अंक – 50

आब-ओ-हवा – अंक - 50 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में विश्व शांति के पक्ष में युद्धग्रस्त क्षेत्रों के बच्चों के दुखों का लेखा-जोखा। बिहार...

अब कहाँ मिलते हैं दादाजी जैसे लोग!

संस्मरण ब्रज श्रीवास्तव की कलम से.... अब कहाँ मिलते हैं दादाजी जैसे लोग!              दादाजी परिवार का एक अत्यंत प्रिय और गरिमामय रिश्ता होते हैं। उन्हें पितामह भी कहा जाता...

क़मर जमील, qamar jameel

मैंने कुछ लोगों की तस्वीर उतारी है जमील
और कुछ लोग छुपा रक्खे हैं आईने में
– क़मर जमील

अपनी तस्वीर खींचता हूँ मैं
और आईना इंतिज़ार में है
– क़मर जमील

क़मर जमील, qamar jameel

--- REGULAR BLOGS ---

आपने सुनी आब-ओ-हवा की गूंज?

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से.... आपने सुनी आब-ओ-हवा की गूंज?             रघु राय साहब का जाना, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु व असम में चुनाव की सरगर्मियां, महिला आरक्षण को...

विश्व-सिनेमा की पहली महिला फिल्मकार

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से.... पहली फिल्म, जिसके खिलाफ सड़क पर उतरी जनता           नमस्कार साथियो, उम्मीद है आपको विश्व सिनेमा के इतिहास की यह सीरीज़ पसंद आ रही...

विकास और जलवायु आपातकाल

पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... विकास और जलवायु आपातकाल        भारत इस समय जिस प्रचंड ग्रीष्म लहर और असामान्य ताप वृद्धि के दौर से गुज़र रहा है, वह अब केवल...

हमारी पूरी आबो-हवा बर्बाद कर देगी AI?

पाक्षिक ब्लॉग ए. जयजीत की कलम से.... हमारी पूरी आबो-हवा बर्बाद कर देगी AI?           दुनिया का तो पता नहीं, मगर भारत की जनता इस समय गर्मी से त्राहिमाम कर रही...

फिल्म नहीं केस स्टडी है ‘कोई मिल गया’

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण ... पाक्षिक ब्लॉग (भाग-8) मानस की कलम...

कमलेश भट्ट कमल: नाम बड़ा और दर्शन?

पाक्षिक ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से.... कमलेश भट्ट कमल: नाम बड़ा और दर्शन?             हिंदी ग़ज़ल में अब तक जितनी भी लीपापोती हुई है, उसमें से एक मुद्दा हमेशा...

ज़हरीला विकास और हमारे बच्चों का कल

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आलोक त्रिपाठी की कलम से.... ज़हरीला विकास और हमारे बच्चों का कल            भारत एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ 'विकास' का अर्थ केवल आर्थिक विस्तार नहीं,...

सोते हुए जागना और जागते हुए सोना!

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से.... सोते हुए जागना और जागते हुए सोना!               अलसाई आंखें रात के अधूरे ख़्वाबों की दास्तां कह देती हैं। जागती आंखों में...

‘ध्वनि’ से शब्द तक पहुँचने की कारीगरी

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. संजीव की कलम से.... ‘ध्वनि’ से शब्द तक पहुँचने की कारीगरी        ध्वनि से अर्थ तक: लेखन की आंतरिक यात्रा का छठा अध्याय... जब लेखन अभिव्यक्त होना पहचानने लगता है,...

ईरान, सादिक़ हिदायत और अंधा उल्लू

मासिक ब्लॉग निशांत कौशिक की कलम से.... ईरान, सादिक़ हिदायत और अंधा उल्लू           मन फ़क़त बराए साये-अम मी-नवीसम के दर मुक़ाबिल-ए-नूर रूए दीवार अंदाख़्ते मी-शवद। बायद ख़ुदम रा बे आन मोअर्रफ़ी...

कथारस में सराबोर स्मृतियों के पन्ने

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... कथारस में सराबोर स्मृतियों के पन्ने          सूरज पालीवाल जी हमारे समय के प्रतिष्ठित आलोचकों में हैं। उन्होंने अपने लेखन की शुरूआत कहानीकार के रूप...

किश्वर नाहीद की बुरी औरत की कथा

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... किश्वर नाहीद की बुरी औरत की कथा          "बुरी औरत की कथा" किश्वर नाहीद लिखित ख़ुद-नविश्त सवानिह उमरी (आपबीती) है जो 1997 में लिखी गयी...

रोम बस रोम है…

पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से..... रोम बस रोम है...      इतिहास रोमन संस्कृति के बारे में जिस तरह से चीख-चीखकर कहता है, रोम अनजाने में हमारे मन में प्रवेश कर जाता है।...

सिनेमा में व्यंग्य: भारतीय संदर्भ में अध्ययन

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से.... सिनेमा में व्यंग्य: भारतीय संदर्भ में अध्ययन        दृश्य-श्रव्य माध्यमों, विशेषतः सिनेमा और टेलीविज़न, में व्यंग्य की भूमिका पर अपेक्षित गंभीर चर्चा प्रायः नहीं हुई...

नामचीन साहित्यकारों की चुटकियां-5

पाक्षिक ब्लॉग विवेक मेहता की कलम से.... नामचीन साहित्यकारों की चुटकियां-5            पिछली कड़ियों में हिंदी साहित्य जगत के स्वनामधन्य लेखकों/कलमकारों के बीच के चुटकुलों/कटाक्ष/हास्य लहरियों को यहां प्रस्तुत किया गया,...

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