गोविंद सर की यादों का गुलशन

याद बाक़ी... तरुणा मिश्रा की कलम से.... गोविंद सर की यादों का गुलशन              ...

कृतित्व के आईने में ज्ञानरंजन

'मान' सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज...

कविता को नये संदर्भों में समझना होगा: रति सक्सेना

रति सक्सेना साहित्य की दुनिया में भली-भांति पहचानी जाती हैं। वर्ल्ड पोएट्री मूवमेंट और कृत्या पोएट्री फ़ेस्टिवल उनकी शख़्सियत के...

समर शेष है… और चुप्पी विशेष?

प्रतिरोध पंकज निनाद की कलम से.... समर शेष है...               विगत 7 जनवरी को...

अंक – 43

आब-ओ-हवा – अंक - 43 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में मुख्य रूप से ​महत्वपूर्ण साहित्यकार ज्ञानरंजन पर फ़ोकस। ग़ज़ल के चर्चित हस्ताक्षर गोविंद गुलशन...

ज्ञानरंजन का जाना

'मान' सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक पुरुष अर्थात बाबा को झकझोरती बच्ची...

mahshar badayuni, महशर बदायूंनी

अब हवाएं ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला
जिस दिये में जान होगी वो दिया रह जाएगा
– महशर बदायूंनी

आड़ दीवारों की लेकर बच गये सारे ​दिये
आंधियां क्या ख़ाक बतलाएंगी किसमें जान थी
– ज्ञानप्रकाश पांडेय

ज्ञानप्रकाश पांडेय, gyan prakash pandey

REGULAR BLOGS

नाम बदलने की समझ बनाम सनक

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से.... नाम बदलने की सनक बनाम समझ             एक राग है काफ़ी। जितना कर्णप्रिय राग है, इसका नाम भी कुछ कम नहीं। 'काफ़ी' बेमतलब...

कैसे ट्रीट करता है एक पोएट्री थेरेपिस्ट?-2

पाक्षिक ब्लॉग (गतांक से आगे) रति सक्सेना की कलम से.... कैसे ट्रीट करता है एक पोएट्री थेरेपिस्ट?-2               मैंने ग्लेन कॉलेजा से सवाल किया, "आपने कहा है कि हम...

जल-जंगल-ज़मीन-हवा और हम

पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से... जल-जंगल-ज़मीन-हवा और हम        जल, जंगल, ज़मीन और हवा के सवाल आज जीवन और अर्थव्यवस्था की धमनियों के प्रश्न बन गये हैं। पैनल ऑन क्लाइमेट...

तो क्या इंसानी दिमाग़ की उल्टी गिनती शुरू?

पाक्षिक ब्लॉग जयजीत अकलेचा की कलम से.... तो क्या इंसानी दिमाग़ की उल्टी गिनती शुरू?             कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हाल के दिनों में कई तरह की...

राज़: कैसे बन गयी कल्ट फिल्म?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो एक टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से ​चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण... पाक्षिक ब्लॉग मानस की कलम से.......

दरिया, कुहरा, मौत और नरेश कुमार शाद

पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से.... दरिया, कुहरा, मौत और नरेश कुमार शाद               पता नहीं मैं अपनी कच्ची उम्र के किस पड़ाव पे था, जब किसी किताब...

भांग का रासायनिक मूल्यांकन

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आलोक त्रिपाठी की कलम से.... भांग का रासायनिक मूल्यांकन                (एक पुराने पौधे की नई–पुरानी कहानी)                भारत में भांग...

वक़्त के ज़ख़्म और ग़ज़ल का दामन

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से.... वक़्त के ज़ख़्म और ग़ज़ल का दामन               निहायत सादगीपसंद और दिलचस्प गुफ़्तगू करने वाले ख़ुमार बाराबंकवी साहब का मैं इंटरव्यू ले...

हृदयनाथ का मंगेशकर घराना

पाक्षिक ब्लॉग विवेक सावरीकर मृदुल की कलम से.... हृदयनाथ का मंगेशकर घराना               पंडित हृदयनाथ मंगेशकर का नाम बॉलीवुड के संगीत आकाश में ध्रुव सितारे जैसा रहा है। चमकीला...

अक्षर ब्रह्म-नाद ब्रह्म और संत वाणियां

पाक्षिक ब्लॉग शम्पा शाह की कलम से.... अक्षर ब्रह्म-नाद ब्रह्म और संत वाणियां               स्कूल के दिनों में जब संत कवियों को पढा था, तो उनके कहन के तरीक़े...

स्त्री-त्रासदी की शाश्वत गाथा फुलिया…

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... स्त्री-त्रासदी की शाश्वत गाथा फुलिया...        आलोचना और कहानी लेखन के क्षेत्र में अस्मिता सिंह का जाना-माना नाम है। लघु-पत्रिकाओं के अलावा अनेक पत्र-पत्रिकाओं में उनकी...

आज़ाद का स्टाइल उन्हीं से शुरू, उन्हीं पर ख़त्म

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... आज़ाद का स्टाइल उन्हीं से शुरू, उन्हीं पर ख़त्म "आज़ाद नस्र (गद्य) में शायरी करते हैं और शायरी करते हुए नस्र लिखते हैं।" -राम बाबू सक्सेना "आज़ाद को...

हिन्दी ग़ज़ल में दृश्य चित्रण की बानगी-2

विजय कुमार स्वर्णकार की कलम से.... हिन्दी ग़ज़ल में दृश्य चित्रण की बानगी-2            पिछले भाग में हमने कुछ ऐसे अशआर की पड़ताल की जिनमें दृश्य चित्रण प्रमुख है और कथ्य...

भाषाओं के पार: व्यंग्य का भारतीय संसार-2

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से.... भाषाओं के पार: व्यंग्य का भारतीय संसार-2            दक्षिण भारतीय भाषाओं में तमिल-व्यंग्य की परंपरा अत्यंत प्राचीन और सामाजिक चेतना से जुड़ी रही...

नदियों के मायके की तस्वीर देखी आपने?

मासिक ब्लॉग दीक्षा मनीष की कलम से.... नदियों के मायके की तस्वीर देखी आपने?             भारत की प्रमुख नदियों की कोख हिमालय को माना जाता है लेकिन आप जानते हैं...