चित्रकारी: छोटे बच्चे उर्फ़ बड़े कलाकार

चित्रकारी: छोटे बच्चे उर्फ़ बड़े कलाकार इस माह गांधी, शास्त्री और कलाम जयंती को बच्चों के साथ हमने ऐसे मनाया।...

मालवी लोककथाएं: नानी वाली कहानियां

#नयेसुर... इस अंक में नियमित ब्लॉग्स के अलावा जो भी सृजन है, सब बाक़ायदा विद्यार्थियों के द्वारा। इस अंक में...

डिग्री मेरी, संघर्ष मेरा… सवाल पूरी व्यवस्था से

#नयेसुर... इस अंक में नियमित ब्लॉग्स के अलावा जो भी सृजन है, सब बाक़ायदा विद्यार्थियों के द्वारा। इस अंक में...

और बड़ी लड़ाई बाक़ी है अभी: नेहा बोरा

#नयेसुर... इस अंक में नियमित ब्लॉग्स के अलावा जो भी सृजन है, सब बाक़ायदा विद्यार्थियों के द्वारा। इस अंक में...

अंक – 56

आब-ओ-हवा – अंक - 56 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की एक और ख़ास कड़ी- कलाम की जयंती यानी 'विश्व छात्र दिवस' पर जारी हो रहा यह अंक...

सहमति का लोकतंत्र

#नयेसुर... इस अंक में नियमित ब्लॉग्स के अलावा जो भी सृजन है, सब बाक़ायदा विद्यार्थियों के द्वारा। इस अंक में चार पीढ़ियों के वो रचनाकार शामिल हैं, जो उम्र के विभिन्न पड़ावों पर किसी शिक्षण...

ग़ुलाम हमदानी 'मुसहफ़ी', musahfi, ghulam hamdani

क्या चीज़ दिल है चाहिए तो जान लीजिए
पर बात कोई है जो कहूं मान लीजिए
– ग़ुलाम हमदानी ‘मुसहफ़ी’

दिल चीज़ क्या है आप मेरी जान लीजिए
बस एक बार मेरा कहा मान मान लीजिए
– शहरयार

शहरयार, shahryar

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साहित्य में मुख्यधारा के सवाल

हिंदी-उर्दू के कुछ विशिष्ट हस्ताक्षरों का जन्म 1926-27 में हुआ। हालांकि कुंवर नारायण, नामवर सिंह, ख़लील-उर-रहमान आज़मी, साजिदा ज़ैदी, रमानाथ अवस्थी, मोहम्मद अल्वी, नरेश कुमार शाद, गुलज़ार देहलवी, इब्ने-इंशा, विजयदान देथा, ख़दीजा मस्तूर जैसे नाम...

भावेश जोशी और हमारे सुपरहीरो

इस स्तंभ में 21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन... नियमित ब्लॉग (भाग-14) मानस की कलम से... भावेश जोशी...

आलापचारी: मां-बेटी के रिश्तों का नया रूप

नियमित ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... आलापचारी: मां-बेटी के रिश्तों का नया रूप               रजनी गुप्त हिंदी की जानी-मानी, चर्चित कथाकार हैं। उनके दस उपन्यास और नौ कहानी...

हरेराम समीप और हिंदी ग़ज़ल में कन्फ़्यूज़न

नियमित ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से.... हरेराम समीप और हिंदी ग़ज़ल में कन्फ़्यूज़न             ग़ज़ल एक ऐसी सिन्फ़ है, जिसमें शब्दों के रख-रखाव का विशेष महत्व है। शब्दों के...

गोल्लागुप्पा की घटना, मीडिया की सक्रियता: संदेश क्या?

नियमित ​ब्लॉग डॉ. आलोक त्रिपाठी की कलम से.... गोल्लागुप्पा की घटना, मीडिया की सक्रियता: संदेश क्या?             पिछले महीने के शुरू में आंध्र प्रदेश के एक गांव में एक ऐसी...

मुशायरे: रिवायत, अहमियत और फ़ायदे-2

नियमित ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... मुशायरे: रिवायत, अहमियत और फ़ायदे-2              अब रुख़ करते हैं दिल्ली के दीगर मुशायरों की तरफ़। दरबारी मुशायरों के सिवा भी लोग अपने...

एआई के इस डर में कितना है बाज़ार का खेल?

नियमित ब्लॉग ए. जयजीत की कलम से.... एआई के इस डर में कितना है बाज़ार का खेल?             यह ख़बर है तो छोटी-सी, मगर है बड़ी चिंताजनक। गूगल ने एक...

वेलेस: सिनेमाई रचनात्मक स्वतंत्रता का पहला विचार

नियमित ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से.... वेलेस: सिनेमाई रचनात्मक स्वतंत्रता का पहला विचार ऑर्सन वेलेस (Orson Welles) का नाम विश्व सिनेमा के इतिहास में उन कलाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने यह साबित किया...

भाषा, जीवन और नियंत्रण का अदृश्य तंत्र

नियमित ब्लॉग डॉ. संजीव जैन की कलम से.... भाषा, जीवन और नियंत्रण का अदृश्य तंत्र           ध्वनि से अर्थ तक: लेखन की आंतरिक यात्रा का 12वां अध्याय।        ...

बाज़ार और सांप्रदायिकता

नियमित ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से.... बाज़ार और सांप्रदायिकता मुक्त रहना यह कठिन काम है- आंद्रे ज़ीदधर्म और मनोरंजन की दो झीनी परतें देह पर चिपकी हैं। जब लोग नैतिक होंगे मनोरंजन की परत...

सदी के ‘नये तेल’: पर्यावरण की बड़ी चुनौती

नियमित ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... सदी के 'नये तेल': पर्यावरण की बड़ी चुनौती             स्मार्टफ़ोन की चमचमाती स्क्रीन से लेकर इलेक्ट्रिक वाहनों की साइलेंट रफ़्तार और पवन...

आसमान की ख़्वाहिश और ज़मीन को भूलना

नियमित ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से.... आसमान की ख़्वाहिश और ज़मीन को भूलना          आसमान छूने की ख़्वाहिश एक बच्चे की उस ख़्वाहिश की तरह नहीं है, जो चांद को पाना...

अलारिज, स्पेन का एक चमत्कारी नगर

नियमित ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से.... अलारिज, स्पेन का एक चमत्कारी नगर              सच कहूँ तो मुझे मालूम ही नहीं था कि स्पेन के दक्षिण छोर पर एक ऐसा...

द टनल: असहज पाठकीय अनुभव देती कथा

मासिक ब्लॉग निशांत कौशिक की कलम से.... द टनल: असहज पाठकीय अनुभव देती कथा               एक मित्र के सुझाव से बीते दिनों अर्जेण्टीना के कथाकार और चित्रकार अर्नेस्तो सबातो...

रंग बिरंगी: नामचीन साहित्यकारों की चुटकियां-11

नियमित ब्लॉग विवेक मेहता की प्रस्तुति... रंग बिरंगी: नामचीन साहित्यकारों की चुटकियां-11              हिंदी-उर्दू के साथ ही भारतीय साहित्य जगत के स्वनामधन्य लेखकों/कलमकारों के बीच के चुटकुलों/कटाक्ष/हास्य लहरियों को प्रस्तुत...

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