कहानी के बदलते स्वरूप
विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... कहानी के बदलते स्वरूप आज ए.आई. मॉडल, डिजिटल प्रभाव,...
विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... कहानी के बदलते स्वरूप आज ए.आई. मॉडल, डिजिटल प्रभाव,...
विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस...
नाम ही जिनका परिचय है, वह लता मंगेशकर कोरोना काल में अस्वस्थ होने के बाद जब ठीक होकर अपने निवास...
डॉ. आज़म की कलम से.... ताहिर फ़राज़ को ख़िराज "ताहिर फ़राज़ ने जनता की...
इंद्रधनुष-7 : डॉ. तारिक़ क़मर 'नयी ग़ज़ल में इमेजरी' विषय पर अपना शोध प्रबंध लिखने वाले डॉ. तारिक़ क़मर उर्दू शाइरी में अपनी एक ख़ास पहचान बना चुके हैं। 'शजर से लिपटी हुई बेल'...

जिस तरह हंस रहा हूं मैं पी-पी के गर्म अश्क
यूं दूसरा हंसे तो कलेजा निकल पड़े
– कैफ़ी आज़मी

जो गुज़ारी न जा सकी हमसे
हमने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
– जौन एलिया

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से.... अथ श्री पद्म-पुरस्कारम् प्रपंच कथा भारत रत्न तक के चयन पर उंगली उठती है, तब पद्म पुरस्कारों में नुक़्स निकालना बेरोज़गारों का काम...
पाक्षिक ब्लॉग (गतांक से आगे) रति सक्सेना की कलम से.... कविता थेरेपी को ज़िन्दगी में देखते हुए मैं पोइट्री थेरेपी की बात करते हुए लीक से ज़रा-सा भटक जाऊं, तो...
पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... ग्रीनलैंड: संकट की वैश्विक चुनौती कलाल्लित नुनात, जिसका नाम ग्लोब पर ग्रीनलैंड है, पृथ्वी का सबसे बड़ा द्वीप है जो 21.66...
पाक्षिक ब्लॉग ए. जयजीत की कलम से.... एआई हमें और ‘मक्कारी’ सिखा रही है! इंसान बाक़ी प्राणियों से किस मामले में अलग है? आप कहेंगे, दिमाग़! बेशक। लेकिन सृजनात्मक...
21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो एक टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण... पाक्षिक ब्लॉग (भाग-2) मानस की कलम...
'मान' सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक पुरुष अर्थात बाबा को झकझोरती बच्ची...
पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आलोक त्रिपाठी की कलम से.... सेहत आयात नहीं होती: सही भोजन कैसे चुनें? वेल्स में एक बार एक डॉक्टर ने कहा था, “एन एप्पल अ डे...
पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से.... सुबह और सांझ के माथे पर ग़मों की गठरी अलसुबह अरमानों को अपनी कांख में दबाकर कितने ही जिस्म सदियों से ज़िन्दगी...
पाक्षिक ब्लॉग विवेक सावरीकर मृदुल की कलम से.... राम गांगुली: 'आग' की शोहरत का पल भर में धुआं होना दोस्तो, विगत एक वर्ष से "उड़ जाएगा हंस अकेला" के...
पाक्षिक ब्लॉग शम्पा शाह की कलम से.... सोनाबाई... अपने अकेलेपन से मौलिक प्रतिशोध उनके घर के बरामदे में बनी मिट्टी की जालियों की ओर इशारा करते हुए जब मैं बार-बार...
पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... जातिवाद, मुस्लिम समाज में ऊँच-नीच की कहानियां 'तश्तरी' सुहेल वहीद द्वारा संपादित मुस्लिम समाज में जातिगत ऊँच-नीच पर केंद्रित कहानियों का संग्रह है। सुहेल वहीद का...
पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... उर्दू के शेक्सपियर का सिल्वर किंग सिल्वर किंग आग़ा हश्र कश्मीरी का एक बहुत मशहूर सुधारवादी और एजुकेशनल ड्रामा है। यह वेस्टर्न ड्रामा...
पाक्षिक ब्लॉग निशांत कौशिक की कलम से डिकेन्स कृत 'ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स'... एक पाठ 'ग्रेट एक्सपेक्टेशन्स' उन उपन्यासों में से एक है, जिसे मैंने अपने जीवन के शुरूआती दौर में...
पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से.... व्यंग्य का विश्वरूप: विदेशों में व्यंग्य लेखन का अध्ययन देश की विभिन्न भाषाओं में व्यंग्य की उपस्थिति पर लिखते समय यह प्रश्न...
पाक्षिक ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से.... वो अदम जिनका दम भरती है हिंदी ग़ज़ल! आब-ओ-हवा में जब मेरा लेख 'कब तक दुष्यंत की पीठ खुजाएगी हिंदी ग़ज़ल' प्रकाशित...

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