ईरानी सिनेमा में प्रतिरोध और मानवतावाद

प्रासंगिकता के चलते आब-ओ-हवा पर प्रस्तुति के लिए ‘हम देखेंगे’ पत्र से विशेष रूप से प्राप्त, ईरानी सिनेमा पर यह चर्चा सुधन्वा देशपांडे की कलम से निकली है, जिसका...

विश्व सिनेमा का इज़रायली नैरैटिव समझें

विश्व सिनेमा का इज़रायली नैरैटिव समझें              अमेरिका, इज़रायल, ईरान, फ़लीस्तीन… यानी संघर्षरत क्षेत्रों के बारे में सोशल मीडिया पर लगातार लेखन और विचार...

ऑस्कर न पा सकी ‘फ़िलीस्तीन-36’ क्या कहती है?

बियॉण्ड द रिव्यू भवेश दिलशाद की कलम से…. ऑस्कर न पा सकी ‘फ़िलीस्तीन-36’ क्या कहती है?             फ़िलीस्तीनी ग्रामीणों को क़ैदी बनाकर जिस बस...

2025 का राजनीतिक सिनेमा: राष्ट्रवाद-प्रतिक्रिया-मनोरंजन की नयी त्रयी

लेखा-जोखा मानस की कलम से…. 2025 का राजनीतिक सिनेमा: राष्ट्रवाद-प्रतिक्रिया-मनोरंजन की नयी त्रयी              पिछले कुछ वर्षों में सिनेमा के विषयों में राजनीति और...

धुरंधर: पॉलिटिकल फ़िल्म या साइकी में घुसपैठ

बियॉण्ड द रिव्यू भवेश दिलशाद की कलम से…. धुरंधर: पॉलिटिकल फ़िल्म या साइकी में घुसपैठ              अगर कोई फ़िल्म बाज़ार में चल पड़ती है,...
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