ईरान की संस्कृति

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... ईरान की संस्कृति             ईरान की संस्कृति विश्व की...

क्यों दस दिन पहले ही दी गयी मंगल पांडे को फांसी?

फांसी दिवस पर प्रमोद दीक्षित मलय की कलम से.... क्यों दस दिन पहले ही दी गयी थी मंगल पांडे को...

चंद्रशेखर आज़ाद के ​घनिष्ठ सुरेंद्र पांडेय को जानते हैं आप?

इतिहास के पन्ने डॉ. शाह आलम राना की कलम से.... चंद्रशेखर आज़ाद के ​घनिष्ठ सुरेंद्र पांडेय को जानते हैं आप?...

इंद्रधनुष-8 : रुख़साना जबीन

इंद्रधनुष-8 : रुख़साना जबीन की शायरी   1955 में कश्मीर में जन्मी रुख़साना जबीन को समकालीन उर्दू अदब में ख़ास...

अंक – 48

आब-ओ-हवा – अंक - 48 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में शांति के हक़ में निरंतर आवाज़। कार्टून मूवमेंट से ओसवाल का कार्टून साभार, जो...

कविता पर एफआईआर!

कौन-सी कविता पर हुई एफआईआर? क्यों?               रूपम मिश्र समकालीन गद्य कविता जगत में एक चर्चित हस्ताक्षर मानी जाती हैं। उनकी एक कविता पर यह आरोप लगाते हुए एफ़आईआर...

कैफ़ी आज़मी, kaifi azmi

अपनी तारीख़ का उन्वान बदलना है तुझे
उठ मिरी जान मिरे साथ ही चलना है तुझे
– कैफ़ी आज़मी

मेरी महबूब मेरे साथ ही चलना है तुझे
रोशनी लेके अंधेरे से निकलना है तुझे
– मजरूह सुल्तानपुरी

Majrooh sultanpurii

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कितनी फ़िल्मी है हमारी डिप्लोमैसी!

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से.... कितनी फ़िल्मी है हमारी डिप्लोमैसी!              विदेश नीति, कूटनीतिक संबंधों में हम इस क़दर कमज़ोर हैं कि एक फ़िल्म से तबाह हो सकते...

क्रांति थी पहली कथा-फ़िल्म.. उसी की कहानी

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से.... क्रांति थी पहली कथा-फ़िल्म.. उसी की कहानी               नमस्कार दोस्तो, हम फिर हाज़िर हैं पिछली कहानी को आगे ले जाने के सिलसिले...

लद्दाख की आह और सोनम वांगचुक की आवाज़

पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... लद्दाख की आह और सोनम वांगचुक की आवाज़            हिमालय की धवल चोटियों और लद्दाख के सर्द मरुस्थल से उठी सोनम वांगचुक की...

सॉफ़्टवेयर कोडिंग को ‘श्रद्धांजलि’! क्या सच में?

पाक्षिक ब्लॉग ए. जयजीत की कलम से.... सॉफ़्टवेयर कोडिंग को ‘श्रद्धांजलि’! क्या सच में?          एक वक़्त था जब सॉफ़्टवेयर कोडिंग लिखने का मतलब होता था घंटों बैठकर हर लाइन को बड़े...

रंग दे बसंती: समाज व लोकतंत्र की ताकत

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण... पाक्षिक ब्लॉग (भाग-6) मानस की कलम से.......

सुल्तान अहमद: ख़ूबियां बनाम ख़ामियां

पाक्षिक ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से.... सुल्तान अहमद: ख़ूबियां बनाम ख़ामियां           इस बाज़ारवादी दौर में जब हर व्यक्ति अपनी क़ीमत बढ़ाने में लगा है, अपने प्रचार में लगा है,...

HPV वैक्सीन और फर्टिलिटी: रिपोर्ट्स व दावे

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आलोक त्रिपाठी की कलम से.... HPV वैक्सीन और फर्टिलिटी: रिपोर्ट्स व दावे             इधर जिस तरह सरकारी प्रचार तंत्र एचपीवी वैक्सीन के प्रचार में लगा है, वो...

हो जंग भी अगर तो मज़ेदार जंग हो

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से.... हो जंग भी अगर तो मज़ेदार जंग हो          दुनिया इस वक़्त युद्धरत है। एक इंसान अपनी पूरी ज़िन्दगी में युद्धरत रहता है। वह लड़ता...

लेखन निर्णय नहीं, आत्म-खोज है

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. संजीव जैन की कलम से.... लेखन निर्णय नहीं, आत्म-खोज है               ध्वनि से अर्थ तक: लेखन की आंतरिक यात्रा का चौथा अध्याय मनुष्य जब लिखता है...

आज अमेरिका और टू किल अ मॉकिंगबर्ड

मासिक ब्लॉग निशांत कौशिक की कलम से.... आज अमेरिका और टू किल अ मॉकिंगबर्ड          टू किल अ मॉकिंगबर्ड, जब हार्पर ली ने 1960 में यह उपन्यास लिखा, तब अमेरिका बड़े बदलावों...

फकीरा: एक जननायक की गाथा

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... फकीरा: एक जननायक की गाथा        प्रसिद्ध मराठी उपन्यास फकीरा का हिंदी अनुवाद 2025 में सेतु प्रकाशन से आया। मराठी के बहुत सम्मानित अण्णाभाऊ साठे का...

इक़बाल का तराना बांगे-दरा है गोया

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... इक़बाल का तराना बांगे-दरा है गोया         वैसे तो शायर-ए-मशरिक़ (पूर्व का शायर) अल्लामा इक़बाल की बहुत सारी किताबें बेहद मशहूर हैं, लेकिन "बांगे-दरा" सबसे...

शान्ति के प्रदेश ओस्लो में

पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से.... शान्ति के प्रदेश ओस्लो में          ओस्लो में मेरे होस्ट जॉन थे। जॉन कई वर्ष पहले भारत में नॉर्वे के राजदूत बनकर आये थे। वे...

लोकसाहित्य में व्यंग्य परंपरा और स्वरूप

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से.... लोकसाहित्य में व्यंग्य परंपरा और स्वरूप            किसी भी समाज की सांस्कृतिक चेतना का सबसे प्राचीन और जीवंत स्रोत लोकसाहित्य है। इसका सबसे...

नामचीन साहित्यकारों के रोचक कटाक्ष-3

पाक्षिक ब्लॉग विवेक मेहता की कलम से.... नामचीन साहित्यकारों के रोचक कटाक्ष-3             पिछली दो कड़ियों में हिंदी साहित्य जगत के स्वनामधन्य लेखकों/कलमकारों के बीच के चुटकुले/कटाक्ष/हास्य लहरियों को यहां...

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