उर्दू अदब और मज़हबी रवादारी

'मान' सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज...

एक मंगल-यात्रा के बाद अब मंगलयान-2 से उम्मीदें

'मान' सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज...

रंग-बिरंगी: नामचीन साहित्यकारों की चुटकियां

प्रस्तुति विवेक मेहता.... रंग-बिरंगी: नामचीन साहित्यकारों की चुटकियां            हास्य-व्यंग्य बात ही बात में बड़ी सीख...

अंक – 46

आब-ओ-हवा – अंक - 46 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में रंग-बिरंगी छटा। गंगा-जमुनी तहज़ीब के साथ ही हिंदी और उर्दू की रवादारी पर एक...

कुत्ते

हास्य-व्यंग्य आदित्य की कलम से.... कुत्ते            कुत्तों से संबंधित हाल की कुछ घटनाओं ने भारतीय जनमानस को असमंजस की स्थिति में डाल दिया है। लोग समझ नहीं पा रहे हैं...

amir khusro, अमीर खुसरो

खुसरो पाती प्रेम की, बिरला बांचें कोय
वेद, कुरान, पोथी पढ़े, प्रेम बिना का होय
– अमीर खुसरो

पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ पंडित भया न कोय
ढाई आखर प्रेम का पढ़े सो पंडित होय
– कबीर

कबीर, kabir

REGULAR BLOGS

साहिर के नाम, औरतों के नाम

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से.... साहिर के नाम, औरतों के नाम         ये किरदार ये बातें बताती हैं कि तुम लोग         हवस की, गुनाहों की किसी...

कविता, कला, प्रकृति… नॉर्वे का स्त्वांगर

पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से.... कविता, कला, प्रकृति... नॉर्वे का स्त्वांगर               आसमान विशाल है, हम पढ़ते-सुनते हैं। आसमान विशाल है, हम कभी-कभार ऊपर झाँक लेते हैं।...

पर्यावरण और औद्योगिक कचरा

पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... पर्यावरण और औद्योगिक कचरा घर आंगन में आग लग रही सुलग रहे वन उपवन दर दीवारें चटख रही हैं जलते छप्पर छाजन तन जलता है, मन जलता...

क्या हम ‘आख़िरी आविष्कार’ के नज़दीक हैं?

पाक्षिक ब्लॉग ए. जयजीत की कलम से.... क्या हम ‘आख़िरी आविष्कार’ के नज़दीक हैं?             हाल ही नई दिल्ली में आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में सबके कान इसी पर लगे...

मुन्नाभाई MBBS और हिरानी की दुनिया

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो एक टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से ​चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण... पाक्षिक ब्लॉग (भाग-4) मानस की कलम...

विजय स्वर्णकार: लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर!

पाक्षिक ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से.... विजय स्वर्णकार: लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर             समकालीन हिंदी ग़ज़ल का आकाश जिन दैदीप्यमान नक्षत्रों से पुरनूर है, उनमें एक नाम विजय स्वर्णकार...

एचपीवी वैक्सीन: ये सवाल ज़रूर पूछें

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आलोक त्रिपाठी की कलम से.... एचपीवी वैक्सीन: ये सवाल ज़रूर पूछें             मुझसे पोस्ट्स और डीएम यानी इनबॉक्स में बार-बार पूछा जाता है, हमें वैक्सीन लगवानी चाहिए...

परचमों में क़ैद होकर रह गया हर रंग है

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से.... परचमों में क़ैद होकर रह गया हर रंग है रंग ज़िन्दगी को तालीम भी देते हैं और तरबीयत भी। रंग होंठों पर मुस्कान बिखेरते हैं। जीना सिखाते हैं।...

सुनना: लेखन की अनदेखी शुरूआत

पाक्षिक ब्लॉग संजीव जैन की कलम से.... सुनना: लेखन की अनदेखी शुरूआत             ध्वनि से अर्थ तक: लेखन की आंतरिक यात्रा की यह दूसरी कड़ी। हम सब सुनते हैं, पर...

पारंपरिक कलाएं बनाम नयी अभिव्यक्ति

पाक्षिक ब्लॉग शम्पा शाह की कलम से.... सोनाबाई और उनके मौन का विस्तार          सन् 1985 के आस-पास, एक दिन, हुआ यूँ कि कुछ संथाली युवक बीस मील पैदल चलकर अपने इष्ट...

दूब: हर चौथे मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... दूब: हर चौथे मध्यमवर्गीय परिवार की कहानी            हरियश राय हिंदी के उन उल्लेखनीय कथाकारों में हैं, जो निरंतर लेखन कर रहे हैं और...

आब-ए-गुम: यूसुफ़ी की काट का अकाट कारनामा

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... आब-ए-गुम: यूसुफ़ी की काट का अकाट कारनामा मुश्ताक अहमद यूसुफ़ी की यह किताब उर्दू तंज़-ओ-मिज़ाह (हास्य-व्यंग्य) साहित्य की सबसे अच्छी किताबों में से एक मानी जाती है। यह...

टिस्का की ‘चटनी’ और साकी की ‘दि ओपन विंडो’

मासिक ब्लॉग निशांत कौशिक की कलम से.... टिस्का की 'चटनी' और साकी की 'दि ओपन विंडो' इतालवी उपन्यासकार और गद्यकार उम्बर्तो एको ने कहा था, ज़िंदा रहने के लिए हमें कहानियाँ सुनानी ही होंगी। कहानी...

हिंदी नाटक में व्यंग्य-चेतना का विकास

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से.... हिंदी नाटक में व्यंग्य-चेतना का विकास : इतिहास और वर्तमान हिंदी साहित्य के प्रारंभिक वर्षों में व्यंग्य-नाटक व्यापक रूप से लिखे और मंचित किये जाते थे तथा...

दृष्टिकोण, आंदोलन, मौलिकता और क़ैफ़ी आज़मी

पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से.... दृष्टिकोण, आंदोलन, मौलिकता और क़ैफ़ी आज़मी          'गूंजती आवाज़ें' में प्रस्तुत आलेख मेरी स्मृति के पन्ने थे, जिन्हें मैं आपके सामने पलटता रहा। शायरी/ग़ज़ल से...