
- June 14, 2025
- आब-ओ-हवा
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आब-ओ-हवा – अंक - 29
भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में एक तरफ़ इस मुद्दे पर विचार है कि सिनेमा के साथ सेंसर बोर्ड का रवैया क्या है तो दूसरी तरफ़, केन्या के अंतरराष्ट्रीय स्तर के लेखक न्यूगी वा तियोंगो के साहित्य पर एक दृष्टि भी है। विशेष बातचीत के अंतर्गत इस बार कला और साहित्य जगत के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हस्ताक्षर प्रयाग शुक्ल की कहानी, और वह भी उन्हीं की ज़ुबानी। साहित्य, कला, शिक्षा आदि से संबद्ध अन्य नियमित ब्लॉग अपने तेवर और वैचारिक उष्मा के साथ हैं ही। इस अंक से कला चर्चा एक नये कलेवर में शुरू हो रही है, यहां प्रीति निगोसकर समकालीन महिला चित्रकारों और उनके रचनाकर्म से रूबरू करवाएंगी।
गद्य
ब्लॉग : तह-दर-तह (विश्व साहित्य)
उत्तर-उपनिवेशवाद में अस्मिता के प्रश्न : निशांत कौशिक
मुआयना
ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)
मुक्त सिनेमा बनाम ग़ुलाम सेंसर बोर्ड : भवेश दिलशाद
ब्लॉग : तख़्ती
कक्षा में क्या करें शिक्षक? : आलोक कुमार मिश्रा
ग़ज़ल रंग
ब्लॉग : शेरगोई
मात्रा पतन : कुछ विशेष तथ्य-3 : विजय स्वर्णकार
ब्लॉग : गूंजती आवाज़ें
दर्स (शिक्षा), अंदाज़ और शहरयार : सलीम सरमद
फ़न की बात
प्रयाग शुक्ल हो जाने की यात्रा : (कला साहित्य जगत के मूर्धन्य हस्ताक्षर प्रयाग शुक्ल से बातचीत)
गुनगुनाहट
ब्लॉग : समकाल का गीत विमर्श
कविता, लोकप्रियता और ब्राह्मणवाद-1 : राजा अवस्थी
ब्लॉग : तरक़्क़ीपसंद तहरीक़ कहकशां
जनकवि हूं साफ़ कहूंगा क्यों हकलाऊं..? : जाहिद ख़ान
किताब कौतुक
ब्लॉग : क़िस्सागोई
संवाद करती कहानियां : नमिता सिंह
ब्लॉग : उर्दू के शाहकार
लखनऊ स्कूल की अमर यादगार : डॉ. आज़म
सदरंग
ब्लॉग : उड़ जाएगा हंस अकेला
नूतन: गायन की ‘समर्थ’ बानगी : विवेक सावरीकर ‘मृदुल’
ब्लॉग : कला चर्चा
आउटर शेप से अंतस की सोच तक : प्रीति निगोसकर
ब्लॉग : कुछ फ़िल्म कुछ इल्म
एक नरगिस का सफ़रनामा.. : मिथलेश रॉय
लैंडस्केप का अद्भुत चितेरा था हरिकृष्ण.. : सुभाष अरोड़ा
पद्य
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खूबसूरत मनमोहक पत्रिका। बधाई आदरणीय प्रयाग शुक्ल जी की बात संग्रहणीय।