उदन्त मार्तण्ड से लुप्त मेरुदण्ड तक

बादल सरोज की कलम से.... उदन्त मार्तण्ड से लुप्त मेरुदण्ड तक            यूं तो हाल के...

हिंदी पत्रकारिता नहीं, मानसिकता के 200 साल

हिंदी पत्रकारिता के 200 साल के सफ़र पर यह उड़ती-सी नज़र उस शख़्स की है, जिसने 1996 से 2019 तक...

मेरे भीतर की स्त्री

मेरे हिस्से का क़िस्सा... आब-ओ-हवा पर एक विशेष शृंखला। उम्र और सृजन का यादगार कथानक लिख चुके हस्ताक्षरों की कहानी,...

शायरी के निशाने पर ‘अख़बार’

हिंदी पत्रकारिता दिवस... 200 साल की हो गयी हिंदी की पत्रकारिता और कहां से कहां पहुंच गयी! भले ही अब...

अंक – 52

आब-ओ-हवा – अंक - 52 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की यह कड़ी हिंदी पत्रकारिता के 200 बरस पूरे होने के संदर्भ में विशेष। हिंदी पत्रकारिता की चिंता...

दुनिया भर के चहेते शायर थे बशीर बद्र

डॉ. नौमान की कलम से.... दुनिया भर के चहेते शायर थे बशीर बद्र..            'आमद', 'इकाई', 'इमेज' शेरी संकलनों के ख़ालिक (रचनाकार) अन्तरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त, पद्मश्री से नवाज़े गये उर्दू शायर एवं...

akbar allahabadi

खींचो न कमानों को न तलवार निकालो
जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो
– अकबर इलाहाबादी

कभी जो एक पन्ना तोप का मुँह तोड़ देता था
कहाँ गुम हो गयी है आज उस अख़बार की ताक़त
– हरीश दरवेश

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--- REGULAR BLOGS ---

हिंदी पत्रकारिता की आब-ओ-हवा

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से.... हिंदी पत्रकारिता की आब-ओ-हवा              जो गुमनामी से थक जाऊंगा औ' बदनामी चाहूंगा             बनाता था ख़बर अख़बार था...

एक शख़्स का जुनून यानी भारतीय सिनेमा की नींव

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से.... एक शख़्स का जुनून यानी भारतीय सिनेमा की नींव             नमस्कार साथियो, हम उम्मीद करते हैं आप सबको विश्व सिनेमा के इतिहास की...

‘ऐल्गी ट्री’ बनेंगे शहरों के नये फेफड़े?

पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... 'ऐल्गी ट्री' बनेंगे शहरों के नये फेफड़े?            कंक्रीट के जंगलों में तब्दील होते जा रहे आधुनिक शहरों में अब सांसों पर संकट...

क्या एआई ने बना लिया है अपना धर्म?

पाक्षिक ब्लॉग ए. जयजीत की कलम से.... क्या एआई ने बना लिया है अपना धर्म?              दुनिया का तो नहीं मालूम, लेकिन बीते कुछ वर्षों से भारत में नित नये-नये...

विक्की डोनर: एक फ़िल्म से बनी कई की राह

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण ... पाक्षिक ब्लॉग (भाग-10) मानस की कलम...

हिंदी ग़ज़ल में भूमिकाबाज़ी और डीएम मिश्र

पाक्षिक ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से.... हिंदी ग़ज़ल में भूमिकाबाज़ी और डीएम मिश्र            हिंदी ग़ज़ल के कुश्तीबाज़ ग़ज़लकारों में डी.एम. मिश्रा साहब का नाम बड़े आदर से लिया जाता...

प्रकृति अनावश्यक कुछ नहीं करती

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आलोक त्रिपाठी की कलम से.... प्रकृति अनावश्यक कुछ नहीं करती              बचपन में एक बार कड़वा खीरा खा लिया और मुंह खराब हो गया। फिर बहुत ग़ुस्सा...

‘दुनिया मुट्ठी में’ या मुट्ठी से फिसलती दुनिया?

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से.... 'दुनिया मुट्ठी में' या मुट्ठी से फिसलती दुनिया? इंसानी ज़िंदगी में बहुत ज़्यादा तब्दीलियां हो चुकी हैं। किसी वक़्त जब टेलीविज़न आया था तब यह चिंता जतायी जा...

लेखन में अर्थ का वास्तविक घर

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. संजीव जैन की कलम से.... लेखन में अर्थ का वास्तविक घर             ध्वनि से अर्थ तक: लेखन की आंतरिक यात्रा का आठवां अध्याय... “लेखन में ‘अर्थ’ एक...

उपन्यास ‘चौरंगी’ और शंकर का जाना

मासिक ब्लॉग निशांत कौशिक की कलम से.... उपन्यास 'चौरंगी' और शंकर का जाना मुझे शंकर के बारे में पहली बार लगभग 2011 में पता चला, जब द हिन्दू में विवेकानंद पर लिखी उनकी किताब के...

‘आत्मसंभवा आण्डाल’: भक्ति साहित्य में स्त्री-स्वर

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... 'आत्मसंभवा आण्डाल': भक्ति साहित्य में स्त्री-स्वर           आज जिस पुस्तक पर चर्चा है वह कथा साहित्य का हिस्सा नहीं है। बाइस-तेईस सौ वर्ष पूर्व...

हास्य-व्यंग्य का शाहकार इब्न-ए-इंशा की यह किताब

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... हास्य-व्यंग्य का शाहकार इब्न-ए-इंशा की यह किताब "उनकी प्रवाहमयी गद्य शैली ने अनगिनत सुंदर, लेकिन अब अप्रचलित और भुला दिये गये शब्दों में नयी जान और ऊर्जा भर...

दानुबे नदी किनारे बसी संस्कृति विएना

पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से..... दानुबे नदी किनारे बसी संस्कृति विएना            रोम से विएना की दूरी कम नहीं है, लेकिन ट्रेन से क़रीब 12 घण्टे में पहुँच गये।...

व्यंग्य की काव्य-यात्रा: कबीर से समकाल तक

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से.... व्यंग्य की काव्य-यात्रा: कबीर से समकाल तक          गद्य-व्यंग्य के सुव्यवस्थित रूप में विकसित होने से बहुत पहले ही हिंदी काव्य-परंपरा में व्यंग्य की...

नामचीन साहित्यकारों की चुटकियां-7

पाक्षिक ब्लॉग विवेक मेहता की कलम से.... नामचीन साहित्यकारों की चुटकियां-7              पिछली कड़ियों में हिंदी साहित्य जगत के स्वनामधन्य लेखकों/कलमकारों के बीच के चुटकुलों/कटाक्ष/हास्य लहरियों को यहां प्रस्तुत किया...

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