतों का उन पर प्रभाव था। गीता पर उनकी श्रद्धा थी। व्यक्ति राम नहीं, भगवान राम... - [माखनलाल चतुर्वेदी: जिन्हें बहुत मानते थे गांधीजी](https://aabohawa.org/makhanlal-chaturvedi-loved-by-mahatma-gandhi-writes-pramod-dixit-malay/) - 30 जनवरी को देश पुण्यतिथि के अवसर पर उस महान संपादक और देश में पत्रकारिता के विद्यापीठ के स्वप्नकार के प्रति श्रद्धासुमन समर्पित कर स्वयं गौरवान्वित है... - [ताहिर फ़राज़ को ख़िराज](https://aabohawa.org/good-bye-to-urdu-poet-tahir-faraz-by-dr-azam/) - ताहिर फ़राज़ का जन्म 29 जून 1953 को बदायूं की सरज़मीन पर हुआ और वहीं शायरी परवान चढ़ी। फिर ऐसी शोहरत मिली कि वो रामपुर स्कूल के नुमाइंदा शायर बन गये... - [कविता थेरेपी को ज़िन्दगी में देखते हुए](https://aabohawa.org/watching-poetry-therapy-in-my-life-blog-by-rati-saxena/) - पाक्षिक ब्लॉग (गतांक से आगे) रति सक्सेना की कलम से.... कविता थेरेपी को ज़िन्दगी में देखते हुए मैं पोइट्री थेरेपी की बात करते हुए लीक से ज़रा-सा भटक जाऊं, तो संभव है, मैं अपनी बात को ज़्यादा स्पष्ट कर सकती हूं। मैं पोइट्री थेरेपी से सम्बन्धित दो अनुभवों को साझा - [जातिवाद, मुस्लिम समाज में ऊँच-नीच की कहानियां](https://aabohawa.org/stories-of-casteism-in-muslim-community-blog-by-namita-singh/) - पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... जातिवाद, मुस्लिम समाज में ऊँच-नीच की कहानियां ‘तश्तरी’ सुहेल वहीद द्वारा संपादित मुस्लिम समाज में जातिगत ऊँच-नीच पर केंद्रित कहानियों का संग्रह है। सुहेल वहीद का नाम हिन्दी-उर्दू पत्रकारिता में चर्चित है। उर्दू दैनिक ‘क़ौमी आवाज़’, हिन्दी दैनिक ‘नवभारत टाइम्स’, ‘नई दुनिया’ और फिर उर्दू मासिक - [उर्दू के शेक्सपियर का सिल्वर किंग](https://aabohawa.org/silver-king-of-shakespeare-of-urdu-blog-by-dr-azam/) - पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... उर्दू के शेक्सपियर का सिल्वर किंग सिल्वर किंग आग़ा हश्र कश्मीरी का एक बहुत मशहूर सुधारवादी और एजुकेशनल ड्रामा है। यह वेस्टर्न ड्रामा “सिल्वर किंग” (हेनरी आर्थर जोन्स) से प्रेरित है, लेकिन इसे आग़ा हश्र कश्मीरी ने पूरी तरह से भारतीय माहौल, संस्कृति - [राम गांगुली: 'आग' की शोहरत का पल भर में धुआं होना](https://aabohawa.org/ram-ganguly-music-masters-rise-and-fall-blog-by-vivek-savrikar-mridul/) - पाक्षिक ब्लॉग विवेक सावरीकर मृदुल की कलम से.... राम गांगुली: 'आग' की शोहरत का पल भर में धुआं होना दोस्तो, विगत एक वर्ष से “उड़ जाएगा हंस अकेला” के निमित्त से फ़िल्म संगीत के अनमोल ख़ज़ाने से कुछ गीतों, गीतकारों, गायकों और संगीतकारों को याद करने का ये उपक्रम - [डिकेन्स कृत 'ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स'... एक पाठ](https://aabohawa.org/reading-charles-dickens-the-great-expectations-blog-by-nishant-kaushik/) - पाक्षिक ब्लॉग निशांत कौशिक की कलम से डिकेन्स कृत 'ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स'... एक पाठ ‘ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स’ उन उपन्यासों में से एक है, जिसे मैंने अपने जीवन के शुरूआती दौर में पढ़ा था -लगभग सत्रह वर्ष की उम्र में- जब मैं अभी अंग्रेज़ी सीख ही रहा था और मेरी शिक्षा का - [मैं तुम्हारे लिए गा रही हूं... लता मंगेशकर का अंतिम इंटरव्यू](https://aabohawa.org/excerpts-from-last-interview-given-by-lata-mangeshkar-writes-dinesh-pathak/) - फ़ोन पर बातचीत का सिलसिला कई दिन चला और लता दीदी ने, 92 वर्ष की आयु के बावजूद न केवल पंडित रविशंकर बल्कि जीवन, कला, संबंध आदि को लेकर तमाम बातें साझा कीं... - [अथ श्री पद्म-पुरस्कारम् प्रपंच कथा](https://aabohawa.org/padmashri-padma-bhushan-prapanch-katha-blog-by-bhavesh-dilshad/) - भारत रत्न तक के चयन पर उंगली उठती है, तब पद्म पुरस्कारों में नुक़्स निकालना बेरोज़गारों का काम कहा जा सकता है। बात साहित्य श्रेणी के पुरस्कारों की है, तो... - [एआई हमें और ‘मक्कारी’ सिखा रही है!](https://aabohawa.org/if-artificial-intelligence-pushes-us-to-be-more-corrupt-blog-by-jayjeet/) - सवाल यह है कि इंसान अपने दिमाग़ की प्रतिकृति आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के रूप में तैयार कर रहा है, तो क्या वह अपनी बेईमानी और मक्कारी को भी स्थानांतरित कर रहा है? - [ग्रीनलैंड: संकट की वैश्विक चुनौती](https://aabohawa.org/greenland-global-threat-of-disaster-blog-by-viven-ranjan-shrivastav/) - ग्रीनलैंड अनछुए खनिज संसाधनों और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति के कारण हमेशा से वैश्विक रुचि का केंद्र रहा है, आज यह वैश्विक पर्यावरणीय संकट का प्रतीक बन गया है... - [बर्फ़ीला तूफ़ान.. हडसन नदी में तैरती बर्फ़, सड़कों पर ढेर](https://aabohawa.org/snowstorm-in-america-snow-floats-on-hudson-river-writes-vivek-ranjan/) - जनवरी की तेज़ शीतलहर के बाद हडसन नदी पर बर्फ़ की मोटी सिल्लियां तैर रही हैं, न्यूयॉर्क और न्यू जर्सी सड़कों पर जगह‑जगह बर्फ़ के ऊँचे ढेर हैं... - [खेद है - एक राष्ट्रीय भावना का आधुनिक संस्करण](https://aabohawa.org/khed-ek-rashtriya-bhavna-ka-adhunik-sanskaran-vyangya-by-mukesh-aseemit/) - ट्रेन लेट हो जाये तो खेद, ट्रेन रद्द हो जाये तो गहरा खेद, और अगर समय पर आ जाये तो भी एहतियातन खेद क्योंकि इतनी चमत्कारी घटना पर शक होना स्वाभाविक है... - ["कम शब्दों में अधिक अर्थ की कविताएं"](https://aabohawa.org/kam-shabdon-mein-adhik-kavita-says-urmila-shirish/) - उर्मिला शिरीष ने कहा कि वह चित्रा सिंह के लेखन कर्म से शुरूआत से परिचित रही हैं और उनकी संवेदनशील कविताओं की प्रशंसक भी। संवाद सत्र में जब उन्होंने... - [ब्रेन ड्रेन, ब्रेन गेन या ब्रेन वेस्ट?](https://aabohawa.org/brain-drain-brain-gain-or-brain-waste-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - कड़े वीज़ा प्रतिबंध प्रतिभा के लोक व्यापीकरण पर कुठाराघात हैं और इस पूरे परिदृश्य को यदि किसी एक मुहावरे में समेटना हो तो वह है 'घर का न घाट का'.... - [गणतंत्र की हिन्दू राजनीति और राज्यदर्शन को देन](https://aabohawa.org/contribution-of-republic-to-hindu-politics-and-state-concepts/) - 'प्राचीन भारत में जनतंत्र', यह एक पुस्तक नहीं बल्कि जनतंत्र की खोज का दस्तावेज़ मालूम होता है। उपसंहार से पूर्व इस पुस्तक का अंतिम अध्याय एक लंबा लेख है... - [सलाम मार्क टली... यादें, क़िस्से और किताबें](https://aabohawa.org/salaam-mark-tully-memories-stories-and-books/) - भारत में अंग्रेज़ी पत्रकारिता का पर्याय कहे गये तो कभी बीबीसी की भारत की आवाज़ तो कभी ​पत्रकारिता में विश्वसनीयता की कसौटी... मार्क टली नहीं रहे... - [वॉन गॉग का कान](https://aabohawa.org/van-gogh-ka-kaan-story-by-manoj-kulkarni/) - मनोज कुलकर्णी की कहानी वह यक्ष प्रश्न है, जो मानवीय सरोकारों के युधिष्ठिर को मथता है कि लिखना ज़रूरी है या प्रतिरोध की किसी सीधी कार्रवाई में हिस्सा लेना.... - [निराला और वीणावादिनी](https://aabohawa.org/nirala-aur-veenavadini-nirala-ki-prasiddh-kavita/) - वसंत पंचमी पर छायावाद के एक स्तंभ सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला के काव्य से ऐसी रचनाएं, जिनमें प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से वीणावादिनी का स्वर/रूप/गन्ध/वर्ण है... - [बदीउज़्ज़मां, जैसा मैंने उन्हें जाना](https://aabohawa.org/badiuzzaman-as-i-know-him-writes-zakia-mashhadi/) - इस तरह के लोगों को पुराने मुसलमान घरानों में 'अल्लाह लोग' कहा जाता। मेरे वालिद पहली बार उनसे मिले तो वापस आकर कहा, 'ख़्वाजा' साहब तो बिल्कुल अल्लाह लोग हैं'... - [भारत में परिवारवाद](https://aabohawa.org/dynasty-or-nepotism-in-indian-politics-writes-aditya/) - देवताओं के भी परिवार हुआ करते थे। स्थापित देवताओं के अपने-अपने परिवार हैं जो सुस्थापित हैं। अपने परिवार के प्रति देवी-देवताओं में भी माया-मोह देखा जा सकता है... - [परदेस में मूल्य निर्धारण](https://aabohawa.org/determination-of-value-abroad-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - पर्यटन इन दिनों विश्व स्तर पर बहुत सहज है। इस स्थिति में दूसरे देश में चीज़ों की क़ीमत समझने का सही तरीक़ा सिर्फ़ अपनी मुद्रा में कन्वर्ट करना नहीं बल्कि... - [नाम बदलने की समझ बनाम सनक](https://aabohawa.org/whims-vs-intentions-behind-renaming-blog-by-bhavesh-dilshad/) - एक राग है काफ़ी... तब आपको क्या ख़याल आएगा जब किसी सरकारी प्राथमिक स्कूल में हाज़िरी लेते वक़्त मास्टर एक बच्ची को पुकारे 'काफ़ी'? - [आलोक चटर्जी: सिगरेट जो धुआं हो गयी](https://aabohawa.org/bhavesh-dilshad-remembers-alok-chatterjee-as-cigarette-and-smoke/) - आलोक भाई को मैंने भोपाल के रवींद्र भवन में 'नटसम्राट' में देखा था। श्रीराम लागू और नाना पाटेकर जिस भूमिका को अमर कर चुके, उसे जीना एक जोखम लेना ही था... - [इज़रायल बनाम हमास: नाइंसाफ़ी से लड़तीं आइदा से चर्चा](https://aabohawa.org/vineet-tiwari-talks-with-israel-parliament-member-aida-touma-suleiman-on-war-against-hamas/) - आइदा टूमा सुलेमान इज़रायल की संसद की सदस्य हैं। वे इज़रायल की नागरिक हैं, अरब ईसाई मूल की हैं लेकिन वे स्वयं को घोषित तौर पर नास्तिक कहती हैं... - [आलोचक वीरेंद्र यादव होने के मायने](https://aabohawa.org/aalochak-virendra-yadav-hone-ke-maayne-writes-chandreshwar/) - सच कहूं तो वीरेंद्र यादव समकालीन हिंदी आलोचना में पूरी तरह से विश्वसनीयता के पर्याय थे। आप उनके लिखे पर भरोसा कर सकते थे.... - [अंक - 43](https://aabohawa.org/edition-43/) - आब-ओ-हवा – अंक - 43 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में मुख्य रूप से ​महत्वपूर्ण साहित्यकार ज्ञानरंजन पर फ़ोकस। ग़ज़ल के चर्चित हस्ताक्षर गोविंद गुलशन की याद को संजोने की भी एक कोशिश। इस अंक से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, पर्यावरणीय चिंतन और सिनेमा पर तीन नये - [भाषाओं के पार: व्यंग्य का भारतीय संसार-2](https://aabohawa.org/bhaashaon-ke-paar-vyangy-ka-bhaarateey-sansaar-2/) - पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से.... भाषाओं के पार: व्यंग्य का भारतीय संसार-2 दक्षिण भारतीय भाषाओं में तमिल-व्यंग्य की परंपरा अत्यंत प्राचीन और सामाजिक चेतना से जुड़ी रही है। संगम साहित्य से लेकर आधुनिक काल तक तमिल व्यंग्य ने सामाजिक विषमताओं, जाति-व्यवस्था, धार्मिक पाखंड, सत्ता के दमन और - [स्त्री-त्रासदी की शाश्वत गाथा फुलिया...](https://aabohawa.org/stree-traasadee-kee-shaashvat-gaatha-phuliya/) - पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... स्त्री-त्रासदी की शाश्वत गाथा फुलिया... आलोचना और कहानी लेखन के क्षेत्र में अस्मिता सिंह का जाना-माना नाम है। लघु-पत्रिकाओं के अलावा अनेक पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कहानियाँ और लेख प्रकाशित होते रहते हैं। उनके संपादन में प्रख्यात कवि कुमारेन्द्र पारसनाथ सिंह की कविताओं के बाद वरिष्ठ - [जल-जंगल-ज़मीन-हवा और हम](https://aabohawa.org/jal-jangal-zameen-hava-aur-ham/) - पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से... जल-जंगल-ज़मीन-हवा और हम जल, जंगल, ज़मीन और हवा के सवाल आज जीवन और अर्थव्यवस्था की धमनियों के प्रश्न बन गये हैं। पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज ने स्पष्ट किया है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण मौसमी चक्र बदल रहे हैं, अतिवृष्टि और सूखा - [हिन्दी ग़ज़ल में दृश्य चित्रण की बानगी-2](https://aabohawa.org/hindi-gazal-mein-drshy-chitran-kee-baanagee-2/) - विजय कुमार स्वर्णकार की कलम से.... हिन्दी ग़ज़ल में दृश्य चित्रण की बानगी-2 पिछले भाग में हमने कुछ ऐसे अशआर की पड़ताल की जिनमें दृश्य चित्रण प्रमुख है और कथ्य भी तग़्ज़्ज़ुल से भरपूर है। आइए कुछ और महत्वपूर्ण शेर देखते हैं:न तो ऑटो न ही रिक्शे दिखायी दे रहे - [कैसे ट्रीट करता है एक पोएट्री थेरेपिस्ट?-2](https://aabohawa.org/https-aabohawa-org-how-poetry-therapist-treats-part-two-blog-by-rati-saxena/) - मैंने सवाल किया, आपने लोगों की कहानियों को कविता में कैसे ढाला? सामान्य तौर पर यह प्रक्रिया कैसी थी? उनका जवाब था.... - [भांग का रासायनिक मूल्यांकन](https://aabohawa.org/chemical-analysis-of-cannabis-blog-by-alok-tripathi/) - आज विज्ञान जब इसके अणुओं को अलग-अलग नाम देकर समझने की कोशिश कर रहा है, तो वह दरअसल उसी पौधे को प्रयोगशाला की भाषा में दोहरा रहा है, जिसे... - [तो क्या इंसानी दिमाग़ की उल्टी गिनती शुरू?](https://aabohawa.org/has-countdown-begun-of-human-brain-blog-by-jayjeet-aklecha/) - कुछ वैज्ञानिक इस सवाल पर मंथन करने लगे हैं कि क्या एआई से हमारी थिंकिंग कैपेसिटी अर्थात सोचने-समझने की ताकत कम हो सकती है? और अंतत: पूरी तरह ख़त्म भी? - [राज़: कैसे बन गयी कल्ट फिल्म?](https://aabohawa.org/how-raaz-movie-becomes-a-cult-blog-by-maanas/) - राज़ को हिंदी फ़िल्म उद्योग के हॉरर सिनेमा में मील का पत्थर माना जाता है। यह पहली मेनस्ट्रीम हॉरर फ़िल्म बनी, जिसे फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेशन मिला... - [हृदयनाथ का मंगेशकर घराना](https://aabohawa.org/hridaynath-mangeshkar-songs-blog-by-vivek-savrikar-mridul/) - आज आज हम बात करते हैं फ़िल्म "सुबह" के एक प्रार्थना गीत की। गीत लिखा है पंडित नरेंद्र शर्मा ने और बोल हैं- "तुम आशा विश्वास हमारे... - [समर शेष है... और चुप्पी विशेष?](https://aabohawa.org/samar-shesh-hai-pankaj-ninad-comments-on-kulpati-and-manoj-rupda-controversy/) - मेज़बान की मर्यादा को तार-तार करते हुए कुलपति आलोक चक्रवाल ने मनोज रूपड़ा को भरी सभा में अपमानित कर सभा से चले जाने को कह दिया... - [अक्षर ब्रह्म-नाद ब्रह्म और संत वाणियां](https://aabohawa.org/akshar-brahma-naad-brahma-sant-vaani-blog-by-shampa-sha/) - कुमार गंधर्व के गाये सूर, कबीर, मीरा और तुलसी को सुना, तब इन संत कवियों की कविता, इनकी भावभूमि का फ़र्क क्या है, यह समझ में आया... - [नदियों के मायके की तस्वीर देखी आपने?](https://aabohawa.org/have-you-seen-nadiyon-ka-maayka-aka-mp-writes-deeksha-manish/) - एक ओर विंध्य पर्वत पर बहने वाली चंबल, बेतवा, केन, धसान, कालीसिंध और पार्वती तो दूसरी ओर सतपुड़ा पर्वत की श्रेणियों से निकलकर बहने वाली नर्मदा व सोन.... - [आज़ाद का स्टाइल उन्हीं से शुरू, उन्हीं पर ख़त्म](https://aabohawa.org/azad-ka-style-unhi-se-shuru-unhi-par-khatm-blog-by-dr-azam/) - यह उर्दू गद्य की एक शाहकार किताब है। इसमें 13 निबंध हैं। सभी रूपक शैली में लिखे गये हैं। इसे दो भागों में लिखा गया था... - [दरिया, कुहरा, मौत और नरेश कुमार शाद](https://aabohawa.org/dariya-kohra-maut-aur-naresh-kumar-shad-blog-by-saleem-sarmad/) - किसी किताब या मैगज़ीन में पढ़ा था कि 'एक सुब्ह नरेश कुमार शाद दरिया की तरफ़ गए और फिर कभी लौट कर नहीं आये... - [वक़्त के ज़ख़्म और ग़ज़ल का दामन](https://aabohawa.org/waqt-ke-zakhm-aur-ghazal-ka-daaman-blog-by-ashish-dashottar/) - ख़ुमार बाराबंकवी साहब का मैं इंटरव्यू ले रहा था। बात वक़्त की तल्ख़ियों की निकली तो हर एक से झुक के मिलने वाले ख़ुमार साहब बेहद संजीदगी से कहने लगे.... - [गोविंद सर की यादों का गुलशन](https://aabohawa.org/remembering-ghazalkar-govind-gulshan-by-taruna-mishra/) - गोविंद गुलशन ने मौसीक़ी की बाक़ायदा कोई तालीम नहीं ली लेकिन अपने हारमोनियम पर वो हर गाने की धुन बड़ी आसानी से निकाल लेते थे... - [इंद्रधनुष-7 : डॉ. तारिक़ क़मर](https://aabohawa.org/indradhanush-seven-ghazals-by-dr-tariq-qamar/) - तारिक़ क़मर के कलाम में नयी शाइरी का तेवर है लेकिन उनके अपने दस्तख़त के साथ। वह आज के शाइरों के बीच अलग सुनायी देने वाली आवाज़ की तरह उभर रहे हैं... - [कृतित्व के आईने में ज्ञानरंजन](https://aabohawa.org/asmita-singh-decoding-gyan-ranjan-writings/) - ग़ौर करने वाली बात यह है कि वो दौर नयी कहानी के अवसान का और 'अ-कहानी' के जन्म और प्रसार का था। ज्ञानरंजन 'नयी कहानी' के स्वर हैं व्यंग्यात्मकता के साथ... - [ज्ञानरंजन का जाना](https://aabohawa.org/gyan-ranjan-ka-jaana-remembering-braj-shrivastav/) - फ़ेन्स के इधर-उधर, पिता, बहिर्गमन और घंटा जैसी अद्भुत कहानियाँ लिखकर नयी कहानी के संसार में अपना स्थाई स्थान बनाने वाले ज्ञानरंजन के फैन्स की तादाद... - [कविता को नये संदर्भों में समझना होगा: रति सक्सेना](https://aabohawa.org/rati-saxena-sakshatkar-kavita-ki-rachna-prakirya/) - रचना प्रक्रिया को लेकर रति सक्सेना से सहायक प्राध्यापक सागर शर्मा की बातचीत, मूल अंग्रेज़ी में ​दर्ज साक्षात्कार हिंदी पाठकों के लिए अनुवाद रूप में प्रस्तुत... - [आदिवासी: अलग दुनिया, समान संघर्ष](https://aabohawa.org/indian-tribes-and-american-natives-study-by-vivek-ranjan-shrivastav/) - दुनिया के दो अलग-अलग कोनों में बसे भारतीय जनजातियाँ और अमेरिकी मूल निवासी (नेटिव अमेरिकन) पहली नज़र में एक-दूसरे से बिल्कुल भिन्न दिखायी देते हैं, लेकिन... - [किताबों का मूल्य अमूल्य](https://aabohawa.org/books-are-invaluable-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - दुनिया में यदि कोई वस्तु ऐसी है, जिसके मूल्य निर्धारण में बाज़ार का ज़ोर नहीं है तो वह किताब ही है। क्योंकि किताब में इंटेलेक्चुएल प्रॉपर्टी संग्रहीत होती है... - [हिंदी दिवस के दो उत्सव और न्यूयॉर्क में गूंज](https://aabohawa.org/how-new-york-celebrates-world-hindi-day-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस और 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है। दोनों का उद्देश्य एक ही है, फिर भी इनके परिप्रेक्ष्य अलग हैं... - 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[दो विचार, एक सदी और बेमेल तुलना](https://aabohawa.org/century-of-rss-and-cpi-analysis-by-manoj-kulkarni/) - आरएसएस और सीपीआई इसी बरस दोनों अपनी स्थापना के एक सौ वर्ष मना रहे हैं। लगभग साथ-साथ शुरू हुई इनकी यात्राओं में इन्होंने क्या खोया, क्या पाया... - [हिन्दी ग़ज़ल में दृश्य चित्रण की बानगी-1](https://aabohawa.org/hindee-gazal-mein-drshy-chitran-kee-baanagee-1/) - विजय कुमार स्वर्णकार की कलम से.... हिन्दी ग़ज़ल में दृश्य चित्रण की बानगी-1 कविता में दृश्य चित्रण की परंपरा आदिकाल से रही है। ग़ज़ल विधा भी इससे अछूती नहीं है ।यद्यपि ग़ज़ल की दो पंक्तियों में तग़ज़्ज़ुल के साथ दृश्य चित्रण करना चुनौती भरा काम है, फिर भी स्थान-स्थान - [‘इंक़लाब ज़िंदाबाद’ का नारा देने वाला शायर](https://aabohawa.org/the-poet-who-coined-the-slogan-inquilab-zindabad/) - पाक्षिक ब्लॉग ज़ाहिद ख़ान की कलम से.... ‘इंक़लाब ज़िंदाबाद’ का नारा देने वाला शायर जंग-ए-आज़ादी में सबसे अव्वल ‘इंक़लाब ज़िंदाबाद’ का जोशीला नारा बुलंद करना और हिंदुस्तान की मुकम्मल आज़ादी की मांग, महज़ ये दो बातें ही मौलाना हसरत मोहानी की बावक़ार हस्ती को बयॉं करने के लिए काफ़ी हैं। वरना उनकी - [हवा, सफ़र और वज़ीर आग़ा साहब](https://aabohawa.org/hava-safar-aur-vazeer-aaga-saahab/) - पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से.... हवा, सफ़र और वज़ीर आग़ा साहब क्या मेरा इस तरह होना तय था? पहले मैं कौन था और अब क्या हूँ? किसी मिट्टी के धेले-सा मुझे क्या पस्ती में फेंक दिया जाना चाहिए था? या मैं किसी बुलंदी का हामिल था? मैंने - [ग़ज़ल गायकी में ख़ैयाम साहब का ख़ास दस्तख़त](https://aabohawa.org/khayyam-sahib-had-a-distinctive-style-in-ghazal-singing/) - पाक्षिक ब्लॉग विवेक सावरीकर मृदुल की कलम से.... ग़ज़ल गायकी में ख़ैयाम साहब का ख़ास दस्तख़त गाने के शब्दों के बीच में एक विशिष्ट ठहराव देने की ख़ैयाम साहब की ख़ासियत उन्हें बॉलीवुड के आला मूसिक़ारों में एक अलग दर्जा अता करती है। मोहम्मद ज़हूर ख़ैयाम हाशमी ने हिंदी फ़िल्मों में - [मनुष्यता के लिए बेचैन नवगीत-कवि कौशलेन्द्र सिंह](https://aabohawa.org/kaushelendra-singh-the-new-age-poet-who-is-deeply-concerned-about-humanity/) - पाक्षिक ब्लॉग राजा अवस्थी की कलम से.... मनुष्यता के लिए बेचैन नवगीत-कवि कौशलेन्द्र सिंह कवि को समकालीन होने के लिए उसके अपने समय के प्रति गहरी संवेदनशीलता की दरकार होती है। यही संवेदनशीलता उसे अपने समय की असंगतियों-विसंगतियों, विषमताओं, बढ़ते शोषण, अनाचार, भ्रष्टाचार, छद्म, पाखण्ड आदि के प्रति बेचैन बनाती है। यही संवेदनशीलता उसे इनसे उबरने - [2025 का राजनीतिक सिनेमा: राष्ट्रवाद-प्रतिक्रिया-मनोरंजन की नयी त्रयी](https://aabohawa.org/political-cinema-of-2025-deep-analysis-by-maanas/) - अब ‘देशभक्ति की भावना’ नहीं, ‘देशभक्ति का उबाल’ है। नागरिक की जगह कार्यकर्ता आ गया है और पॉलिटिकली एक्टिव व्यक्ति की जगह पॉलिटिकली रिएक्टिव व्यक्ति... - [अपनी रचना में पूरे मौजूद विनोद कुमार शुक्ल](https://aabohawa.org/vinod-kumar-shukla-writing-process-memoir-by-swapnil-shrivastava/) - जब विनोद जी मुक्तिबोध फ़ेलोशिप के अंतर्गत प्रथम उपन्यास 'नौकर की कमीज़' लिख़ रहे थे। साथ ही वे अपना संग्रह 'वह आदमी नया गर्म कोट पहिन कर चला गया विचार की तरह'... - [इंद्रधनुष-6 : यतींद्रनाथ राही](https://aabohawa.org/indradhanush-six-poetry-by-yatindranath-rahi/) - यतींद्रनाथ राही (जन्म: 31.12.1926) ग़ज़ल, दोहा, खंड काव्य, बाल काव्य, मुक्त छंद जैसी अनेक विधाओं में रमने के बाद पिछले कुछ वर्षों से गीत/नवगीत को समर्पित हैं... - [ताकि दर्ज रहे 2025](https://aabohawa.org/for-the-sake-of-documenting-2025-blog-by-bhavesh-dilshad/) - 'हम बोलेंगे' 2025 के कुछ लमहों को दर्ज करता रहा। आब-ओ-हवा के मंच पर और भी ब्लॉग्स, लेख, काव्य, तस्वीरें आदि भी यह बीड़ा उठाती रहीं। फिर भी कितना कुछ छूट गया... - [कैसे ट्रीट करता है एक पोएट्री थेरेपिस्ट?](https://aabohawa.org/how-poetry-therapist-treats-writes-rati-saxena/) - पोइट्री थेरेपिस्ट का काम एक प्रशिक्षित कवि होना चाहिए, यदि वह स्वयं में कवि न भी हो, तो भी उसे कविता की समझ होनी चाहिए। उसमें करुणा और समझदारी अपेक्षित है... - [स्वर, रंग-रूप, भंगिमा, आकाश और अन्य तत्व](https://aabohawa.org/kumar-gandharva-singing-and-other-art-forms-blog-by-shampa-shah/) - कभी तो ऐसा भी हुआ कि कुमार जी को सुनने का मौक़ा हर हफ़्ते मिला। कैसे-कैसे कार्यक्रम हुए उन दिनों कुमार जी के भोपाल में- कभी मीरा, सूर, कबीर की त्रिवेणी कभी... - [यीशू की कीलें: पर्तों के नीचे दबी सच्चाइयाँ](https://aabohawa.org/the-nails-of-jesus-truths-buried-beneath-the-layers/) - पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... यीशू की कीलें: पर्तों के नीचे दबी सच्चाइयाँ किरण सिंह का कहानी-संग्रह ‘यीशू की कीलें’ 2016 में आधार प्रकाशन से छपा और चर्चा में रहा। किरण सिंह हमारे समय की महत्वपूर्ण कथाकार हैं और सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। सामाजिक न्याय और महिला अधिकारों - [नया साल, नयी उड़ान की नयी लय](https://aabohawa.org/new-year-new-motivations-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - हमारी सोच अक्सर आदतों के पिंजरे में क़ैद होती है। हम वही रास्ते चुनते हैं, वही प्रतिक्रियाएं देते हैं और वही डर साथ लेकर चलते हैं। यह सोच ऐसा आरामदायक... - [उर्दू कथा इतिहास में मील का पत्थर 'बस्ती'](https://aabohawa.org/basti-is-a-milestone-in-the-history-of-urdu-fiction/) - पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... उर्दू कथा इतिहास में मील का पत्थर 'बस्ती' इंतिज़ार हुसैन लिखित ‘बस्ती’, यह नॉवेल पहली बार 1980 में लाहौर में प्रकाशित हुआ था। नॉवेल की मेन थीम भारत के बंटवारे के बाद भारत और पाकिस्तान में इंसान की अंदरूनी और बाहरी यात्रा है। यह - [अंक - 42](https://aabohawa.org/edition-42/) - आब-ओ-हवा – अंक - 42 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में गुज़र रहे 2025 की प्रमुख हलचलों पर प्रमुख सामग्री। मसलन साल के सिनेमाई परिदृश्य पर एक नज़र, बुकर पुरस्कार विजेता कन्नड़ लेखक की कहानी का हिंदी अनुवाद, विदा हुए​ विनोद कुमार शुक्ल की यादों - [सड़कों पर सोते लोग, क्या प्रश्न सिर्फ़ अमेरिका का है?](https://aabohawa.org/roadside-sleeping-people-is-this-issue-of-just-america-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - न्यूयॉर्क मतलब आधुनिकता का चरमोत्कर्ष पर यहां बेघर होना (Homelessness) आज केवल एक मानवीय संकट नहीं, बल्कि विकास की नीतिगत, आर्थिक और सामाजिक समस्या है.... - [कब तक दुष्यंत की पीठ खुजाएगी 'हिंदी ग़ज़ल'?](https://aabohawa.org/kab-tak-dushyant-kumar-ki-peeth-khujayegi-hindi-ghazal-writes-gyan-prakash-pandey/) - दुष्यंत के अवसान और साये में धूप के प्रकाशमान होने का 50वां वर्ष संपन्न हो रहा है। रवायत यही है कि ऐसे उल्लेखनीय अवसरों पर क़सीदे ही पढ़े जाएं लेकिन मैं बस... - [चलता-फिरता विचार बना महुआ-डाबर संग्रहालय](https://aabohawa.org/mahua-dabar-museum-journey-in-2025/) - महुआ डाबर संग्रहालय केवल ईंट-पत्थरों से बना कोई साधारण भवन नहीं है, बल्कि यह 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के एक ऐसे अध्याय का जीवित साक्ष्य है, जिसे... - [महामना: वामन से विराट की यात्रा](https://aabohawa.org/life-sketch-of-mahamana-madan-mohan-malviya/) - जिन्हें महात्मा गांधी ने अपना बड़ा भाई कहा और 'महामना' कहकर पुकारा। हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी में पारंगत मालवीय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के चार बार अध्यक्ष... - [जलम यानी चार दिन कला चेतना के नाम](https://aabohawa.org/jalam-offers-four-days-dedicated-to-literature-and-all-arts/) - इत्यादि आर्ट फाउण्डेशन द्वारा 2017 में शुरू किये गये इस फेस्टिवल का यह दसवां संस्करण है। कला, साहित्य, संगीत, सिनेमा, रंगमंच एवं लगभग सभी ललित विधाओं के साथ.... - [विनोद कुमार शुक्ल: जो चुपचाप चला गया, पर सबके पास पहुँच गया](https://aabohawa.org/decoding-poetry-of-vinod-kumar-shukla-writes-braj-shrivastav/) - हम उन्हें ‘नौकर की कमीज़’ और ‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ से पहचानते हैं, पर सच यह है कि उनकी पहचान किसी एक कृति में सीमित नहीं रही... - [विनोद कुमार शुक्ल: शब्द संधान](https://aabohawa.org/vinod-kumar-shukla-passes-away-know-his-world-of-words/) - विनोद कुमार शुक्ल ने साधारण जीवन की निस्सार दिखायी देने वाली वस्तुओं और स्थितियों में भी अद्भुत काव्यात्मक चमक और जादुई यथार्थ की आभा दिखायी... - [स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी: सबकी स्वतंत्रता का प्रतीक](https://aabohawa.org/door-desh-mein-lekhak-statue-of-liberty-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - स्वतंत्रता का आकार नहीं होता, पर जब वह न्यूयॉर्क हार्बर के मध्य लिबर्टी द्वीप पर खड़ी होकर हवाओं से बातें करती है तो एक वैश्विक जीवंत प्रतीक बन जाती है.... - [अलविदा गीतम मिश्र](https://aabohawa.org/alvida-geetam-mishra-former-doordarshan-reporter/) - सेवानिवृत्त दूरदर्शन संवाददाता गीतम मिश्र, नवगीत प्रणेता कवि वीरेंद्र मिश्र की सुपुत्री का लंबी बीमारी के उपरांत हृदय गति रुक जाने से दिल्ली में निधन हो गया... - [रामानुजन... शून्य से 'शून्य' के रहस्य तक](https://aabohawa.org/srinivasa-ramanujan-who-knew-the-infinite-writes-pramod-dixit-malay/) - रामानुजन का जीवन-पथ कंटकाकीर्ण था। तमाम अभावों और दुश्वारियों से जूझते हुए अंतिम घड़ी तक रोगशैय्या पर पेट के बल लेटे औंधे मुंह वह गणित के सूत्र रचते रहे... - [विज्ञान बनाम नैतिकता की बहस है 'जलथलिया'](https://aabohawa.org/the-amphibian-discusses-science-vs-morality-writes-shashi-khare/) - किताबों के लिए कृतज्ञता का एक भाव। आब-ओ-हवा पर 'शुक्रिया किताब'.. इस बार एक रूसी उपन्यास जो मनुष्य के मूलभूत प्रश्नों पर विमर्श करती है... - [इंद्रधनुष-5 : हिना रिज़वी हैदर](https://aabohawa.org/indradhanush-five-poetry-by-hina-rizvi-haider/) - हिना रिज़वी टीवी, रेडियो और मुशायरों के अदबी मंचों से अवाम तक पहुंची हैं। “बिंत-ए-हव्वा”, “इब्न-ए-आदम” और “लखनऊ” जैसी नज़्मों से पहचान रखती हैं.... - [धुरंधर: पॉलिटिकल फ़िल्म या साइकी में घुसपैठ](https://aabohawa.org/dhurandhar-political-film-or-play-with-psyche-writes-bhavesh-dilshad/) - 'धुरंधर' को जिस तरह बाज़ार मिल रहा है, हाल यही है कि कोई इसके एकदम पक्ष में है और कोई एकदम विपक्ष में। सिनेमा से हम हासिल क्या कर पाते हैं... - [हंसी ही बचाव और सवाल ही उम्मीद](https://aabohawa.org/hindi-satire-on-sahitya-akademy-awards-sudden-cancelation/) - साहित्य अकादमी के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ कि न प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई न प्रेस रिलीज़ जारी की गयी। पत्रकार घर लौट आया पर ख़बर वहीं की वहीं अटकी रह गयी... - [जब अशफ़ाक ने कहा था, मैं मौत से नहीं डरता वक़्त बताएगा](https://aabohawa.org/when-ashfaqullah-khan-said-not-afraid-of-dying/) - राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी ने ज़ंजीर खींच दी। अशफ़ाक ने लपककर ड्राइवर की कनपटी में माउज़र धर दिया। गार्ड ने मुक़ाबला करने की कोशिश की लेकिन बिस्मिल ने... - [व्यंग्य लेखन की समझ का दायरा बढ़ाती किताब](https://aabohawa.org/book-based-on-knowledge-and-history-of-hindi-satire-writing/) - हिंदी व्यंग्य जगत के मूर्धन्य रचनाकार कबीर, परसाई, शरद जोशी, रवीन्द्रनाथ त्यागी, श्रीलाल शुक्ल, नरेन्द्र कोहली, नागार्जुन की रचनाओं, शिल्प पर व्यापक चर्चा है... - [अंक - 41](https://aabohawa.org/edition-41/) - आब-ओ-हवा – अंक - 41 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में गुज़र रहे 2025 में पुस्तकों, घटनाओं एवं विदाइयों पर आधारित साहित्यिक परिदृश्य का लेखा-जोखा। इन दिनों चर्चा में चल रहे राष्ट्रगीत ‘वन्दे मातरम’ का सांगीतिक इतिहास। ‘कला कोलाज’ और ‘मध्य प्रदेश’ दो नये पन्ने - [जुड़ती कड़ी, सिमटता हिसार और अकबर इलाहाबादी](https://aabohawa.org/judti-kadi-simatta-hisar-aur-akbar-allahabadi-blog-by-saleem-sarmad/) - अकबर इलाहाबादी का नाम गाहे-गाहे सुनने और पढ़ने में आता रहा है मगर वो मौक़ा नहीं मिला कि उनकी शख़्सियत के पहलुओं पर ग़ौर करें और उन्हें समझें... - [वन्दे मातरम: सुरों के सफ़र की दास्तान](https://aabohawa.org/vande-mataram-a-musical-journey-of-national-song-of-india/) - 150 सालों में भारत की आत्मा में रच-बस गये राष्ट्रगीत की धुनें बनने, उसे गाये जाने के इतिहास पर कोई एक जिल्द हाथ नहीं लगती, फिर भी ब्यौरे कहीं रोचक हैं... - [शायर बेदख़ल और गुम कैसे हो गया?](https://aabohawa.org/why-poet-missing-and-ousted-blog-by-bhavesh-dilshad/) - जीवनशैली में बदलाव की साज़िशों, मजबूरियों और हसरतों ने एक ऐसा समाज रच दिया है जहां शायर/कवि/पोएट सिरे से ग़ायब है। यह पूरे समाज की सेहत पर किस तरह एक हमला है... - [कुरान के बाद सबसे ज़्यादा छपने वाली किताब](https://aabohawa.org/musaddas-hali-altaf-hussain-hali/) - पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... कुरान के बाद सबसे ज़्यादा छपने वाली किताब किताब “मुसद्दस हाली” पहली बार 1879 में पब्लिश हुई थी। इसमें 295 बंद थे। दूसरी बार 1886 में 162 बंद और जोड़कर पब्लिश हुई। इस तरह, इसमें कुल 457 बंद हैं और अशआर की संख्या - [भारत के हृदय प्रदेश को कितना जानते हैं आप?](https://aabohawa.org/how-much-you-know-heart-state-of-india-asks-deeksha-manish/) - मध्य प्रदेश 70वें साल में प्रवेश कर चुका है। मध्य प्रदेश के बारे में सामान्य ज्ञान के साथ ही कुछ विशिष्ट जानकारियां, बातें और विमर्श हम इस ब्लॉग में पढ़ेंगे... - [व्यंग्य-पत्रिकाओं की विरासत](https://aabohawa.org/vyangya-patrikaon-ki-virasat-blog-by-arun-arnaw-khare/) - भारतेंदु युग से लेकर आधुनिक काल तक प्रकाशित प्रमुख पत्रिकाओं की स्थिति कमोबेश समान रही है, जिसकी विस्तृत चर्चा... - [जीवन-बोध से भरी नवगीत कविताओं का कवि सुभाष वसिष्ठ](https://aabohawa.org/jeevan-bodh-se-bharee-navageet-kavitaon-ka-kavi-subhaash-vasishth/) - पाक्षिक ब्लॉग राजा अवस्थी की कलम से.... जीवन-बोध से भरी नवगीत कविताओं का कवि सुभाष वसिष्ठ कविता पर बात करने का प्रथमतः अर्थ गीत पर बात करना होना चाहिए या जो कुछ और जितना भी गीतात्मक है, उस सब पर। इस दायरे में सभी छंदों के साथ ग़ज़ल भी शामिल है। कविता - [मनोचिकित्सा से अलग है कविता की थेरेपी](https://aabohawa.org/poetry-therapy-is-different-from-psychiatry-blog-by-rati-saxena/) - अभी तक मैं पोइट्री थेरेपी से सम्बन्धित केस प्रस्तुत कर रही थी, लेकिन कुछ बैठकों में मुझे पता चला कि इस संबन्ध में मनोवैज्ञानिकों की भी जानकारी अधूरी है... - [धर्मेंद्र पर फिल्माये वो लीक से हटकर गाने](https://aabohawa.org/different-songs-picturised-on-dharmendra-blog-by-vivek-savarikar-mridul/) - चंद उन गीतों का ज़िक्र लाज़मी हो जाता है, जो धर्मेंद्र की ख़ूबसूरत आंखों और लिपसिंक करने के दिलचस्प अंदाज़ के कारण लीक से हटकर साबित हुए... - [हिन्दी सिनेमा की पहली जुबली गर्ल - मुमताज़ शांति](https://aabohawa.org/the-first-jubilee-girl-of-hindi-cinema-mumtaz-shanti/) - पाक्षिक ब्लॉग मिथलेश राय की कलम से.... हिन्दी सिनेमा की पहली जुबली गर्ल - मुमताज़ शांति उन दिनों हमारी कॉलोनी ऐसी नहीं थी। इतना नीरस व अकेला जीवन नहीं था। तब लोग बड़े मिलनसार थे हालांकि कोई एकरूपता नहीं थी। कोई उत्तर प्रदेश, कोई महाराष्ट्र, दक्षिण भारत के लोग रहते थे। - [औरत ने जनम दिया मर्दों को...](https://aabohawa.org/women-gave-birth-to-men/) - पाक्षिक ब्लॉग ज़ाहिद ख़ान की कलम से.... औरत ने जनम दिया मर्दों को... साहिर लुधियानवी को अपनी ग़ज़लों और नज़्मों से पूरे मुल्क में ख़ूब मक़बूलियत मिली। अवाम का ढेर सारा प्यार मिला। हिन्दी फ़िल्मों में उन्होंने दर्जनों सुपरहिट गाने दिये। उनके इन गानों में भी अच्छी शायरी होती थी। साहिर - [एक दरख़्त के साये में 50 वर्ष (अंतिम भाग)](https://aabohawa.org/ek-darakht-ke-saaye-mein-50-varsh-last-part-blog-by-vijay-swarnakar/) - श्रेष्ठ फ़ोटोग्राफ़र वह है जो उस दृश्य की सबसे दिलकश फोटो निकालता है। उसके लिए वह अनेक कोण से प्रयत्न करता हो, लेकिन अंत में उसे पता होता है कि किस कोण से... - [छूटती चीज़ों को संभालती शाइरी](https://aabohawa.org/chhootatee-cheezon-ko-sambhaalatee-shairee/) - पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से.... छूटती चीज़ों को संभालती शाइरी वक़्त बहुत तेज़ी से बदल रहा है। जिस तेज़ी से वक़्त बदल रहा है उसी तेज़ी से इंसान में भी तब्दीली आ रही है। दुनियावी ज़रूरतों में भी कई सारी तब्दीलियां आ रही हैं। इल्मो-अदब इन सबसे से - ["दौड़": आर्थिक उदारीकरण और युवा पीढ़ी](https://aabohawa.org/daud-aarthik-udaareekaran-aur-yuva-peedhee/) - पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... "दौड़": आर्थिक उदारीकरण और युवा पीढ़ी ममता कालिया हमारे समय की वरिष्ठ लेखिका हैं, जिन्होंने हिन्दी कथा-साहित्य को अपनी कृतियों से समृद्ध किया है। 2014 में उनका लघु-उपन्यास “दौड़” प्रकाशित हुआ था। इसे एक लंबी कहानी की श्रेणी में भी रखा जा सकता है। - [मोटापा: क्या इसका पूरा सच जानते हैं हम?](https://aabohawa.org/obesity-do-we-know-full-truth-of-this-epidemic-blog-by-alok-tripathi/) - कुछ महीने पूर्व, प्रधानमंत्री ने एक सभा को संबोधित करते हुए जनमानस से अपील की खाने के तेल में 10% की कटौती कीजिए। क्योंकि मोटापा एक महामारी का रूप ले रहा है... - [कुमार गंधर्व और विष्णु चिंचालकर](https://aabohawa.org/kumar-gandharva-and-vishnu-chinchalkar-writes-shampa-shah/) - किसी कैमरे ने कुमार जी कि उन विशिष्ट मुद्राओं को आज तक वैसे नहीं पकड़ा, जैसे उस रोज़ विष्णु काकू ने मिनटों में काग़ज़ पर उतार दिया था... - [2025: किताबें इस साल और साहित्य की दिशा](https://aabohawa.org/books-and-direction-of-hindi-sahitya-in-2025-opines-vivek-ranjan-shrivastav/) - 2025 का वर्ष हिंदी साहित्य के लिए केवल नयी किताबों का साल नहीं, बल्कि एक नये विश्वास और साहस का दौर साबित हुआ है... - [2025: साहित्य के उत्सव-पुरस्कार-विमर्श और...](https://aabohawa.org/2025-year-in-hindi-and-urdu-literature-analysis-by-vivek-ranjan-shrivastav/) - 2025 साहित्यिक हलचलों से भरा-पूरा रहा। भारत में पुरस्कारों, बड़े उत्सवों और प्रकाशन जगत ने भारतीय भाषाओं के भविष्य की संभावना के सफ़र में कई सोपान पार किये... - [राज कपूर: हिंदी सिनेमा के पहले शोमैन](https://aabohawa.org/raj-kapoor-first-showman-of-hindi-cinema-writes-zahid-khan/) - राज कपूर आम आदमी के फ़िल्मकार थे और उन्होंने अपनी फ़िल्मों में आम आदमी के दुःख-दर्द, उनकी आशा-निराशा, स्वप्न और संघर्ष को बड़े ही खू़बसूरती से अभिव्यक्ति दी... - [शैलेंद्र: कला और सहजता का दुर्लभ संयोग](https://aabohawa.org/shailendra-rare-combination-of-art-and-simplicitiy-writes-zahid-khan/) - शैलेन्द्र की बात ही और है। आम आदमी के जज़्बात को गीतों में अक्कासी करने का हुनर, उनमें औरों से कहीं ज़्यादा था। उनके गीत आज भी होठों पर सहजता से चले आते हैं... - [क्यों बार-बार देखी जाये सत्यकाम?](https://aabohawa.org/why-satyakam-is-repeatedly-watch-movie-writes-braj-shrivastav/) - 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NHRL अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध कॉम्बैट रोबोट प्रतियोगिता लीग है, जिसने रोबोट फ़ाइट को गंभीर “टेक‑स्पोर्ट” और तकनीकी शिक्षा के माध्यम के रूप में... - [एक सदी बाद भी 'दिवास्वप्न' ही है शिक्षा का लक्ष्य!](https://aabohawa.org/goal-of-education-is-still-a-diwaswapna-writes-pramod-dixit-malay/) - गिजुभाई जब अपने शैक्षिक प्रयोग करने की अनुमति हेतु अधिकारी से मिलते हैं... आश्चर्य है और कसक भी कि आज भी हम इस अंक आधारित परीक्षा प्रणाली से मुक्त नहीं... - [जब किसी अमेरिकी मॉल में बम मिलता है...](https://aabohawa.org/when-a-bomb-found-in-american-mall-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - न्यू पोर्ट सेंटर मॉल में घटित बम धमकी की यह घटना अमेरिकी शॉपिंग मॉल सुरक्षा, भीड़-प्रबंधन और आतंकवाद-रोधी सतर्कता के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण उदाहरण के रूप में.. - [शुक्रिया 'कितने पाकिस्तान'](https://aabohawa.org/shukriya-kitne-pakistan-writes-dharmendra-tijoriwale-azad/) - विधाओं, विषयों व भाषाओं की सीमा से परे.. किताबों के लिए कृतज्ञता का एक भाव। आब-ओ-हवा पर 'शुक्रिया किताब'.. इस बार कमलेश्वर लिखित एक बेस्टसेलर कृति की चर्चा... - [बिहार में माताओं के स्तनदूध में यूरेनियम, समस्या व समाधान](https://aabohawa.org/uranium-in-breastmilk-of-bihar-women-problem-and-solution/) - बिहार के छह ज़िलों में माताओं के स्तनदूध में यूरेनियम की उपस्थिति एक साधारण “रिपोर्टेड फ़ैक्ट” नहीं, ऐसे संकट का संकेत है, जिसकी जड़ें ज़मीन के भीतर भी हैं और.. - [काल के कपाल पर](https://aabohawa.org/kaal-ke-kapaal-par-hindi-vyangya-by-mukesh-aseemit/) - कभी-कभी मन करता है कि इस ‘कॉस्मिक पांडुलिपि’ में एक-दो पंक्तियाँ अपनी मर्ज़ी की भी जोड़ दी जाएँ— कम-से-कम एक “फुटनोट” तो लेखक स्वयं भी लिख सके.... - [नफ़रत के ख़िलाफ़... शायरी पोस्टर](https://aabohawa.org/poetry-posters-of-nida-fazli-waseem-barelvi-bhavesh-dilshad/) - बाबरी विध्वंस, राम मंदिर, मंदिर यहीं बनाएंगे, राम जन्मभूमि और ऐसे कितने जुमलों, नारों के बीच तीन दशक गुज़र गये। शेरो-शायरी में यह विषय कई ज़ावियों से आता रहा... - [अयोध्या का सफ़र 1990 से अब तक](https://aabohawa.org/ayodhya-journey-from-1990-to-2025-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - 1990 के आसपास अयोध्या का नाम एक तीव्र कंपन की तरह उभरा। कारसेवा की ख़बरों, नारों की आवाज़ों और उत्तेजनाओं की परतों के बीच शहर वैसे ही कांप उठा... - [ज्योत्स्ना... तेरी राजी](https://aabohawa.org/jyotsana-teri-raji-letter-to-friend-by-raji-seth/) - गूंज बाक़ी... पिछले दिनों लेखक राजी सेठ हमारे बीच नहीं रहीं, ज्योत्स्ना मिलन पर केंद्रित 'कथादेश' के अंक में प्रकाशित यह पत्र दिव्या जैन से प्राप्त हुआ है... - [मोमो](https://aabohawa.org/momo-memoir-for-pet-by-khudeja-khan/) - था तो पालतू लेकिन हरकतें बिल्कुल इंसानों की तरह, जैसे उसके चेहरे पर हर भाव को पढ़ा जा सकता था कि वह कब ख़ुश है, कब अनमना और कब मूड अच्छा नहीं है... - [आज की सियासत पर कटाक्ष “बागेश्वर एमएलए”](https://aabohawa.org/bageshwar-mla-sarcasm-on-todays-politics-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - एक साथ राजनीतिक व्यंग्य, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संबंधों की जटिलताओं को छूती कहानी को उपन्यास में डॉ. संजीव कुमार ने बहुत रोचक ढंग से प्रस्तुत किया है... - [समूह में कहानी पढ़ना कई नज़रिये देता है: आलोक मिश्रा](https://aabohawa.org/story-reading-in-group-gives-many-insights/) - शैक्षिक संवाद मंच का मासिक पुस्तक संवाद सम्पन्न, मुख्य अतिथि महेश पुनेठा ने कहा कहानी को जीवन संदर्भों से जोड़ना उचित.... - [रमेश आनंद छोड़ गये अपना कला संसार](https://aabohawa.org/artist-and-poet-ramesh-anand-passes-away-left-his-art-behind/) - मोहक रंगों और बहुत साधारण-सी लकीरों भरा चित्र ही पहचान है कलाकार रमेश आनंद जी की। प्रकृति-प्रेमी, सरल-सहज स्वभाव की झलक इनके चित्रों में भी देखी जा सकती है... - [कौतूहल, रहस्य और एकांत रचने वाली प्रीति तामोट](https://aabohawa.org/kautuhal-rahasya-aur-ekant-rachne-wali-preeti-tamot-blog-by-preeti-nigoskar/) - पद्मश्री वाकणकर जी की कक्षा भारती कला भवन में प्रीती की चित्रकला की शिक्षा हुई। रंगों से खेलते हुए पारंपरिक और आधुनिक कला को सीखने-समझने का मौक़ा यहां मिला... - [एक दरख़्त के साये में 50 वर्ष (भाग-2)](https://aabohawa.org/ek-darakht-ke-saaye-me-pachas-varsh-part-two-blog-by-vijay-kumar-swarnakar/) - यहाँ दरख़्तों के साये में धूप लगती है/चलो यहाँ से चलें और उम्र भर के लिए..पिछले ब्लॉग में शेर के सहज अर्थ के बारे में चर्चा थी। अब इस शेर की परत में जो निहित... - [लोकतंत्र, सत्तानमाज़ी नागरिक और बंधु-गीतों की याद](https://aabohawa.org/loktantra-sattanamazi-naagrik-aur-bandhu-geet-ki-yaad-blog-by-bhavesh-dilshad/) - जंगबहादुर जी जब कविता का पाठ करते थे, तो घर का कमरा हो या कोई सभागार, एक बुलंद आवाज़ से धड़कने लगता, बल्कि धड़धड़ाने लगता था। 'बंधु फिर भी पूछते हो...' - [अंक - 40](https://aabohawa.org/edition-40/) - आब-ओ-हवा – अंक - 40 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में धर्मेंद्र, कामिनी कौशल जैसे कलाकारों के साथ ही जोश मलीहाबादी, दुष्यंत कुमार, शौक़त सिद्दीक़ी और जंगबहादुर श्रीवास्तव जैसे शब्द-शिल्पियों की याद और चर्चा। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और जनसांख्यिकीय परिवर्तन जैसे मुद्दों - [आधे रह गये आपके शुक्राणु, कोई अज्ञात कारण तो नहीं!](https://aabohawa.org/decreasing-sperm-count-what-is-real-reason-blog-by-alok-tripathi/) - स्टैटिस्टा के आंकड़े के अनुसार, पुरुषों में शुक्राणुओं (स्पर्म) की संख्या जो 1973 में 101 थी, वो 2018 में घटकर 49 mn/ml हो गयी है, जो कि आधे से भी कम है... - [एसआईआर के ख़िलाफ़ एक यह एफ़आईआर](https://aabohawa.org/read-this-fir-against-sir-writes-bhavesh-dilshad/) - एस.आई.आर... जिसे प्रक्रिया होना चाहिए, उसे नाटक, झमेला, सिरदर्द जैसे नाम मिल रहे हैं। दर्जनों जानें ले चुके सर्वे पर महत्वपूर्ण संगठनों से लेकर सुप्रीम कोर्ट... - [क्या कहती हैं पाकिस्तान की इन लेखकों की कहानियां?](https://aabohawa.org/stories-by-women-writers-from-pakistan-blog-by-namita-singh/) - 'मसरूफ़ औरत' रेख़्ता पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित और तस्नीम हैदर द्वारा संपादित पुस्तक है, जिसमें उर्दू की दस महिला कहानीकारों की कहानियाँ संकलित हैं... - [सम्बन्धों के दृष्टा कवि डाॅ. ओमप्रकाश सिंह](https://aabohawa.org/sambandhon-ke-drishta-kavi-om-prakash-singh-blog-by-raja-awasthi/) - डाॅ. ओमप्रकाश सिंह का रचना संसार विपुल है। विविध प्रारूपों में उनके सृजन-संसार की व्याप्ति है। प्रमुख रूप से और सबसे अधिक उन्होंने नवगीत कविताएँ ही रची हैं... - [वास्तविक डेमोक्रैसी तभी जब डेमोग्राफी सायास न बदले](https://aabohawa.org/actual-democracy-and-intentional-demographics-change-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - क्या लोकतंत्र तब भी उतना ही प्रभावी और निष्पक्ष रह पाता है जब उसकी जनसांख्यिकीय (डेमोग्राफ़िक) संरचना लगातार बदलती रहे? क्या इंटेंशनली डेमोग्राफ़ी बदलना और... - [जंगल की रात और तख़लीक़](https://aabohawa.org/jungle-ki-raat-aur-takhleeq-blog-by-saleem-sarmad/) - ये रास्ता पचमढ़ी की ओर जाता है तो ज़ाहिर है साँप का फन ऊपर उठा हुआ होगा लेकिन अस्ल चढ़ाई मटकुली से शुरू होती है। पचमढ़ी जिन पहाड़ों पर विराजमान है.... - [मेरा नारा इंक़िलाब-ओ-इंक़िलाब-ओ-इंक़िलाब](https://aabohawa.org/josh-malihabadi-nazm-mera-naara-inquilab-o-inquilab-blog-by-zahid-khan/) - जोश मलीहाबादी की ज़िन्दगानी का इब्तिदाई दौर, मुल्क की ग़ुलामी का दौर था। ज़ाहिर है कि इस दौर के असरात उनकी शायरी पर भी पड़े। हुब्बुल-वतन (देशभक्ति) और बग़ावत... - [लता और गीता दत्त के पहले-पहले गाने और कामिनी कौशल](https://aabohawa.org/first-songs-of-lata-mangeshkar-and-geera-dutt-and-kamini-kaushal-blog-by-vivek-savarikar-mridul/) - कामिनी कौशल पर जिन दो महान गायिकाओं के गाने फ़िल्माये गये, वे उन गायिकाओं के लिए भी किसी हीरोइन के लिए गाये गये पहले गीत थे... - [नलिनी जयवंत, जो पहली ही फ़िल्म से बनी स्टार](https://aabohawa.org/nalini-jaywant-who-became-star-from-first-film-blog-by-mithlesh-rai/) - नलिनी जयवंत वाक़ई बहुत ख़ूबसूरत हीरोइन थी। अभिनेत्री नूतन की रिश्तेदार थी, पर उसके पिता उसके फ़िल्म में काम करने के पक्ष में नहीं थे। फिर भी उसने काम किया और... - [42 भाषाओं में छपा उर्दू का इकलौता नॉवेल!](https://aabohawa.org/only-urdu-novel-published-in-42-languages-blog-by-dr-azam/) - पहली बार 1958 में प्रकाशित 'ख़ुदा की बस्ती' को उर्दू लिटरेचर का एक महत्वपूर्ण नॉवेल माना जाता है। इसके अब तक 50 से ज़्यादा एडिशन आ हो चुके हैं.... - [अस्मिता व पहचान के लिए कविता है एक मुहिम](https://aabohawa.org/poetry-is-movement-for-identity-and-national-honor-blog-by-rati-saxena/) - तेनजिन त्सुंडु ने उन दिनों मुंबई में पीआरसी के प्रधानमंत्री जू रोंगजी के होटल के बाहर बालकनी की छत पर चढ़कर तिब्बत का झंडा लहराया था। वे जेल भी गये... - [बच्चे कैसे पढ़ें धर्मनिरपेक्षता का पाठ!](https://aabohawa.org/how-to-teach-the-secularism-to-children-blog-by-alok-kumar-mishra/) - सामाजिक विज्ञान विषय के शिक्षक के रूप में मेरे लिए यह ज़रूरी मुद्दा रहा कि मैं बच्चों के सम्मुख धर्मनिरपेक्षता की संकल्पना को किस तरह से प्रस्तुत करूँ... - [लकदक बाज़ार में गुमसुम किरदार](https://aabohawa.org/lakdak-bazaar-mein-gumsum-kirdar-blog-by-ashish-dashottar/) - एक वक़्त वह भी था जब किरदार को सबसे बड़ी दौलत समझा जाता था और एक वक़्त यह भी है कि जब किरदार की कोई अहमियत नहीं रही है... - [हिंदी व्यंग्य स्तंभ-लेखन की परंपरा और समकाल](https://aabohawa.org/hindi-vyangya-stambh-lekhan-ki-parampara-aur-samkal-blog-by-arun-arnaw-khare/) - अनेक समालोचक मानते हैं हिंदी व्यंग्य को जो व्यापक पहचान मिली, उसका श्रेय मुख्यतः समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं में छपने वाले स्तंभ-लेखन को जाता है... - [छावा या फुले.. देश को कैसा नायक चाहिए?](https://aabohawa.org/chhaava-or-phule-what-hero-does-the-nation-need-writes-bhavesh-dilshad/) - इस साल चर्चा में रहीं बायोपिक को लेकर बात करने का मन है। 'छावा', और दूसरी, ज्योतिराव फुले पर आधारित 'फुले'। 'छावा' फरवरी में रिलीज़ हुई और 'फुले' अप्रैल में... - [गुफ़्तगू पर गुफ़्तगू: मजरूह सुल्तानपुरी के इंटरव्यू पर](https://aabohawa.org/guftgoo-on-majrooh-sultanpuri-interview-in-pakistan-by-muzaffar-hanfi/) - गूंज बाक़ी... मजरूह सुल्तानपुरी ने पाकिस्तान में एक इंटरव्यू दिया। फिर डॉक्टर हनफ़ी ने एक लेख लिखा और खुलकर कहा, फिर यह बहस बड़ी लम्बी चली थी... - [संविधान ही है देश का मार्गदर्शक](https://aabohawa.org/constitution-is-mentor-of-the-nation-writes-pramod-dixit-malay/) - संविधान दिवस को राष्ट्रीय विधि दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। भारत का संविधान विश्व में सबसे बड़ा संविधान है। वर्तमान में 448 अनुच्छेद व 12 अनुसूचियां हैं... - [रस सिद्धांतों की परंपरा का गहन विश्लेषण](https://aabohawa.org/ras-siddhant-ki-parampara-ka-gahan-vishleshan-book-review-by-raja-awasthi/) - शोधग्रन्थ "रस सिद्धांत परम्परा" में प्रो. खरे अपने पिता के संघर्ष और उपलब्धियों को याद करते हुए आचार्य नन्ददुलारे बाजपेयी को भी विशेष रूप से याद करते हैं... - [रफ़ी की आवाज़ में धर्मेंद्र के फ़िल्मी अंदाज़](https://aabohawa.org/rafi-ki-aawaz-mein-dharmendra-ke-filmi-andaaz-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - लगता है जैसे रफ़ी के सुरों में धर्मेंद्र की आत्मा ने रहने का कोई गुप्त स्थान खोज लिया था। इन दोनों की संगत में संगीत सिर्फ़ गाया नहीं जाता था, वह.... - [अगर देवदास होते धर्मेंद्र..! कुछ और क़िस्से भी](https://aabohawa.org/what-if-dharmendra-was-seen-as-devdas-other-stories-too-facts-and-trivia/) - दिलीप कुमार के प्रशंसक रहे धर्मेंद्र भी देवदास की भूमिका करने वाले थे लेकिन नियति में जो नहीं होता, वह नहीं होता। हालांकि यह क़िस्सा हमेशा.... - [तो क्या साहित्य सदा राजसत्ता का मुखापेक्षी रहेगा!](https://aabohawa.org/kya-sahitya-sada-rajsatta-ka-mukhapekshi-rahega-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - आदर्श स्थिति यही है कि साहित्य को राजनीति से दूर रखना चाहिए। किन्तु यह बात सुनने में जितनी सहज लगती है, व्यवहार में उतनी ही कठिन है.... - [लाल बिंदी वाली इरफ़ाना](https://aabohawa.org/laal-bindi-wali-irfana-memoir-by-ram-prakash-tripathi/) - नेहा के ब्लॉग का हेडिंग था, बड़ी बिंदी वाली मेरी मां इरफ़ाना शरद सिद्दीक़ी। नेहा ने यह भी लिखा कि हमेशा वह पूरे उत्साह से साड़ी, बिंदी, सिंगार करती रहीं.... - [कान्स में छाई 'ए पोएट', लाजवाब किरदार की मज़ेदार कहानी](https://aabohawa.org/winner-in-cannes-entry-for-oscars-read-the-review-of-a-poet/) - इसका टाइटल भले ही 'कवि' हो, कोलंबियाई डायरेक्टर साइमन मेसा सोटो की “ए पोएट” एक सिनेमाई कविता से ज़्यादा एक लंबी कहानी जैसी लगती है... - [अपनी आंखों से देखिए इतिहास के नायकों के दस्तावेज़](https://aabohawa.org/see-historic-documents-in-exhitbition-dedicated-to-famous-kakori-kand-heroes/) - काकोरी ट्रेन एक्शन के महानायकों से संबंधित पत्र, डायरी, टेलीग्राम, स्मृति-चिह्न, पत्र, पत्रिकाएँ, पुस्तकें, तस्वीरें और मुक़दमों की फ़ाइलों की प्रदर्शनी... - [बिहार: जनादेश या धनादेश या...](https://aabohawa.org/bihar-chunav-parinaam-janaadesh-ya-dhanaadesh-ya-opinion-by-bhavesh-dilshad/) - दरअसल यह चुनाव है ही ​कहां! खुलेआम वोटों की मंडी सजी है और ख़ज़ाने की चाबी जिसके हाथ में है, ज़ाहिर है उससे बड़ी बोली किसकी होगी.... - [अंधकार से अंधी खाई की तरफ़ बांग्लादेश](https://aabohawa.org/bangladesh-from-dark-to-blind-state-dangerously-writes-bhavesh-dilshad/) - ख़तरे बहुत भयानक दिख रहे हैं। क्या यहां महिलाओं की स्थिति बदतर हो जाएगी? क्या बांग्लादेश में 1 करोड़ से ज़्यादा ग़ैर-मुस्लिम आबादी सुरक्षित रह पाएगी या पलायन... - [देश में अभूतपूर्व पत्रकारिता का दौर](https://aabohawa.org/desh-mein-abhootpoorv-patrakarita-ka-daur-writes-aditya/) - आजकल मीडिया में दरबारी प्रवृत्ति का ज़ोर चल रहा है। वर्तमान सत्ता ने मध्यकालीन भारत में प्रचलित भाट और चारणों की दरबारी परंपरा को पुनर्जीवित कर दिया है... - [अंक - 39](https://aabohawa.org/edition-39/) - आब-ओ-हवा – अंक - 39 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में बहुत कुछ ख़ास। बाल दिवस यानी नेहरू जयंती पर जारी हो रहे अंक-39 में एक पिता के रूप में नेहरू की प्रगतिशीलता पर लेख। राष्ट्रीय प्रैस दिवस से संबंधित सामग्री। (कवर कार्टून यूनेस्को व - [विद्यालयों को आनंदघर बनाने की ज़रूरत](https://aabohawa.org/need-to-develop-schools-as-aanandghar-writes-pramod-dixit-malay/) - गिजुभाई बधेका ने विद्यालयों को आनंदघर के रूप में विकसित करने, रूपांतरित करने का न केवल विचार प्रस्तुत किया बल्कि पहल करते हुए उदाहरण भी उपस्थित किया... - [हिंदी व्यंग्य आलोचना: मुख्यधारा से अब भी बाहर](https://aabohawa.org/hindi-vyangya-alochana-mukhyadhara-se-baahar-blog-by-arun-arnaw-khare/) - हिंदी साहित्य में अनेक बड़े आलोचक हुए हैं, किंतु व्यंग्य के प्रति उनका दृष्टिकोण प्रायः उपेक्षापूर्ण ही रहा है। यह उपेक्षा इसलिए भी खटकती है कि अनेक मनीषियों... - [मोतीलाल, हिन्दी सिनेमा का पहला नैचुरल अभिनेता](https://aabohawa.org/hindi-cinema-ka-pahla-natural-actor-motilal-blog-by-mithlesh-rai/) - तबीयत से हरफ़नमौला इस आदमी के अच्छे लुक और अंदाज़ के चलते निर्देशक काली घोष ने फ़िल्म 'शहर का जादू' के लिए पहली ही मुलाक़ात में मोतीलाल को हीरो चुन लिया.... - [कैमरे की निगरानी में शिक्षा](https://aabohawa.org/education-under-cctv-surveillance-blog-by-alok-kumar-mishra/) - 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[सुलक्षणा पंडित ने आख़िर बांधी रे काहे प्रीत?](https://aabohawa.org/sulakshana-pandit-ne-akhir-baandhi-re-kaahe-preet-blog-by-vivek-savarikar-mridul/) - कहते हैं यह अवसाद उन्हें मशहूर अभिनेता संजीव कुमार द्वारा उनके प्रेम प्रस्ताव को अस्वीकार करने से शुरू हुआ, जो संजीव कुमार के असामयिक निधन से गहराता चला गया... - [धर्म के नाम पर अलगाना अपराध, मेरी कथाएं प्रतिकार: प्रीत](https://aabohawa.org/dharm-par-algana-apradh-meri-kathayen-pratikar-avdhesh-preet-talks-to-ghazala-tabassum/) - आब-ओ-हवा परिवार की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि तो है ही, यह साक्षात्कार साहित्य, भाषा, सामाजिक ताने-बाने और सृजन प्रक्रिया पर अवधेश प्रीत के मन की तहें खोलता है... - [क्यों गिरता जा रहा है रक्तचाप का रक्तचाप?](https://aabohawa.org/why-bp-of-bp-is-deteriorating-blog-by-alok-tripathi/) - वास्तव में सामान्य बीपी को ही कुछ बीमारी-सी हो गयी और यह घटते-घटते 80/120 पर आ गया है। यह अपने आप में एक शोध का विषय है। ज़रा इन आंकड़ों पर ध्यान दीजिए... - [लोककला और सरोकारों से जुड़ी कलाकार प्रतिभा वाघ](https://aabohawa.org/lokkala-sarokaro-se-judi-kalakar-pratibha-wagh-blog-by-preeti-nigoskar/) - 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डॉक्टर विनोद निगम की ख्याति नवगीत कवि के रूप में है। वे डाॅ. शंभुनाथ सिंह के नवगीत दशक दो के सम्माननीय नवगीत कवि हैं। इनका रचना समय विगत सदी के सातवें दशक से... - [शायरी की आलोचना पर पहली व यादगार किताब](https://aabohawa.org/first-great-book-on-criticism-of-urdu-shayari-blog-by-doctor-azam/) - यह पुस्तक सर्वप्रथम "शेर-ओ-शायरी" नाम से लिखी गयी और 1893 में प्रकाशित हुई थी। इसके तुरंत बाद मौलाना अल्ताफ़ हुसैन "हाली" ने विस्तृत प्रस्तावना/प्राक्कथन लिखा.. - [पं. नेहरू: बेटी का पिता होने की सोच-समझ](https://aabohawa.org/jawaharlal-nehru-beti-ke-pita-ke-roop-mein-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - नेहरू ने इंदिरा की परवरिश जिस तरह की, वह आज भी बेटियों के पिताओं के लिए प्रेरणा बन सकती है। उन्होंने उसे केवल पाल-पोसकर बड़ा नहीं किया, बल्कि.... - [ज़रूरी सामाजिक प्रश्न उठाते हैं अवधेश प्रीत](https://aabohawa.org/zaroori-samajik-prashn-uthate-hain-avdhesh-preet-blog-by-namita-singh/) - 'नृशंस' हमारे समय के प्रतिष्ठित और वरिष्ठ पत्रकार अवधेश प्रीत का महत्वपूर्ण कहानी संग्रह है। प्रतीकात्मकता अक्सर उनकी कहानियों में मिलती है और वो महत्वपूर्ण.... - [हिंदी की दैनिक पत्रकारिता का उत्कर्ष](https://aabohawa.org/goonj-baaqi-hindi-ki-dainik-patrakarita-ka-utkarsh-writes-rajendra-mathur/) - गूंज बाक़ी... अंग्रेज़ी के दैनिक टाइम्स आफ़ इंडिया के लिए हिंदी की दैनिक पत्रकारिता के विषय पर राजेंद्र माथुर ने दो लेखों में अपने दृष्टिकोण लिखे थे.... - [बहुत याद आएंगे अवधेश प्रीत...](https://aabohawa.org/bahut-yaad-aayenge-avdhesh-preet/) - साहित्यकार अवधेश प्रीत जी चले गये। उनका जाना अचानक नहीं हुआ, पिछले कुछ महीनों से बीमार चल रहे थे लेकिन हृदय उनके जाने को स्वीकार नहीं करना चाहता है.... - [विद्यालय को 'आनंदघर' बनाने में समुदाय की भूमिका](https://aabohawa.org/community-role-in-developing-schools-into-anandghar-writes-pramod-dixit-malay/) - हमारे विद्यालय ऐसी रचनात्मक जगह बनें, जहाँ बच्चे निर्भय होकर अपने ज्ञान निर्माण की साधना कर सकें, जहाँ वे रोक-टोक के बिना अपनी कल्पना को साकार कर सकें... - [बस दो किरदारों से मेरे लिए महान जॉनी वॉकर](https://aabohawa.org/johnny-walker-great-for-me-by-just-two-roles-writes-bhavesh-dilshad/) - जॉनी वॉकर (11.11.1926-29.07.2003)। अपनी कामयाबी, अपनी कला की वजह से हासिल मक़ाम और मिसाल के रूप में महान। अब मैं कहूं कि मुझे जॉनी वॉकर साहब एक्टर के तौर पर... - [उर्दू शायरी में भारतीयता - भाग एक](https://aabohawa.org/indianness-in-urdu-poetry-part-one-by-bano-sartaj/) - उर्दू साहित्य में देशभक्ति, भारतीयता तथा धर्मनिरेपक्षता की जितनी सुगंध समाहित है, वह शायद ही भारत की किसी दूसरी भाषा में हो... - [उर्दू शायरी में भारतीयता - भाग दो](https://aabohawa.org/indianness-in-urdu-poetry-part-two-by-bano-sartaj/) - 9 नवंबर को विश्व उर्दू दिवस मना। चर्चित लेख आब-ओ-हवा के पाठकों के लिए ख़ास तौर से। जो 2009 में प्रकाशित पुस्तक 'उर्दू शायरी में भारतीयता' में संग्रहीत भी है... - ['दिवास्वप्न' के लिए शिक्षकों के लिखे पत्रों की किताब जल्द](https://aabohawa.org/collection-of-letters-to-famous-book-diwaswapna-coming-in-book-shape/) - बेसिक शिक्षकों द्वारा गिजुभाई बधेका लिखित पुस्तक 'दिवास्वप्न' के नाम अनेक पत्र लिखे गये हैं, जो जल्द ही पुस्तकाकार प्रकाशित हो रहे हैं... - [मौलाना आज़ाद: आईआईटी, आईआईएम, अकादमियों के जनक](https://aabohawa.org/maulana-azad-father-of-iit-iim-and-many-academies-writes-pramod-dixit-malay/) - आज़ादी के बाद शैक्षिक संस्थानों को विकसित करने में जिस महनीय कृतित्व का विराट व्यक्तित्व उभरता है, वह देश के प्रथम शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद हैं... - [हर दौर का आईना - राग दरबारी](https://aabohawa.org/har-daur-ka-aaina-rag-darbari-shukriya-kitab-by-sanjeev-persai/) - साल 2011 में श्रीलाल शुक्ल जी ने इस शिवपालगंज रूपी संसार को अलविदा कह दिया। लेकिन राग दरबारी हमारे बीच आज भी मौजूद है। ठीक उसी रूप में, जैसा कि लिखा गया है... - [साहित्य, समाज, सिनेमा और किन्नर](https://aabohawa.org/sahitya-samaj-cinema-aur-kinnar-writes-babita-gupta/) - उभयलिंगी मनुष्य, जिसे हिजड़ा और अब वृहनलला, किननी नाम से जानते हैं, की भूमिका रामायण, महाभारत से लेकर मुगल़ काल तक किन्नर जाति के रूप में बलशाली, वीरता की रही... - [बराबरी के सपने से 'ज़्यादा बराबरी' वाली हकीकत–एनिमल फार्म](https://aabohawa.org/barabari-ke-sapne-se-zyada-barabari-ki-haqeeqat-animal-farm-writes-mukesh-aseemit/) - सत्ता बदलती है या बस चेहरों की अदला-बदली होती है? इसी उधेड़बुन में एनिमल फ़ार्म (Animal Farm) दुबारा हाथ में उठा लिया। जॉर्ज ऑरवेल का यह राजनीतिक व्यंग्य.... - [बॉलीवुड फिल्मों में पुलिस - हीरो, विलन और...](https://aabohawa.org/police-in-bollywood-films-hero-villain-and-more-writes-maanas/) - हिंदी फ़िल्मों में पुलिस के किरदार को मुख्यतः तीन तरीक़े से गढ़ा गया है। पहला, जो हिंदी फ़िल्मों का टिपिकल पुलिस कैरिकेचर था.... - [पंडित रतननाथ सरशार एक क़लंदर क़लमकार](https://aabohawa.org/pundit-ratannath-sarshar-ek-qalandar-qalamkar-by-rajkumar-keswani/) - पं. रतननाथ सरशार के जीवन व सृजन पर 'क़लंदर क़लमकार' शीर्षक से एक लंबा लेख चर्चित स्तंभकार, पत्रकार, लेखक, अनुवादक और संपादक राजकुमार केसवानी ने लिखा है... - [ऋत्विक घटक: सिनेमा की एक भाषा का नाम](https://aabohawa.org/ritwik-ghatak-a-new-language-of-cinema/) - महान फ़िल्मकार ऋत्विक घटक की जन्म शताब्दी का भी अवसर है और उनके गुज़रने की अर्धशती का भी। इस समय वे कितने प्रांसगिक हैं, उन्हें क्यों और कैसे याद किया जाये... - [दिल हूम हूम करे... भूपेन हज़ारिका की याद](https://aabohawa.org/dil-hoom-hoom-kare-bhupen-hazarika-ki-yaad-by-khudeja-khan/) - बहुमुखी प्रतिभासंपन्न गायक, गीतकार, संगीतकार, फ़िल्म निर्माता, कवि, लेखक के जीवन के बारे में आज उनकी पुण्यतिथि पर स्मृतियों के झरोखों से कुछ महत्वपूर्ण बातें... - [भारतीय क्रिकेट: लड़कियों ने लिखा इतिहास, अब मुट्ठी में आसमान](https://aabohawa.org/indian-women-cricket-new-era-strats-girls-created-history-notes-arun-arnaw-khare/) - भारत जीत गया, दक्षिण अफ्रीका की एक न चली। अब भारतीय लड़कियाँ भी विश्व विजेता हैं, और उन्होंने यह गौरव डंके की चोट पर हासिल किया है.... - [श्रीमद्भगवद्गीता: हमेशा उपयोगी ग्रंथ का सुगम अनुवाद](https://aabohawa.org/always-useful-shrimadbhagwadgita-simple-hindi-translation-notes-vivek-ranjan-shrivastav/) - गीता एक सार्वकालिक वैश्विक ग्रंथ है, इसमें जीवन के मैनेजमेंट की गूढ़ शिक्षा है। आज संस्कृत समझने वाले कम होते जा रहे हैं, पर गीता में सबकी रुचि सदैव बनी रहेगी... - [मध्य प्रदेश गौरव गीत - परंपरा, प्रश्न और निहितार्थ](https://aabohawa.org/madhya-pradesh-gaurav-geet-tradition-and-reflections-writes-bhavesh-dilshad/) - असम, बिहार, छग, गुजरात, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा जैसे राज्यों की उस फ़े​हरिस्त में मध्य प्रदेश का नाम भी प्रमुख है, जिन्होंने... - [आप जानते हैं मध्य प्रदेश के तीन गौरव गीत?](https://aabohawa.org/do-you-know-three-songs-written-for-madhya-pradesh/) - मध्य प्रदेश के 70वें स्थापना के अवसर पर यहां पढ़िए राज्य की महिमा, गौरव और वंदना के सुर में सराबोर तीन गीत। आब-ओ-हवा की विशेष प्रस्तुति... - [टीम इंडिया की मानसिक जीत, भय-मुक्त क्रिकेट है संदेश](https://aabohawa.org/mental-win-of-team-india-message-is-fearless-cricket-writes-arun-arnaw-khare/) - सेमीफाइनल में रिकॉर्ड-ब्रेकिंग चेज़, जेमिमा रोड्रिग्स की असाधारण गाथा ने भारतीय महिला क्रिकेट में नया अध्याय जोड़ा है। भारत ऑस्ट्रेलिया को मात देकर फाइनल में... - [अंक - 38](https://aabohawa.org/edition-38/) - आब-ओ-हवा – अंक - 38 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में उन कलाकारों पर चर्चा, जो इस माह हमें छोड़ गये। बीते कुछ समय से लगातार चिंता में बने हुए हिमालय के संकट पर वैचारिकी। सेहत के मूलभूत विचारों को केंद्र में रखता एक नया - [क़ाफ़िया कैसे बांधें : भाग-3](https://aabohawa.org/qaafiya-kaise-baandhein-part-three-blog-by-vijay-swarnkar/) - यह एक जटिल गुत्थी है जिसे सुलझाना आवश्यक है। ग़ज़ल के विख्यात आलोचक सुल्तान अहमद ने एक जगह लिखा है कि ग़ालिब के निम्न शेर में क़ाफ़िये सुसंगत नहीं हैं... - [मैं कौन हूँ! पुराना सवाल नये ढंग से पूछता 'काकुलम'](https://aabohawa.org/who-am-i-old-question-in-new-theme-is-plot-of-kakulam-blog-by-namita-singh/) - भरत प्रसाद का उपन्यास 'काकुलम' पिछले वर्ष प्रकाशित हुआ। आश्चर्य हुआ और ख़ुशी भी। भरत आलोचक और संपादक भी हैं और उपन्यासकार के रूप में उन्हें पढ़ना अच्छा लगा... - [हस्बे-हाल, सुख़न और उबैदुल्लाह अलीम](https://aabohawa.org/hasbe-haal-sukhan-aur-obaidullah-aleem-blog-by-saleem-sarmad/) - उबैदुल्लाह अलीम 12 जून 1939 में भोपाल में पैदा हुए थे लेकिन बंटवारे में पाकिस्तान चले गये। जॉन एलिया से भी इनका तआल्लुक़ है, यह जानकर भी झुकाव और बढ़ गया... - [युद्ध और हिटलर के यातनाघर से उपजती कविता](https://aabohawa.org/war-prisoners-poem-and-poetry-for-hitler-concentration-camp-blog-by-rati-saxena/) - 2016 में जर्मनी में रेसीडेन्सी के वक़्त जब मैं उन जगहों को भी जानने की कोशिश कर रही थी, तब कुप्रसिद्ध डाकाउ यातनाघर के बारे में जानकारी मिली। मैं वहां तक... - [अगाध राग से भरी नवगीत कवयित्री डॉ. शांति सुमन](https://aabohawa.org/agaadh-raag-se-bhari-navgeet-kavi-shanti-suman-blog-by-raja-awasthi/) - कविता में महीयसी महादेवी वर्मा थी, सुभद्रा कुमारी चौहान थीं, और भी बहुत सारी कवयित्रियाँ रही हैं, किंतु शांति सुमन सच में ही नवगीत कविता की पहली कवयित्री हैं... - [150 करोड़ दीये जलाने का रिकॉर्ड बन पाएगा?](https://aabohawa.org/will-we-achieve-record-of-lighting-150-crore-diyas-blog-by-bhavesh-dilshad/) - 26 लाख दीये जलाने का रिकॉर्ड बनाया जाता है। इस रिकॉर्ड के लिए ड्रोन्स और हेलीकॉप्टर लगाये जा रहे हैं, गिनीज़ बुक के लोग गिनती कर रहे हैं कि सच में... - [परवीन शाकिर की मुर्दा उंगलियाँ](https://aabohawa.org/parveen-shakir-ki-murda-ungliyaan-by-mustnasir-hussain-tarar/) - इस्लामाबाद के क़ब्रिस्तान में परवीन को विदा करने वाले बहुत कम लोग थे, उसकी अज़ीज़दारी कराची में थी, और वहाँ से यहाँ आज ही के दिन पहुँचना मुश्किल था.... - [कायस्थों की लिपि कैथी - इतिहास, वर्तमान और भविष्य](https://aabohawa.org/kaithi-lipi-of-kayastha-community-history-present-and-future-by-vivek-ranjan-shrivastav/) - कायस्थ लिपि, जिसे कैथी लिपि भी कहा जाता है... इसका इतिहास प्राचीन ब्राह्मी लिपि से शुरू होकर गुप्तकाल में विकसित कुटिल लिपि के ज़रिये कैथी के रूप में... - [विज्ञापन का महानायक: पीयूष पाण्डे](https://aabohawa.org/megastar-or-stalwart-of-advertisement-industry-know-piyush-pandey-as-personality-writes-pavitra-shrivastav/) - पीयूष पाण्डे... वे केवल विज्ञापन विशेषज्ञ ही नहीं बल्कि ऐसे कथाकार थे, जिन्होंने भारत की नब्ज़ को पहचानकर उसे विज्ञापन की भाषा में ढाला... - [विकास अवधारणा, बिजली परियोजनाएं और संकट में हिमालय](https://aabohawa.org/development-hydro-power-projects-and-himalayas-under-threat-writes-vivek-ranjan-shrivastav/) - लगातार बढ़ रही जल विद्युत परियोजनाओं के पर्यावरणीय, सामाजिक और भू-वैज्ञानिक प्रभावों को नियंत्रित करते हुए अब हमें एक सतत् स्थायित्व की राह तलाशना होगी.... - [आधुनिक चिकित्सा पद्धति: एक अर्धसत्य क्यों है?](https://aabohawa.org/modern-medicine-why-is-a-half-truth-blog-by-alok-tripathi/) - आजकल के समय में, यह कहना जैसे पाप हो कि जो भी आपके डॉक्टर आपसे कह रहे हैं, वो शुद्ध सत्य नहीं है। उसके पीछे उनकी मंशा आपके स्वस्थ होने के अलावा कोई और भी है.... - [मखमली आवाज़ से जादू करने आया फ़नकार: तलत महमूद](https://aabohawa.org/talat-mahmood-magician-of-silky-voice-blog-by-mithlesh-rai/) - हालांकि तलत का अभिनेता बनने का सफ़र बहुत लंबा नहीं था, फिर भी सोने की चिड़िया, दिल-ए-नादान, एक गांव की कहानी उनकी कामयाब फ़िल्में थीं... - [कैनवास पर छाप छोड़ने को बेताब भावना](https://aabohawa.org/canvas-par-chhap-chhodne-ko-betaab-bhavna-blog-by-preeti-nigoskar/) - प्रकृति के पांच तत्त्व हवा, पानी, आकाश, मिट्टी और आग जैसे तत्वों का अहसास अपने चित्रों में रंगने की कोशिश का नाम भावना है। रंगों की बात करें तो.... - [व्यंग्य: इक्कीसवीं सदी के अछूते विषय](https://aabohawa.org/vyangya-ikkeesvi-sadi-ke-achhote-vishay-blog-by-arun-arnaw-khare/) - जीवन-शैली बदलती है, परिवेश बदलता है, मान्यताएँ बदलती हैं, संस्कृति बदलती है, दृष्टि बदलती है, सोच बदलती है, और व्यंग्यकार की दृष्टि से देखें तो विसंगतियाँ भी... - [ज़ालिम दौर में मासूम शाइरी की आवाज़](https://aabohawa.org/zaalim-daur-mein-masoom-shayri-ki-aawaz-blog-by-ashish-dashottar/) - शाइरी ही क्या, कोई भी सिन्फ़ हो, वह अपने आप को उस जगह खड़ा रखती है, जहां आम इंसान मौजूद रहता है। इसीलिए कहा जाता है कि साहित्य हमेशा आईना दिखाता है... - [लोकरंग की चाशनी में एस.एन. त्रिपाठी की अमर धुन](https://aabohawa.org/lokrang-ki-chashni-mein-s-n-tripathi-ki-amar-dhun-blog-by-vivek-savrikar-mridul/) - यह फ़िल्म तो भले ही कम चली लेकिन भरत व्यास की कलम से निकले और एस.एन.त्रिपाठी के लोकरंग से पगे एक-दो गानों की मधुरता आज भी रसिकों के कानों में रस घोल देती है... - [अख़्तरुल ईमान: उर्दू अदब में जदीद नज़्मों की इब्तिदा](https://aabohawa.org/akhtarul-iman-urdu-mein-jadeed-nazm-ki-ibtida-blog-by-zahid-khan/) - अख़्तरुल ईमान अपने दौर के संजीदा शायर और बेहतरीन डायलॉग राइटर थे। अक्सर लोग उन्हें फ़िल्मी लेखक के तौर पर याद करते हैं, भूल जाते हैं कि वो एक नामचीन शायर थे... - [आज भी मिसाल है यह 200 साल पुरानी किताब](https://aabohawa.org/this-200-year-old-book-is-still-live-blog-by-dr-azam/) - सैयद इंशा अल्लाह ख़ान "इंशा" और मिर्ज़ा मुहम्मद हसन "क़तील" के नाम से मन्सूब ग्रंथ 'दरिया-ए-लताफ़त' पहली बार फ़ारसी में 1808 में लिखा गया था.... - [जेंडर तटस्थ स्कूली पोशाक और समावेशी समझ](https://aabohawa.org/gender-neutral-school-uniform-and-inclusivity-blog-by-alok-kumar-mishra/) - विद्यालयों में बच्चों के लिए एक जैसी वर्दी हो, इस बात पर कमोबेश हमारे समाज में आम सहमति है। हालाँकि कभी-कभी कुछ सांस्कृतिक, धार्मिक पहनावों और... - [नेताजी-चमचाजी पुराण: दूसरा भाग](https://aabohawa.org/https-aabohawa-org-netaji-chamchaji-puraan-part-two-hasya-vyangya-by-aditya/) - नेताजी की जयंती और उनके नाम से कोई दिवस न मना पाने जैसी समस्याओं के बाद चमचा उत्साहित था कि नेताजी के लिए एक अभूतपूर्व उपाधि चिपकाने की योजना बन सकती है... - [नेताजी-चमचाजी पुराण](https://aabohawa.org/netaji-chamchaji-puraan-hasya-vyangya-by-aditya/) - लोग घरों में तोते, कुत्ते, बिल्ली आदि पालते हैं और अधिकांश नेता अपने बौद्धिक स्तर के हिसाब से चमचे। चमचे नेताओं के मानसिक तनाव को कम करने में सहायक होते हैं... - [पीयूष पांडे... वेल डन कैप्टन](https://aabohawa.org/well-done-captain-a-memoir-to-piyush-pandey-by-sonu-yashraj/) - विज्ञापनों में हिंदी की गरिमामय काव्यात्मक उपस्थिति के लिए हमेशा याद किये जाएंगे पीयूष पांडे। ऐड गुरु से एक मुलाक़ात के बहाने एक याद... - [शिक्षक के प्रति श्रद्धा, संवेदना व सम्मान जगाती कृति](https://aabohawa.org/classic-book-by-chingiz-aitmatov-injects-respect-to-teachers-notes-pramod-dixit-malay/) - पहला अध्यापक मूलरूप से रूसी भाषा में चिंगिज़ ऐटमाटोव लिखित ‘दुईशेन’ का भीष्म साहनी कृत हिंदी अनुवाद है, जो राष्ट्रीय पुस्तक न्यास द्वारा प्रकाशित किया गया... - [राज बेगम: कश्मीर की आवाज़, कश्मीरी औरतों का इंक़लाब](https://aabohawa.org/raj-begum-nightingale-of-kashmir-revolution-for-kashmir-women-notes-bhavesh-dilshad/) - ख़ुशी के गीतों की बनिस्पत दुख के गीत देर तक याद रहते हैं, दूर तक साथ चलते हैं। ऐसे ही गीतों की तरह की एक शख़्सियत का नाम राज बेगम... - [असरानी: हास्य अभिनेता के छिपे दर्द को कौन समझा!](https://aabohawa.org/asrani-who-know-sadness-behind-a-comedian-comments-vivek-savrikar-mridul/) - अब असरानी जी के आगे स्वर्गीय लिखना होगा। लेकिन क्या उनकी स्मृतियां कभी दिवंगत हो सकेंगी! 'शोले' का अंग्रेज़ों के ज़माने का जेलर हम जितनी बार परदे पर देखेंगे... - [बृज की एयरलाइंस](https://aabohawa.org/brij-ki-airlines-humour-by-dr-mukesh-aseemit/) - हास्य-व्यंग्यकार कवि डॉ. अशोक चक्रधर जी की एक हास्य रचना "बृज की मेट्रो रेल" सुन रहा था... मुझे भी एक आइडिया आया कि अगर बृज क्षेत्र की कोई एयरलाइन हो.... - [हिंदी पत्रकारिता ही नहीं, विदेशों में भारतीयता का दस्तावेज़](https://aabohawa.org/not-only-hindi-journalism-but-a-document-of-indian-culture-in-other-countries-book-review-by-swarangi-sane/) - किताब के कवर पर ही साफ़-साफ़ लिखा था- 27 देशों की हिंदी पत्रकारिता का सिंहावलोकन। किसी किताब के कवर से उसका अंदाज़ा नहीं लगाना चाहिए... - [मिले सुर मेरा तुम्हारा... ऐसे बना था देश का यह सुर](https://aabohawa.org/story-of-making-of-legendary-video-of-mile-sur-mera-tumhara/) - इसी टीम ने वह तस्वीर दूरदर्शन के परदे पर साकार कर दिखायी, जो आज भी भारत की अखंडता, अनेकता में एकता और सहजीविता के आदर्श का चमत्कारिक प्रतिरूप बनी हुई है... - [कैसी है प्रसिद्ध कवि पुश्किन की बायोपिक 'द पोएट'!](https://aabohawa.org/review-of-the-poet-movie-biopic-of-great-russian-poet-alexander-pushkin/) - दुर्भाग्य ही है पुश्किन पर हाल ही रिलीज़ हुई रूसी बायोपिक "द पोएट", जो स्पष्ट रूप से उनके जीवन पर आधारित है, के बारे में यह दावा गंभीरता से नहीं किया जा सकता... - [दीपक/प्रकाश के विषय पर 10 समकालीन गद्य कविताएं](https://aabohawa.org/deepak-aur-prakash-ke-vishay-par-10-samkaleen-kavitayen-diwali-vishesh/) - दीपक, प्रकाश शब्द और भाव के इर्द-गिर्द ये कविताएं बुनी गयी हैं। समकालीन गद्य कविता की दुनिया में ये सभी कवि अपनी पहचान बना रहे हैं या बना पाये हैं... - [उल्लू बनो-बनाओ, लक्ष्मी जी को प्रसन्न करो](https://aabohawa.org/ullu-bano-banao-lakshmi-ji-ko-prasann-karo-humour-by-vivek-ranjan-shrivastav/) - दीपावाली पर लक्ष्मी पूजन से पहले, बड़े बड़े धोखाधड़ी के शिकार लोगों को उल्लू श्रेष्ठ, मूर्ख श्रेष्ठ, लल्लू लाल जैसी उपाधियों से विभूषित किया जा सकता है... - [द गेम... यानी खेल में आप अकेले कभी नहीं!](https://aabohawa.org/netflix-series-says-you-never-play-alone-the-game-review-by-swarangi-sane/) - सीरीज़ में दिखाया गया है पुरुषवादी मानसिकता उस पर जानलेवा हमले तक करवाती है, लेकिन वह यह भी दिखाती है अब महिलाएँ शिकस्त खाने नहीं, शिकस्त देने को तैयार हैं... - [विदेशों में दीपावली: प्रकाश का वैश्विक उत्सव](https://aabohawa.org/diwali-celebration-worldwide-festivals-of-light-notes-madhulika-shrivastav/) - अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, मॉरीशस, फ़िजी, दक्षिण अफ्रीका और मलेशिया जैसे देशों में दीपावली आज एक अंतरराष्ट्रीय उत्सव का रूप ले चुकी है... - [नोबेल पुरस्कार: शांति की खोज या ईजाद?](https://aabohawa.org/nobel-prize-discovery-or-invention-of-peace-blog-by-bhavesh-dilshad/) - वेनेज़ुएला के एक सियासी चेहरे मारिया कोरिना मचाडो को शांति का नोबेल दिये जाने पर हंगामा है। इसे 'युद्ध का नोबेल' तक क़रार दे दिया गया है.... - [अंक - 37](https://aabohawa.org/edition-37/) - आब-ओ-हवा – अंक - 37 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में नोबेल पुरस्कारों के संबंध में चर्चा, क्या शांति के नोबेल को कठघरे में खड़ा करना उचित है! दीवाली के त्योहार पर विशेष सामग्री में उत्पादों को लेकर जागरूकता के लिए विशेषज्ञ का नज़रिया और - [तीसरा किरदार: कबीर और ग़ालिब के बहाने](https://aabohawa.org/teesra-kirdar-kabir-aur-ghalib-ke-bahane-blog-by-namita-singh/) - युवा लेखक सलीम सरमद साहित्य के गंभीर अध्येता हैं। न सिर्फ़ हिन्दी, उर्दू और सूफ़ी काव्य उनकी दिलचस्पी के विषय हैं बल्कि एक क़िस्सागो के रूप में भी... - [हिन्दी-उर्दू शायरी में 'चराग़'](https://aabohawa.org/hindi-urdu-shayri-mein-chirag-a-compilation-by-devdutt-sangep/) - लफ़्ज़ 'चराग़' या चिराग़। इस लफ़्ज़ को हिंदोस्तानी शायरी में इस तरह बरता गया है कि इसके दायरे में क्या मोहब्बत क्या सियासत, समाज का हर पहलू आता रहा है... - [व्यंग्य शीर्षक: ऐसा हो, ऐसा-वैसा नहीं](https://aabohawa.org/vyangya-sheershak-aisa-ho-aisa-waisa-nahin-blog-by-arun-arnaw-khare/) - शीर्षक यदि रचना की अंतर्धारा को अभिव्यक्त करता है तो वह रचना-पाठ के पहले ही क्षण पाठक को संपूर्ण आस्वाद से जोड़ देता है। यही कारण है व्यंग्य रचना... - [क़ाफ़िया कैसे बांधें : भाग-2](https://aabohawa.org/qaafiya-kaise-baandhein-part-two-blog-by-vijay-swarnkar/) - हम क़ाफ़िये के सुसंगत होने के लिए आवश्यक शर्तों को समझने के लिए यह विवेचना कर रहे हैं। जो ग़ज़ल प्रेमी क़ाफ़िये के सभी हर्फ़ों से परिचित हैं.... - [शेर और शाइरी के बीच की जगह](https://aabohawa.org/sher-aur-shayari-ke-beech-ki-jagah-blog-by-ashish-dashottar/) - हर शेर अपने आप में मुकम्मल होता है। सभी में ख़यालों की तर्जुमानी तो होती है मगर कुछ शेर ऐसे होते हैं, जो दिल पर नक़्श हो जाते हैं। शाइरी वहीं होती है... - [काश! हम वैसे ही होते](https://aabohawa.org/kaash-hum-waise-hi-hote-blog-by-alok-kumar-mishra/) - आख़िर कभी न कभी हम सबके पूर्वज ऐसी ही ज़िंदगी तो जीते थे। वैसा ही जीवन हम जीते तो फिर न ग्लोबल वॉर्मिंग होती, न प्रदूषण... - [त्योहार का समय और प्रमाणीकरण का व्यवसायीकरण](https://aabohawa.org/festival-times-and-commercialization-of-product-verification-reflections-by-alok-tripathi/) - सलाह देने में भी मेरी सोच सकारात्मक थी। बिना सिर पैर के विज्ञापनों की भीड़ में वास्तविक उत्पाद का चयन, उपभोक्ता के लिए एक बहुत बड़े शोध का विषय बन गया है... - [गीत विमर्श की इस यात्रा का नया मोड़](https://aabohawa.org/geet-vimarsh-ki-is-yatra-ka-naya-mod-blog-by-raja-awasthi/) - कविता की दशा, प्रकृति, प्रवृत्ति और आलोचना के उस अपराध पर भी चर्चा की, जो उसने कविता के मात्र एक प्रारूप गद्य कविता को ही कविता मानते और घोषित करते हुए.... - [संध्या शांताराम का वह अनूठा सर्प नृत्य](https://aabohawa.org/that-classic-ballet-of-snake-dance-of-sandhya-v-shantaram-blog-by-vivek-savrikar-mridul/) - अपने समय की मशहूर और मारूफ़ अभिनेत्री और नर्तकी संध्या शांताराम का पिछले दिनों 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से फ़िल्मी चकाचौंध से दूर... - [कला में आस्था व उत्साह यानी भावना सोनावणे](https://aabohawa.org/meet-bhavna-sonavane-an-artist-with-energy-and-devotion-in-art-blog-by-preeti-nigoskar/) - भावना सोनावणे ने अद्भुत भाव-विश्व को कैनवास पर साकार करने के लिए प्रयास और कलानिष्ठा से अपनी स्वतंत्र शैली निर्मित की... - [युद्ध और आपदा में संजीवनी पोएट्री](https://aabohawa.org/poetry-as-medicine-in-wars-and-disasters-blog-by-rati-saxena/) - हंगरी के एक कवि थे, वे यहूदी मूल के थे, उनका नाम था यहूदी मिक्लोस रैडनोटी [1909-1944] उन्हें होलोकॉस्ट कवियों में महसन कवि के रूप में याद किया जाता है... - ['चराग़' के विषय पर चार शायरों की ग़ज़लें](https://aabohawa.org/famous-ghazals-by-ahmad-faraz-vineet-aashna-saleem-sarmad-bhavesh-dilshad/) - रदीफ़ के तौर पर 'चराग़' लफ़्ज़ को बरतने वाली चार ग़ज़लों का गुलदस्ता। दीवाली के मौक़े पर आब-ओ-हवा की इस ख़ास पेशकश पर आप अपनी राय हमें ज़रूर दें... - [कौन था हिन्दी सिनेमा का पहला 'जुबली कुमार'](https://aabohawa.org/who-was-first-jubilee-kumar-of-hindi-cinema-blog-by-mithlesh-rai/) - "कौन राजेन्द्र कुमार?"... "नहीं यार ये अब तो सब आज़ादी के बाद के हीरो हैं, हमारा ज़माना ब्लैक एंड व्हाइट सिनेमा का था, तब हीरो हुआ करता था करण दीवान... - [मजाज़: शमशीर, जाम और साज़ का इम्तिज़ाज](https://aabohawa.org/majaz-shamsheer-jaam-aur-saaz-ka-imtizaj-blog-by-zahid-khan/) - शेर-ओ-अदब की महफ़िल में जब भी ग़ज़लों-नज़्मों का ज़िक्र छिड़ता है, मजाज़ लखनवी का नाम ज़रूर आता है। एक लंबा अरसा गुज़र गया, मगर उनकी शायरी की धमक कम नहीं हुई.... - [बानो की जादूगरी, जादुई यथार्थवाद का मशहूर उपन्यास](https://aabohawa.org/bano-qudsia-magic-and-famous-novel-of-magical-realism-blog-by-dr-azam/) - "राजा गिद्ध", ये बानो क़ुदसिया और उर्दू अदब का बहुत मशहूर नॉवेल है, जो पहली बार 1981 में प्रकाशित हुआ। अब तक इसके चौदह से ज़्यादा एडीशन आ चुके हैं... - [फ़ासला, भाषा, उद्देश्य और अदम गौंडवी](https://aabohawa.org/faasla-bhasha-uddeshya-aur-adam-gondvi-blog-by-saleem-sarmad/) - अदम गौंडवी जानते हैं वो कौन हैं, जो रोटी का मसला हल नहीं कर सकते, जो अमीरी-ग़रीबी के फ़ासले को मिटाने की क़ुव्वत नहीं रखते, जिनकी नीयत में खोट है लेकिन... - [इंद्रधनुष-4 : जंगबहादुर श्रीवास्तव 'बंधु'](https://aabohawa.org/indradhanush-four-jang-bahadur-shrivastav-bandhu-ke-geet/) - 8 दिसंबर 1935 को जन्मे बंधु जी का निधन कल 13 अक्टूबर 2025 को भोपाल में हो गया। बंधु जी गीति ​काव्य में अपने अनूठे स्वर और हस्ताक्षर के लिए सर्वविदित रहे... - [हर उम्र की स्त्री के लिए यूनिवर्सिटी है यह किताब](https://aabohawa.org/must-read-book-is-university-for-all-women-notes-akaknsha-tyagi/) - वर्जीनिया वूल्फ़ से 'पहली मुलाक़ात' ट्वेंटीज़ की उम्र में हुई थी। यह किताब 'अ रूम ऑफ़ वन्'स ओन' उन सब बातों की गूँज थी, जो भारतीय समाज में... - [जादू](https://aabohawa.org/jaadu-story-in-hindi-by-shashi-khare/) - वह दबे पाँव आकर खिड़की पर बैठ गया और बहुत एकाग्र होकर सूर्योदय देखने लगा मानो यह सृष्टि का प्रथम सूर्यागमन हो। समुद्र के पीछे क्षितिज पर... - [50 दिन में 8 देश घूमकर लिये 8000 चित्र, स्केच व नोट्स](https://aabohawa.org/how-keerat-pandher-europe-tour-created-photo-and-sketch-exhibition-noting-subhash-arora/) - कीरत पंधेर ने इटली, वेटिकन, स्विटज़रलैंड, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल के 43 कस्बों की यात्रा की। 135 वास्तुशिल्प प्रोजेक्ट्स का अवलोकन किया... - [शमशेर: ग़ज़ल की ज़मीन पर](https://aabohawa.org/shamsher-bahadur-singh-ghazal-ki-zameen-par-studying-asmita-singh/) - उर्दू ग़ज़लों में प्रमुख मुद्दा - इश्क़िया ग़ज़लगोई से ऊपर उठकर सामाजिक चेतना - यहां तक कि विश्व-चिंता से भी जुड़ जाता है और ग़ज़ल गुनगुनाने तक ही सीमित... - [लास्ज़लो क्राज़्नाहोरकाई और लास्ज़लो टॉथ से गुज़रते हुए](https://aabohawa.org/going-through-laszlo-krasznahorkai-and-laszlo-toth-notes-by-bhavesh-dilshad/) - लास्ज़लो क्राज़्नाहोरकाई को इस साल साहित्य का नोबेल पुरस्कार घोषित किया गया है। इत्तेफ़ाक से यह नाम 'लास्ज़लो' पिछले एक हफ़्ते से मेरे ज़ेह्न में बना हुआ है... - [पाकिस्तानी पेशकश ठुकराने वाला अलीगढ़ का बुक हाउस](https://aabohawa.org/how-legendary-bookshop-educational-book-house-refused-to-relocate-to-pakistan-notes-mohd-wajihuddin/) - रिपोर्ताज मो. वजीहुद्दीन की कलम से.... पाकिस्तानी पेशकश ठुकराने वाला अलीगढ़ का बुक हाउस विभाजन की भयावहता से उठी धूल के बैठने के बाद, अलीगढ़ स्थित एजुकेशनल बुक हाउस के मालिक मोहम्मद शहीद ख़ान को सीमा पार से दोस्तों और रिश्तेदारों से पाकिस्तान चले जाने के पत्र मिले। - [अथ अशोभन शोभायात्रा कथा...](https://aabohawa.org/ath-ashobhan-shobhayatra-katha-hasya-vyangya-by-aditya/) - फ़िल्मी संगीत के समीक्षकों द्वारा फूहड़ करार दिये गये गाने आज धार्मिक शोभायात्राओं में हिट नंबर्स की श्रेणी में शामिल होकर पवित्र हो गये हैं... - [पर्दा है पर्दा](https://aabohawa.org/parda-hai-parda-hasya-vyangya-by-mukesh-aseemit/) - राजा विशेष आरामगाह में आराम फ़रमा रहा था। विशेष इसलिए कि वह पहली बार इस आरामगाह में आया था। राजा को एक ही दुःख कचोटे जा रहा था- आज वह अकेला था... - [ताकि यहां फिल्में बनें और चंबल के कलाकारों को मिले उड़ान](https://aabohawa.org/chambal-international-film-festival-this-year-in-gwalior-focus-on-cinema-and-tourism/) - चंबल इंटरनेशनल फ़िल्म फ़ेस्टिवल 2025: ग्वालियर में दो दिन सिनेमा और पर्यटन पर होगा फ़ोकस... - ['इग्नाइटेड माइंड्स' के अप्रतिम स्वप्न और यह लौह समय](https://aabohawa.org/apj-abdul-kalam-great-dreams-of-ignited-minds-and-todays-tough-times-shukriya-kitab-by-anil-singh-satyapriya/) - इग्नाइटेड माइंड्स आत्म-खोज और राष्ट्रीय गौरव की यात्रा पर निकलने के लिए उन्हें आमंत्रित करती है, जो भारत के उज्ज्वल भविष्य का साहसपूर्ण सपना देखते हैं... - [कमलकांत... याद तो होगा आपको यह नाम!](https://aabohawa.org/kamal-kant-you-must-remember-the-name-right-kavita-posters/) - पत्रकार, 'साहित्य सागर' के संपादक, 'नटवर गीत सम्मान' के प्रवर्तक और 'राष्ट्रीय गीत उत्सव' के आयोजक के रूप में ख्यातिप्राप्त कमलकांत जी एक श्रेष्ठ कवि रहे.. - [भाषा का रोब](https://aabohawa.org/bhasha-ka-rob-reflections-by-aditya/) - प्राचीनकाल में संस्कृत और मध्यकाल में फ़ारसी का प्रयोग राज दरबारों में होता था, जबकि आम जनता क्षेत्रीय बोलियों से काम चलाती थी... - [यादें और सपने... गुरु-शिष्या की पेंटिंग्स ने जमाया रंग](https://aabohawa.org/nostalgia-and-dreams-paintings-of-teacher-student-got-appreciated/) - मुकेश बरसों से कला साधना में रत हैं। वहीं उनकी शिष्या सीरत, रानी और राजमहल वाले बाल्यकाल वाले सपनों को कैनवास पर सजीव करती प्रतीत होती हैं... - ['वाद' के आधार पर नहीं रचा जाता साहित्य: नमिता सिंंह](https://aabohawa.org/sahitya-vaad-ke-aadhar-par-nahin-racha-jaata-says-writer-namita-singh/) - सुभद्रा कुमारी चौहान की अमर कविता 'झांसी की रानी' की भाषा और निराला की 'जुही की कली' की भाषा लोकप्रिय कविता के दो छोर हैं। जनपक्षधरता की कविता और उनकी भाषा... - [अंक - 36](https://aabohawa.org/edition-36/) - आब-ओ-हवा – अंक - 36 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में गांधी जयंती और शास्त्री जयंती पर दो महापुरुषों को विशेष नमन (चित्र रत्नाकर देशपांडे के इंस्टाग्राम से साभार)। इधर चर्चित लेखक व कवि विनोद कुमार शुक्ल को मिली रॉयल्टी के संदर्भ में जो बहस - [धूप में निकलो घटाओं में नहाकर देखो](https://aabohawa.org/dhoop-mein-niklo-ghataaon-mein-nahakar-dekho-blog-by-zahid-khan/) - निदा फ़ाज़ली उर्दू-हिन्दी ज़बान के जाने-पहचाने अदीब, नग़मानिगार और डायलॉग राइटर थे। निदा फ़ाज़ली ने कुछ अरसे पत्रकारिता भी की, लेकिन उनकी शिनाख़्त एक ऐसे शायर की है... - [कलाकार का सपना- चित्र देख सब कहें, यह सुनीला का है](https://aabohawa.org/kalakar-ka-sapna-chitr-dekh-sab-kahein-yah-sunila-khandelwal-ka-hai-blog-by-preeti-nigoskar/) - चित्रों की एक अलग-सी शृंखला पेश करती कलाकार सुनीला खंडेलवाल उज्जैन में रहती हैं। वही उज्जैन जो कलाकारों का गढ़ कहा जाता है... - [राजेश रोशन का राग पहाड़ी में संगीतबद्ध अनूठा भजन](https://aabohawa.org/rajesh-roshan-ka-raag-pahadi-me-anootha-bhajan-blog-by-vivek-savrikar-mridul/) - वर्ष 1975 में राजेश रोशन के संगीत से सजी फ़िल्म 'जूली' के गाने हर युवा की ज़ुबान पर थे। विक्रम और लक्ष्मी की जोड़ी को इस फ़िल्म में बेहद पसंद किया गया था... - [ज़माने की बात को अपनी बात बनाने का शऊर](https://aabohawa.org/zamaane-ki-baat-ko-apni-baat-banaane-ka-shuoor-blog-by-ashish-dashottar/) - आज सामईन बहुत उलझने या कहन के दाव-पेंच में पड़ना नहीं चाहते। वे कुछ ऐसा चाहते हैं, जो उनके बिल्कुल क़रीब का हो। छूता हुआ गुज़रे। जैसे शकील जमाली कहते हैं... - [नवगीत क्या है?](https://aabohawa.org/what-is-navgeet-blog-by-raja-awasthi/) - नवगीत की नित-नव्यता पर बात करते हैं। वास्तव में यह नित-नव्यता ही वह कारण है, जिसके कारण नवगीत को बार-बार परिभाषित करने की ज़रूरत महसूस की जाती है... - [हिंदी और उर्दू दोनों का शाहकार उपन्यास](https://aabohawa.org/classic-novel-for-both-hindi-and-urdu-literature-blog-by-dr-azam/) - गोदान को मुंशी प्रेमचंद ही नहीं उर्दू और हिन्दी दोनों अदब का शाहकार नॉवेल तस्लीम किया जाता है। पहले देवनागरी में लिखा गया था फिर इक़बाल बहादुर वर्मा 'साहिर'... - [हिन्दी सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार](https://aabohawa.org/first-female-superstar-of-hindi-cinema-blog-by-mithlesh-rai/) - नसीम बानो की मां शमशाद बेगम दिल्ली की मशहूर तवायफ़ थीं। नसीमा को संगीत का माहौल बचपन से ही मिल गया था, लेकिन उसकी मां उसे डॉक्टर बनाना चाहती थी... - [बूढ़े भी सीखें ढलना](https://aabohawa.org/old-age-people-should-also-learn-to-adapt-takhti-by-alok-mishra/) - आज बढ़ते वृद्धाश्रमों, अकेले जीवन गुज़ारते बूढ़ों को देखकर हम युवा वर्ग को ही कोसते हैं। बहुत-से मामले इन बूढ़े लोगों की कारगुज़ारियों का भी परिणाम होते हैं... - [क़ाफ़िया कैसे बांधें : भाग-1](https://aabohawa.org/kafiya-kaise-baandhein-part-one-blog-by-vijay-swarnakar/) - क़ाफ़िये या तुकांत के बारे में मेरा मानना है जो जन्मजात कवि हैं वे आसानी से इसके मर्म को समझ लेते हैं। उनसे वे ग़लतियां नहीं होतीं जो अन्य कविताप्रेमी करते हैं... - [ऐसे ईमानदारी के आइकन बने लाल बहादुर शास्त्री​](https://aabohawa.org/forgotten-stories-of-honesty-icon-lal-bahadur-shastri-notes-by-vivek-ranjan-shrivastava/) - आज राजनीति में सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी तलाशना कठिन हो चला है। शास्त्री जी के व्यक्तित्व के अनेक अनछुए पहलू हैं, जो आज ख़ासतौर पर प्रासंगिक तथा अनुकरणीय है.. - ["रामराज्य का अर्थ हिन्दू राज्य नहीं"](https://aabohawa.org/ramrajya-ka-arth-hindu-rajya-nahin-what-mahatma-gandhi-said-in-bhopal-notes-by-madhulika-shrivastav/) - तक़रीबन 95 साल पहले 11 सितंबर 1929 को महात्मा गांधी स्वदेशी और हिंदू मुस्लिम एकता की पताका लेकर भोपाल के नवाब श्री हमीदुल्लाह ख़ान के आमंत्रण पर भोपाल आये थे... - [मेरे अस्तित्व की लघुता और कमलकांत सक्सेना जी](https://aabohawa.org/mere-astitva-ki-laghuta-aur-kamal-kant-saxena-blog-by-saleem-sarmad/) - कमलकांत जी तब साहित्य-सागर पत्रिका के संपादक थे, मेरी कच्ची रचनाओं को भी अपनी पत्रिका में स्थान देकर उन्होंने मुझ पर बड़ा उपकार किया था... - [व्यंग्य में फैंटेसी- प्रभावकारी व्यंजना](https://aabohawa.org/vyangya-mein-fantasy-prabhavkari-vyanjana-blog-by-arun-arnaw-khare/) - फैंटेसी-साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मानवीय विचार, अनुभव और संवेदनाओं की अभिव्यक्ति का एक सशक्त उपकरण है... - [खिड़की में दीवार बनाने की ख़ुराफ़ात में लोग](https://aabohawa.org/deewar-mein-khidki-or-khidki-mein-deewar-an-analysis-by-ashok-sharma/) - तीस लाख की रॉयल्टी और छत्तीस तरह के विवाद... चौथा हिन्द युग्म उत्सव, रायपुर साहित्य की दुनिया में आख़िर क्यों निशाने और चर्चा में बना हुआ है? - [इतने साहित्य उत्सव..! तमाशा मेरे आगे](https://aabohawa.org/too-much-literature-festivals-tamasha-mere-aage-blog-by-bhavesh-dilshad/) - पिछले एक दशक में भारत में साहित्य उत्सवों की बाढ़ क्यों आयी है? इन उत्सवों का हासिल क्या है? सवाल यह भी कि इन आयोजनों के लिए पूंजी आ कहां से रही है और... - [कविता से इलाज : कुछ केस स्टडीज़](https://aabohawa.org/treatment-by-poetry-a-few-case-studies-blog-by-rati-saxena/) - यहाँ मैं कुछ कवियों के मामलों का हवाला देना चाहती हूँ, जिन्होंने कविता को चिकित्सा के रूप में इस्तेमाल किया। चूँकि उनमें कुछ मेरे मित्र हैं, इसलिए... - [द्वितीय विश्वयुद्ध का कथानक और आज के संदर्भ](https://aabohawa.org/second-world-war-plot-of-novel-and-present-times-blog-by-namita-singh/) - एक दिलचस्प उपन्यास 'गोरी हिरणी', लेखक पंजाबी के चर्चित कथाकार गुलज़ार सिंह सन्धु हैं। इसका हिन्दी अनुवाद वंदना सुखीजा और गुरुबख़्श सिंह मोगा ने किया है... - [हर संवेदनशील भारतीय को शर्मसार करती किताब](https://aabohawa.org/every-sensible-indian-feels-shame-after-reading-this-book-by-laxman-gaikwad-writes-shashi-khare/) - लक्ष्मण गायकवाड़ के परिवार और समाज ने जो भोगा, वह तो 1890 के शिकागो के माँस कारखानों में काम करने वालों से कई गुना अधिक क्रूर है, असहनीय, नारकीय है... - [महात्मा गांधी और नवरात्रि](https://aabohawa.org/mahatma-gandhi-and-navratri-note-by-vivek-ranjan-shrivastava/) - गांधीजी की आत्मकथा, “सत्य के प्रयोग” (My Experiments with Truth) में वर्णन है किशोरावस्था में माँ से प्रेरणा लेकर वह वैष्णव और शिव व्रतों का पालन किया करते थे.. - [इंद्रधनुष-3 : द्विजेंद्र द्विज](https://aabohawa.org/indradhanush-three-gazals-by-dwijendra-dwij/) - हिंदी के साथ ही द्विज ख़ास तौर से हिमाचली ग़ज़लें भी कह रहे हैं और इनका एक संग्रह भी ला चुके हैं। द्विज की ग़ज़लों में पहाड़ के कई पहलू झलकते हैं... - [रंग](https://aabohawa.org/rang-hindi-satire-by-pankaj-ninad/) - पूत के पाँव पालने में दिखने लगे थे। वह अपने पिता पर ही गया था। वह भी देश के नामी पेंटर थे। नन्ही उम्र से ही उसकी उँगलियों ने ब्रश और पेंसिल थाम लिये थे... - [पंजाब बाढ़ पीड़ितों के लिए कलाकारों ने जुटाये 11 लाख](https://aabohawa.org/art-exhibition-collects-eleven-lakh-rupees-for-punjab-flood-relief/) - पंजाब के बाढ़ प्रभावितों की सहायतार्थ 171 कलाकारों की कलाकृतियों वाली प्रदर्शनी में अब तक कलाकृतियों के विक्रय से 11 लाख रुपये की राशि एकत्र की जा चुकी है... - [चंद्रकांता: प्रासंगिकता और आलोचना के प्रश्न](https://aabohawa.org/chandrakanta-relevance-of-bestseller-hindi-novel-and-challenges-of-criticism-by-rajendra-yadav/) - मैंने 100 साल पुरानी चंद्रकांता जैसी किताब पर अपने 6 महीने क्यों लगा दिये! आज उस गड़े मुर्दे को उखाड़ने की क्या मजबूरी या प्रासंगिकता है? - [भाषा, साहित्य और कथक की त्रिवेणी: एक विवेचन](https://aabohawa.org/language-literature-and-dance-an-analysis-by-swarangi-sane/) - कविता में एक शब्द आता है और उसका एक आयाम कवि रखता है, दूसरा आयाम श्रोता सुनता है लेकिन नृत्य उसे तीसरा आयाम देता है, जिसका अर्थ कई आयामों में खुलता है... - ['मजाज़ हूं सरफ़रोश हूं मैं' का विमोचन](https://aabohawa.org/majaz-hoon-sarfarosh-hoon-main-book-launch-at-janvadi-lekhak-sangh-national-summit/) - 'जनवादी लेखक संघ' के 11वें राष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज़ 19 सितम्बर को बांदा में हुआ। उद्घाटन शायर गौहर रज़ा ने किया, विशिष्ट अतिथि एक्टिविस्ट सुभाषिनी अली थीं.. - [साहित्य की बातों को बुनने का जुनून 'साकीबा'](https://aabohawa.org/sahitya-ki-baat-annual-celebration-in-presence-of-popular-poets-and-writers-of-madhya-pradesh/) - बहुचर्चित साहित्यिक संस्था ‘साहित्य की बात’ (साकीबा) का दसवाँ वार्षिक समारोह विदिशा में हुआ तो साहित्य प्रेमियों के एक बड़े वर्ग में इसे लेकर सुगबुगाहट रही... - [करियर, रिश्तों और व्यक्तित्व विकास के सूत्र थमाती किताब](https://aabohawa.org/ryan-holiday-book-that-provides-secrets-of-career-relationships-and-personality-reading-by-adil-siddiqui/) - Ego is the Enemy किताब को अमेरिकी लेखक और दार्शनिक विचारक Ryan Holiday ने लिखा है। उन्होंने देखा इंसानों की असफलता और संघर्षों की जड़ भीतर बैठा ईगो होता है... - [सज़ा](https://aabohawa.org/saza-folklore-type-short-story-by-pankaj-ninad/) - जबसे उसने होश संभाला था, वो तीन सरकारें बदलते देख चुका था। सब कुछ बदला, पर नहीं बदला तो उसका नसीब। न नौकरी थी, न कोई ढंग का रोज़गार... - [बशीर बद्र के नाम मुज़फ़्फ़र हनफ़ी का वो चर्चित ख़त](https://aabohawa.org/once-popular-letter-to-bashir-badr-from-muzaffar-hanfi-a-debate-of-poets/) - इसके बरअक्स मुझे भोपाल, कोलकाता, जमशेदपुर वग़ैरह की कई ऐसी नशिस्तें और मुशायरे याद आ रहे हैं, जहां 'कम मक़बूल' फ़नकार सराहे गये और तुम्हें हूट किया गया... - [विज़न 2035: भारत में स्वास्थ्य निगरानी- वरदान या ख़तरा?](https://aabohawa.org/vision-2035-public-health-surveillance-in-india-blessing-or-danger-explaining-alok-tripathi/) - WHO ने पैंडेमिक ट्रीटी को पास कराया, जिसका उद्देश्य है अंतरराष्ट्रीय केन्द्रीकृत कंट्रोल रूम बनाना, जिसके बाद विज़न 2035 के पहलुओं पर ध्यान देना आवश्यक है... - [विश्वगुरु भारत के पड़ोसी](https://aabohawa.org/vishwaguru-bharat-ke-padosi-humor-and-satire-by-aditya/) - कुछ देश सैकड़ों सालों से भारत की छत्रछाया में रहकर नक्शे पर बने हुए हैं। श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल समय-समय पर भारत विरोध का सुर अलापते रहते है.... - [पानी की कहानी... अनुपम मिश्र से आमिर खान की बातचीत](https://aabohawa.org/paani-ki-kahani-aamir-khan-meaningful-talks-to-anupam-mishra/) - इस संदर्भ में टीवी कार्यक्रम 'सत्यमेव जयते' हेतु आमिर ख़ान द्वारा अनुपम मिश्र से की गयी बातचीत महत्वपूर्ण है। सोनू यशराज के सौजन्य से प्रस्तुत है बातचीत अंश.. - ['खरे हैं तालाब' बस किताब नहीं, जीने का मंत्र-साझा परंपरा](https://aabohawa.org/aaj-bhi-khare-hain-talab-not-only-a-book-its-life-secret-common-tradition-study-by-sonu-yashraj/) - ये किताब 19 भाषाओं में अनूदित है। किताब का नाम है "आज भी खरे हैं तालाब", लेखक हैं भवानी प्रसाद मिश्र के सुपुत्र, सामाजिक कार्यकर्ता, पर्यावरणविद् अनुपम मिश्र... - [शिक्षक दिवस तुम फिर आना](https://aabohawa.org/teachers-day-you-come-again/) - 5 सितंबर यानी कि टीचर्स डे, मतलब शिक्षक दिवस बिना किसी बड़ी आपदा के बीत गया। रस्मी सम्मान के बोझ तले दबे शिक्षक बड़ी कातर नज़रों से आसपास का परिवेश टटोलते रहे। - [सभी सत्ताओं पर भारी डिजिटल सत्ता](https://aabohawa.org/digital-power-is-greater-than-all-other-powers/) - व्यंग्य के बारे में यह धारणा प्रचलित है कि उसका निशाना सदैव सत्ता पर होना चाहिए। इसका मूल कारण यह है कि सत्ता के पास ही वास्तविक शक्ति निहित होती है। सत्ताधारी, - [राजेंद्र कृष्ण का कारनामा—13 मिनिट में गांधी का ज़िन्दगी—नामा](https://aabohawa.org/rajendra-krishnas-feat-gandhis-life-in-13-minutes-nama/) - फ़िल्मी दुनिया में राजेन्द्र कृष्ण वह गीतकार हैं, जिन्होंने हिन्दी फ़िल्मों की कहानी, स्क्रिप्ट और सम्वाद भी लिखे। हर मैदान में वे कामयाब रहे। लेकिन उनकी पहचान गीतकार की ही है। - [नीता पहाड़िया... निरंतर कुछ अलग खोजती कलाकार](https://aabohawa.org/neeta-pahadiya-an-artist-in-search-of-something-different-always-blog-by-preeti-nigoskar/) - नीता पहाड़िया के चित्रों की ख़ासियत है विषयानुकूल रंगों का चयन और सही रंगों को सही जगह लगाकर चित्र बनाना। कोई रंग अछूता नहीं है, जो इनके कैनवास में न हो... - [ग़ज़ल का वज़्न निकालिए: सिर्फ़ एक मिनिट में](https://aabohawa.org/how-to-count-meter-of-ghazal-in-just-one-minute-blog-by-vijay-kumar-swarnakar/) - ग़ज़ल का वज़्न में होना अनिवार्य है। किसी ग़ज़ल का वज़्न पता करना अलग काम है। मात्रा गणना से तात्पर्य है शेर में लघु दीर्घ की शृंखला या संयोजन को ज्ञात करना... - [बड़ी अनोखी थी प्लेबैक गायकी की पहली-पहली आवाज़](https://aabohawa.org/how-awsome-was-pioneer-voice-of-playback-singing-blog-by-mithlesh-roy/) - ब्लैक एंड व्हाइट सिनेमा की चर्चा करते हुए नाना जी.एम. दुर्रानी की चर्चा ज़रूर करते। दुर्रानी वह महान गायक था जिससे मुहम्मद रफ़ी, तलत महमूद आदि ने सीखा... - [हिन्दोस्तानी भाषा और डॉ. अख़्तर नज़्मी](https://aabohawa.org/hindustani-language-and-dr-akhtar-nazmi/) - महात्मा गांधी ने भाषा के मध्यम मार्ग को खोज लिया था, वो उसको हिंदी नहीं... हिन्दोस्तानी कहते थे। भाषाई सियासत ने हमारी बोलियों का बहुत नुक़सान किया है और एक ख़ूबसूरत लिपि (उर्दू) को भी अछूत बना दिया। - [कविता अपने समय को व्यक्त कर पा रही है?](https://aabohawa.org/is-the-poem-able-to-express-its-time/) - मनुष्य सभ्यता के इतिहास में या कहें कि मनुष्य सभ्यता के विकास को प्रामाणिक रूप से सहेजने का काम कला ने किया है। कला के सभी रूपों ने यह किया है। वास्तुशिल्प से लेकर चित्रकला और गायन - - [पीटर वॉटकिन्स बने पतरस बुखारी और उर्दू हुई मालामाल](https://aabohawa.org/how-peter-watkins-became-patras-bokhari-and-enriched-urdu-blog-by-dr-azam/) - प्रथम प्रकाशन 1930 में "मज़ामीन-ए-पतरस"। अहमद शाह बुख़ारी (क़लमी नाम पतरस बुख़ारी) के हास्य-व्यंग्य का संकलन है। "मज़ामीन-ए-पतरस" में 11 लेख हैं... - [कक्षा के आयाम - स्मृतियों से सीख](https://aabohawa.org/classroom-activities-and-lessons-from-memories-by-alok-mishra/) - पूर्वांचल में बीते बचपन के दिनों में सर्दियों का मुकाबला हम सामूहिक रूप से अलाव तापते हुए करते थे। वहाँ इसे कउड़ा कहा जाता है... - [वर्तमान की विडंबना का आईना है उपन्यास 'दहन'](https://aabohawa.org/hindi-novel-dahan-depicts-present-times-challenges-blog-by-namita-singh/) - हरियश राय का उपन्यास 'दहन' पढ़ा, वर्तमान के राजनीतिक माहौल में जो अंध-धार्मिकता और कर्मकांडों का ज़ोर है, उसे कथावस्तु बनाकर सचमुच लेखक ने साहस का काम किया है.. - [छाया गांगुली की आवाज़ के साथ थोड़ा-सा रूमानी हो जाएं](https://aabohawa.org/thodasa-roomani-ho-jayen-with-chhaya-ganguly-voice-blog-by-vivek-savrikar-mridul/) - अमोल पालेकर निर्मित-निर्देशित फिल्म "थोड़ा सा रूमानी हो जाएं" तो आप सुधि रसिकों को याद होगी ही। शीर्षक गीत में गायिका छाया गांगुली ने आवाज़ का जादू बिखेरा है... - [शहर के जिस्म में गांव की मिट्टी की महक](https://aabohawa.org/shahar-ke-jism-me-gaaon-ki-mitti-ki-mahak-blog-by-ashish-dashottar/) - शाइरी अब रवायती मौज़ूआत से अलहदा राहों पर भी चहलक़दमी कर रही है। जदीद शाइरी ने उन इंसानी मसअलों पर अपनी बात कही है, जो कभी इस तरफ़ आने से महरूम थे... - [हिंदी, भाषा, आवाज़ और अपने सवाल](https://aabohawa.org/hindi-language-voice-and-questions-to-self-blog-by-bhavesh-dilshad/) - अरुंधति रॉय ने अपनी ​नयी किताब 'मदर मैरी कम्स टू मी' में भाषा के बारे में चिंतन करते हुए एक मार्के की बात कही है कि भाषा अपनी होना चाहिए... - [अथर्ववेद और औषधीय विज्ञान](https://aabohawa.org/atharvaveda-and-medicinal-science/) - शामनिज्म में उपचार में संगीत और लयात्मक का आधार प्रकृति से घनिष्ठता है। प्रकृति में एक लय है, बिल्कुल संगीत की तरह। मनुष्य प्रकृति का एक अंग है, उसका संबन्ध पशु पक्षी पढ़ड़ पौधे आदि चेतन ही नहीं - [अंक - 35](https://aabohawa.org/edition-35/) - आब-ओ-हवा – अंक - 35 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में हिंदी दिवस पर कुछ विशेष चिंतन। इधर प्रख्यात लेखक अरुंधति रॉय की तस्वीर को लेकर जो विवाद है, उसके बहाने एक विशेष पड़ताल। साहित्य, कला, शिक्षा आदि से संबद्ध नियमित ब्लॉग्स अपने रंग, तेवर - [ग़ज़ल तब : महेश अनघ](https://aabohawa.org/ghazal-tab-mahesh-anagh-poetry/) - संदर्भ : 14 सितंबर 1947, महेश अनघ की जयंती - [लफ़्ज़, सियासत और अली सरदार जाफ़री](https://aabohawa.org/lafz-siyasat-aur-ali-sardar-jafri-by-saleem-sarmad/) - भोपाल की सेंट्रल लाइब्रेरी में अली सरदार जाफ़री की किताब 'मेरा सफ़र', एक दिन मुझे आवाज़ सुनायी दी- कौन आज़ाद हुआ, किसके माथे से ग़ुलामी की सियाही छूटी... - [वैश्विक भाषाई परिदृश्य: हिंदी तथा विविध विदेशी भाषाएं](https://aabohawa.org/global-language-scenario-hindi-and-other-foriegn-languages-analysis-by-vivek-ranjan-shrivastava/) - जापानी, जर्मन, रूसी और चीनी, कोरियाई भाषाएं अपने-अपने औद्योगिक गलियारों की चाबी की तरह हैं, इन्हें समझे बिना हम वैश्विक बाज़ार, तकनीक, टैलेंट निर्यात में... - [सिगरेट... बदनाम औरतें और बाज़ार मालामाल](https://aabohawa.org/cigarette-makes-women-bad-and-market-rich-history-of-smoking-propaganda-by-bhavesh-dilshad/) - सोशल मीडिया पर ​अरुंधति रॉय की उस तस्वीर पर हंगामा है, जिसमें वह सिगरेट पीती दिख रही हैं। यह फ़ोटो 'मदर मैरी कम्स टू मी' के कवर पर चढ़ायी गयी है... - [मौत](https://aabohawa.org/maut-indonesian-story-translation-by-shrivilas-singh/) - मोहम्मद जोकोर लिखित इंडोनेशियाई कहानी का अंग्रेज़ी से अनुवाद: श्रीविलास सिंह की कलम से - [सितारे ज़मीं पर... सबके अलग नॉर्मल से तालमेल का पैग़ाम](https://aabohawa.org/sitaare-zameen-par-message-to-build-bridge-between-different-normals/) - डाउन सिंड्रोम, ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम, जैसे डिसएबल बच्चों को लेकर बनाया गया "सोशल स्पोर्ट्स ड्रामा" 'सितारे ज़मीं पर' यदि दर्शकों में संवेदना जगाता है... - [हमें ईश्वर की ज़रूरत क्यों है?](https://aabohawa.org/why-do-we-need-the-god-or-eeshwar-thoughts-by-om-prabhakar/) - हमें जिन चीज़ों की ज़रूरत है, वे सब हम अपने शरीर से प्राप्त कर ही लेते हैं और वे चीज़ें भी, जो अंत:पुर को तृप्त करती है, तब फिर ये ईश्वर हमारे लिए क्यों है? - [आह डॉक्टर अली अब्बास उम्मीद!](https://aabohawa.org/doctor-ali-abbas-ummid-dies-in-bhopal-dr-azam-remembering-him/) - सहृदय, शिष्ट और दर्दमंद इन्सान, उच्चकोटि के साहित्यकार, उर्दू-हिंदी के विद्वान का इंतिक़ाल बेहद मलाल का कारण है। विशेष तौर से उर्दू अदब की बड़ी क्षति है... - [हिन्दी-उर्दू शायरी में 'आबो-हवा'](https://aabohawa.org/aabohawa-ke-vishay-par-hindi-urdu-shayri-collection-of-poetry/) - 'आबो-हवा' लफ़्ज़ सदियों से शायरी में है और अब भी बासी नहीं हुआ है। समकालीन शायरों ने इसे अपने अंदाज़ से बरता है। ऐसे ही कुछ अशआर आब-ओ-हवा के पाठकों के लिए... - [पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी : भाग-22](https://aabohawa.org/poorvpath-diary-of-a-poet-jaiprakash-maanas-part-twenty-two/) - आज घर में चुरचुटिया की महक है। वही ग्वारफली जिसके बिना छत्तीसगढ़ी रसोई अधूरी लगती है। माँ कहती थीं- "इसके बिना तो खाना खाने का मन ही नहीं करता।" - [गुनाहों का देवता.. मुझे लेखक बनाने वाली किताब](https://aabohawa.org/gunahon-ka-devta-book-which-makes-me-writer-note-by-anita-rashmi/) - प्रसिद्ध लेखक-लेखिकाओं के उपन्यास, कहानी, काव्य आदि कैशार्य में ही पढ़ ली थीं यथा-आचार्य चतुरसेन, अमृता प्रीतम, शिवानी, मन्नू भंडारी, कमलेश्वर, राजेन्द्र यादव... - [गालियों की पॉलिटिक्स और सोशियोलॉजी](https://aabohawa.org/sociology-and-politics-of-abuse-sense-of-humour-by-aditya/) - मीडिया में वबाल है कि प्रधानमंत्री को विपक्षी पार्टी के मंच से गाली दी गयी। बड़ा तआज्जुब हुआ! ये कैसी बेवक़ूफ़ी है! कोई अपने पाँव पर कुल्हाड़ी क्यूँ मारेगा भला... - [साहित्य में अपने नाख़ून ख़ूबसूरती से तराशें विमर्श](https://aabohawa.org/hindi-sahitya-me-apne-naakhoon-khoobsoorti-se-tarashein-vimarsh-by-ajit-kumar-rai/) - साहित्य का जातिवादी पाठ चौंकाने वाला है। अभी 'समयान्तर' में रंजीत वर्मा का लेख छपा है, जो प्रेमचंद की साबुत खोपड़ी और फटे जूते को केन्द्र में रख लिखा गया है... - ['ब्राह्मण' से ट्रंप प्रशासन का मतलब? मीडियाई मूर्खता को समझें](https://aabohawa.org/what-does-trump-administration-mean-by-brahmans-see-media-nonsense/) - वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मत शनिवार को मीडिया में हैं, जिसमें वह नवारो की इस टिप्पणी को ब्रिटिश राज की तरह 'डिवाइड एंड रूल' का नैरैटिव बता रही हैं... - [पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी : भाग-21](https://aabohawa.org/poorvpath-diary-of-a-poet-jaiprakash-maanas-part-twenty-one/) - कवियों की भाव-संपदा,​ विचार-वीथिका और संवेदन-विश्व को खंगालती इस डायरी का मक़सद प्रकाशन पूर्व पाठक-लेखक संवाद बनाना है... - [साहब की डिग्री और नैतिकता की दुहाई](https://aabohawa.org/sahab-ki-degree-aur-naitikta-ki-duhaai/) - साहब ने विरोधियों की क़ानूनी चालों सूचना का अधिकार, अदालती जांच जैसी हर दलील को एक ही वार में काट दिया। उन्होंने “निजता का हनन” वाला ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया... - [तस्वीरों में कला के 'आनंद' की कहानी](https://aabohawa.org/story-of-anand-tahanguriya-artistic-journey-through-his-paintings/) - कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ से फ़ाइन आर्ट्स में डिग्री लेने वाले प्रथम विद्यार्थी रहे आनंद टहनगुरिया (19-08-1960) ने 23 दिसंबर 2017 को अंतिम सांस ली थी... - [गवाही देती ब्रज श्रीवास्तव की कविताएं](https://aabohawa.org/gavaahi-deti-braj-shrivastav-ki-kavita-by-madhu-saxena-and-vanita-bajpai/) - ब्रज श्रीवास्तव की दो किताबों 'हम गवाह हैं' और 'समय ही ऐसा है' को केंद्र में रखती हुई पाठकीय टिप्पणियां दो महिला कवियों की नज़र से... - [ज्ञान की भूमिका और विशेषता](https://aabohawa.org/gyan-ki-bhoomika-aur-visheshta-by-rohit-dhankar-and-braj-shrivastav/) - ज्ञान और कल्पना दोनों के दायरे में विचार करते हुए मैं प्रमाणित सत्य विश्वास (justified true belief) को ज्ञान का केन्द्र मानता हूँ... - [शिक्षक दिवस पर विचारें विद्यार्थी दिवस की अवधारणा](https://aabohawa.org/shikshak-diwas-par-vidyarthi-diwas-ki-avdharna-by-raja-awasthi/) - अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक दिवस 5 अक्टूबर को मनाया जाता है। डॉ राधाकृष्णन के जन्मदिवस को भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं... - [डिग्री–डिग्री.. देश की परंपरा का तो लिहाज़ करो निकम्मो!](https://aabohawa.org/pm-modi-degree-desh-ki-parampara-ka-lihaaz-humour-by-aditya/) - मेरा बेटा विपक्षी पार्टी के नेताओं की तरह "डिग्री दिखाओ" पर अड़ा हुआ है। कभी-कभी तो अपनी मार्कशीट दिखाकर चिढ़ाते हुए कहता है, "डिग्री दिखाओ"... - [जावेद अख्तर विरोध... उर्दू के माथे पर 'टोपियां' कलंक](https://aabohawa.org/javed-akhtar-program-cancal-issue-urdu-faces-radical-islamic-views-in-west-bengal/) - सबसे बड़ा सवाल है कि भाषा पर जाहिलाना सियासत से दुर्गति क्या होती है? और यह भी कि साहित्य और कला की 'स्वायत्त' संस्थाओं पर सरकारों का नियंत्रण क्यों? - [पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी : भाग-20](https://aabohawa.org/poorvpath-diary-of-a-poet-jaiprakash-maanas-part-twenty/) - कवियों की भाव-संपदा,​ विचार-वीथिका और संवेदन-विश्व को खंगालती इस डायरी का मक़सद प्रकाशन पूर्व पाठक-लेखक संवाद बनाना है... - [राग विहाग में सुलक्षणा-भूपी की सुरीली बोलियां](https://aabohawa.org/raag-vihag-me-sulakshana-pundit-bhupinder-ki-surili-boliyan-song-analysis-by-vivek-mridul/) - महान गायिका गीता दत्त के भाई और अभिनेता-संगीतकार कनू रॉय ने हिंदी की चुनिंदा फ़िल्मों में ही संगीत दिया है। वह भी ज़्यादातर बासु भट्टाचार्य की फ़िल्मों में... - [दीप्ति नवल: ख़ुद की तलाश का सफ़र](https://aabohawa.org/shukriya-kitab-deepti-naval-a-voyage-of-searching-self-by-khudeja-khan/) - 1983 में प्रकाशित दीप्ति नवल का कविता संग्रह "लम्हा-लम्हा", 1984 में पढ़ने का मौक़ा मिला। यही वह किताब थी, जिसने मेरे अंदर भावनाओं को समझने की ललक पैदा कर दी... - [जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो कहां हैं?](https://aabohawa.org/jinhen-naaz-hai-hind-par-wo-kahan-hain-an-article-on-freedom-of-hindi-cinema/) - यह दौर आज़ादी के अमृतकाल का है। यह मुड़कर देखना बनता है कि हम कहां-कहां से गुज़रते हुए आये हैं। बात साहिर से शुरू हुई है, हिंदी सिनेमा में आये बदलाव तक जाएगी... - [कमलकांत जी, अनघ जी.. प्यास और अंधेरे से भिड़ंत](https://aabohawa.org/kamalkant-ji-anagh-ji-pyas-aur-andhere-se-bhidant-blog-by-bhavesh-dilshad/) - 1975 में 'साये में धूप' आ चुका था। हिंदी गीतकार गज़ल पा रहे थे। लेकिन दुष्यंत कुमार की तरह सबके नसीब में उर्दू के उस्ताद शायरों की दिलदाराना संगत नहीं थी... - [21वीं सदी में व्यंग्य: अभिव्यक्ति के नये उपकरण तलाशना ज़रूरी](https://aabohawa.org/ikeesvi-sadi-mein-vyangya-abhivyakti-ke-naye-upkaran-talshna-zaroori-by-arun-arnaw-khare/) - मानना है कि हरिशंकर परसाई, श्रीलाल शुक्ल, शरद जोशी, ज्ञान चतुर्वेदी और प्रेम जनमेजय जैसी परंपराओं को आगे बढ़ाने वाली कालजयी रचनाओं का प्रवाह मंद पड़ रहा है... - [मम्मी की फिल्मी यादें और कल्पना की दास्तान](https://aabohawa.org/story-of-kalpana-kartik-in-memories-of-my-mother-by-mithlesh-roy/) - नानी के साथ बाज़ार जातीं तो फ़िल्मी गानों की किताब खरीद लातीं, उनमें छपी पिक्चर में उन्होंने पुराने हीरो दिलीप कुमार, अशोक कुमार, देव आनंद को देखा था... - [राजिंदर सिंह बेदी का पहला और आख़िरी नॉविल](https://aabohawa.org/first-and-last-novel-of-rajinder-singh-bedi-blog-by-dr-azam/) - 'एक चादर मैली-सी' राजिंदर सिंह बेदी का पहला और आख़िरी नॉविल। इस नॉविल के लिए 1965 में साहित्य अकैडमी अवार्ड से सम्मानित किया गया था... - [न वो दिल है न वो शबाब... आबरू-ए-ग़ज़ल ख़ुमार बाराबंकवी](https://aabohawa.org/na-wo-dil-hai-na-wo-shabab-story-of-khumar-barabankvi-by-zahid-khan/) - आज़ादी के ठीक पहले और उसके बाद जिन शायरों ने मुशायरे को आलमी तौर पर मक़बूल किया, उनमें भी ख़ुमार बाराबंकवी का नाम अव्वल नंबर पर लिया जाता है... - [पोइट्री थेरेपी - संगीत थेरेपी और कविता थेरेपी](https://aabohawa.org/poetry-therapy-and-music-therapy-blog-by-rati-saxena/) - संगीत में ध्वनियों की प्रधानता होती है, लेकिन कविता में भावों की होती है। कविता भी गायी जा सकती है, प्रार्थना के रूप में... - [नयी शायरी : तकनीक के ज़ाविये में ढलने का हुनर](https://aabohawa.org/nayi-shayri-takneek-ke-zaviye-me-dhalne-ka-hunar-by-ashish-dashottar/) - वक़्त से पहले आने वाले वक़्त की बात कहता उनका यह शेर मौज़ूं है- कम्प्यूटरों से ग़ज़लें लिखेंगे 'बशीर-बद्र'/'ग़ालिब' को भूल जाएगी इक्कीसवीं सदी... - ['हंगल साहब...' अपने ही अंदाज़ की कहानियां](https://aabohawa.org/hangal-sahab-zara-hans-deejiye-stories-by-hari-mridul-note-by-namita-singh/) - हरि मृदुल अनेक राष्ट्रीय पत्रों में पत्रकारिता के बाद आजकल नवभारत टाइम्स, मुंबई में सहायक संपादक हैं। बाल साहित्य के अलावा वे फ़िल्मों पर भी लिखते रहे हैं... - [हम तुम और वो](https://aabohawa.org/hum-tum-aur-wo-ghazal-learning-class-by-vijay-swarnkar/) - 'ग़ालिब' का यह शे'र एक विशेष ध्येय से उद्धृत किया गया है। संकेत यह कि शे'र जिसके बारे में है वह व्यक्ति सामने ही है, तब भी "वो" कहा है, "तुम" क्यों नहीं... - [सुषमा जैन - परम्परा का नया रूप](https://aabohawa.org/sushma-jain-new-facet-of-traditional-art-critical-appreciation-by-preeti-nigoskar/) - सुषमा जैन, उज्जैन जैसे सांस्कृतिक शहर में जन्मीं, पली-बढ़ीं और प्रशिक्षित हुईं। पद्मश्री वि.श्री. वाकणकर जी की कलाकक्षा ‘भारती कला भवन’ में शिक्षण लेती रहीं... - [साहित्य की सकारात्मक दृष्टि](https://aabohawa.org/sahitya-ki-sakaratmak-drishti-blog-by-raja-awasthi/) - हमें गलवान घाटी के सौंदर्य का वर्णन करते समय सैनिकों की शहादत और चीन के छल को भी लिखना ही होगा। दीपों से जगमगाते बनारस के घाटों पर लिखते हुए ठगों की ठगी... - [अंक - 34](https://aabohawa.org/edition-34/) - आब-ओ-हवा – अंक - 34 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में कमलकांत सक्सेना का स्मरण विशेष। चूंकि इस महीने आज़ादी की सालगिरह मनायी गयी, इसी संदर्भ से आज़ादी के बाद सिनेमा के बदलते स्वरों पर एक विशेष वैचारिकी। साहित्य, कला, शिक्षा आदि से संबद्ध नियमित - [पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी : भाग-19](https://aabohawa.org/poorvpath-diary-of-a-poet-jaiprakash-maanas-part-nineteen/) - हमारे नामों में जाति के फूल खिले हैं। उपनामों की जड़ें इतिहास के कुएं में पसरी हैं। कोई "शर्मा" है तो कोई "खान", कोई "नेगी" तो कोई "राव"... - [गीत तब : कमलकांत सक्सेना](https://aabohawa.org/geet-tab-poetry-by-kamal-kant-saxena/) - 2000 से 'साहित्य सरोवर' का संपादन शुरू किया, जो 2002 से अंतिम सांस तक 'साहित्य सागर' नाम से जारी रहा। 'नटवर गीत सम्मान', 'राष्ट्रीय गीत उत्सव' के प्रवर्तक... - [शायरी में बारिश-बादल-बरसात](https://aabohawa.org/barish-badal-barsat-ke-vishay-par-hindi-urdu-prasiddh-shayri/) - कहीं बादलों से पानी बरस रहा है तो कहीं आंखों से! उर्दू-हिंदी-हिंदोस्तानी शायरी में यह कैफ़ियत दर्ज होती रही है। कुछ बेहतरीन मिसरे आब-ओ-हवा के पाठकों के लिए.. - [तिड़ककर टूटना](https://aabohawa.org/tidak-kar-tootna-hindi-kahani-by-anita-shrivastav/) - अगर मैं एकांत से पीछा न छुड़ाती, तो उसके आवारा साथी अवसाद और निराशा भी मुझसे मिलने आ जाते। लॉकडाउन के कठिन समय में यह एक चुनौती थी... - [पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी : भाग-18](https://aabohawa.org/poorvpath-diary-of-a-poet-jaiprakash-maanas-part-eighteen/) - कवियों की भाव-संपदा,​ विचार-वीथिका और संवेदन-विश्व को खंगालती इस डायरी का मक़सद प्रकाशन पूर्व पाठक-लेखक संवाद बनाना है... - [एक राष्ट्र एक चुनाव - बेरोज़गारी के बढ़ते भाव](https://aabohawa.org/ek-desh-ek-chunav-berozgari-ke-badhte-bhaav-hasya-vyangya-by-mukesh-aseemit/) - देश में 'वन नेशन, वन इलेक्शन' का पुछल्ला बड़े ज़ोर-शोर से उछाला जा रहा है। मुझे तो देश के युवाओं की रोज़ी-रोटी पर लात मारने जैसा लग रहा है यह! - [मख़दूम: सुर्ख़ सवेरे का शायर](https://aabohawa.org/makhdoom-surkh-savere-ka-shayar-a-memoir-by-ali-sardar-jafri/) - प्रगतिशील आंदोलन के प्रसिद्ध शायर मख़दूम मोहिउद्दीन (4 फरवरी 1908–25 अगस्त 1969) की याद के दिन श्रद्धांजलि स्वरूप यह चर्चित लेख... - [लाहुल: दुर्गम घाटी, दूरस्थ लोक से रिश्ता बनवाती किताब](https://aabohawa.org/lahul-a-book-that-establishes-connection-with-contested-valley-and-distant-world/) - मानवता के संसार की अनमोल किताब -धरोहर- को हस्तांतरित करने की पहल। हर सोमवार आब-ओ-हवा पर 'शुक्रिया किताब'.. इस बार तुलसी रमण की बहुचर्चित पुस्तक का विस्तृत पाठ.. - [आसंदी पर विट्टलभाई पटेल ही थे, जब भगत सिंह ने फेंका था बम](https://aabohawa.org/vitthal-bhai-patel-was-there-on-chair-when-bhagat-singh-threw-bomb-in-the-assembly/) - 24 अगस्त 1925 को वल्लभभाई पटेल के अग्रज विट्ठलभाई पटेल सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली (केंद्रीय विधानसभा, अब लोकसभा कहा जाता है) के अध्यक्ष पद पर निर्वाचित हो... - [पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी : भाग-17](https://aabohawa.org/poorvpath-diary-of-a-poet-jaiprakash-maanas-part-seventeen/) - कवियों की भाव-संपदा,​ विचार-वीथिका और संवेदन-विश्व को खंगालती इस डायरी का मक़सद प्रकाशन पूर्व पाठक-लेखक संवाद बनाना है... - [हरिशंकर परसाई – राजनैतिक व्यंग्य के पुरोधा](https://aabohawa.org/harishankar-parsai-pioneer-of-political-satire/) - मुक्तिबोध कहते थे— “तुम्हारी पॉलिटिक्स क्या है, पार्टनर?” हम सभी कलमकारों, अदीबों, रंगकर्मियों और कलाकारों को भी यह तय करना होगा कि हम किस तरफ़ हैं... - [हिम्मत-हौसले के धागों से बुनी स्त्रियों की कहानियां](https://aabohawa.org/intoducing-the-book-khudi-ko-kar-buland-compiled-by-divya-jain/) - ‘ज़िंदगीनामा’ शब्द इतना अच्छा लगा कि मैंने तुरंत पढ़ना शुरू कर दिया। पढ़ते-पढ़ते मुझे प्रेमचंद जी की ‘निर्मला’ और ‘मुनाजाते बेवा’ की याद आती रही... - [Kitab](https://aabohawa.org/kitab/) - Share this:Share Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Reddit (Opens in new window) Reddit Share on Pinterest (Opens in new window) Pinterest Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Share on Bluesky (Opens in - [कश्मीर: प्रतिबंधित किताबों के बोलते चेहरे](https://aabohawa.org/25-books-ban-in-kashmir-pratibandhit-kitabon-ke-bolte-chehre/) - कश्मीर में LG प्रशासन ने हाल ही 25 किताबों को ज़ब्त व प्रतिबंधित किया, नैशनल कॉन्फ्रेंस ने कहा बैन के पीछे अब्दुल्ला सरकार नहीं है। लेखकों ने इसे दमन बताया... - [आपदा एवं संकटकाल के नायकों को सलाम](https://aabohawa.org/salute-to-unsung-heroes-of-calamities-and-disasters-in-view-of-world-humanitarian-day/) - मानव की लोभी दृष्टि का परिणाम सृष्टि में विपर्यय पैदा कर अतिवृष्टि, अनावृष्टि, सुनामी, बादल फटने, भूकम्प जैसी प्राकृतिक आपदाओं के रूप में प्रकट होता है... - ['अरे! आप तो रेंगने लगे..' 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[आइए, खोजें कोई 'हलगाम'](https://aabohawa.org/come-lets-find-some-halgam/) - आइए, खोजें कोई 'हलगाम' हमको मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिनदिल के ख़ुश रखने को ग़ालिब ये ख़याल अच्छा हैजन्नत कहा जाता है कश्मीर को। बनाया जाता है जहन्नुम। दूर की बांसुरी सुनायी ही नहीं देती। शेष भारत कितना जानता है कश्मीर, कश्मीरियत! कुछ काले अक्षर, कुछ रंगीन तस्वीरें देखकर क्या सब समझ सकते हैं? - [सूचना-मुक्त होते हुए हम](https://aabohawa.org/by-becoming-information-free-we/) - सूचना-मुक्त होते हुए हम भारत-पाकिस्तान की सरहदों पर संघर्ष हुआ, फिर जंगबंदी हो गयी। जंग के हिमायती एक बहुत बड़े जनसमूह ने मर्यादा की लक्ष्मण रेखाएं भी पार कर दीं। संघर्ष-विराम का श्रेय लूटने में अमरीका ने ज़बानदराज़ी की। इधर, जंग से ऐन पहले, दौरान और जंग के बाद भी मीडिया (मुख्यत: टीवी/इंटरनेट) की लफ़्फ़ाजियों - [और ज़ुबान जीत जाती है](https://aabohawa.org/aur-zubaan-jeet-jaati-hai/) - और ज़ुबान जीत जाती है, हम बोलेंगे, भवेश दिलशाद, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति का अधिकार, freedom of speech, bhavesh dilshad, right to speech - [मुक्त सिनेमा बनाम ग़ुलाम सेंसर बोर्ड](https://aabohawa.org/free-cinema-and-slave-censor-board/) - 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15 अगस्त आता है तो बंटवारे की यादें ताज़ा हो जाती हैं। सिर्फ़ धर्म/संप्रदाय/मज़हब ही नहीं बहुत छोटे-छोटे ख़ेमों में पूरा परिवेश बंटता हुआ दिखता है... - [हिंदी में पढ़िए डब्ल्यू.एच. ऑडेन रचित कविता 'बंटवारा'](https://aabohawa.org/read-wystan-hugh-auden-famous-poen-partition-in-hindi-translation/) - भारत-विभाजन विषय पर सरहद के दोनों तरफ़ प्रचुर मात्रा में लिखा गया। कथा साहित्य तो बेहद प्रसिद्ध है। कम ही जानते हैं अंग्रेज़ी में भी इस विषय पर सृजन होता रहा... - [याद आते रहेंगे कलाविद् वास्तुकार आदित्य प्रकाश..](https://aabohawa.org/exhibition-and-discussion-in-remembering-artist-architect-aditya-prakash/) - पंजाब कला भवन की सोभा सिंह कला दीर्घा में बुद्धिजीवियों ने 'आदित्य प्रकाश: ए प्रेज़ेंटेशन इन फ्री वर्स' में उनके योगदान की मुक्तकण्ठ से प्रशंसा की... - [हिंदोस्तानी तहज़ीब का दस्तावेज़ है 'सरयू से गंगा'](https://aabohawa.org/shukriya-kitab-hindostani-tahzeeb-ka-dastavez-hai-amar-kitab-sarayu-se-ganga/) - साप्ताहिक पेशकश के रूप में हर सोमवार आब-ओ-हवा पर अमूल्य पुस्तक का साथ यानी 'शुक्रिया किताब'.. इस बार कमलाकान्त त्रिपाठी की बहुचर्चित पुस्तक का विस्तृत पाठ... - [कितनी त्रासद होती है आग?](https://aabohawa.org/kitni-traasad-hoti-hai-aag-book-review-by-leeladhar-mandloi/) - वीणा सिन्हा के इस उपन्यास की तुलना समकालीन परिदृश्य में वृंदावनलाल वर्मा, भगवानदास मोरवाल, महेश कटारे के उपन्यासों से की जा सकती है... - [पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी : भाग-15](https://aabohawa.org/poorvpath-diary-of-a-poet-jaiprakash-maanas-part-fifteen/) - कवियों की भाव-संपदा,​ विचार-वीथिका और संवेदन-विश्व को खंगालती इस डायरी का मक़सद प्रकाशन पूर्व पाठक-लेखक संवाद बनाना है... - [यौम-ए-आज़ादी (स्वतंत्रता दिवस) और उर्दू किताबें](https://aabohawa.org/urdu-novels-and-urdu-poetry-related-to-independence-of-india/) - स्वतंत्रता दिवस, देश विभाजन, आज़ादी के बाद के भारत और पाकिस्तान को केंद्र में रखकर कई उर्दू नॉवेल और किताबें लिखी गयी हैं। ऐसे नोवेलों और किताबों की सूची... - [अंक - 33](https://aabohawa.org/edition-33/) - आब-ओ-हवा – अंक - 33 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में आज़ादी के दिन के मौक़े पर प्रचुर सामग्री। साहित्य, कला, शिक्षा आदि से संबद्ध अधिकतर नियमित ब्लॉग्स में इस बार 15 अगस्त के संदर्भ का समावेश है। हां, रंग और तेवर सबका अपना-अपना ही - [शोले के 50 साल के बरअक्स 1975 का सिनेमाई जादू](https://aabohawa.org/fifty-years-of-sholay-in-the-light-of-magic-of-1975-bollywood-cinema/) - भवेश दिलशाद की कलम से.... शोले के 50 साल के बरअक्स 1975 का सिनेमाई जादू भारत की आज़ादी को चौथाई सदी पूरी हो चुकी थी। आज़ाद भारत के ख़्वाबों को जिस दौर में चांद-सितारे छूने थे, एक बेचैनी, नाराज़गी और असंतोष का दलदल फैल रहा था। बहुत बड़ी - [पोइट्री थेरेपी - शास्त्र, साहित्य और लोक](https://aabohawa.org/poetry-therapy-shastra-sahitya-aur-lok/) - भारतीय गणितज्ञ भास्कर द्वितीय ने गणित पर पुस्तक लिखी, जिसका नाम अपनी बेटी पर रखा "लीलावतीयम"। यह पुस्तक अपनी काव्यात्मक भाषा के लिए अधिक लोकप्रिय है... - [कविता की आज़ादी का पर्व?](https://aabohawa.org/is-this-freedom-festival-of-poetry-too/) - कोई बिस्मिल 'सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है' गा रहा था, तो कहीं कोई माखनलाल चतुर्वेदी जैसा कवि जेल में रहते 'क़ैदी और कोकिला' और 'पुष्प की अभिलाषा'... - [वतन की सांसों से वाबस्ता तहरीरों की शायरी](https://aabohawa.org/watan-ki-sanso-se-vabasta-tahriron-ki-shayri/) - शाइरी ने आज़ाद हिन्दोस्तान को तक़दीर के भरोसे छोड़ने के बजाय तदबीर से वाबस्ता करने का काम किया। तरक़्क़ी पसंद शाइरों ने मुल्क की बेहतरी के रास्ते बताये... - [हमज़मीन: व्यवस्था के अंतर्विरोध और प्रतिरोध की कहानियां](https://aabohawa.org/hamzameen-by-avdhesh-preet-stories-of-resistence-and-system-irony/) - अवधेश प्रीत एक वरिष्ठ और प्रतिष्ठित कथाकार हैं। लेखन में सक्रिय हैं, रंगकर्म से भी जुड़े रहे हैं। उनके कहानी संग्रह 'हमज़मीन' का पेपरबैक संस्करण मेरे सामने है.. - [भारतीय व्यंग्य इतिहास का प्रस्थान बिंदु "शिवशंभू के चिट्ठे"](https://aabohawa.org/bharteey-vyangya-itihas-ka-prasthan-bindu-shiv-shambhu-ke-chitthe/) - व्यंग्य का मूल स्वभाव विरोध है, यह सत्ता के विरुद्ध बौद्धिक प्रतिरोध के रूप में है। परसाई की वाणी है- शासन सोता है, तब व्यंग्य उसकी नींद में काँटे बिछाता है... - [आज़ादी का संदेश](https://aabohawa.org/azadi-ka-sandesh-aka-message-of-independence/) - इस वर्ष हम आज़ादी की 79वीं सालगिरह मना रहे हैं। त्याग, बलिदान, संघर्ष और सहकार की असंख्य कहानियों से भरी आज़ादी की लड़ाई और उसकी विरासत पथ प्रदर्शक बनी हुई है.. - [मात्रा पतन: शहरों के नाम](https://aabohawa.org/matra-patan-shahron-ke-naam-ghazal-learning-class-by-arooz-ustad/) - विजय कुमार स्वर्णकार की कलम से.... मात्रा पतन: शहरों के नाम शे’र में शहरों के नाम आते रहे हैं। जैसे सबको अपना नाम बहुत प्रिय होता है, उसी तरह शहर का नाम उसके निवासियों के लिए असाधारण होता है। यह सहज आचरण है कि किसी के नाम को ग़लत - [शहीद सफ़दर हाशमी के नाम...](https://aabohawa.org/shaheed-safdar-hashmi-who-was-killed-during-a-nukkad-natak/) - क ख ग घ को पहचानो... अपील करने की सज़ा सफ़दर को मिली गाज़ियाबाद में 1 जनवरी 1989 की सुबह सड़क पर 'हल्ला बोल' नाटक करते हुए उन्हें चींटी की तरह मसल दिया गया... - [आवाज़ दो हम एक हैं](https://aabohawa.org/awaaz-do-hum-ek-hain-urdu-poets-writings-during-freedom-fight/) - तरक़्क़ी-पसंद शायरों का ख़्वाब हिंदुस्तान की आज़ादी था। 1942 से 1947 तक तरक़्क़ी-पसंद तहरीक का सुनहरा दौर था। हर भाषा में सांस्कृतिक आंदोलन ने जन्म लिया.. - ["जय-जय जननी जन्मभूमि, हम बालक हैं तेरे"](https://aabohawa.org/jai-jai-janani-janmabhoomi-hum-balak-hain-tere-story-of-first-hindi-patriotic-film/) - अशोक कुमार की जन्मभूमि ही वह फ़िल्म है, जो देशसेवा भाव से प्रेरित थी। संभवतः पहली व अंतिम फ़िल्म भी थी जिसमें देशप्रेम से ज़्यादा देशसेवा को महत्व दिया गया... - [ध्यान ही कला : रीना तोमर](https://aabohawa.org/art-is-meditation-says-painter-artist-reena-tomar/) - रीना तोमर अपनी चित्रकला को रियलिस्टिक विधा में स्वीकारा जाना पसंद करती हैं। पद्मश्री वाकणकर से शिक्षा प्राप्त चित्रकार में मुझे सामाजिक बोध की झलक दिखती है.. - [आत्मा को झकझोरता 'नवरंग' का वो प्रेरक गीत](https://aabohawa.org/aatma-ko-jhakjhorta-navrang-film-ka-prerak-geet-in-mahendra-kapoor-voice/) - 1959 में प्रदर्शित शांताराम बापू की सदाबहार फिल्म 'नवरंग' के पहले दृश्य में आम जनता पर अंग्रेज़ी हुकूमत के आतंक को बेहद प्रभावी ढंग से चित्रित किया गया है... - [सैर कर ग़ाफ़िल...: एक कलाकार की यूरोप डायरी-11](https://aabohawa.org/travelogue-europe-diary-of-an-artist-part-eleven/) - शब्दों में ऐसी रवानी है कि शब्दों से ही चित्र दिखने लगते हैं। साप्ताहिक पेशकश के तौर पर हर बुधवार यहां पढ़िए प्रवेश सोनी की यूरोप डायरी... - [पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी : भाग-14](https://aabohawa.org/poorvpath-diary-of-a-poet-jaiprakash-maanas-part-fourteen/) - 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[19वां अयोध्या फिल्म फेस्टिवल लखनऊ में](https://aabohawa.org/19th-ayodhya-film-festival-in-lucknow-due-to-importance-of-kakori-action-centenary-year/) - आज़ादी की लड़ाई के ऐतिहासिक पड़ाव काकोरी ट्रेन एक्शन की शताब्दी के मौक़े पर इस बार 19वां अयोध्या फ़िल्म फ़ेस्टिवल राजधानी लखनऊ में आयोजित किया जा रहा है... - [ज़िंदगी, जिसे तेज़ाब (एसिड अटैक) भी गला नहीं सका](https://aabohawa.org/shukriya-kitab-life-which-even-acid-attack-could-not-destroy-autobiography-by-mangla-kapoor/) - 12 साल की उम्र में एसिड अटैक की शिकार मंगला कपूर ने 18 साल की उम्र तक असहनीय दर्द, जलन और पीड़ा को पाया... उन्होंने अपनी ​कहानी लिखी जिसे पढ़ना अविस्मरणीय है... - [शायरी में यार-दोस्त-अहबाब](https://aabohawa.org/dost-aur-dosti-ke-vishay-par-prasiddh-sher-shayri/) - मौक़ा है मित्रता दिवस (Friendship Day)... यूं भी दोस्ती सेलिब्रेट करने के लिए किसी दिन की क्या ज़रूरत। प्रसिद्ध शेरों में से दोस्त के लिए आपका पसंदीदा कौन-सा है - [सृजन का सांगीतिक सौंदर्य](https://aabohawa.org/srijan-ka-sangitik-saundarya-a-literary-criticism-by-dr-bharat-prasad/) - मुक्तिबोध स्वयं सारी वैचारिकी, संवेदना, प्रतीक और अभिनव कल्पनाशीलता भर देने के बावजूद लयात्मक आवेग का दामन नहीं छोड़ते... - [पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी : भाग-11](https://aabohawa.org/poorvpath-diary-of-a-poet-jaiprakash-maanas-part-eleven/) - कवियों की भाव-संपदा,​ विचार-वीथिका और संवेदन-विश्व को खंगालती इस डायरी का मक़सद प्रकाशन पूर्व पाठक-लेखक संवाद बनाना है... जयप्रकाश मानस की कलम से.... पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी : भाग-11 समुद्र का भी कोई न कोई प्रवेश-द्वार 29 मार्च, 2014मैं नहीं, मेरा मन समुद्र - [रफ़ी को नहीं सुना तो तुमने क्या किया...](https://aabohawa.org/if-you-did-not-listen-mohd-rafi-then-stories-of-legend-singer/) - रफ़ी साहब को "शहंशाह-ए-तरन्नुम" कहा जाता है। सिनेमा जगत के संगीत के जानकारों का एक सुर में कहना रहा कि रफ़ी साहब के लिए किसी भी तरह का गाना क़तई मुश्किल न था... - [दरवाज़ा](https://aabohawa.org/darwaza-an-urdu-story-by-munshi-premchand/) - मुंशी प्रेमचंद ने 'नवाबराय' नाम से उर्दू में विशद लेखन किया। उनकी यह उर्दू कहानी लिप्यंतर एवं हिंदी शब्दार्थों सहित देवनागरी के पाठकों के लिए प्रस्तुत है... - [जब इतिहास ही खो जाये..](https://aabohawa.org/what-if-history-is-lost-reflections-on-munshi-premchand-works/) - यदि आज़ादी के सौ साल पहले का इतिहास मिटा दिया जाये या कहीं खो जाये? तब शायद प्रेमचंद को पढ़ना एकमात्र विकल्प बचेगा। उनके अथाह कथा-सागर में आपको इतिहास मिलेगा... - [विजेता में 'आशा' का आनंद बरसाता अहीर भैरव](https://aabohawa.org/vivek-mridul-blog-vijeta-film-mein-asha-bhosle-ka-anand-barsata-aheer-bhairav/) - जहान कपूर को वेब सीरीज़ 'ब्लैक वारंट' में सहज अभिनय करते देख अचानक दशकों पूर्व उनके दादा शशि कपूर और पिता कुणाल कपूर अभिनीत फ़िल्म विजेता की याद ताज़ा हो आयी... - [प्रगीत से नवगीत](https://aabohawa.org/prageet-se-navgeet-reflections-by-raja-awasthi/) - नामवर सिंह अपने निबंध में अपनी जड़ धारणा से बद्धमूल हो जाते हैं कि "आज भी प्रगीत के रूप में उसी कविता को स्वीकार किया जाता है, जो नितांत वैयक्तिक/आत्मपरक हो... - [यह है उर्दू की ऑलटाइम बेस्टसेलर फंतासी](https://aabohawa.org/this-is-alltime-bestseller-urdu-book-of-fantasy-poetry/) - आलोचक इसे उर्दू की सबसे अच्छी मसनवी मानते हैं। 'जैसा नाम वैसा काम' के अनुरूप है। 'सेह्र-उल-बयान' का अर्थ है जादू से भरा बयान। इसके अनगिनत एडीशन छप चुके हैं। - [ग़ज़ल: ख़ास और आम के बीच की बात](https://aabohawa.org/ghazal-khaas-aur-aam-ke-beech-ki-baat-reflections-by-ashish-dashottar/) - अवाम से गुफ़्तगू हर दौर का ख़्वाब भी रहा है और अरमान भी। मगर क्या कारण है कि जिसके लिए लिखा जा रहा है, उस तक बात नहीं पहुंच पा रही है? - ['वो अक्सर याद आते हैं' यानी एक भूला-बिसरा अभिनेता](https://aabohawa.org/wo-aksar-yaad-aate-hain-a-story-of-forgotten-bollywood-actor/) - "जिन्हें हम भूलना चाहें" मुकेश की आवाज़ में यह गाना 1968 में बनी, फ़िल्म आबरू का है। इस फ़िल्म में मशहूर फ़िल्म डायरेक्टर सीएल रावल का बेटा दीपक कुमार हीरो था.. - ['युद्ध और शान्ति' की नियति](https://aabohawa.org/commentary-on-destiny-of-war-and-peace-of-leo-tolstoy/) - विश्व साहित्य की उत्कृष्ट दस कृतियों की सूची में टॉलस्टॉय के तीन उपन्यास शामिल यदि किए जाएँगे- उसमें पहला होगा 'युद्ध और शान्ति'... - [पहली किताब, बस स्टैंड और दीवान रोशन लाल रोशन](https://aabohawa.org/pahli-kitab-bus-stand-aur-diwan-roshan-lal-roshan-memoir-of-a-ghazal-compilation/) - सलीम सरमद की कलम से.... पहली किताब, बस स्टैंड और दीवान रोशन लाल रोशन जब मुझे शेर के दो मिसरों की समझ आयी और ग़ज़ल से मेरी निस्बत बढ़ी तो सबसे पहले मैंने समाज के आईने में देखा, जहां मेरा अक्स मुझे चिढ़ा रहा था। मुझे कुछ गिल्ट-सा महसूस - [एक बार फिर सुधा अरोड़ा की कहानियों से गुज़रते हुए](https://aabohawa.org/reading-across-sudha-arora-fiction-once-more-a-commentary-by-namita-singh/) - हमारे समय की बेहद विशिष्ट कथाकार सुधा अरोड़ा का कुछ समय पहले प्रकाशित कहानी संग्रह 'आमार नाम दमनचक्र' मिला। समकालीनों में सुधा अरोड़ा मेरी प्रिय कथाकार हैं। - [हिंदी पर हंगामा-2](https://aabohawa.org/commentary-on-politics-on-hindi-in-maharashtra-and-tamilnadu/) - नई शिक्षा नीति, 2020 ने शिक्षा में त्रिभाषा सूत्र पर ज़ोर दिया। इसमें प्रारंभिक शिक्षा में मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा को माध्यम बनाने की बात शामिल है... - [कौन-सी विशेषता व्यंग्य को विधा बनाती है?](https://aabohawa.org/which-features-define-satire-as-form-of-literature-in-hindi-an-essay/) - व्यंग्यकारों में पीड़ा संभवत: साहित्य के नामवर आलोचकों द्वारा व्यंग्य को मुख्यधारा का साहित्य न मानने के कारण उपजी जबकि व्यंग्य आज का सबसे लोकप्रिय साहित्य है.. - [अंक - 32](https://aabohawa.org/edition-32/) - आब-ओ-हवा – अंक - 32 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में पहली जयंती के उपलक्ष्य पर विशेष तौर से पढ़िए फ़िल्मकार मनोज कुमार के साक्षात्कारों के अंश… ‘हम बोलेंगे’ में फ़हमीदा रियाज़ की याद भी। इस अंक से तीन नये ब्लॉग। प्रतिष्ठित साहित्कार रति सक्सेना - [पोइट्री थेरेपी- भूत, वर्तमान और भविष्य](https://aabohawa.org/poetry-therapy-history-present-and-future-reflections-by-rati-saxena/) - मैंने पोइट्री थेरेपी के बारे में पढ़ा था और विभिन्न कवि मित्रों के अनुभवों से भी गुज़री थी। कविता मानसिक अवसाद से छुटकारा तो दिलाती ही है, देह के कष्ट से भी... - [मात्राभार गणना: एक मनोरंजक विधि-2](https://aabohawa.org/matra-ganna-ek-manoranjak-vidhi-part-two-shergoi-blog/) - "वर्ड रिप्लेसमेंट मैथड" की उपयोगिता निर्विवाद है। पिछले भाग में हमने निम्नलिखित डमी नंबर-2 शे'र की सहायता से कुछ शब्दों के मात्राभार का सत्यापन किया था। - [कला साधक शोभा पत्की का कला संसार](https://aabohawa.org/kala-sadhak-shobha-patki-ka-kala-sansar-by-preeti-nigoskar/) - शोभा अपने चित्रों में ऑइल रंग उपयोग करती हैं, इनमें थोडा ईनामेल रंग मिलाकर चित्रों को चमकीला बनाती हैं, जिससे विशिष्ट टेक्स्चर्स भी उभरते हैं... - [धरती से रिश्ता पनपना मेरी नियति में था: मनोज कुमार](https://aabohawa.org/manoj-kumar-says-in-interviews-i-was-destined-to-relate-with-mother-land/) - अभिनेता, फ़िल्मकार मनोज कुमार के शब्द और सिनेमा बरसो-बरस गूंजता रहेगा। सिने पत्रकार दिनेश रहेजा ने उनसे समय-समय पर एकाधिक साक्षात्कार किये, उन्हीं से अंश... - 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[पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी : भाग-10](https://aabohawa.org/https-aabohawa-org-poorvpath-diary-of-a-poet-jaiprakash-maanas-part-ten/) - कवियों की भाव-संपदा,​ विचार-वीथिका और संवेदन-विश्व को खंगालती इस डायरी का मक़सद प्रकाशन पूर्व पाठक-लेखक संवाद बनाना है - [प्लांट फ़िज़ियोलॉजी: 'जीवन' प्रश्न के उत्तर की ओर](https://aabohawa.org/plant-physiology-a-search-of-answer-of-origin-of-life/) - जीवन, उसकी उत्पत्ति का सूत्र क्या है? चिरंतन प्रश्न को दर्शन, साहित्य और विज्ञान ने अपनी तरह हल करने का उद्यम किया है। इस खोज में जीवविज्ञान के अध्येता का लेख। - [नई कहानी और महिला कथाकार](https://aabohawa.org/nayi-kahani-aur-mahila-kathakar-an-essay-on-contemporary-hindi-literature/) - महिला कहानीकारों ने लेखन के आकाश की असीमता देख ली है। अब उनके लिए चुने हुए विषय, चुनी हुई भाषा की स्वयं स्वीकृत पाबन्दियां जैसा कुछ भी नहीं है... - [मासूम बच्चों का क़त्ल करने पर आमादा सिस्टम](https://aabohawa.org/system-killing-government-school-students-in-rajasthan-madhya-pradesh/) - ये हादसे अचानक नहीं हो रहे हैं। ये हादसे टाले जा सकते थे, अब भी रोके जा सकते हैं लेकिन 'साहबों' ने कानों में कैसी रूई ठूंस रखी है कि आवाज़ें अनसुनी रह जाती हैं! - 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साग़र सिद्दीक़ी, प्रसिद्ध उर्दू शायर, उर्दू शायरी, सागर सिद्दीकी की शायरी, sagar siddiqui, sagar siddiqui poetry, famous urdu poet, urdu poetry, famous ghazal - ['चंदा से होगा वो प्यारा', गाने में लता के साथ किसकी आवाज़ है?](https://aabohawa.org/chanda-se-hoga-wo-pyara-whose-voice-with-lata-mangeshkar-ud-jayega-hans-akela-blog/) - लता मंगेशकर, पीबी श्रीनिवास, बॉलीवुड गायक, पुराने फिल्मी गीत, lata mangeshkar, p b srinivas, old film song, bollywood singer, famous playback singer - ['दिलीप-देव-राज कपूर उसके सामने थे ही क्या!'](https://aabohawa.org/dilip-kumar-dev-anand-raj-kapoor-uske-samne-the-hi-kya-kuchh-film-kuchh-ilm-blog/) - राज कपूर दिलीप कुमार देव आनंद, पुराने बॉलीवुड स्टार, क्लासिक बॉलीवुड किस्से, raj kapoor dilip kumar dev anand, old bollywood star, filmi qisse, old movies - ['आख़िरी गीत मुहब्बत का...' शायराना नग़मों का राजा](https://aabohawa.org/akhiri-geet-muhabbat-ka-shayrana-geeton-ka-raja-taraqqi-pasand-tahreek-ki-kahkasha-blog/) - राजा मेहदी अली खान, पुराने फिल्मी गीतकार, क्लासिक फिल्मी गीत, मदन मोहन, raja mehdi ali khan, madan mohan, old film song, classic film song, bollywood songs - 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[अंक - 30](https://aabohawa.org/edition-30/) - आब-ओ-हवा – अंक - 30 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में विशेष तौर से पढ़िए हिंदी साहित्य पट्टी के हालिया चर्चित विवाद, ‘राइटर्स रेज़ीडेन्सी’ की पूरी पड़ताल कि इस घटनाक्रम में कौन से प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। संविधान की प्रस्तावना में ‘सेक्युलर’ शब्द को लेकर एक - [दॉस्तोएव्स्की के बहाने](https://aabohawa.org/dostoevskys-excuses/) - दॉस्तोएव्स्की के बहाने इन दिनों दॉस्तोएव्स्की फिर चर्चा में हैं। उनकी लघुकथा ‘व्हाइट नाइट्स’ ज़ोरों से पढ़ी जा रही है। पिछले सवा-सौ बरसों में दॉस्तोएव्स्की की उपस्थिति हमारे बीच किसी प्रेत की-सी हो गयी है, जिसके पास इस धर्मोत्तर समाज का नागरिक बार-बार लौटता रहता है। काफ़ी हद तक यह उपस्थिति टॉलस्टॉय और अलेक्सांद्र - [शिक्षा नीति को समझें](https://aabohawa.org/understand-the-education-policy/) - शिक्षा नीति को समझें औपचारिक शिक्षा व्यवस्था की पूरी इमारत खड़ी ही इस आधार पर है कि वह नयी पीढ़ी में बदलते समय के अनुकूल क्षमताओं या क़ाबिलियत का विकास कर सके। हर विद्यार्थी बीज रूप में भिन्न क्षमताओं व संभावनाओं को ख़ुद में समेटे हुए होता है। शिक्षा का काम खाद, हवा, पानी, - [मैं तो दरिया हूं, समंदर में उतर जाऊंगा](https://aabohawa.org/i-am-a-river-i-will-enter-the-ocean/) - मैं तो दरिया हूं, समंदर में उतर जाऊंगा अहमद नदीम क़ासमी एक हरफ़न-मौला अदीब थे। उनके चाहे अफ़साने देख लीजिए, चाहे गज़ल़ें-नज़्में, पंजाब के देहातों की सुंदर अक्कासी दिखलायी देती है। उन्होंने शुरूआत में रूमानी ग़ज़लें लिखीं, लेकिन बाद में ज़िंदगी की तल्ख़ सच्चाइयों को अपने अदब का मौजू़अ बना लिया। उनकी शायरी जहां - [कविता, लोकप्रियता और ब्राह्मणवाद-2](https://aabohawa.org/poetry-popularity-and-brahmanism-2/) - कविता, लोकप्रियता और ब्राह्मणवाद-2 …पिछले अंक से जारी पिछले सत्तर साल से जिसे कविता कहा जा रहा है, उसकी उपस्थिति समाज में शून्य है। और विनोद कुमार शुक्ल भी उसी गद्य कविता के कवि हैं। पाठ्यक्रम में जिन्होंने पढ़ा है, उनके सिवा उनकी कविता पढ़ने और उन्हें जानने वाले सामान्य पाठक नहीं मिलेंगे। समाज में - [स्त्री-पराधीनता का प्रामाणिक दस्तावेज़](https://aabohawa.org/authentic-document-of-womens-subjugation/) - स्त्री-पराधीनता का प्रामाणिक दस्तावेज़ इन दिनों बुकर पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ लेखिका बानू मुश्ताक़ का कहानी-संग्रह ‘हार्ट लैम्प’ चर्चा में है। बानू मुश्ताक़ कन्नड़ भाषा की जानी-मानी प्रतिष्ठित लेखिका हैं। इस संग्रह में शामिल कहानियाँ पिछले तीस-पैंतीस वर्षों में लिखी गईं और इनका अनुवाद दीपा भास्ती ने किया है। बानू मुश्ताक़ लेखिका होने के - [दिलीप कुमार: आवाज़ का जादू](https://aabohawa.org/dilip-kumar-the-magic-of-voice/) - दिलीप कुमार: आवाज़ का जादू हिंदी फिल्मों के प्रेमी यह जानते ही होंगे कि वर्ष 1957 में ऋषिकेश मुखर्जी ने फ़िल्म ‘मुसाफ़िर’ के साथ अपनी निर्देशकीय पारी शुरू की थी। पर कुछ ही सुधिजन इस तथ्य से वाकिफ होंगे कि नायक दिलीप कुमार ने इस फ़िल्म में एक सुरीला गीत भी गाया था, लता - [मुहब्बत कर लो जी, कर लो अजी किसने रोका है](https://aabohawa.org/fall-in-love-who-has-stopped-you/) - मुहब्बत कर लो जी, कर लो अजी किसने रोका है एक थे सरदार दलीप सिंह, उनका सही नाम दिलीप सिंह था पर वे अपने को दलीप सिंह ही कहते थे। पंजाबी में छोटी इ की मात्रा न बोलने का चलन है। तो दलीप सिंह जी बूढ़े हो चले थे पर उनका उठना बैठना बच्चों - [कविता-कहानी कहती कलाकृतियां](https://aabohawa.org/know-contemporary-artist-mamata-singh-deva/) - प्रसिद्ध चित्रकार, प्रसिद्ध शिल्पकार, कला प्रदर्शनी, famous painter, famous sculptor, famous artist, art exhibition, contemporary artists - [अपनी बेवतनी से तबाह बूढ़ा दरवेश - ज़िया फ़ारुक़ी](https://aabohawa.org/remembering-zia-faruqui-a-cotemporary-poet-of-urdu/) - 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[संयुक्तांक 23-24](https://aabohawa.org/combined-issues-23-24/) - आब-ओ-हवा – संयुक्तांक 23-24 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में विशेष नज़र है अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़ी कुछ प्रमुख घटनाओं पर। नियमित स्तंभों की अपनी रौनक़ है, जो नये कोण और नयी दृष्टियां देते हैं। इसके साथ ही मक़बूल शायर राजेश रेड्डी से एक - [अंक - 25](https://aabohawa.org/issue-25/) - आब-ओ-हवा – अंक - 25 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में विशेष नज़र है आब-ओ-हवा के एक साल के सफ़र पर। साहित्य, कला और समाज के प्रतिष्ठित हस्ताक्षरों ने आब-ओ-हवा की यात्रा को अपने शब्दों में बयान किया है। नियमित स्तंभों की अपनी रौनक़ है, - [अंक - 26](https://aabohawa.org/issue-26/) - आब-ओ-हवा – अंक - 26 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में विशेष नज़र है पहलगाम में हुए आतंकी हमले और उसके बाद के हालात पर। प्रमुख समाचार पत्रों से लेकर सोशल मीडिया पर तैरे विचार इस घटना के विभिन्न आयाम छूते हैं। नियमित स्तंभों की - [लोक के बीच पहुंचने का रास्ता हो सकता है कवि सम्मेलन?](https://aabohawa.org/lok-ke-beech-geet-ka-rasta-kavi-sammelan/) - 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[आपके आधे घंटे का पूरा नुक़सान, 'गांधी: अ पर्सपेक्टिव'](https://aabohawa.org/a-complete-waste-of-your-half-an-hour-gandhi-a-perspective/) - आपके आधे घंटे का पूरा नुक़सान,'गांधी: अ पर्सपेक्टिव' नयी पीढ़ी का एक बालक महात्मा गांधी से चिढ़ता है। चिढ़ता भी क्या है बल्कि धारणाग्रस्त हो चुका है। किशोरावस्था में ही। उसका कहना है कि हम दोस्तों के बीच काफ़ी डिस्कशन हो चुका है और मुझे गांधी बिल्कुल पसंद नहीं हैं। इस बालक के मामा, गांधीवादी - [एक चित्र : एकादश कविताएं](https://aabohawa.org/ek-chitra-ekaadash-kavitaen/) - एक चित्र : एकादश कविताएं छवि काव्य :किसी वस्तु से निकलने वाले विकिरण को किसी संवेदनशील माध्यम पर रेकार्ड करके जब कोई स्थिर छवि बनायी जाती है तो छायाचित्र बन जाता है। एक छायाचित्र भी संवेदना जागृत करने का सबब होता है। एक मौज़ूं तस्वीर न जाने कितने कितने विचारों को जन्म देती है। जो - [प्यार का भूत](https://aabohawa.org/pyaar-ka-bhoot/) - प्यार का भूत इंडिया हैबिटैट सेंटर फ़िल्म फ़ेस्टिवल में कई फ़िल्मों की स्क्रीनिंग हुई, ​इनमें से एक फ़िल्म “Kottukkaali, the adamant girl” को दर्शकों ने ख़ूब सराहा।यह फ़िल्म प्यार से नफ़रत करते उन सभी लोगों की है जो पितृसत्ता समाज और जातिगत भेदभाव के शिकार होने के साथ शिक्षा को चरित्र बिगाड़ने के लिए ज़िम्मेदार - [चंगेज](https://aabohawa.org/changej/) - चंगेज (इंडोनेशियाई कहानी - आबिदा अल ख़लीक़ी) (जोन सुएनागा के अंग्रेजी अनुवाद से हिंदी अनुवाद: श्रीविलास सिंह) मैं चंगेज हूँ, एक वेश्या जिसने पिछली रात पाक लुराह के मुंह पर थूक दिया था। कौन कहता है कि मैं पाक लुराह से डरती हूँ। मैं उससे कभी नहीं डरी, हज यात्रा पर उसके जाने से पहले - [हफ़्ते भर की ख़बर](https://aabohawa.org/aab-o-hawa-weekly-newsletter/) - हफ़्ते भर की ख़बर (आब-ओ-हवा वीकली न्यूज़लेटर) कंटेंट : भवेश दिलशाद, आकांक्षा, ग़ज़ाला तबस्सुम “रोज़ाना कम से कम एक गीत सुनें, एक अच्छी कविता पढ़ें, एक सुंदर तस्वीर देखें, और मुमकिन हो तो कुछ सार्थक शब्द बोलें.” - गोएथे दक्षिण और भाषा: कई पहलू रस्किन का 91वां बॉण्ड लखनऊ में साहित्य पार्क याद आएंगे - [वैन गॉफ़: पूंजीवाद-विरोधी कलाकार](https://aabohawa.org/van-gough-the-anti-capitalist-artist/) - वैन गॉफ़: पूंजीवाद-विरोधी कलाकार वैन गॉफ़ की “द पटैटो ईटर्स” अपेक्षाकृत अलग है उस धारणा से जो उनकी ज़्यादा लोकप्रिय पेंटिंग के बारे में हमारी रही है। यह पेंटिंग नीदरलैंड में बनायी गयी उनकी “स्टिल लाइफ़” पेंटिंग के शुरूआती उदाहरणों में से एक है और उनकी बाक़ी विशिष्ट, सतर्कतापूर्ण और नवाचारी कला तकनीकों का प्रयोग - [एक और तस्वीर](https://aabohawa.org/another-pic/) - एक और तस्वीर -सलमा सिद्दीक़ी हमारे यहां उस समय बम्बई के राइटरों और शायरों की एक गोष्ठी होने वाली थी। राइटर और शायरों से अदबी जलसों और मुशायरों में मुलाक़ात कीजिए, तो वह मज़ा नहीं आता, जो लुत्फ़ उनको घरेलू माहौल और बे-तकल्लुफ़ महफ़िल में देखकर, आता है। हक़ीक़त में ज़िंदगी के हर - [संस्मरण : वो स्कूल वाले दिन](https://aabohawa.org/memories-those-school-days/) - संस्मरण : वो स्कूल वाले दिन मैं बगल के गाँव में पढ़ने जाता था। तीसरी, चौथी और पाँचवीं क्लास वहीं पढ़ा। दूसरी क्लास तक तो घर पर ही पिता जी ने पढ़ाया। स्कूल तक जाने का रास्ता बड़ी चुनौतियों से भरा था। पहले तो कच्ची सड़क आधे रास्ते तक ही थी, वो भी हमारे गाँव - ['हृदय दीप' को बुकर पुरस्कार, बानू और दीपा को बधाई](https://aabohawa.org/hridya-deep-gets-booker-prize-congratulations-to-banu-and-deepa/) - 'हृदय दीप' को बुकर पुरस्कार, बानू और दीपा को बधाई हार्ट लैम्प, हिंदी अनुवाद 'हृदय दीप', हिंदोस्तानी अनुवाद किया जाये तो 'दिल का दीया' या उर्दू अनुवाद करें तो 'चिराग़-ए-दिल'... यह किताब मूलत: कन्नड़ में लिखी गयी और इसके अंग्रेज़ी अनुवाद को 2025 का अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार प्राप्त हुआ है। इस घोषणा के बाद से - 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[मैंने आत्महत्या क्यों नहीं की ?](https://aabohawa.org/why-didnt-i-commit-suicide/) - मैंने आत्महत्या क्यों नहीं की ? (‘एकालाप‘ का संदर्भ : बादल सरकार लिखित और निखिल महाजन निर्देशित टेलिथिएटर ‘बाक़ी इतिहास‘… इस नाटक में एक पात्र है सीतानाथ जो आत्महत्या कर लेता है। अख़बार में समाचार तो छपता है लेकिन आत्महत्या का कारण नहीं। एक लेखक दंपति इस कारण की कल्पना करते हुए कहानियां लिखता - [गुजरात समाचार का क़सूर क्या?](https://aabohawa.org/what-is-the-fault-of-gujarat-news/) - गुजरात समाचार का क़सूर क्या? एक बार फिर प्रेस की आज़ादी सुर्खियों में आ गयी है। यूट्यूबरों, पोर्टलों के बाद अब एक 93 साल पुराने अख़बार के ख़िलाफ़ दमनात्मक कार्रवाई की ख़बरें हैं। गुजरात के सबसे पुराने अख़बारों में से एक 'गुजरात समाचार' संचालित करने वाली फ़र्म के निदेशक बाहुबली शाह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा - [सितार पर राग - कैनवास पर रंग](https://aabohawa.org/ragas-on-sitar-colors-on-kansas/) - सितार पर राग - कैनवास पर रंग ग्वालियर में एक अनूठा कला आयोजन होने से पहले ही चर्चाओं में है। सितार पर शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति होगी और जिस तरह सितार की तरंगित होगा, उसी के अनुसार चित्रकार कैनवास को रंगों से सज्जित करेंगे। यदि आप चित्रकार हैं और इस तरह के प्रयोग में रुचि - [अंक - 27](https://aabohawa.org/issue-27/) - आब-ओ-हवा – अंक - 27 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में विशेष नज़र है भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सरहदी संघर्ष और संघर्ष विराम पर। पत्रकारिता के पतन के समय की चिंताएं भी ज़रूरी हैं। नियमित स्तंभों का अपना अपना तेवर है, जो नये - [‘मेड इन इंडिया’ नहीं... ‘मेड बाय इंडिया’ की दरकार](https://aabohawa.org/not-made-in-india-made-by-india-is-needed/) - ‘मेड इन इंडिया’ नहीं... ‘मेड बाय इंडिया’ की दरकार पहलगाम के क्रूर आतंकी हमले के बाद हमारी सेना ने जिस तरह पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों को नेस्तनाबूद किया, उस पर प्रत्येक भारतीय गर्व कर सकता है और कर भी रहा है। लेकिन जिस वक़्त हर हिंदुस्तानी पाकिस्तान को समूल नष्ट किये जाने के जज़्बे - [द्वंद्व के वैभव की कथा चेखव का 'द डुएल'](https://aabohawa.org/chekhovs-the-duel-a-tale-of-the-glory-of-conflict/) - द्वंद्व के वैभव की कथा चेखव का 'द डुएल' एक उपन्यास मैंने कभी पढ़ा था, जिसकी शुरूआती पंक्तियों में ही यह कह दिया जाता है कि हमारा किरदार चेखव के किरदारों की तरह गुणों-अवगुणों के बीच झूलने वालों में से नहीं है जिन्होंने मानो ज़िंदगी में कभी ख़ुशी ही न देखी हो। चेखव की - [तुम अपना रंजो-ग़म.. मुझे दे दो](https://aabohawa.org/give-me-your-sorrows-and-pains/) - तुम अपना रंजो-ग़म.. मुझे दे दो फ़िल्म के पर्दे पर तो नायक की भूमिका कई निभाते हैं पर असल जीवन में नायक बहुत कम लोग हो पाते हैं। प्रेम की हज़ारों कहानियां सिनेमाहॉल में देखी जाती हैं और भुला दी जाती हैं। बड़े-बूढ़े कहते हैं यह सब छद्म है, वास्तविक जीवन में ऐसा नहीं - [गीत अब](https://aabohawa.org/song-now-aruna-dubey/) - गीत अब हमें स्वार्थ के लिएतोड़कर ऐसा बाँटा हैऐन पसलियों बीचधँसा-सेही का काँटा हैजान गये एका की ताकत,इसीलिए है तोड़ाधर्म-जाति का मुद्दा, तिस परधन का सख्त हथौड़ाचिड़ियों के मनचले झुण्डपर चीलझपाटा हैखोटा सिक्का उठा सभा केबीच उछाल दियाडाल फिटकरी दूधसहज हो ख़ूब उबाल दियासाबित किया वजूदतुम्हारा-उखटा माठा हैअवसर पाकर भी जोख़ुद को सिद्ध न कर - [गीत तब](https://aabohawa.org/song-then-vasu-malviya/) - गीत तब बहुत दिन से नहीं आये घरकहो अनवर क्या हुआ आ गया क्या बीच अपने भीछः दिसम्बर क्या हुआमैं कहाँ हिन्दू, मुसलमां तू कहाँ थासच मोहब्बत के सिवा क्या दरमियां थाजब बनी है खीर घर में पूछती है मां बराबर क्या हुआआसमां बैठा ख़ुदा तेरा कहाँ थापत्थरों का देवता मेरा कहाँ थाजिस समय हम - [ग़ज़ल अब](https://aabohawa.org/ghazal-now-bharat-deep-mathur/) - ग़ज़ल अब आपकी चौखट से होकर जो भी दीवाना गयाशाइर-ए-आज़म हुआ दुनिया में पहचाना गयाहाय वो रस्ता कि जिससे छिन गये बूढ़े दरख़्तहाय को राही जो इस पर बे-हिजाबाना गयाएक चिड़िया आपके पिंजरे की रौनक़ हो गयी और वो बच्चे कि जिनकी चोंच से दाना गयाजो मेरी तक़रीर में सच था उसे बतला के झूठजो - [ग़ज़ल तब](https://aabohawa.org/ghazal-then-ganesh-bihari-tarz/) - ग़ज़ल तब कितने जुमले हैं कि जो रू-पोश हैं यारों के बीचहम भी मुजरिम की तरह ख़ामोश हैं यारों के बीचक्या कहें किसने बहारों को ख़िज़ाँ-सामाँ कियादेखने में तो सभी गुल-पोश हैं यारों के बीचये भी सच है घर के भेदी ने किया घर को तबाहये भी लगता है कि सब निर्दोश हैं यारों के - [समय से परे टैगोर की संगीत रचनाएं](https://aabohawa.org/tagores-musical-compositions-beyond-time/) - समय से परे टैगोर की संगीत रचनाएं स्पॉटिफ़ाइ एल्गोरिदम और टिकटॉक ट्रेंड के युग में, असंभव लग सकता है कि एक सदी से भी पहले रचे गये संगीत का संग्रह अब तक भावनात्मक आवश्यकता है और आधुनिकता बोध लिये हुए भी। रवींद्र संगीत (रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखे और संगीतबद्ध 2,000 से ज़्यादा गीतों की - [ओरिजनल 'एक चतुर नार' एक गीत क़िस्से बेशुमार](https://aabohawa.org/original-ek-chatur-naar-one-song-numerous-stories/) - ओरिजनल 'एक चतुर नार' एक गीत क़िस्से बेशुमार आज जैसे ही कोई गुनगुनाता है- ‘एक चतुर नार करके सिंगार’, हमारी आँखों के आगे फिल्म पड़ोसन का मज़ेदार दृश्य उभर आता है, जहाँ भाईजान मेहमूद एक दक्षिणात्य नृत्य गुरु मास्टर पिल्लै हैं, हरफ़नमौला किशोर कुमार नेपथ्य में छिपकर गा रहे हैं और आशिक़ भोला बने - [डिप्टी नज़ीर अहमद का तौबतुन्नसूह](https://aabohawa.org/taubatunsuh-of-deputy-nazir-ahmad/) - डिप्टी नज़ीर अहमद का तौबतुन्नसूह “मुझको तुम्हारे माँ-बाप होने से इनकार नहीं। गुफ़्तगू इस बात में है कि तुमको मेरे अफ़आल में ज़बरदस्ती दख़ल देने का इख़्तियार है या नहीं। सौ मैं समझता हूँ कि नहीं है। तुम कहती हो कि हम बमजबूरी दख़ल देते हैं इस वास्ते कि माँ-बाप पर औलाद का तालीम - [कथारस के साथ काव्य की संवेदना](https://aabohawa.org/poetic-sensibility-with-story/) - कथारस के साथ काव्य की संवेदना ‘पीले फूल कनेर के’ शशि खरे का बेहद आश्वस्त करने वाला और शिल्पायन प्रकाशन से छपा पहला कहानी-संग्रह है। मैं उनकी कहानियों की पाठक रही हूँ और उनकी कहानियों ने हमेशा मुझे प्रभावित किया है। ‘वर्तमान साहित्य’ पत्रिका के संपादन के दौरान वर्ष 2007 से हमने ‘वर्तमान साहित्य-कमलेश्वर - [भाषा : राजनीति, लोक और एआई युग के मुद्दे](https://aabohawa.org/language-politics-people-and-issues-in-the-ai-age/) - भाषा : राजनीति, लोक और एआई युग के मुद्दे भारत के पीपल्स लिंंग्विस्टिक सर्वे के माध्यम से 780 भाषाओं का दस्तावेज़ीकरण करने वाले गणेश नारायणदास देवी सांस्कृतिक कार्यकर्ता, साहित्य आलोचक एवं अंग्रेज़ी के पूर्व प्राध्यापक हैं। जी.एन. देवी आदिवासी अकादमी के साथ ही भाषा रिसर्च एवं प्रकाशन केंद्र के संस्थापक हैं। 75 वर्षीय भाषाविद देवी - [ज़ालिम को रुसवा हम भी देखेंगे](https://aabohawa.org/we-will-also-see-the-oppressor-being-humiliated/) - ज़ालिम को रुसवा हम भी देखेंगे तरक़्क़ी-पसंद तहरीक के इब्तिदाई दौर का अध्ययन करें, तो यह बात सामने आती है कि तरक़्क़ी-पसंद शायर और आलोचक ग़ज़ल विधा से मुतमइन नहीं थे। उन्होंने अपने तईं ग़ज़ल की पुर-ज़ोर मुख़ालफ़त की, उसे जानबूझकर नज़र-अंदाज़ किया। शायर-ए-इंक़लाब जोश मलीहाबादी, तो ग़ज़ल को काव्य विधा की हैसियत से - [हर कवि के लिए सबसे बड़ा प्रश्न](https://aabohawa.org/the-biggest-question-for-every-poet/) - हर कवि के लिए सबसे बड़ा प्रश्न मानव जाति की लाखों वर्षों की विकास-यात्रा के दौरान उसमें अड़चनों का बड़ा महत्व है। इन अड़चनों ने, चुनौतियों ने कई बार ही नहीं बल्कि बार-बार उसके अस्तित्व पर भी संकट खड़ा कर दिया होगा। कई प्रजातियां इन्हीं चुनौतियों से न निपट पाने के कारण समाप्त हो - [एक थे परवीन कुमार अश्क..](https://aabohawa.org/there-was-one-parveen-kumar-ashk/) - एक थे परवीन कुमार अश्क.. एक थे परवीन कुमार अश्क, पंजाबी टोन में बात करते थे। जब भी फ़ोन आता, दिल धक से हो जाता, कम से कम दो घंटे गये। बुज़ुर्ग थे, सीधा कौन बोलता है कि बहुत देर हो गयी है… हाँ-हाँ करके मैं उनसे बातें करता रहता। बात-बात पर कहते, मैं - [मात्रा पतन : कुछ विशेष तथ्य](https://aabohawa.org/volume-collapse-some-highlights/) - मात्रा पतन : कुछ विशेष तथ्य ग़ज़ल और अन्य काव्य विधाओं में एक बड़ा अंतर लय को लेकर है। छंदमुक्त कविता में भी आंतरिक लय होती है जिसके छूटने पर वह मात्र एक बयान रह जाती है। लय प्राप्त करने का सरल उपाय छंद है किंतु छंद साधना कठिन है। ग़ज़ल का छंद चूंकि - [शिक्षा के सही मायने](https://aabohawa.org/true-meaning-of-education/) - शिक्षा के सही मायने मोहल्ले में हमारे एक पड़ोसी की चर्चा उनकी तीन साल की बेटी की वजह से आजकल ख़ूब ज़ोरों पर है। कारण है कुछ याद करा दिये गये प्रश्नों का उत्तर तोतली आवाज़ में बच्ची द्वारा अंग्रेज़ी में फटाफट देना। अधिकतर प्रश्न सामान्य ज्ञान टाइप के हैं, जिन्हें दूसरों के सामने - [कितने अभिन्न लोगों को मैंने चिट्ठियां नहीं लिखीं!](https://aabohawa.org/how-many-different-people-have-i-written-letters-to/) - कितने अभिन्न लोगों को मैंने चिट्ठियां नहीं लिखीं! “उसके लिए चिट्ठियांभाषा के बन्द दरवाज़ों कोखोलती गयींदरवाज़ा खुला अधखुला रह गयाबन्द हो गया चिट्ठियों का दरवाज़ा”तब गांव में घर कम थे। कोयला खदानों का उतना विस्तार नहीं था। इनीगिनी खदानें थीं — जमकुंडा, सुकरी, बड़ियावाली, मोहन कॉलरी। थोड़ा आगे निकल जाओ तो जटाछापर, रावनबाड़ा, और पश्चिम - [युद्धविराम के बाद... चुनौतियां और विचार](https://aabohawa.org/after-the-ceasefire-challenges-and-considerations/) - युद्धविराम के बाद... चुनौतियां और विचार ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम पहले संबोधन में आतंकवाद से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ की बात पुरज़ोर ढंग से कही। मंगलवार की सुबह, यह संबोधन देश के प्रमुख दैनिकों के पहले पन्ने पर हुंकार की तरह परोसा गया। हालांकि टीओआई - [हिन्दी उर्दू का भाषाई रिश्ता](https://aabohawa.org/linguistic-relationship-between-hindi-and-urdu/) - हिन्दी उर्दू का भाषाई रिश्ता हिंदोस्तान एक ऐसा बहुभाषीय देश है, जिसमें अनेक क्षेत्रीय बोलियां एवं स्थानीय भाषाएं बोली समझी एवं इस्तेमाल की जाती हैं। हिंदोस्तान को भाषाओं का घर भी कहा जाता है। भारतीय संविधान में जो प्रमुख हिंदोस्तानी भाषाएं सम्मिलित हैं, उनमें हिंदी एवं उर्दू भी हैं। उक्त दोनों भाषाएं न केवल देश - [4PM के बाद द वायर ब्लॉक](https://aabohawa.org/the-wire-block-after-4pm/) - 4PM के बाद द वायर ब्लॉक एक तरफ़ ऑपरेशन सिंदूर को लेकर सारा दिन समाचार चैनलों/अन्य प्रकाशनों पर लगातार कवरेज जारी है तो दूसरी तरफ़ कुछ समाचार/ओपिनियन हैंडलों आदि पर प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का दौर भी चल रहा है। समाचार समूह 'द वायर' ने कहा कि केंद्र सरकार ने 9 मई को उसकी वेबसाइट को ब्लॉक - [हर कलाकार इस समय का सामना करे](https://aabohawa.org/every-artist-must-face-these-times/) - हर कलाकार इस समय का सामना करे जनवादी लेखक संघ उ.प्र. का दसवाँ राज्य सम्मेलन लखनऊ स्थित कैफ़ी आज़मी एकेडमी में अप्रैल 2025 में आयोजित किया गया। पहले दिन उद्घाटन सत्र में 'असहमति और जनतंत्र: हमारे समय की चुनौतियों के बीच साहित्य' विषय पर गोष्ठी आयोजित की गई। इस सत्र में स्वागत समिति के अध्यक्ष - [कौन किस पाले में? दक्षिण एशिया में जंग का गणित](https://aabohawa.org/who-is-on-which-side-the-mathematics-of-war-in-south-asia/) - कौन किस पाले में? दक्षिण एशिया में जंग का गणित छह साल बाद फिर एक बार भारत और पाकिस्तान मुठभेड़ की स्थिति में पहुंच गये हैं। वजह कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों पर आतंकियों का नृशंस हमला। और जवाब में भारत का ऑपरेशन सिंदूर। 2019 में जब जंग जैसे हालात बने थे, तब तो शुरूआती - [ऑपरेशन सिंदूर : क्या भीषण युद्ध का बिगुल है यह?](https://aabohawa.org/operation-sindoor-is-this-the-bugle-of-a-terrible-war/) - ऑपरेशन सिंदूर : क्या भीषण युद्ध का बिगुल है यह? आधी रात के बाद भारत ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमले बोल दिये। सुबह होने पर पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने भारत के लड़ाकू विमानों को ध्वस्त किया और इधर भारत ने साफ़ शब्दों में कहा कि उसने पाकिस्तान के किसी सैन्य ठिकाने - [धरती को प्यार, आत्मीयता और सम्मान दें](https://aabohawa.org/give-love-affection-and-respect-to-the-earth/) - धरती को प्यार, आत्मीयता और सम्मान दें मानव जीवन में अगर कोई सम्बंध सर्वाधिक उदात्त, गरिमामय, पावन और प्रेमपूर्ण है तो वह है मां और पुत्र का सम्बंध। एक मां कभी भी अपनी संतान को भूखा-प्यासा, निर्बल और कष्ट का जीवन जीते नहीं देख सकती और ऐसा कोई पुत्र भी नहीं होगा जो मां की - [गीत अब](https://aabohawa.org/song-now-ranjana-gupta/) - गीत अब रंजना गुप्ता द्वन्द कोलाहल जटिल संवेदनाहै कदाचित यह समयनिर्मम समयगिद्ध जैसी दृष्टि से दिन रात सब कुछ लीलतावंचनाओं की वही गोठिल दुधारी छीलतासब निरर्थक वाद हैं संवाद हैंहै अवांछित यह समय निर्मम समयसंतरण है मृत्यु पथ का झील के अवसाद मेंवितृषणाओं की घुली महुआमगर अनुनाद मेंघृष्ट शकुनि पार्थ विचलित पार्श्व मेंहै अयाचित यह - [अच्छी शायरी ही चलती है, टिकती है](https://aabohawa.org/only-good-poetry-lasts-and-lasts/) - बातचीत अच्छी शायरी ही चलती है, टिकती है ‘जितनी बंटनी थी बंट चुकी ये ज़मीं/अब तो बस आसमान बाक़ी है’, ऐसे शेरों से देश व दुनिया में शिनाख़्त रखने वाले लोकप्रिय शायर राजेश रेड्डी अदब की दुनिया में अपना एक ख़ास मुक़ाम रखते हैं। उनके अब तक तीन ग़ज़ल संग्रह आ चुके हैं- ‘उड़ान’, ‘वजूद’ और - ['राधा और कृष्ण की आड़ में नैतिकता का हनन आख़िर कैसे हो जाएगा..!'](https://aabohawa.org/how-can-morality-be-violated-under-the-guise-of-radha-and-krishna/) - ‘राधा और कृष्ण की आड़ में नैतिकता का हनन आख़िर कैसे हो जाएगा..!’ बहुचर्चित लेखिका उर्मिला शिरीष ने अपने कथा-साहित्य में, प्रेम के विविध रूपों की चर्चा की है। तमाम कथानक इस विषय पर पर्याप्त डिस्कशन प्रस्तुत करते हैं कि ‘प्रेम विमर्श’ का एक नया पाठ हमारे समक्ष स्पष्ट होने लगता है। - [शाइरी की रेल-शब्दों के पुल](https://aabohawa.org/rail-of-shayari-bridge-of-words/) - शाइरी की रेल-शब्दों के पुल प्रत्येक कलाकार इस तथ्य की पुष्टि करेगा कि वे विशेष क्षण होते हैं, जब मन-मस्तिष्क एक आवेश से संचालित होकर कला के नये धरातल और नयी सूक्ष्मताओं को चिह्नित करता है और उसके सौंदर्य-बोध को अपने माध्यम से प्रकट करने में जुट जाता है। प्रकट करने की यह प्रक्रिया - [नयी सदी की चुनौतियांँ और नवगीत कविता-5](https://aabohawa.org/challenges-of-the-new-century-and-navgeet-poem-5/) - नयी सदी की चुनौतियांँ और नवगीत कविता-5 कविता की सही पहचान पढ़ने,‌ गुनगुनाने व सुनने से ही हो पाती है, यह बात छांदस कविता और गद्य कविता दोनों के लिए बराबर सही है। गद्य कविता के लिए तो रूप का कोई महत्व है भी नहीं। गद्य कविता के कवि ने रूप की इसी महत्वहीनता - [आसेब, ख़ाली हाथ और ज़ुबैर रिज़वी](https://aabohawa.org/aseb-empty-handed-and-zubair-rizvi/) - आसेब, ख़ाली हाथ और ज़ुबैर रिज़वी ‘आसेब’ शब्द किसी रहस्य, एक सवाल की तरह मुझे मिला… जिसके हल हो जाने से मुझे ख़ुशी मिलने वाली थी। एक ऐसी गुत्थी मेरे हाथों में पड़ गयी थी जिसके धागे का वो सिरा अंगूठे और उंगली के दरमियान आ गया था, जिसे खींचने पर गुत्थी की कसावट में - [विविधता और ताज़गी का अहसास](https://aabohawa.org/variety-and-freshness/) - विविधता और ताज़गी का अहसास “दूध की जाति” आलोक कुमार मिश्रा का पहला कहानी संग्रह है। आलोक मूलतः कवि हैं।आपने बच्चों के लिए भी कविताएँ लिखी हैं और उनका बाल-कविता संग्रह ‘क्यों तुमसा हो जाऊँ मैं’ सम्मानित हुआ है। कविताओं की विवेचना और मूल्यांकन पर आप लगातार लिखते रहे हैं। इस संग्रह की सबसे - [मीर अम्मन का ‘बाग़-ओ-बहार’](https://aabohawa.org/mir-ammans-bagh-o-bahar/) - मीर अम्मन का ‘बाग़-ओ-बहार’ फ़ोर्ट विलियम कॉलेज में जॉन गिलक्रिस्ट की फ़रमाइश पर मीर अम्मन देहलवी ने मीर हुसैन अता तहसीन की “नौ तर्ज़-ए-मुरस्सा” से लाभ उठाकर बाग़-ओ-बहार की दास्तान लिखी। आम ख़्याल ये है कि उन्होंने अमीर ख़ुसरो की फ़ारसी दास्तान “क़िस्सा चहार दरवेश” से उर्दू में अनुवाद किया, यह बात ख़ुद गिलक्रिस्ट - [ललिता-रफ़ी के सुरों की देसी मिठास](https://aabohawa.org/the-indigenous-sweetness-of-lalita-rafis-voice/) - ललिता-रफ़ी के सुरों की देसी मिठास किशोर साहू निर्देशित “नदिया के पार” में नायिका कामिनी कौशल और नायक दिलीप कुमार पर एक बड़ा ही दिलकश दोगाना फ़िल्माया गया था- ‘मोरे राजा हो ले चल नदिया के पार’। भोजपुरी अंचल की देसी मिठास लिये इस दोगाने में मो. रफी के साथ जिस गायिका ने अपने मधुर - [कला से आशय आख़िर है क्या?](https://aabohawa.org/what-exactly-is-meant-by-art/) - कला से आशय आख़िर है क्या? कला है क्या? आज की बात इस मूल प्रश्न से आरंभ करेंगे। इस विषय में अन्य चिन्तकों ने अपने-अपने मत प्रस्तुत किये हैं, मैं भी अपना मत पाठकों के सामने रख रहा हूँ। यहाँ मेरा मत दृश्य कलाओं (चित्रकला, मूर्तिकला) के संदर्भ में है। मुझे लगता है मन - [रस उन आँखों में है, कहने को ज़रा-सा पानी...](https://aabohawa.org/there-is-juice-in-those-eyes-just-a-little-bit-of-water/) - रस उन आँखों में है, कहने को ज़रा-सा पानी... आरज़ू लखनवी का शुमार उन शायरों में होता है, जिन्होंने न सिर्फ़ अपना नाम उर्दू अदब में सुनहरे हुरूफ़ में लिखवाया, बल्कि उनके मधुर गीतों ने हिन्दी सिनेमा के इब्तिदाई दौर को मालामाल किया। आरज़ू लखनवी के नग़मों के शैदाई उनके समकालीन मूसीकार अनिल विश्वास, - [विचार के लिए कठिन समय में आब-ओ-हवा के मायने](https://aabohawa.org/the-meaning-of-air-and-water-in-difficult-times-for-reflection/) - विचार के लिए कठिन समय में आब-ओ-हवा के मायने “आब-ओ-हवा” ने इस बीच एक वर्ष का समय पार कर लिया, इतने थोड़े से समय में इस ई-पत्र ने बहुत अधिक लोगों का ध्यान अपनी पठनीय, विचारणीय सामग्री को लेकर अनेक तरह से अपनी ओर खींचा है। इसका हर कोना साहित्यिक ख़ुशबू लिये है। कविता - [पहलगाम : श्वेत-श्याम... हक़ीक़त@कतरन](https://aabohawa.org/pahalgam-black-and-white-realitycuttings/) - पहलगाम : श्वेत-श्याम... हक़ीक़त@कतरन ख़बर, ब्यौरे रिपोर्ट करना अलग बात है और मौक़े पर अपनी भावना, संवेदना दर्शाना अलग। कश्मीर के अख़बारों ने 22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के ब्यौरे छापे तो मुखपृष्ठ काले कर दिये। दिल्ली और आसपास की हिन्दी पट्टी तक आते आते मुखपृष्ठ रोज़ की तरह सफ़ेद दिखे। छत्तीसगढ़ - [कश्मीर : नरेटिव और मेरे अनुभव](https://aabohawa.org/kashmir-the-narrative-and-my-experiences/) - कश्मीर : नरेटिव और मेरे अनुभव ‘नरेटिव-नरेटिव’ की चीख़ों से भरे गले तो बैठ जाने चाहिए अब तक…नहीं?सौ बातों की एक बात यह है कि विगत पांच दशकों से कश्मीर में व्याप्त आतंकवाद एक मज़हबी आतंकवाद है और यह मज़हब है इस्लाम। इसकी शुरूआत ही मज़हबी ताने-बाने से हुई थी। अब चाहे वह दिसंबर 1963 - [कविता में अर्थ की लय और अन्विति!](https://aabohawa.org/rhythm-and-search-for-meaning-in-poetry/) - कविता में अर्थ की लय और अन्विति! पहले भी मैंने कहा है और यह लगातार पहचानना-जानना और कहा जाना चाहिए भी कि पिछली शताब्दी के मध्य से जब कविता के आलोचकों ने आलोचना के भारतीय मानकों को छोड़कर पश्चिम के प्रचारित मानकों को मूल आधार बनाकर आलोचना शुरू की, तबसे यह आलोचना लगातार एक अपराध - [आज के हिन्दुस्तान की कहानी](https://aabohawa.org/story-of-todays-india/) - आज के हिन्दुस्तान की कहानी मेरे सामने युवा कथाकार सोनी पांडेय का उपन्यास ‘सुनो कबीर’है। आज के कवियों में सोनी पांडेय का विशिष्ट स्थान है। इधर उन्होंने कहानियाँ लिखीं और कथाकार के रूप में भी अपनी पहचान बनायी है। उनके तीन कहानी-संग्रह प्रकाशित हैं जिनमें ‘बलमा जी का स्टूडियो’ बहुत चर्चित रहा है। इधर, वह - [ऐनी आपा का ‘आग का दरिया’](https://aabohawa.org/anne-apas-daria-of-fire/) - ऐनी आपा का ‘आग का दरिया’ “क़ुर्रतुल-ऐन हैदर ने एक ऐसी मुशतर्का तहज़ीब (साझा संस्कृति) के गुण गाये और अपने तहदार किरदारों में ऐसी हिन्दुस्तानी शख़्सियात (व्यक्तित्वों) को उजागर किया, जिनका ख़मीर कई क़ौमों और नस्लों के तहज़ीबी इख़तिलात (सांस्कृतिक मेलजोल) का रहीन मिन्नत (आभारी) है… बिला-शुबहा ऐसे अह्दसाज़ (युग प्रवर्तक) और बाकमाल तख़लीक़कार (रचनाकार) - [‘हमें तो लूट लिया’ से ये फ़नकार हुए मक़बूल लेकिन फिर न हुए क़ुबूल](https://aabohawa.org/these-artists-became-popular-with-humein-to-loot-liya-but-were-not-accepted-again/) - ‘हमें तो लूट लिया’ से ये फ़नकार हुए मक़बूल लेकिन फिर न हुए क़ुबूल साल 1958 में एक फ़िल्म आई- ‘अल हिलाल’। अल हिलाल का मतलब होता है नया चांद। यानी अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष की पहली रात का चांद, जो इतना कमनीय होता है कि उसकी तुलना सुंदरियों की कमानदार भौंहों से की - [भारत से मास्को तक एक जोकर का सफ़र](https://aabohawa.org/a-clowns-journey-from-india-to-moscow/) - भारत से मास्को तक एक जोकर का सफ़र राज कपूर की ‘मेरा नाम जोकर’ को रूस में अप्रत्याशित सफलता मिलने के साढ़े पांच दशक बाद, भारतीय जोकर की आत्मा मास्को फिर पहुंचने वाली है। इस बार, निर्देशक सौरीश डे की एक उल्लेखनीय इंडी फ़िल्म में कोलकाता के एक शांत व्यक्ति बागंबर बेरा के ज़रिये।बेरा कोई - [उठ मेरी जान, मेरे साथ ही चलना है तुझे](https://aabohawa.org/get-up-my-love-you-have-to-come-with-me/) - उठ मेरी जान, मेरे साथ ही चलना है तुझे दीगर तरक़्क़ीपसंद शायरों की तरह कैफ़ी आज़मी ने भी अपनी शायरी की इब्तिदा रूमानी ग़ज़लों से की, लेकिन बाद में पूरी तरह से नज़्मों की ओर आ गये। मुल्क की आज़ादी की तहरीक में उन्होंने वतनपरस्ती में डूबी इन्क़लाबी नज़्में लिखीं, जिसमें उनका समाजवादी - [धुन ही नहीं, रहमान के बर्ताव पर भी सवालिया निशान](https://aabohawa.org/not-just-the-tune-there-are-question-marks-on-rahmans-behavior-as-well/) - धुन ही नहीं, रहमान के बर्ताव पर भी सवालिया निशान हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत क्षेत्र में बौद्धिक संपदा अधिकार के लिए लड़ी गयी पहली लड़ाई शास्त्रीय संगीत के घराने के पक्ष में गयी और फ़िल्म उद्योग के दिग्गज कलाकारों पर भारी पड़ी। दो साल से अधिक समय से चल रहे विवाद में अतत: दिल्ली उच्च न्यायालय - [ग़ज़ल, हिंदी लफ़्ज़ और ज़हीर क़ुरैशी](https://aabohawa.org/ghazal-hindi-words-and-zaheer-qureshi/) - ग़ज़ल, हिंदी लफ़्ज़ और ज़हीर क़ुरैशी पुराना भोपाल, रेलवे स्टेशन का एरिया और संगम टॉकीज़ के सामने एक अपार्टमेंट जिसके फ़्लैट में ज़हीर क़ुरैशी साहब अपनी शरीके-हयात के साथ रहते थे, उसी अपार्टमेंट में उनकी बेटी और दामाद भी थे। कभी दोपहर में ज़हीर साहब के पास जाकर बैठ जाता तो शाम तक बहुत-सी काम - ["था "और "है" की गुत्थी](https://aabohawa.org/the-puzzle-of-was-and-is/) - "था "और "है" की गुत्थी ये मुझे चैन क्यों नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्यायह एक प्रसिद्ध शे’र है। मनुष्य अपनी संवेदनाओं को खंगालकर यह जानना चाहता ही है कि मन की अशांति का स्रोत क्या है और क्यों है? शे’र में उस प्रश्न की ओर संकेत है। सकारात्मक सोच और दृष्टिकोण - [बच्चों से भी सीखें](https://aabohawa.org/learn-from-children-too/) - बच्चों से भी सीखें हम बच्चों को कितना निराश करते हैं! उस दिन मेरी बेटी और बेटा स्कूल से आने के बाद से ही बहुत उत्साहित थे। क्लास में ‘अर्थ-डे’ के बारे में जो उनकी टीचर ने उन्हें बताया था। दरअसल उस दिन अप्रैल महीने की 22 तारीख़ थी, जिसे पूरी दुनिया में पृथ्वी दिवस - [गीत अब](https://aabohawa.org/the-song-is-now/) - गीत अब ज्ञानप्रकाश पांडेय शब्द ये गंभीरता खोने लगे हैंभाव गूँगे सिर झुकातेमात खाये-सेशब्द के कंकाल में हैंमुँह छुपाये-सेशोरशब्दों में प्रबल होने लगे हैंभैंस ज्यों खूँटा तुड़ाकरखेत चर लेघाम जैसे चाँदनी काचीर हर लेशब्दशासन हीन-से होने लगे हैंसर टिके हैं साधनों कीचौखटों परहो मुखर कैसे भलाप्रतिवाद का स्वरशब्द,मुश्किल देखकर रोने लगे हैं….. ज्ञानप्रकाश पांडेय1979 में - [पर्दा नहीं जब कोई ख़ुदा से, बंदों से पर्दा करना क्या](https://aabohawa.org/when-there-is-no-veil-from-god-then-why-should-there-be-a-veil-from-the-servants/) - जिया सो गाया पर्दा नहीं जब कोई ख़ुदा से, बंदों से पर्दा करना क्या मनस्वी अपर्णा ‘जब प्यार किया तो डरना क्या…’ फिल्म मुग़ले-आज़म और हिंदुस्तानी सिनेमा के सफ़र का वह गीत, जो मील का पत्थर साबित हुआ। इस फ़िल्म के हवाले से यह लेख गीतकार शकील बदायूंनी के नाम। जैसा उनके नाम से - [उर्दू, ईदी, शब्दकोष](https://aabohawa.org/urdu-hindi-dictionary/) - हम बोलेंगे (संपादकीय) उर्दू, ईदी, शब्दकोष भवेश दिलशाद हम भूल हैं या दाग़ हैं उजले वरक़ नहींतारीख़ की क़सम तुम्हें दुहराओ मत हमें अंग्रेज़ों ने रेल दी, डाकख़ाने दिये और न जाने क्या-क्या विकास किये, कुछ तामीरें तो ऐसी कि आज तक क़ायम हैं। लेकिन जिन रास्तों और जिन पुलों की जड़ों में - [शाहनाज़ इमरानी, एक यादगार कहानी](https://aabohawa.org/shahnaz-emrani-a-memorable-story/) - याद बाक़ी शाहनाज़ इमरानी, एक यादगार कहानी प्रतिभा गोटीवाले शाहनाज़ दी से मेरी मुलाक़ात सन्ध्या दीदी के मार्फ़त हुई… इन दोनों के पास भोपाल की तहज़ीब के इतने मज़ेदार क़िस्से थे कि मैं अक्सर दोनों से कहती, आप लोगों को तो एक-एक उपन्यास लिखना चाहिए। फिर उपन्यास के नाम भी तय होते। शहनाज़ दी के - [स्टैंड लीजिए, आप अपने ही देश में हैं](https://aabohawa.org/stand-up-you-are-in-your-own-country/) - फ़्रंट स्टोरी स्टैंड लीजिए, आप अपने ही देश में हैं भवेश दिलशाद स्टैंडअप आर्टिस्ट कुणाल कामरा की एक पैरोडी और कटाक्ष भरे वीडियो पर महाराष्ट्र में भाजपा और पूर्व मुख्यमंत्री शिंदे के समर्थकों ने ख़ासा वबाल काटा। कुणाल ने माफ़ी मांगने से इनकार करके भीड़ को मुंहतोड़ जवाब दे दिया और मामला कोर्ट तक पहुंच - [गीत अब जगदीश पंकज](https://aabohawa.org/song-now-jagdish-pankaj/) - गीत अब जगदीश पंकज ख़बरें, बरस रहीं धरती परआसमान बोझिल-बोझिल हैजाने-पहचाने चेहरों परकुछ भी कह पाना मुश्किल हैकानाफूसी में उलझी हैंइतनी आदमक़द अफ़वाहेंचलती-फिरती दीख रही हैंदीवारों की कुटिल निगाहेंसच को कितना कहाँ खंगालेंसब प्रायोजित है, झिलमिल हैविज्ञापन तो विज्ञापन हैंशीर्ष-कथा की तरह परोसा शंका उभरे नहीं कहीं सेउठ न जाये कहीं भरोसापर जो दिखलाया निखारकरवह - [गीत तब - कुमार रवींद्र](https://aabohawa.org/song-then-kumar-ravindra/) - गीत तब कुमार रवींद्र अपराधी देव हुएऎसे में क्या करें मंदिर की घंटियाँउनको तो बजना है बजती हैंकई बार आपा भी तजती हैंधूप मरी भोर-हुएकैसे फिर धीर धरें मंदिर की घंटियाँभक्तों की श्रद्धा वे झेल रहींआंगन में अप्सराएँ खेल रहींउनके संग राजा भीदेख-देख उन्हें तरें मंदिर की घंटियाँएक नहीं कई लोग भूखे हैंआँखों के कोये - [ग़ज़ल अब राजकुमार राज़](https://aabohawa.org/ghazal-now-rajkumar-raaz/) - ग़ज़ल अब राजकुमार राज़ तुमने दुश्वारियाँ देखीं तो इरादे बदलेहमने मंज़िल ही कभी बदली न रस्ते बदलेफिर कहीं कोई जनाज़ा उठा शाने बदलेखेल था वो ही फ़क़त देखने वाले बदलेजिस्म के पास न हक़ है न इजाज़त है कोईरूह जब चाहे ये पोशाक उतारे बदलेख़ुद को इक बीज की मानिंद यहीं बोया थाहमने बस्ती भी - [ग़ज़ल तब](https://aabohawa.org/ghazal-then-zafar-gorakhpuri/) - ग़ज़ल तब ज़फ़र गोरखपुरी रौशनी परछाईं पैकर आख़िरीदेख लूँ जी भर के मंज़र आख़िरीमैं हवा के झक्कड़ों के दरमियाँऔर तन पर एक चादर आख़िरीज़र्ब इक ठहरे हुए पानी पे औरजाते जाते फेंक कंकर आख़िरीदोनों मुजरिम आईने के सामनेपहला पत्थर हो कि पत्थर आख़िरीटूटती इक दिन लहू की ख़ामुशीदेख लेते हम भी महशर आख़िरीये भी टूटा - [ग़ज़ल तब](https://aabohawa.org/ghazal-then/) - ग़ज़ल तब साहिर लुधियानवी 1.लब पे पाबन्दी नहीं एहसास पे पहरा तो हैफिर भी अहले-दिल को अहवाले-बशर कहना तो हैअपनी ग़ैरत बेच डालें अपना मसलक़ छोड़ देंरहनुमाओं में भी कुछ लोगों को ये मन्शा तो हैहै जिन्हें सब से ज्यादा दावा-ए-हुब्ब-ए-वतनआज उनकी वजह से हुब्ब-ए-वतन रुस्वा तो हैबुझ रहे हैं एक-एक कर के अक़ीदों के - [ग़ज़ल अब](https://aabohawa.org/ghazal-now/) - ग़ज़ल अब वसीम नादिर 1.दिल से तुम उसकी याद के जुगनू जुदा करोअब वक़्त आ गया है ये क़ैदी रिहा करोहर वक़्त तितलियों के तअक़्क़ुब में ज़ेह्न हैंदो चार दिन तो अपने बदन में रहा करोइनके भी कुछ परिंदे कहीं दूर जा बसेपेड़ों के दुख ठहर के कभी सुन लिया करोये मसलिहत तुम्हारा हुनर चाट - [गीत तब](https://aabohawa.org/the-song-then/) - गीत तब हबीब जालिब इक पटरी पर सर्दी मेंअपनी तक़दीर को रोयेदूजा ज़ुल्फ़ों की छाँव मेंसुख की सेज पे सोयेराज सिंहासन पर इक बैठाऔर इक उसका दास – भए कबीर उदासऊँचे-ऊँचे ऐवानों मेंमूरख हुकम चलाएँक़दम-क़दम पर इस नगरी मेंपंडित धक्के खाएँधरती पर भगवान बने हैंधन है जिनके पास – भए कबीर उदासगीत लिखाएँ, पैसे ना - [गीत तब](https://aabohawa.org/song-then-devendra-sharma-indra/) - गीत तब देवेंद्र शर्मा 'इंद्र' हम जीवन के महाकाव्य हैंकेवल छन्द प्रसंग नहीं हैंकंकड़-पत्थर की धरती हैअपने तो पाँवों के नीचेहम कब कहते बन्धु! बिछाओस्वागत में मखमली गलीचेरेती पर जो चित्र बनातीऐसी रंग-तरंग नहीं हैंतुमको रास नहीं आ पायीक्यों अजातशत्रुता हमारीछिप-छिपकर जो करते रहतेशीतयुद्ध की तुम तैयारीहम भाड़े के सैनिक लेकरलड़ते कोई जंग नहीं हैंकहते-कहते - [ग़ज़ल अब](https://aabohawa.org/ghazal-now-ashok-mizaj-badr/) - ग़ज़ल अब अशोक मिज़ाज बद्र पतंग उड़ा के मैं पीछे तो हट नहीं सकतातुम्हारी सद्दी से माझा तो कट नहीं सकताअब एक मुश्त चुकाना पड़ेगा दुश्मन कोये क़र्ज़ वो है जो किश्तों में बट नहीं सकतामुझे उलाँघ के निकलो या काटकर निकलोपहाड़ हूँ मैं तो रस्ते से हट नहीं सकतामोहब्बतों से ही मुमकिन है बात - [ग़ज़ल तब](https://aabohawa.org/ghazal-then-uday-pratap-singh/) - ग़ज़ल तब उदय प्रताप सिंह पुरानी कश्ती को पार ले कर फ़क़त हमारा हुनर गया हैनये खिवैये कहीं न समझें नदी का पानी उतर गया हैतुम होशमंदी के उंचे दावे किसी मुनासिब जगह पे करतेये मयक़दा है यहां से कोई कहीं गया बेख़बर गया हैहुआ सफ़र में यही तजुर्बा वो रेल का हो या ज़िंदगी - [कठोर सच की कहानियां](https://aabohawa.org/stories-of-harsh-truth/) - क़िस्सागोई कठोर सच की कहानियां नमिता सिंह आज मैं एक अलग तरह की कहानियों की चर्चा कर रही हूं। मुझे डर है कि वह कुछ लोगों की रुचि के अनुकूल न हो। मैं कारख़ानों की ज़िंदगियों पर आधारित एक कहानी संग्रह पर बात कर रही हूं। कुछ लोग कहेंगे कि ‘क्या है! - [ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है?](https://aabohawa.org/even-if-we-get-this-world-what-is-the-point/) - जिया सो गाया ये दुनिया अगर मिल भी जाये तो क्या है? मनस्वी अपर्णा हिंदी सिनेमा का वो आसमान… जिस पर न जाने कितने सितारे उभरे, चमके और गोया अपनी ही कामयाबी के भंवर में उलझकर मजीद खोते भी चले गये। किसी ने कहा भी है कि बुलंदी की राह बड़ी फिसलन - [छड़ी रे छड़ी!](https://aabohawa.org/stick-oh-stick/) - तख़्ती छड़ी रे छड़ी! आलोक कुमार मिश्रा केरल हाइकोर्ट ने हाल ही में अपने एक फैसले में कुछ ऐसा कहा जिसे सुनकर नागरिकों और विशेषकर हम शिक्षकों का एक तबका अपनी खुशी को छुपाए न छुपा सका। संबंधित ख़बर की क्लिप वॉट्सएप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़े स्तर पर साझा की जाने - [बच्चे कोरे कागज़ नहीं](https://aabohawa.org/children-are-not-blank-papers/) - तख़्ती बच्चे कोरे कागज़ नहीं आलोक कुमार मिश्रा शिक्षाविदों ने ऐसी मान्यताओं को तार्किक आधार पर सिरे से ख़ारिज किया है जो बच्चों को महज कोरा कागज़ समझती हैं या फिर गीली मिट्टी, जिस पर शिक्षकों, अभिभावकों और बड़ों के द्वारा जो भी लिखा जाएगा वही अंकित होगा। वह जैसे ढाले जाएँगे, उसी तरह - [थोड़ा है, थोड़े की ज़रूरत है](https://aabohawa.org/have-a-little-need-a-little/) - शेरगोई "थोड़ा है, थोड़े की ज़रूरत है" विजय कुमार स्वर्णकार जिस तरह शे’र में भर्ती के शब्द जाने-अनजाने अपनी जगह बना लेते हैं, उसी तरह कभी-कभी कुछ ज़रूरी शब्द अपनी जगह नहीं बना पाते हैं। तात्पर्य यह है कि कुछ ज़रूरी शब्द शे’र के टेक्स्ट में होते ही नहीं हैं इसके बावजूद शे’र प्रथम दृष्टया - [आभासी दुनिया और इलियास राहत](https://aabohawa.org/virtual-world-and-ilyas-rahat/) - गूंजती आवाज़ें आभासी दुनिया और इलियास राहत सलीम सरमद नसीरुद्दीन शाह के किसी इंटरव्यू में सुना था- “अगर आप थिअटर आर्टिस्ट हैं और कोई बड़ा प्लेटफ़ॉर्म नहीं मिल रहा है, तो चार हमख़याल दोस्त पकड़ो, मोबाइल कैमरा लो, कोई स्क्रिप्ट उठाओ और किसी कमरे में परफ़ॉर्म कर दो… कौन रोकने वाला है।” सच तो यही - [नयी सदी की चुनौतियांँ और नवगीत कविता-4](https://aabohawa.org/challenges-of-the-new-century-and-navgeet-poem-4/) - समकाल का गीत विमर्श नयी सदी की चुनौतियांँ और नवगीत कविता-4 राजा अवस्थी जबकि यह कुछ साक्ष्यों, उदाहरणों आदि के माध्यम से प्रमाणित ही नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति का अनुभूत तथ्य भी है कि जब भी कविता का कोई विचार या किसी कविता का ध्यान भी मन में आता है, तो भीतर - 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[Home](https://aabohawa.org/) - आज दुनिया की चुनौतियाँ और सत्याग्रह विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस... और पढ़ें राग दरबारी: पिता ने मुझे दी, मैंने बेटे को… (विधाओं, विषयों व भाषाओं की सीमा से परे.. मानवता के संसार की अनमोल किताब -धरोहर- को हस्तांतरित करने - [web story](https://aabohawa.org/web-story/) - Share this:Share Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Reddit (Opens in new window) Reddit Share on Pinterest (Opens in new window) Pinterest Share on Telegram (Opens in new window) Telegram Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp Share on Bluesky (Opens in - [प्रतिध्वनि](https://aabohawa.org/feedback/) - सृजनात्मक पत्रकारिता जब आज संकट की ज़द में है, तब आब-ओ-हवा का एक साल का सफ़र उपलब्धि से कम नहीं। संसाधनों के अभाव में पत्रिका की आब और ताब क़ाबिल-ए-तारीफ़ है। आपने इसका एक मेयार बनाया है और दोआब की परम्परा को मज़बूत किया है। साधुवाद और शुभकामना। -लीलाधर मंडलोई (वरिष्ठ साहित्यविद/चित्रकार) आब-ओ-हवा के कुछ - [gallery](https://aabohawa.org/gallery/) - [वीडियो](https://aabohawa.org/videos/) - अज्ञेय की "दूर्वादल " प्रयाग शुक्ल की आवाज़ में कला साहित्य जगत के वरिष्ठ एवं प्रसिद्ध हस्ताक्षर प्रयाग शुक्ल ने बातचीत के दौरान प्रसंगवश हिंदी कवि अज्ञेय की एक कविता का अपने अंदाज़ में पाठ भी किया। पाठ करते हुए वह भाव विभोर हो उठे… प्रयाग शुक्ल के साथ लंबी बातचीत “फ़न की बात” खंड - [आब-ओ-हवा - संयुक्तांक 23-24](https://aabohawa.org/aab-o-hawa-combined-issue-23-24/) - संयुक्तांक 23-24 आब-ओ-हवा – संयुक्तांक 23-24 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में विशेष नज़र है अभिव्यक्ति की आज़ादी से जुड़ी कुछ प्रमुख घटनाओं पर। नियमित स्तंभों की अपनी रौनक़ है, जो नये कोण और नयी दृष्टियां देते हैं। इसके साथ ही मक़बूल शायर राजेश रेड्डी - [साथी](https://aabohawa.org/team/) - संस्थापक/प्रधान संपादक भवेश दिलशादशायर/पत्रकार संपादन मंडल शशि खरेवरिष्ठ कथाकार ब्रज श्रीवास्तवकवि, कलाकार, साहित्यकार ग़ज़ाला तबस्सुमशायर/लेखक सलीम सरमदशायर/लेखक अनामिका अनाकवि/संकलक आकांक्षा त्यागीशैक्षिक शोधकर्ता मार्गदर्शन मंडल आशा सक्सेनाहिन्दीसेवी यतीन्द्रनाथ राहीवरिष्ठ कवि Share this:Share Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Reddit (Opens in new window) Reddit - [आयाम](https://aabohawa.org/dimensions/) - आयाम (बाहरी लिंक्स) दिल से.. दिलशाद : http://dilsedilshaad.blogspot.com/आब-ओ-हवा पूर्व ब्लॉग : https://theaabohawa.blogspot.com/जस्ट टू मॉम्स: https://www.instagram.com/justwomoms/थिंक एंड सॉल्व क्लासेस: https://youtube.com/@thinkandsolveclassesबस्ती फ़ाउंडेशन : https://surli.cc/ncxctr Share this:Share Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Share on X (Opens in new window) X Share on Reddit (Opens in new window) Reddit Share on Pinterest (Opens in new window) - [test](https://aabohawa.org/test/) - टिप्पणी स्टैंड लीजिए, आप अपने ही देश April 11, 2025 Trending Stories Latest Posts View All What’s New Get in Touch Followers 750 Likes 590 Followers 1050 Fans 1250 Comments 870 Subscribers 1400 Don’t Miss View More Trading Video Feature Posts View All Posts Categories Most Read Feature Posts View All Posts Categories Most Read - [रचनाएं भेजें](https://aabohawa.org/send-your-creations/) - रचनाएं भेजें आब-ओ-हवा क्रिएटिव कलेक्टिव के रूप में एक मंच बनने की ओर अग्रसर है। यदि आप कला विषयों पर गंभीर और गहन लेखन करते हैं तो आपका स्वागत है। यदि आप साहित्य की विधाओं में रचनात्मक लेखन में निपुण हैं तो आपका स्वागत है। यदि आप सामाजिक मुद्दों पर निष्पक्ष रूप से वैचारिकी या - 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I'm a bike messenger ## My Templates - [दीपक रूहानी](https://aabohawa.org/?elementor_library=दीपक-रूहानी) - डॉ. दीपक रूहानीशायर, अनुवादक और लेखक के रूप में चर्चित। 'ग़ज़लकार' पत्रिका के संपादन के साथ ही कुछ पुस्तकों का संपादन भी। राहत इंदौरी पर चर्चित किताब के लेखन के लिए भी चर्चित। मधुबनी में हिन्दी के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर। संपर्क: 9415142314 - [आब-ओ-हवा - अंक 45](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-45) - प्रसंगवश खुसरो पाती प्रेम की बिरला बांचे कोय: शशि खरेअर्द्धनारीश्वर: डॉ. मंगला अनुजाबदली-बदली नज़र आती है दुनिया आवाज़ की: डॉ. दिनेश पाठकभोपाल और मिर्ज़ा ग़ालिब मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)प्यार के दिन ख़ूनख़राबे की तस्वीर : भवेश दिलशादब्लॉग : बियॉण्ड द ब्रेनहथियार कारोबार की राह पर एआई कंपनियां? : ए. जयजीतब्लॉग : तत्वान्वेषणराजस्थान में - [मंगला अनुजा](https://aabohawa.org/?elementor_library=मंगला-अनुजा) - डॉ. मंगला अनुजावरिष्ठ पत्रकार, संपादक और लेखक। आधी दुनिया की पूरी पत्रकारिता, भारतीय पत्रकारिता के नींव के पत्थर जैसी शोधपरक पुस्तकों के साथ ही हेमंतकुमारी देवी चौधरी और सुभद्राकुमारी चौहान पर मोनोग्राफ़ भी प्रकाशित। आधा दर्जन संदर्भ पुस्तकें आपके नाम। आंचलिक पत्रकार, कर्मवीर जैसे पत्रों के संपादन के साथ ही अनेक संकलनों एवं ग्रंथों का - [मुदित रेवातटी](https://aabohawa.org/?elementor_library=मुदित-रेवातटी) - मुदित रेवातटीमूल नाम कौशल किशोर पुरी। माध्यमिक शिक्षक के रूप में सेवारत और ओशो से प्रभावित होने के कारण कोई सपना नहीं बस स्वांतः सुखाय सृजन। गीत, ग़ज़ल, नवगीत, व्यंग्य में विशेष रुचि। संपर्क: 90091 51723 - [आब-ओ-हवा - अंक 44](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-44) - प्रसंगवश माखनलाल चतुर्वेदी: जिन्हें बहुत मानते थे गांधीजी: प्रमोद मलयमहात्मा गांधी: विचार दर विचार: विवेक मेहताताहिर फ़राज़ को ख़िराज: डॉ. आज़म फ़न की बात मैं तुम्हारे लिए गा रही हूं… लता मंगेशकर का अंतिम इंटरव्यू : डॉ. दिनेश पाठक मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)अथ श्री पद्म-पुरस्कारम् प्रपंच कथा : भवेश दिलशादब्लॉग : बियॉण्ड द - [दिनेश पाठक](https://aabohawa.org/?elementor_library=दिनेश-पाठक) - डॉ. दिनेश पाठकराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं हेतु दीर्घ काल से कला, संस्कृति, संगीत एवं सामायिक लेखन एवं संपादन। आकाशवाणी, दूरदर्शन एवं विभिन्न टी.वी. चैनलों हेतु कार्यक्रम/वृतचित्र लेखन, निर्माण, प्रस्तुतकर्ता के रूप में संबद्ध। विविध क्षेत्रों की विशिष्ट विभूतियों के शताधिक विस्तृत साक्षात्कार जिनमें लता मंगेशकर का अंतिम इंटरव्यू सम्मिलित है। तानसेन समारोह शताब्दी वर्ष हेतु निर्मित विशेष - [मनोज कुलकर्णी](https://aabohawa.org/?elementor_library=मनोज-कुलकर्णी) - मनोज कुलकर्णीचित्रकार, कहानीकार, छायाकार, घुमक्कड़ व वामपंथी संस्कृतिकर्मी। 25 से अधिक चित्र प्रदर्शनियों में हिस्सेदारी। सामयिक विषयों पर अनेक शहरों में नुक्कड़ नुमाइशें। कहानियां, चित्रकला संबंधी लेख, चित्र, रेखांकन, यात्रावृत्तांत, संस्मरण, समीक्षाएं आदि पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। कहानी संग्रह 'औघड़ समय' सहित भारत के जनविज्ञान आंदोलन पर एक पुस्तक के अलावा कुछ अनुवाद पुस्तिकाएं प्रकाशित। बाल-साहित्य - [ज़किया मशहदी](https://aabohawa.org/?elementor_library=ज़किया-मशहदी) - ज़किया मशहदीशिवप्रसाद सिंह के भाषाई तौर पर बेहद कठिन उपन्यास 'नीला चाँद' का उर्दू में अनुवाद करने वाली ज़किया मशहदी ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान में एम.ए. किया है। पिछले 45 वर्षों से उर्दू में कहानियाँ लिख रही हैं। अनुवाद करती हैं। सात कहानी संग्रहों के साथ लगभग सत्रह अनूदित पुस्तकें प्रकाशित हैं। दो उपन्यास - [विनीत तिवारी](https://aabohawa.org/?elementor_library=विनीत-तिवारी) - विनीत तिवारीभारत-फ़लस्तीन एकजुटता नेटवर्क के कार्यकर्ता। प्रगतिशील लेखक संघ के राष्ट्रीय सचिव। ख़ुद को साहित्यकार नहीं मानते पर बताते हैं वैचारिक और संगठन से जुड़े मुद्दों पर लेखन के साथ ही कविताई में भी दिलचस्पी। संपर्क: 98931 92740। - [चंद्रेश्वर](https://aabohawa.org/?elementor_library=चंद्रेश्वर) - चंद्रेश्वरप्रोफ़ेसर पद से सेवानिवृत्ति के बाद स्वतंत्र लेखन। हिन्दी-भोजपुरी की सभी प्रमुख साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं में कविताएं, आलेखों और 'हिन्दवी' पर चयनित कविताओं का भी प्रकाशन। तीन हिन्दी और एक भोजपुरी कविता संग्रह प्रकाशित। एक शोधालोचना की पुस्तक 'भारत में जन नाट्य आंदोलन' (1994) और साक्षात्कार की एक पुस्तिका 'इप्टा-आंदोलनः कुछ साक्षात्कार' सहित कथेतर गद्य की - [आब-ओ-हवा - अंक 43](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-43) - प्रसंगवश कृतित्व के आईने में ज्ञानरंजन: अस्मिता सिंहज्ञानरंजन का जाना: ब्रज श्रीवास्तवगोविंद सर की यादों का गुलशन: तरुणा मिश्रासमर शेष है… और चुप्पी विशेष?: पंकज निनाद फ़न की बात कविता को नये संदर्भों में समझना होगा: रति सक्सेना से सागर शर्मा की बातचीत मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)नाम बदलने की समझ बनाम सनक : - [आब-ओ-हवा - अंक 42](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-42) - प्रसंगवश हृदय दीप (कहानी बानू मुश्ताक़): अनुवाद श्रीविलास सिंहअपनी रचना में पूरे मौजूद विनोद कुमार शुक्ल: स्वप्निल श्रीवास्तवदो विचार, एक सदी और बेमेल तुलना: मनोज कुलकर्णीराही: विशाल अनुभव, अलग अंदाज़ व दृष्टि: अनामिका सिंहइंद्रधनुष-6 : यतींद्रनाथ राहीनया साल, नयी उड़ान की नयी लय: विवेक रंजन श्रीवास्तव2025 का राजनीतिक सिनेमा: मानस मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे - [अनामिका सिंह](https://aabohawa.org/?elementor_library=अनामिका-सिंह) - अनामिका सिंहउत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में वर्षों से सेवाएं दे रही अनामिका स्वभाव से साहित्य सेवी हैं और अपने काव्य कर्म के साथ ही समकालीन कवियों पर लेखन भी करती हैं। अनेक पत्र/पत्रिकाओं में गीत, ग़ज़लें, समीक्षाएं, लेख आदि प्रकाशित होते रहे हैं। गीत, नवगीत, दोहा और ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं, साथ - [आब-ओ-हवा - अंक 41](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-41) - प्रसंगवश 2025: साहित्य के उत्सव-पुरस्कार-विमर्श और…2025: किताबें इस साल और साहित्य की दिशा : विवेक रंजन श्रीवास्तववन्दे मातरम: सुरों के सफ़र की दास्तान मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)शायर बेदख़ल और गुम कैसे हो गया? : भवेश दिलशादब्लॉग : Truth in हेल्थमोटापा: क्या इसका पूरा सच जानते हैं हम? : डॉ. आलोक त्रिपाठी गुनगुनाहट ब्लॉग - [दीक्षा मनीष](https://aabohawa.org/?elementor_library=दीक्षा-मनीष) - दीक्षा मनीषपेशे से सांदीपनि विद्यालय में व्याख्याता। शिक्षा, साहित्य एवं कलाओं संबंधी रुचियों से संपन्न। ख़ुद को लेखक तो नहीं मानतीं किंतु निरंतर अध्ययन करते रहना एक शग़ल ज़रूर। - [शम्पा शाह](https://aabohawa.org/?elementor_library=शम्पा-शाह) - शम्पा शाहकला की दुनिया में रमी हुई यह कलाकार सिरैमिक की लोक कला और आधुनिक अभिव्यक्ति के बीच पुल बनाती रही है और मृदा कला के संरक्षण/संवर्धन में योगदान देती रही है। भारत के अनेक शहरों सहित अनेक देशों में कला प्रदर्शनियां आपके नाम हैं। आपकी शिल्प कला में मानवीय, प्राकृतिक एवं मिथकीय रूपों का - [धर्मेंद्र तिजोरीवाले 'आज़ाद'](https://aabohawa.org/?elementor_library=धर्मेंद्र-तिजोरीवाले-आज) - धर्मेंद्र तिजोरीवाले 'आज़ाद'निजी व्यवसाय के समानांतर स्वतंत्र लेखन करने वाले धर्मेंद्र आज़ाद समकालीन कवियों एवं ग़ज़लगो शायरों में शुमार हैं। ग़ज़ल, कविता, कथा जैसी विधाओं में आपके रचना संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। 'ज्ञानपुंज' पत्रिका का संपादन भी कर चुके हैं और अनेक पत्र पत्रिकाओं व पोर्टलों पर प्रकाशित होते रहे हैं। संपर्क-94254 69326 - [शैलेंद्र चौहान](https://aabohawa.org/?elementor_library=शैलेंद्र-चौहान) - शैलेंद्र चौहाननियमित लेखन एवं स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे शैलेंद्र चौहान जयपुर में रहते हैं। 1983 से क​काव्य संग्रह के प्रकाशन का सिलसिला शुरू हुआ और अब तक गद्य एवं पद्य की दर्जन भर पुस्तकें खाते में हैं। 1979 से 'धरती' पत्रिका का संपादन करते हुए कई चर्चित विशेषांक एक और उपलब्धि रहे। संपर्क-7838897877 - [आब-ओ-हवा - अंक 40](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-40) - प्रसंगवश एसआईआर के ख़िलाफ़ एक यह एफ़आईआर : भवेश दिलशादवास्तविक डेमोक्रैसी तभी जब डेमोग्राफी सायास न बदले : विवेक रंजन मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)लोकतंत्र, सत्तानमाज़ी नागरिक और बंधु-गीतों की याद : भवेश दिलशादब्लॉग : Truth in हेल्थआधे रह गये आपके शुक्राणु, कोई अज्ञात कारण तो नहीं! : डॉ. आलोक त्रिपाठी गुनगुनाहट ब्लॉग : - [मुज़फ़्फ़र हनफ़ी](https://aabohawa.org/?elementor_library=मुज़फ़्फ़र-हनफ़ी) - मुज़फ़्फ़र हनफ़ी1 अप्रैल 1936 को खंडवा में जन्म। उर्दू में एम.ए. और पी.एच.डी. के बाद वन विभाग, एनसीईआरटी जैसे संस्थानों में सेवा के बाद जामिया मिल्लिया इस्लामिया के उर्दू विभाग में पदस्थ हुए। कलकत्ता विश्वविद्यालय में इक़बाल चेयर के प्राध्यापक रहे व उर्दू विभाग के प्रमुख। सौ से ज़्यादा किताबों के लेखक, प्रसिद्ध शायर और - [रामप्रकाश त्रिपाठी](https://aabohawa.org/?elementor_library=रामप्रकाश-त्रिपाठी) - रामप्रकाश त्रिपाठीसाहित्यकार, संस्कृतिसेवी और राजनीतिक एक्टिविस्ट के रूप में दशकों से पहचान। जनवादी लेखक संघ के मौजूदा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष। तक़रीबन छह दशकों से लेखन, रंगमंच, विचारधारा आधारित एक्टिविज़्म में सक्रिय। मध्य प्रदेश हिंदी ग्रंथ अकादमी के पूर्व अधिकारी। अनेक सांस्कृतिक संस्थाओं के साथ संबद्धता। अनेक पत्र पत्रिकाओं में नियमित लेखन और इसके बावजूद कोई पुस्तक - [आब-ओ-हवा - अंक 39](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-39) - प्रसंगवश पं. नेहरू: बेटी का पिता होने की सोच-समझ : विवेक रंजनहिंदी की दैनिक पत्रकारिता का उत्कर्ष : राजेंद्र माथुर का यादगार लेख फ़न की बात धर्म के नाम पर अलगाना अपराध, मेरी कथाएं प्रतिकार: प्रीत मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)न ज़िम्मेदार है प्रेस न आज़ाद, फिर भी दिवस? : भवेश दिलशादब्लॉग : Truth - [राजेश बादल](https://aabohawa.org/?elementor_library=राजेश-बादल) - राजेश बादलराज्यसभा टीवी के पूर्व कार्यकारी निदेशक के रूप में ख्यातिप्राप्त। चार दशक से अधिक समय से रेडियो, टीवी, प्रिंट व डिजिटल पत्रकारिता में चर्चित हस्ताक्षर। सौ से अधिक वृत्तचित्रों के निर्माण, टीवी पत्रकारिता में व्यवस्थित बायोपिक एवं पत्रकारिता की अनेक पुस्तकों के लिए प्रशंसित। पत्रकारिता के लिए महत्वपूर्ण सम्मानों से सम्मानित। - [बानो सरताज](https://aabohawa.org/?elementor_library=बानो-सरताज) - डॉ. बानो सरताज17 जुलाई 1945 को जन्मीं डॉ. बानो सरताज महत्वपूर्ण लेखक हैं। राष्ट्रपति अवार्ड सहित साहित्य अकादमियों से पुरस्कृत हो चुकी हैं और सामाजिक संस्थाओं से भी। साहित्य की तमाम विधाओं में क़रीब ढाई दर्जन किताबें प्रकाशित हैं। तीन विषयों में एम.ए. के बाद एम.एड., पीएच.डी. सहित अनेक कोर्स भी आपने किये और लंबा - [संजीव परसाई](https://aabohawa.org/?elementor_library=संजीव-परसाई) - संजीव परसाईघोषित रूप में क़रीब 25 सालों से लेखन, पठन-पाठन की गतिविधियों में संलग्न। व्यंग्यात्मक शैली में बात कहने में महारत। विभिन्न विषयों पर आलेख, शोध प्रकाशित। चर्चित पुस्तक “हम बड़ी ई वाले” के बाद हाल ही प्रकाशित किताब "भोपाल टॉकीज़" चर्चा में। पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातकोत्तर और पत्रकारिता में शुरूआती ज़ोर-आज़माइश के बाद - [बबीता गुप्ता](https://aabohawa.org/?elementor_library=बबीता-गुप्ता) - बबीता गुप्ताएम.ए.(समाजशास्त्र), पी-एच.डी. (महिला कल्याणकारी योजनाओं पर), लघुकथा लेखन कौशल (सर्टिफिकेट कोर्स एवं डिप्लोमा) के बाद स्वतंत्र लेखन। स्त्री विमर्श की कथाओं, लघुकथाओं, बाल कथाओं के अलग-अलग संग्रह प्रकाशित। जीवनी और नाटक आदि विधाओं में भी लेखन। शोधपरक एवं वैचारिक लेखों के संग्रह भी प्रकाशित। - [मानस विवेक त्रिपाठी](https://aabohawa.org/?elementor_library=मानस-विवेक-त्रिपाठी) - मानसविवेक त्रिपाठी उर्फ़ मानस पूर्व बैंककर्मी हैं लेकिन फ़िल्मों के जुनून ने नौकरी छुड़वायी और फ़िल्में बनाने की दिशा में प्रेरित किया। आधा दर्जन शॉर्ट फ़िल्में बना चुके मानस की कुछ फ़िल्मों को फ़ेस्टिवलों में सराहना व पुरस्कार मिले हैं। फ़िल्म लेखन व निर्देशन के अलावा मानस का एक कहानी संग्रह 'बालकनी' प्रकाशित है। इन - [आब-ओ-हवा - अंक 38](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-38) - प्रसंगवश विकास अवधारणा, बिजली परियोजनाएं और संकट में हिमालय : विवेक रंजनविज्ञापन का महानायक: पीयूष पाण्डे : प्रो. पवित्र श्रीवास्तव मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)150 करोड़ दीये जलाने का रिकॉर्ड बन पाएगा? : भवेश दिलशादब्लॉग : Truth in हेल्थआधुनिक चिकित्सा पद्धति: एक अर्धसत्य क्यों है? : डॉ. आलोक त्रिपाठीब्लॉग : तख़्तीजेंडर तटस्थ स्कूली पोशाक - [पवित्र श्रीवास्तव](https://aabohawa.org/?elementor_library=पवित्र-श्रीवास्तव) - पवित्र श्रीवास्तवमाखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल में विज्ञापन एवं जनसंपर्क विभाग तथा सिनेमा अध्ययन विभाग के प्रमुख। प्रो.(डॉ.) पवित्र श्रीवास्तव 25 वर्षों से टीचिंग, रिसर्च एवं एकेडमिक एडमिनिस्ट्रेशन में सक्रिय हैं। जनसंचार के विभिन्न विषयों पर पुस्तक लेखन के साथ आलेख एवं शोध-पत्र देश की प्रतिष्ठित पत्रिकाओं एवं समाचार पत्रों में प्रकाशित। - [सोनू यशराज](https://aabohawa.org/?elementor_library=सोनू-यशराज) - सोनू यशराजसाहित्यकार और सूचना शिक्षा संचार सलाहकार। 'पहली बूंद नीली थी' चर्चित काव्य संग्रह है। कविताओं का आधा दर्जन से अधिक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। ग्वालियर सेंट्रल लाइब्रेरी की डॉक्युमेंट्री में आपकी कविता शामिल हुई। 'साहित्य तक' में आपकी कविताओं का वाचन। अनेक पत्र पत्रिकाओं, ब्लॉग, चैनलों, आकाशवाणी आदि माध्यमों से कविता, कहानी, - [आब-ओ-हवा - अंक 37](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-37) - प्रसंगवश त्योहार का समय और प्रमाणीकरण का व्यवसायीकरण : डॉ. आलोक त्रिपाठी‘चराग़’ के विषय पर चार शायरों की ग़ज़लेंहिन्दी-उर्दू शायरी में ‘चराग़’ मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)नोबेल पुरस्कार: शांति की खोज या ईजाद? : भवेश दिलशादब्लॉग : तख़्तीकाश! हम वैसे ही होते : आलोक कुमार मिश्रा गुनगुनाहट ब्लॉग : पोइट्री थेरेपीयुद्ध और आपदा में - [मोहम्मद वजीहुद्दीन](https://aabohawa.org/?elementor_library=मोहम्मद-वजीहुद्दीन) - मोहम्मद वजीहुद्दीनएशियन एज, इंडियन एक्सप्रेस के बाद फ़िलहाल टाइम्स आफ़ इंडिया समूह के साथ पत्रकार। तक़रीबन तीन दशक की पत्रकारिता और ख़ास तौर से मुस्लिम समाज और उसके मुद्दों पर लेखन। उर्दू साहित्य और पत्रकारिता में रुचि। ब्लॉगिंग भी। कुछ ख़ास पुरस्कार और यूके व यूएसए द्वारा बहुलवादी समुदायों के अध्ययन के लिए आमंत्रित भी - [मुकेश असीमित](https://aabohawa.org/?elementor_library=मुकेश-असीमित) - डॉ. मुकेश असीमितहास्य-व्यंग्य, लेख, संस्मरण, कविता आदि विधाओं में लेखन। हिंदी और अंग्रेज़ी में लिखे व्यंग्यों के संग्रह प्रकाशित। कुछ साझा संकलनों में रचनाएं शामिल। देश-विदेश के प्रतिष्ठित दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, पाक्षिक, त्रैमासिक पत्र-पत्रिकाओं एवं साहित्यिक मंचों पर नियमित प्रकाशन। - [प्रो. अनिल सत्यप्रिय](https://aabohawa.org/?elementor_library=प्रो-अनिल-सत्यप्रिय) - प्रो. अनिल सत्यप्रियअंग्रेज़ी और इतिहास में मास्टर्स के बाद अंग्रेज़ी में शोध उपाधि। इन दिनों प्राध्यापक और अंग्रेज़ी विभाग के अध्यक्ष। हिंदी और अंग्रेज़ी में काव्य एवं साहित्य की एक दर्जन पुस्तकें प्रकाशित। विंध्य लिटरेरी फ़ाउंडेशन के साथ ही ह्यूमन एंड नेचर केयर सोसायटी के संस्थापक। - [आब-ओ-हवा - अंक 36](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-36) - प्रसंगवश खिड़की में दीवार बनाने की ख़ुराफ़ात में लोग : अशोक शर्माऐसे ईमानदारी के आइकन बने लाल बहादुर शास्त्री​ : विवेक रंजन श्रीवास्तवराम राज्य का अर्थ हिन्दू राज्य नहीं : मधूलिका श्रीवास्तव मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)इतने साहित्य उत्सव..! तमाशा मेरे आगे : भवेश दिलशादब्लॉग : तख़्तीबूढ़े भी सीखें ढलना : आलोक कुमार मिश्रा - [विवेक रंजन श्रीवास्तव](https://aabohawa.org/?elementor_library=विवेक-रंजन-श्रीवास्तव) - विवेक रंजन श्रीवास्तवसेवानिवृत मुख्य अभियंता (विद्युत मंडल), प्रतिष्ठित व्यंग्यकार, नाटक लेखक, समीक्षक, ई अभिव्यक्ति पोर्टल के संपादक, तकनीकी विषयों पर हिंदी लेखन। इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स के फैलो, पोस्ट ग्रेजुएट इंजीनियर। 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी ब्लॉगर, साहित्यिक अभिरुचि संपन्न, वैश्विक एक्सपोज़र। - [राजेंद्र यादव](https://aabohawa.org/?elementor_library=राजेंद्र-यादव) - राजेंद्र यादव'सारा आकाश', 'एक इंच मुस्कान' और 'उखड़े हुए लोग' जैसे चर्चित उपन्यासों के लेखक और प्रेमचंद द्वारा स्थापित साहित्यिक पत्रिका 'हंस' के पुनर्प्रकाशन और संपादन के लिए प्रसिद्ध। - [स्वरांगी साने](https://aabohawa.org/?elementor_library=स्वरांगी-साने) - स्वरांगी सानेप्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित। यूट्यूबर, कविता, कथा, अनुवाद, संचालन, स्तंभ लेखन, पत्रकारिता, अभिनय, नृत्य, साहित्य-संस्कृति-कला समीक्षा, आकाशवाणी और दूरदर्शन पर वार्ता और काव्यपाठ। 2 कविता संग्रह, 6 किताबों का अनुवाद, 3 का संपादन, फ़िल्मों के हिंदी सबटाइटल्स, पेटेंट दस्तावेज़ों व भारत सरकार के वेब इंटरफ़ेस आदि स्टार्ट अप्स के लिए अनुवाद। - [आब-ओ-हवा - अंक 35](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-35) - प्रसंगवश वैश्विक भाषाई परिदृश्य: हिंदी तथा विविध विदेशी भाषाएं : विवेक रंजन श्रीवास्तवसिगरेट… बदनाम औरतें और बाज़ार मालामाल : भवेश दिलशाद मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)हिंदी, भाषा, आवाज़ और अपने सवाल : भवेश दिलशादब्लॉग : तख़्तीशिक्षक दिवस तुम फिर आना : आलोक कुमार मिश्रा गुनगुनाहट ब्लॉग : पोइट्री थेरेपीअथर्ववेद और औषधीय विज्ञान : रति सक्सेनाब्लॉग - [महेश अनघ](https://aabohawa.org/?elementor_library=महेश-अनघ) - महेश अनघसाहित्य के अनेक विधाओं में ​पर्याप्त लेखन। कहानी, उपन्यास, निबंध के साथ ही काव्य सृजन। नवगीतों और ​'हिंदी ग़ज़ल' में विशेष ख्याति। 1977 में ग्वालियर बाज़ार पत्रिका के लिए 'हिंदी ग़ज़ल की रूपरेखा' के सिलसिलेवार लेखन से चर्चित। 14 सितंबर 1947 में जन्म और 4 दिसंबर 2012 को निधन। - [ओम प्रभाकर](https://aabohawa.org/?elementor_library=ओम-प्रभाकर) - ओम प्रभाकर5 अगस्त 1941 को भिंड, मध्य प्रदेश में जन्मे ओमनारायण अवस्थी साठोत्तरी पीढ़ी के महत्वपूर्ण कवियों में शुमार रहे। उन्होंने गीत, नवगीत, गद्य कविता के साथ अपने रचनाकर्म के उत्तरार्ध में ग़ज़लें भी बाक़ायदा तालीम के बाद कहीं। हिंदी और उर्दू पर समान अधिकार के साथ ही 'शब्द' पत्रिका और 'कविता 64' के संपादन - [अजित कुमार राय](https://aabohawa.org/?elementor_library=अजित-कुमार-राय) - अजित कुमार रायआस्था अभी शेष है, रथ के धूल भरे पांव आपकी चर्चित कृतियां हैं। 'सर्जना की गंध लिपि' संपादित कृति है और 'नई सदी की हिन्दी कविता का दृष्टि बोध' आलोचना पुस्तक प्रकाशित है। आप हिंदी साहित्य की तमाम महत्वपूर्ण पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। अनेक संकलनों में निबन्ध, कविताएँ और आलोचनाएँ प्रकाशित। - [आदित्य](https://aabohawa.org/?elementor_library=आदित्य) - आदित्यप्राचीन भारतीय इतिहास में एम. फिल. की डिग्री रखने वाले आदित्य शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न एनजीओ के साथ विगत 15 वर्षों से जुड़े रहे हैं। स्वभाव से कलाप्रेमी हैं। - [आब-ओ-हवा - अंक 34](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-34) - प्रसंगवश जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो कहां हैं? : राकेश कायस्थ मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)कमलकांत जी, अनघ जी.. प्यास और अंधेरे से भिड़ंत : भवेश दिलशादब्लॉग : तख़्तीकक्षा के आयाम – स्मृतियों से सीख : आलोक कुमार मिश्रा गुनगुनाहट ब्लॉग : पोइट्री थेरेपीसंगीत थेरेपी और कविता थेरेपी : रति सक्सेनाब्लॉग : समकाल - [राकेश कायस्थ](https://aabohawa.org/?elementor_library=राकेश-कायस्थ) - राकेश कायस्थपेशे से पत्रकार और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रोफेशनल राकेश कायस्थ ने लेखन की लगभग हर विधा में कलम चलायी है। व्यंग्य संग्रह 'कोस-कोस शब्दकोश', फ़ैंटेसी नॉवेल 'प्रजातंत्र के पकौड़े' और उपन्यास 'रामभक्त रंगबाज़' चर्चित कृतियां हैं। अंतरराष्ट्रीय पत्रिका 'ओपन' ने 'रामभक्त रंगबाज़' को 2022 की दस सर्वश्रेष्ठ भारतीय किताबों की सूची में शामिल किया। किताब - [अनीता श्रीवास्तव](https://aabohawa.org/?elementor_library=अनीता-श्रीवास्तव) - अनीता श्रीवास्तवपेशे से शिक्षक और स्वभाव से कवि, कथाकार, व्यंग्यकार, मंच संचालक, पूर्व रेडियो/टीवी उद्घोषिका। 200 से अधिक रचनाएँ प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। कनाडा से प्रकाशित पाक्षिक वेब पत्रिका 'साहित्य कुंज' में नियमित लेखन। 'तिड़क कर टूटना' शीर्षक से कहानी संग्रह और 'जीवन वीणा' शीर्षक से कविता संग्रह और ‘बचते-बचते प्रेमालाप’ व्यंग्य संग्रह प्रकाशित। यू - [बकुला घासवाला](https://aabohawa.org/?elementor_library=बकुला-घासवाला) - बकुला घासवालाकर्मशील-लेखिका-अनुवादक-कवि। क़रीब आधा दर्जन किताबें लेखन-सहलेखन में प्रकाशित हैं। गुजराती साहित्य परिषद द्वारा 2005 का भगिनी निवेदिता अवार्ड (प्रथम)। मृणालिनी साराभाई की अंग्रेज़ी आत्मकथा ‘द वॉइस आफ़ द हार्ट' का गुजराती अनुवाद 'अंतर्नाद-एक नृत्यांगना जीवन’ को साहित्य अकादमी, दिल्ली द्वारा 2019 में पुरस्कृत किया गया। हाल ही ऑडियो नॉवेल ‘सात पेटी ना संबंधे’ जिज्ञेश - [Gallery](https://aabohawa.org/?elementor_library=gallery) - Title - [शमीम ज़हरा](https://aabohawa.org/?elementor_library=शमीम-ज़हरा) - शमीम ज़हराअदब से वा​बस्ता परिवार में पैदाइश के बाद शादी एकदम विपरीत परिवार में होने के बावजूद शमीम ज़हरा उच्च शिक्षा (उर्दू, हिंदी, संस्कृत पर समान अधिकार) हासिल कर प्रशासनिक सेवा में गयीं। डिप्टी कलेक्टर के पद से रिटायर होने के बाद लेखन और अदब की ख़िदमत में वक़्त देने के साथ ही युवतियों को - [लीलाधर मंडलोई](https://aabohawa.org/?elementor_library=लीलाधर-मंडलोई) - लीलाधर मंडलोईप्रख्यात साहित्यकार और आलोचक लीलाधर मंडलोई दूरदर्शन और आकाशवाणी के महानिदेशक रह चुके हैं। प्रसार भारती बोर्ड के भी सदस्य भी रह चुके हैं। साथ ही, उन्होंने साहित्य की अनेक विधाओं में अनुपम कृतियों का सृजन किया है। आत्मकथा भी लिख चुके हैं और राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक आयोजनों के सूत्रधार के रूप में - [आब-ओ-हवा - अंक 33](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-33) - प्रसंगवश शोले के 50 साल के बरअक्स 1975 का सिनेमाई जादू मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)आज़ादी बचाने का वक़्त : भवेश दिलशादब्लॉग : तख़्तीआज़ादी का संदेश : आलोक कुमार मिश्रा गुनगुनाहट ब्लॉग : पोइट्री थेरेपीपोइट्री थेरेपी – शास्त्र, साहित्य और लोक : रति सक्सेनाब्लॉग : समकाल का गीत विमर्शकविता की आज़ादी का पर्व? : - [शेफाली श्रीवास्तव](https://aabohawa.org/?elementor_library=शेफाली-श्रीवास्तव) - शेफाली श्रीवास्तवपेशे से शिक्षक हैं और साहित्य, संस्कृति व सरोकारों की विरासत को सहेजती हैं। अपने माता पिता प्रतिष्ठित साहित्यकार महेश अनघ एवं प्रमिला अनघ की स्मृति में पुरस्कारों का आयोजन भी करती रही हैं और गाहे ब गाहे लेखनी चलाती हैं लेकिन ख़ुद को साहित्यकार या लेखक नहीं मानतीं। - [देवदत्त संगेप](https://aabohawa.org/?elementor_library=देवदत्त-संगेप) - देवदत्त संगेपबैंक अधिकारी के रूप में भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त। शायरी के प्रति ख़ास लगाव। उर्दू, हिन्दी और मराठी ग़ज़लों में गहरी दिलचस्पी। मिज़ाह शायरी करने के भी शौक़ीन और चुनिंदा शेरों और ग़ज़लों के संकलनकर्ता के रूप में पहचान। - [ख़ुदेजा ख़ान](https://aabohawa.org/?elementor_library=ख़ुदेजा-ख़ान) - ख़ुदेजा ख़ानहिंदी-उर्दू की कवयित्री, समीक्षक और एकाधिक पुस्तकों की संपादक। अब तक पांच पुस्तकें अपने नाम कर चुकीं ख़ुदेजा साहित्यिक व सामाजिक संस्थाओं से सम्बद्ध हैं और समकालीन चिंताओं पर लेखन हेतु प्रतिबद्ध भी। एक त्रैमासिक पत्रिका 'वनप्रिया' की और कुछ साहित्यिक पुस्तकों सह संपादक भी रही हैं। - [मुंशी प्रेमचंद](https://aabohawa.org/?elementor_library=मुंशी-प्रेमचंद) - मुंशी प्रेमचंदबस नाम ही काफ़ी है... - [आब-ओ-हवा - अंक 32](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-32) - फ़न की बात धरती से रिश्ता पनपना मेरी नियति में था: मनोज कुमार : (मनोज कुमार के चर्चित साक्षात्कारों के अंशों से तैयार एक बातचीत) नये ब्लॉग ब्लॉग : पोइट्री थेरेपीपोइट्री थेरेपी- भूत, वर्तमान और भविष्य : रति सक्सेनाब्लॉग : पक्का चिट्ठाकौन-सी विशेषता व्यंग्य को विधा बनाती है? : अरुण अर्णव खरेब्लॉग : ग़ज़ल: लौ - [रति सक्सेना](https://aabohawa.org/?elementor_library=रति-सक्सेना) - रति सक्सेनालेखक, कवि, अनुवादक, संपादक और वैदिक स्कॉलर के रूप में रति सक्सेना ख्याति अर्जित कर चुकी हैं। व्याख्याता और प्राध्यापक रह चुकीं रति सक्सेना कृत कविताओं, आलोचना/शोध, यात्रा वृत्तांत, अनुवाद, संस्मरण आदि पर आधारित दर्जनों पुस्तकें और शोध पत्र प्र​काशित हैं। अनेक देशों की अनेक यात्राएं, अंतरराष्ट्रीय कविता आंदोलनों में शिरकत और कई महत्वपूर्ण - [अरुण अर्णव खरे](https://aabohawa.org/?elementor_library=अरुण-अर्णव-खरे) - अरुण अर्णव खरेअभियांत्रिकीय क्षेत्र में वरिष्ठ पद से सेवानिवृत्त। कथा एवं व्यंग्य साहित्य में चर्चित हस्ताक्षर। बीस से अधिक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त। अपने माता-पिता की स्मृति में 'शांति-गया' साहित्यिक सम्मान समारोह आयोजित करते हैं। दो उपन्यास, पांच कथा संग्रह, चार व्यंग्य संग्रह और दो काव्य संग्रह के साथ ही अनेक समवेत संकलनों में शामिल तथा - [New Blog](https://aabohawa.org/?elementor_library=new-blog) - 'मान' सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक पुरुष अर्थात बाबा को झकझोरती बच्ची वास्तव में सभी के लिए निर्भीक होकर दहशत को साहस के साथ रोकने का प्रतीक बन जाती है। - शशि - [मधु सक्सेना](https://aabohawa.org/?elementor_library=मधु-सक्सेना) - मधु सक्सेनामूलत: कविता में मन रमता है और गाहे-ब-गाहे मधु सक्सेना गद्य लिखती हैं। कभी व्यंग्य तो कभी लेख, समीक्षा और कहानी का रुख़ करती हैं। तक़रीबन आधा दर्जन काव्य संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और अनेक मंचों से काव्य पाठ कर चुकी हैं। समवेत संकलनों में कविता, कहानी संकलित हो चुकी हैं। कतिपय संकलनों - [पंकज निनाद 2](https://aabohawa.org/?elementor_library=पंकज-निनाद-2) - पंकज निनादपेशे से लेखक और अभिनेता पंकज निनाद मूलतः नाटककार हैं। आपके लिखे अनेक नाटक सफलतापूर्वक देश भर में मंचित हो चुके हैं। दो नाटक 'ज़हर' और 'तितली' एम.ए. हिंदी साहित्य के पाठ्यक्रम में भी शुमार हैं। स्टूडेंट बुलेटिन पाक्षिक अख़बार का संपादन कर पंकज निनाद ने लेखन/पत्रकारिता की शुरूआत छात्र जीवन से ही की - [अस्मिता सिंह](https://aabohawa.org/?elementor_library=अस्मिता-सिंह) - अस्मिता सिंहकहानीकार एवं आलोचक। लंबे समय तक मगध यूनिवर्सिटी और पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में हिन्दी-साहित्य का अध्यापन। प्रमुख पुस्तकों में 'रंग से बेरंग होती ज़िंदगी', 'इन्तज़ार तो ख़त्म हुआ' (कहानी-संग्रह), 'फुलिया' (उपन्यास), 'शमशेर: अभिव्यक्ति की कशमकश (आलोचना पुस्तक), नारी मुक्ति: दशा एवं दिशा (नारी विमर्श), दलित अनुभव का सच (दलित-विमर्श) हैं। साथ ही, लू-शुन के पत्रों - [अशोक अंजुम](https://aabohawa.org/?elementor_library=अशोक-अंजुम) - अशोक अंजुमगीत, ग़ज़ल, दोहे और अन्य छन्दों में भरपूर रचनाएं एवं प्रकाशित पुस्तकें अपने नाम कर चुके अशोक अंजुम हिंदी साहित्य की एक लघु पत्रिका 'अभिनव प्रयास' का संपादन भी वर्षों से कर रहे हैं। कवि सम्मेलनों के मंच से लेकर यूट्यूब तक आप सक्रिय हैं। देश के प्रतिष्ठित पत्र, पत्रिकाओं में प्रकाशन के साथ - [विवेक मेहता](https://aabohawa.org/?elementor_library=विवेक-मेहता) - विवेक मेहताशिक्षा से सिविल इंजीनियर। पेशे से अध्यापक रहे। "क़िस्से बदरंग कोराना के संग", "बैताल कथाएं", "बेमतलब की" जैसे कॉलम थोड़े बहुत चर्चा में रहे। छुटपुट कहानी, कविता आकाशवाणी से प्रसारित होती रही और प्रकाशित भी होती रहती है। कोई पुस्तक, कोई पुरस्कार नहीं। - [आब-ओ-हवा - अंक 31](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-31) - फ़न की बात दुष्यंत कुमार से बहुत ​आगे निकल चुकी ग़ज़ल : (जन्मशताब्दी और पुण्यतिथि के अवसर पर लोकप्रिय कवि नीरज की याद के रूप में उनका एक चर्चित साक्षात्कार) मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)पुल बनाने का वक़्त : भवेश दिलशादब्लॉग : तख़्तीहिंदी पर हंगामा : आलोक कुमार मिश्रा ग़ज़ल रंग ब्लॉग : शेरगोईमात्राभार - [भरत प्रसाद](https://aabohawa.org/?elementor_library=भरत-प्रसाद) - डॉ. भरत प्रसादहिंदी विभाग में प्राध्यापक, पूर्वांगन के अध्यक्ष और देशधारा वार्षिकी के संपादक भरत प्रसाद के नाम पर क़रीब डेढ़ दर्जन साहित्यिक पुस्तकें दर्ज हैं। इनमें काव्य संग्रह, उपन्यास, आलोचना, कहानी और वैचारिकी आधारित किताबें हैं। अनेक प्रमुख साहित्यिक पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। आप अनेक महत्वपूर्ण पुरस्कारों से नवाज़े जा चुके हैं - [अशोक शर्मा](https://aabohawa.org/?elementor_library=अशोक-शर्मा) - अशोक शर्माछत्तीसगढ़ शासन से सेवानिवृत्त राजपत्रित अधिकारी अशोक शर्मा मिज़ाज से कवि, लेखक और साहित्य प्रेमी हैं। चार दशकों से अधिक सक्रिय लेखन, मूलतः ग़ज़ल लेखन तथापि अनेक गीत, दोहे, स्वतंत्र आलेख, कविताएं और कहानियाँ भी। एक स्वतंत्र ग़ज़ल संग्रह 'बाप से परिचय हुआ' तथा कुछ साझा ग़ज़ल संग्रह और दोहा संग्रह प्रकाशित। देश विदेश - [अशोक भौमिक](https://aabohawa.org/?elementor_library=अशोक-भौमिक) - अशोक भौमिककला के क्षेत्र में बहुचर्चित अशोक भौमिक का कलाकर्म क़रीब पांच दशकों में फैला हुआ है। अनेक देशों में प्रदर्शनियां उनके नाम हैं ही, साथ ही ललित कला अकादमी नई दिल्ली, मॉडर्न आर्ट नैशनल गैलरी नई दिल्ली सहित सैन फ्रांसिस्को, जर्मनी के संग्रहालयों में भी उनकी कलाकृतियों को सहेजा गया है। - [श्रीविलास सिंह](https://aabohawa.org/?elementor_library=श्रीविलास-सिंह) - श्रीविलास सिंहअनेक वर्षों से लेखन। दो कविता संग्रह, तीन संग्रह अनूदित कविताओं के, एक कहानी संग्रह, तीन संग्रह अनूदित कहानियों के, कविताएँ, कहानियाँ और देशी विदेशी साहित्य के अनुवाद और लेख विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित, साहित्य और संस्कृति की पत्रिका “परिंदे” का अवैतनिक संपादन। - [शाह आलम राना](https://aabohawa.org/?elementor_library=शाह-आलम-राना) - शाह आलम रानादिल्ली से मुल्तान सहित सांप्रदायिक सद्भाव के लिए अनेक पदयात्राएं, अनेक कला उत्सव, अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म उत्सव, साहित्य उत्सव और मैराथन आदि के आयोजन और बीबीसी जैसे संस्थानों के साथ पत्रकारिता का अनुभव रखने वाले डॉक्टर शाह आलम राना फिल्म मेकर भी हैं और लेखक भी। चंबल संग्रहालय के संस्थापक हैं और शहीदों की - [ग़ज़ाला तबस्सुम](https://aabohawa.org/?elementor_library=ग़ज़ाला-तबस्सुम) - ग़ज़ाला तबस्सुमसाहित्यिक समूहों में छोटी-छोटी समीक्षाएं लिखने से शुरू हुआ साहित्यिक सफ़र अब शायरी के साथ अदबी लेखन और प्रेरक हस्तियों के साथ गुफ़्तगू से लुत्फ़अंदोज़ हो रहा है। एक ग़ज़ल संग्रह ने अदब की दुनिया में थोड़ी-सी पहचान दिलायी है। लेखन में जुनून नहीं, सुकून की तलाश है। आब-ओ-हवा के पहले अंक से ही - [जयप्रकाश मानस](https://aabohawa.org/?elementor_library=जयप्रकाश-मानस) - जयप्रकाश मानसछत्तीसगढ़ शासन में वरिष्ठ अधिकारी जयप्रकाश मानस की कविताओं, निबंधों की दर्जन भर से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। आपने आधा दर्जन से अधिक साहित्यिक पुस्तकों का संपादन किया है और आपकी कविताओं का अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। यही नहीं, पाठ्यक्रमों में भी आपकी रचनाएं शामिल हैं और अनेक प्रतिष्ठित सम्मानों से - 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[सुनिल शुक्ल](https://aabohawa.org/?elementor_library=सुनिल-शुक्ल) - सुनिल शुक्लभारतीय फ़िल्म और टेलीविज़न संस्थान, पुणे से प्रशिक्षित सुनिल शुक्ल एक स्वतंत्र वृत्तचित्र फ़िल्मकार हैं। मुख्यतः कला, संस्कृति और सामुदायिक विकास के मुद्दों पर काम करते हैं। साथ ही, एक सक्रिय कला-प्रवर्तक, आयोजक, वक्ता, लेखक और डिज़ाइन शिक्षक हैं। युवाओं को रचनात्मक करियर के लिए परामर्श भी देते हैं। उनका कार्यक्षेत्र शिक्षा, अभिव्यक्ति और - [आब-ओ-हवा - अंक 29](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-29) - गद्य फ़्रंट स्टोरी ब्लॉग : तह-दर-तह (विश्व साहित्य)उत्तर-उपनिवेशवाद में अस्मिता के प्रश्न : निशांत कौशिक मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)मुक्त सिनेमा बनाम ग़ुलाम सेंसर बोर्ड : भवेश दिलशादब्लॉग : तख़्तीकक्षा में क्या करें शिक्षक? : आलोक कुमार मिश्रा ग़ज़ल रंग ब्लॉग : शेरगोईमात्रा पतन : कुछ विशेष तथ्य-3 : विजय स्वर्णकारब्लॉग : गूंजती आवाज़ेंदर्स - [प्रीति निगोसकर](https://aabohawa.org/?elementor_library=प्रीति-निगोसकर) - प्रीति निगोसकरपिछले चार दशक से अधिक समय से प्रोफ़ेशनल चित्रकार। आपकी एकल प्रदर्शनियां दिल्ली, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, पुणे, बेंगलुरु आदि शहरों में लग चुकी हैं और लंदन के अलावा भारत में अनेक स्थानों पर साझा प्रदर्शनियों में आपकी कला प्रदर्शित हुई है। लैंडस्केप से एब्स्ट्रैक्शन तक की यात्रा आपकी चित्रकारी में रही है। प्रख्यात कलागुरु - [शिखा टहनगुरिया](https://aabohawa.org/?elementor_library=शिखा-टहनगुरिया) - डॉ. शिखा टहनगुरियाचित्रकार, कवि डॉ. शिखा टहनगुरिया ने भील चित्रकारी संबंधी विषय पर शोध किया है। देश के कई शहरों में चित्र प्रदर्शनियों इनके नाम हैं। इनके रेखांकन एवं कविताओं को भी प्रमुख पत्रिकाओं में स्थान मिला है। इन दिनों भोपाल स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में सेवारत हैं। - [मो. नौमान ख़ान](https://aabohawa.org/?elementor_library=मो-नौमान-ख़ान-2) - मो. नौमान ख़ानउर्दू साहित्य की सात किताबों के लेखक, 6 किताबों के संपादक और दर्जनों पाठ्यपुस्तकों के संकलक/संपादक रह चुके हैं डॉ. नौमान। सवा सौ ज़्यादा शोधपत्र प्रकाशित हैं। आधा दर्जन साहित्यिक किताबें प्रकाशनाधीन हैं। दर्जनों सेमिनार में बतौर एक्सपर्ट वक्ता शामिल होने के साथ ही आपको आधा दर्जन से ज़्यादा महत्वपूर्ण सम्मानों से नवाज़ा - [मधूलिका श्रीवास्तव](https://aabohawa.org/?elementor_library=मधूलिका-श्रीवास्तव) - मधूलिका श्रीवास्तवश्री अरविन्दो स्कूल, भोपाल की संस्थापक सदस्य व संचालिका मधूलिका संस्कृत, भाषा शास्त्र एवं पत्रकारिता में दक्ष हैं। उपन्यास, लघुकथा, कथा एवं कविताओं के संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। अनेक साझा संकलनों में आपकी रचनाएं शामिल हुई हैं। मप्र हिन्दी लेखिका संघ समेत अनेक संस्थाओं से आप सम्मानित की जा चुकी हैं। - [आरती साहू](https://aabohawa.org/?elementor_library=आरती-साहू) - आरती साहूसहायक अध्यापक के पद पर कार्य करते हुए लेखन में सक्रिय। क़रीब आधा दर्जन साझा संग्रहों में रचनाएं शामिल। विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशन। शिक्षा और लेखन को अपनी रुचि मानने वाली आरती को लेखन के लिए अनेक पुरस्कार और सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं। - [ज्ञानप्रकाश पांडेय](https://aabohawa.org/?elementor_library=ज्ञानप्रकाश-पांडेय) - ज्ञानप्रकाश पांडेय1979 में जन्मे, पेशे से शिक्षक ज्ञानप्रकाश को हिन्दी और उर्दू की शायरी में समकालीन तेवरों के लिए जाना जाता है। अमिय-कलश (काव्यसंग्रह), सर्द मौसम की ख़लिश (ग़ज़ल संग्रह), आसमानों को खल रहा हूँ (ग़ज़ल संग्रह) प्रकाशित हैं। कुछ एक प्रतिष्ठित संस्थाओं से नवाज़े जा चुके हैं। - [ब्रज श्रीवास्तव](https://aabohawa.org/?elementor_library=ब्रज-श्रीवास्तव) - ब्रज श्रीवास्तवकोई संपादक समकालीन काव्य परिदृश्य में एक युवा स्वर कहता है तो कोई स्थापित कवि। ब्रज कवि होने के साथ ख़ुद एक संपादक भी हैं, 'साहित्य की बात' नामक समूह के संचालक भी और राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक आयोजनों के सूत्रधार भी। उनके आधा दर्जन कविता संग्रह आ चुके हैं और इतने ही संकलनों - [आब-ओ-हवा - अंक 28](https://aabohawa.org/?elementor_library=आब-ओ-हवा-अंक-28) - गद्य फ़्रंट स्टोरी ब्लॉग : तह-दर-तह (विश्व साहित्य)स्थानीयता का विश्व स्वर ‘हार्ट लैम्प’ : निशांत कौशिक मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)और ज़ुबान जीत जाती है : भवेश दिलशादब्लॉग : तख़्तीनंबरों का खेल : आलोक कुमार मिश्रा ग़ज़ल रंग ब्लॉग : शेरगोईमात्रा पतन : कुछ विशेष तथ्य-2 : विजय स्वर्णकारब्लॉग : गूंजती आवाज़ेंक़ाफ़िया, रदीफ़ और - [प्रवेश सोनी](https://aabohawa.org/?elementor_library=प्रवेश-सोनी) - प्रवेश सोनीकविता और चित्रकला, यानी दो भाषाओं, दो लिपियों को साधने वाली प्रवेश के कलाकार की ख़ूबी यह है कि वह एक ही दौर में शिक्षक भी हैं और विद्यार्थी भी। 'बहुत बोलती हैं औरतें' उनका प्रकाशित कविता संग्रह है और समवेत व एकल अनेक चित्र प्रदर्शनियां उनके नाम दर्ज हैं। शताधिक साहित्य पुस्तकों के - [विक्रम सिंह](https://aabohawa.org/?elementor_library=विक्रम-सिंह) - विक्रम सिंहअपने करियर में पहले क़रीब 10 वर्ष पत्रकार रहीं आकांक्षा पिछले क़रीब 15 वर्षोंशिक्षा से इंजीनियर, पेशे से फ़िल्मकार और अभिनेता और प्रकृति से लेखक हैं विक्रम सिंह। देश भर की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ प्रकाशित हुई हैं। "और कितने टुकड़े" कहानी संग्रह है, "अपना ख़ून", "लक्खा सिंह", "मऊ जंक्शन" (इसका अंग्रेज़ी अनुवाद प्रकाशनाधीन) - [डॉ. मालिनी गौतम](https://aabohawa.org/?elementor_library=डॉ-मालिनी-गौतम) - डॉ. मालिनी गौतममध्यप्रदेश के झाबुआ में जन्मी डॉ. मालिनी गौतम गुजरात के संतरामपुर में 1994 से अंग्रेजी की एसोसिएट प्रोफेसर हैं। अंग्रेजी की विशेषज्ञ होते हुए भी हिंदी साहित्य में गहरी रुचि रखती हैं। उन्होंने कविता, ग़ज़ल, नवगीत और अनुवाद में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनके सात काव्य संग्रह, अनुवाद व संपादन कार्य प्रकाशित हो - [आशीष दशोत्तर](https://aabohawa.org/?elementor_library=आशीष-दशोत्तर) - आशीष दशोत्तरख़ुद को तालिबे-इल्म कहते हैं। ये भी कहते हैं कि अभी लफ़्ज़ों को सलीक़े से रखने, संवारने और समझने की कोशिश में मुब्तला हैं और अपने अग्रजों को पढ़ने की कोशिश में कहीं कुछ लिखना भी जारी है। आशीष दशोत्तर पत्र पत्रिकाओं में लगातार छपते हैं और आपकी क़रीब आधा दर्जन पुस्तकें प्रकाशित हैं। - [डॉ. आलोक त्रिपाठी](https://aabohawa.org/?elementor_library=डॉ-आलोक-त्रिपाठी) - डॉ. आलोक त्रिपाठी2 दशकों से ज्यादा समय से उच्च शिक्षा में अध्यापन व शोध क्षेत्र में संलग्न डॉ. आलोक के दर्जनों शोध पत्र प्रकाशित हैं और अब तक वह 4 किताबें लिख चुके हैं। जीवविज्ञान, वनस्पति शास्त्र और उससे जुड़े क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले डॉ. आलोक वर्तमान में एक स्वास्थ्य एडवोकेसी संस्था फॉर्मोन के - [संजीव कुमार जैन](https://aabohawa.org/?elementor_library=संजीव-कुमार-जैन) - संजीव कुमार जैनलंबे समय से साहित्य के स्वाध्याय एवं अध्यापन से जुड़े संजीव शासकीय महाविद्यालय, गुलाबगंज में हिंदी के सह प्राध्यापक हैं। आपकी अभिरुचि पढ़ना लिखना है लेकिन अधिक प्रकाशन से आप गुरेज़ करते हैं। - [चन्दन यादव](https://aabohawa.org/?elementor_library=चन्दन-यादव) - चन्दन यादव विगत तीस सालों से शिक्षा और बाल साहित्य के लिए काम करते रहे चन्दन यादव बीस साल एकलव्य में और छह साल इकतारा में रहे। बच्चों के लिए रूम टू रीड, इकतारा, एनबीटी, और एलएलएफ़ से कहानियों की 12 किताबें प्रकाशित हैं। इन दिनों स्वतंत्र रूप से विभिन्न संस्थाओं के साथ शिक्षा और - [शशि खरे](https://aabohawa.org/?elementor_library=शशि-खरे) - शशि खरेज्योतिष ने केतु की संगत दी है, जो बेचैन रहता है किसी रहस्य को खोजने में। उसके साथ-साथ मैं भी। केतु के पास मात्र हृदय है जिसकी धड़कनें चार्ज रखने के लिए लिखना पड़ता है। क्या लिखूँ? केतु ढूँढ़ता है तो कहानियाँ बनती हैं, ललित लेख, कभी कविता और डायरी के पन्ने भरते हैं। - [माधवी शंकर](https://aabohawa.org/?elementor_library=माधवी-शंकर) - माधवी शंकरकानपुर यूनिवर्सिटी से माइक्रो बायोलॉजी में मास्टर्स और उर्दू के प्रति अपने रुजहान के चलते साहित्य अध्ययन में रत माधवी एक स्थापित शायर हैं। पिछले क़रीब एक दशक से मंचों पर काव्यपाठ और आकशवाणी से प्रसारित माधवी ने कई राष्ट्रीय स्तर के मंचों पर उपस्थिति दर्ज करवायी है। एक ग़ज़ल संग्रह "बाक़ी इश्क़ में - [डॉ. नसीम निक़हत](https://aabohawa.org/?elementor_library=डॉ-नसीम-निक़हत) - डॉ. नसीम निक़हतशायर मुनव्वर राना ने सदी के बेहतरीन शायरों में नसीम निक़हत का नाम शुमार करते हुए उन्हें पद्मश्री से नवाज़े जाने की मांग की थी। 1958 में बाराबंकी में जन्मीं और लखनउ में पली बढ़ीं नसीम उर्दू शायरी का प्रमुख स्त्री स्वर रहीं। कई किताबों में उनकी शायरी संकलित हुई और मुशायरों के - [विवेक सावरीकर मृदुल](https://aabohawa.org/?elementor_library=विवेक-सावरीकर-मृदुल) - विवेक सावरीकर मृदुलसांस्कृतिक और कला पत्रकारिता से अपने कैरियर का आगाज़ करने वाले विवेक मृदुल यूं तो माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववियालय में वरिष्ठ अधिकारी हैं,पर दिल से एक ऐसे सृजनधर्मी हैं, जिनका मन अभिनय, लेखन, कविता, गीत, संगीत और एंकरिंग में बसता है। दो कविता संग्रह सृजनपथ और समकालीन सप्तक में इनकी कविता के - 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[Blog Post](https://aabohawa.org/?elementor_library=blog-post) - रस उन आँखों में है, कहने को ज़रा-सा पानी. आरज़ू लखनवी का शुमार उन शायरों में होता है, जिन्होंने न सिर्फ़ अपना नाम उर्दू अदब में सुनहरे हुरूफ़ में लिखवाया, बल्कि उनके मधुर गीतों ने हिन्दी सिनेमा के इब्तिदाई दौर को मालामाल किया। आरज़ू लखनवी के नग़मों के शैदाई उनके समकालीन मूसीकार अनिल विश्वास, - [आकांक्षा त्यागी](https://aabohawa.org/?elementor_library=आकांक्षा-त्यागी) - आकांक्षा त्यागीअपने करियर में पहले क़रीब 10 वर्ष पत्रकार रहीं आकांक्षा पिछले क़रीब 15 वर्षों से शिक्षा में नवाचार के क्षेत्र में सक्रिय हैं। शोधकर्ता और ट्रेनर के रूप में वह राष्ट्रीय स्तर तक के प्रोजेक्ट लीड कर चुकी हैं। वर्तमान में एलएलएफ़ के साथ बच्चों की शिक्षा से जुड़े विषयों पर अपनी सेवाएं दे - [आब-ओ-हवा - अंक 27](https://aabohawa.org/?elementor_library=aab-o-hawa-issue-27) - गद्य फ़्रंट स्टोरी ‘मेड इन इंडिया’ नहीं… ‘मेड बाय इंडिया’ की दरकार : ए. जयजीत मुआयना ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)सूचना-मुक्त होते हुए हम : भवेश दिलशादब्लॉग : तख़्तीशिक्षा के सही मायने : आलोक कुमार मिश्रा ग़ज़ल रंग ब्लॉग : शेरगोईमात्रा पतन : कुछ विशेष तथ्य : विजय स्वर्णकारब्लॉग : गूंजती आवाज़ेंएक थे परवीन कुमार अश्क.. : - [निशांत कौशिक](https://aabohawa.org/?elementor_library=निशांत-कौशिक) - निशांत कौशिक1991 में जन्मे निशांत ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया, दिल्ली से तुर्की भाषा एवं साहित्य में स्नातक किया है। मुंबई विश्वविद्यालय से फ़ारसी में एडवांस डिप्लोमा किया है और फ़ारसी में ही एम.ए. में अध्ययनरत हैं। तुर्की, उर्दू, अज़रबैजानी, पंजाबी और अंग्रेज़ी से हिंदी में अनुवाद प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित। पुणे में 2023 से नौकरी - [मिथलेश रॉय](https://aabohawa.org/?elementor_library=मिथलेश-रॉय) - मिथलेश रॉयपेशे से शिक्षक, प्रवृत्ति से कवि, लेखक मिथिलेश रॉय पांच साझा कविता संग्रहों में संकलित हैं और चार लघुकथा संग्रह प्रकाशित। 'साहित्य की बात' मंच, विदिशा से श्रीमती गायत्री देवी अग्रवाल पुरस्कार 2024 से सम्मानित। साथ ही, साहित्यिक त्रैमासिक पत्रिका "वनप्रिया" के संपादक। - [ए. जयजीत](https://aabohawa.org/?elementor_library=ए-जयजीत) - ए. जयजीत27 वर्षों से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल तीनों माध्यमों में और रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क पर कार्य करने का लंबा अनुभव। ये अपने आप को व्यंग्यकार भी मानते हैं। प्रमाण-स्वरूप 'पाँचवाँ स्तंभ' नाम से व्यंग्य संग्रह भी प्रकाशित करवा चुके हैं। अनुवाद इनकी वर्क प्रोफ़ाइल का हिस्सा होने के - [प्रमोद दीक्षित मलय](https://aabohawa.org/?elementor_library=प्रमोद-दीक्षित-मलय) - प्रमोद दीक्षित मलयप्रमोद दीक्षित मलय की दो किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं जबकि वह क़रीब एक दर्जन पुस्तकों का संपादन कर चुके हैं। इनमें प्रमुख रूप से अनुभूति के स्वर, पहला दिन, महकते गीत, हाशिए पर धूप, कोरोना काल में कविता, विद्यालय में एक दिन, यात्री हुए हम आदि शामिल हैं। कविता, गीत, कहानी, लेख, - [भवेश दिलशाद](https://aabohawa.org/?elementor_library=भवेश-दिलशाद) - भवेश दिलशादक़ुदरत से शायर और पेशे से पत्रकार। ग़ज़ल रंग सीरीज़ में तीन संग्रह 'सियाह', 'नील' और 'सुर्ख़' प्रकाशित। रचनात्मक लेखन, संपादन, अनुवाद... में विशेष दक्षता। साहित्य की चार काव्य पुस्तकों का संपादन। पूर्व शौक़िया रंगमंच कलाकार। साहित्य एवं फ़िल्म समालोचना भी एक आयाम। वस्तुत: लेखन और कला की दुनिया का बाशिंदा। अपनी इस दुनिया - [जाहिद ख़ान](https://aabohawa.org/?elementor_library=जाहिद-ख़ान) - जाहिद ख़ान इक्कीसवीं सदी के पहले दशक से लेखन की शुरुआत। देश के अहम अख़बार और समाचार एवं साहित्य की तमाम मशहूर मैगज़ीनों में समसामयिक विषयों, हिंदी-उर्दू साहित्य, कला, सिनेमा एवं संगीत की बेमिसाल शख़्सियतों पर हज़ार से ज़्यादा लेख, रिपोर्ट, निबंध,आलोचना और समीक्षा आदि प्रकाशित। यह सिलसिला मुसलसल जारी है। अभी तलक अलग-अलग मौज़ूअ - [डॉक्टर मो. आज़म](https://aabohawa.org/?elementor_library=डॉक्टर-मो-आज़म) - डॉक्टर मो. आज़मबीयूएमएस में गोल्ड मे​डलिस्ट, एम.ए. (उर्दू) के बाद से ही शासकीय सेवा में। चिकित्सकीय विभाग में सेवा के साथ ही अदबी सफ़र भी लगातार जारी रहा। ग़ज़ल संग्रह, उपन्यास व चिकित्सकी पद्धतियों पर किताबों के साथ ही ग़ज़ल के छन्द शास्त्र पर महत्पपूर्ण किताबें और रेख्ता से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ग़ज़ल विधा का - [नमिता सिंह](https://aabohawa.org/?elementor_library=नमिता-सिंह) - नमिता सिंहलखनऊ में पली बढ़ी।साहित्य, समाज और राजनीति की सोच यहीं से शुरू हुई तो विस्तार मिला अलीगढ़ जो जीवन की कर्मभूमि बनी।पी एच डी की थीसिस रसायन शास्त्र को समर्पित हुई तो आठ कहानी संग्रह ,दो उपन्यास के अलावा एक समीक्षा-आलोचना,एक साक्षात्कार संग्रह और एक स्त्री विमर्श की पुस्तक 'स्त्री-प्रश्न '।तीन संपादित पुस्तकें।पिछले वर्ष - [राजा अवस्थी](https://aabohawa.org/?elementor_library=राजा-अवस्थी) - राजा अवस्थीसीएम राइज़ माॅडल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कटनी (म.प्र.) में अध्यापन के साथ कविता की विभिन्न विधाओं जैसे नवगीत, दोहा आदि के साथ कहानी, निबंध, आलोचना लेखन में सक्रिय। अब तक नवगीत कविता के दो संग्रह प्रकाशित। साहित्य अकादमी के द्वारा प्रकाशित 'समकालीन नवगीत संचयन' के साथ सभी महत्वपूर्ण और उल्लेखनीय समवेत नवगीत संकलनों में - [सलीम सरमद](https://aabohawa.org/?elementor_library=सलीम-सरमद) - सलीम सरमद1982 में इटावा (उ.प्र.) में जन्मे सलीम सरमद की शिक्षा भोपाल में हुई और भोपाल ही उनकी कर्म-भूमि है। वह साहित्य सृजन के साथ सरकारी शिक्षक के तौर पर विद्यार्थियों को भौतिक विज्ञान पढ़ाते हैं। सलीम अपने लेखन में अक्सर प्रयोगधर्मी हैं, उनके मिज़ाज में एकरंगी नहीं है। 'मिट्टी नम' उनकी चौथी किताब है, - [विजय कुमार स्वर्णकार](https://aabohawa.org/?elementor_library=विजय-कुमार-स्वर्णकार) - विजय कुमार स्वर्णकारविगत कई वर्षों से ग़ज़ल विधा के प्रसार के लिए ऑनलाइन शिक्षा के क्रम में देश विदेश के 1000 से अधिक नये हिन्दीभाषी ग़ज़लकारों को ग़ज़ल के व्याकरण के प्रशिक्षण में योगदान। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग में कार्यपालक अभियंता की भूमिका के साथ ही शायरी में ​सक्रिय। एक ग़ज़ल संग्रह "शब्दभेदी" भारतीय ज्ञानपीठ - [आलोक कुमार मिश्रा](https://aabohawa.org/?elementor_library=आलोक-कुमार-मिश्रा) - आलोक कुमार मिश्रापेशे से शिक्षक। कविता, कहानी और समसामयिक मुद्दों पर लेखन। शिक्षा और उसकी दुनिया में विशेष रुचि। अब तक चार पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। जिनमें एक बाल कविता संग्रह, एक शैक्षिक मुद्दों से जुड़ी कविताओं का संग्रह, एक शैक्षिक लेखों का संग्रह और एक कहानी संग्रह शामिल है। लेखन के माध्यम से दुनिया - 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