किताबें कुछ कहना चाहती हैं…

'मान' सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज...

मध्य-पूर्व में शांति की अधूरी कहानी

डॉ. आकिब जावेद की कलम से.... मध्य-पूर्व में शांति की अधूरी कहानी            “शक्ति वहाँ केंद्रित...

मानवीय सभ्यता और युद्ध

मधु सक्सेना की कलम से.... मान          "अरे छोरी रुक तो... कंघी तो करवा ले।" मम्मी चिल्लाती...

हरिऔध के काव्य में संवेदना और संदेश

निबंध विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... हरिऔध के काव्य में संवेदना और संदेश            ...

अंक – 49

आब-ओ-हवा – अंक - 49 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में शांति के पक्ष में एक और हांका। दुनिया में चल रहे युद्धों के परिप्रेक्ष्य...

कविता पर एफआईआर!

कौन-सी कविता पर हुई एफआईआर? क्यों?               रूपम मिश्र समकालीन गद्य कविता जगत में एक चर्चित हस्ताक्षर मानी जाती हैं। उनकी एक कविता पर यह आरोप लगाते हुए एफ़आईआर...

Mirza ghalib, मिर्ज़ा ग़ालिब

जी ढूंढ़ता है फिर वही फ़ुरसत कि रात-दिन
बैठे रहें तसव्वुर-ए-जानां किये हुए
– मिर्ज़ा ग़ालिब

अब मयस्सर नहीं फ़ुरसत के वो दिन रात हमें
ले उड़ी जाने कहां सरसर-ए-हालात हमें
– शकेब जलाली

शकेब जलाली, shakeb jalali

--- REGULAR BLOGS ---

आशा भोसले: वर्जनाओं के विरुद्ध…

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से.... आशा भोसले: वर्जनाओं के विरुद्ध...            कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो एक या कुछ पीढ़ियों को न सिर्फ़ मुतास्सिर करते हैं बल्कि आकार...

पहली फिल्म, जिसके खिलाफ सड़क पर उतरी जनता

पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से.... पहली फिल्म, जिसके खिलाफ सड़क पर उतरी जनता नमस्कार दोस्तो, विश्व सिनेमा का इतिहास बहुत दिलचस्प और रोमांचित करने वाला है। बिल्कुल एक मल्टीस्टारर फ़िल्म की तरह जिसमें...

गंगाजल की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय चेतावनी

पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... गंगाजल की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय चेतावनी          फरवरी 2026 में ब्रिटिश जीवविज्ञानी और टीवी प्रस्तोता जेरेमी वेड का वीडियो वायरल हुआ। ​वे दुनिया भर...

एआई की ‘ज़ुल्मी दुनिया’ में एंथ्रोपिक की ‘गांधीगीरी’!

पाक्षिक ब्लॉग ए. जयजीत की कलम से.... एआई की ‘ज़ुल्मी दुनिया’ में एंथ्रोपिक की ‘गांधीगीरी’!        फरवरी 2025 में कैलिफ़ोर्निया के शहर सांता क्लारा के एक होटल के कमरे में एंथ्रोपिक कंपनी के...

क्यों प्रासंगिक बनी हुई है ‘हज़ारों ख़्वा​हिशें ऐसी’?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण... पाक्षिक ब्लॉग (भाग-7) मानस की कलम से.......

रामकुमार कृषक: विश्वसनीयता का संकट

पाक्षिक ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से.... रामकुमार कृषक: विश्वसनीयता का संकट            सत्तर के आस-पास का समय रहा होगा, जब रामकुमार कृषक साहित्य की दुनिया में आये। ऐसा माना जाता...

ऐसे ग़ायब हो गया आपका ‘असली’ खाना

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आलोक त्रिपाठी की कलम से.... ऐसे ग़ायब हो गया आपका 'असली' खाना              क्या सिर्फ़ मुझे लग रहा है — या असली बीज वाली सब्ज़ियाँ और फल...

शहर की कीमत बढ़ी तो इंसान की घटी

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से.... शहर की कीमत बढ़ी तो इंसान की घटी     अभी वक़्त ने एक नये फ़ाइनेंशियल ईयर में क़दम रखा। इसमें यह तब्दीली नज़र आयी कि अब हर...

लेखन बोलना नहीं, अभिव्यक्त होना है

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. संजीव जैन की कलम से.... लेखन बोलना नहीं, अभिव्यक्त होना है             ध्वनि से अर्थ तक: लेखन की आंतरिक यात्रा का पांचवा अध्याय...मनुष्य बोलना सीखता है, पर...

आज अमेरिका और टू किल अ मॉकिंगबर्ड

मासिक ब्लॉग निशांत कौशिक की कलम से.... आज अमेरिका और टू किल अ मॉकिंगबर्ड          टू किल अ मॉकिंगबर्ड, जब हार्पर ली ने 1960 में यह उपन्यास लिखा, तब अमेरिका बड़े बदलावों...

एक दिन का सफ़र: स्त्री व्यथा-कथा के विविध रूप

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... एक दिन का सफ़र: स्त्री व्यथा-कथा के विविध रूप      हाल-फ़िलहाल में प्रकाशित 'एक दिन का सफ़र' लेखिका कल्पना मनोरमा का पहला कहानी संग्रह है। अध्यापन और...

उर्दू में आलोचना की ज़ोरदार किताब

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... उर्दू में आलोचना की ज़ोरदार किताब      "काशिफ़ अल-हक़ाइक़" 1894 में प्रकाशित हुई। इमदाद इमाम "असर" की लिखी हुई उर्दू भाषा की बेहद महत्वपूर्ण तनक़ीदी (आलोचना) किताब...

मोंजा: कविता के नाम एक नगर-भ्रमण

पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से.... मोंजा: कविता के नाम एक नगर-भ्रमण        मोंजा की यात्रा से पहले नॉर्वे की यात्रा हो चुकी थी, लेकिन यूरोप यात्रा का मक़सद मोंजा के पोएट्री...

लोकसाहित्य में व्यंग्य परंपरा व स्वरूप-2

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से.... लोकसाहित्य में व्यंग्य परंपरा व स्वरूप-2          पिछले अंक में हमने लोकगीतों और लोककाव्य को दृष्टिगत रखते हुए व्यंग्य उपस्थिति की परंपरा और स्वरूप...

नामचीन साहित्यकारों की चुटकियां-4

पाक्षिक ब्लॉग विवेक मेहता की कलम से.... नामचीन साहित्यकारों की चुटकियां-4              पिछली कड़ियों में हिंदी साहित्य जगत के स्वनामधन्य लेखकों/कलमकारों के बीच के चुटकुलों/कटाक्ष/हास्य लहरियों को यहां प्रस्तुत किया...

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