साहित्य की आत्मा और सिनेमा का पर्दा
विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... साहित्य की आत्मा और सिनेमा का पर्दा लेखकीय...
विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... साहित्य की आत्मा और सिनेमा का पर्दा लेखकीय...
आब-ओ-हवा के सिलसिले 'गूंज बाक़ी' के लिए एक और यादगार लेख। अक्टूबर 1991 धर्मयुग में प्रकाशित लाडलीमोहन निगम का यह...
विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... ईरान की संस्कृति ईरान की संस्कृति विश्व की...
इंद्रधनुष-8 : रुख़साना जबीन की शायरी 1955 में कश्मीर में जन्मी रुख़साना जबीन को समकालीन उर्दू अदब में ख़ास...
कौन-सी कविता पर हुई एफआईआर? क्यों? रूपम मिश्र समकालीन गद्य कविता जगत में एक चर्चित हस्ताक्षर मानी जाती हैं। उनकी एक कविता पर यह आरोप लगाते हुए एफ़आईआर...

अपनी तारीख़ का उन्वान बदलना है तुझे
उठ मिरी जान मिरे साथ ही चलना है तुझे
– कैफ़ी आज़मी

मेरी महबूब मेरे साथ ही चलना है तुझे
रोशनी लेके अंधेरे से निकलना है तुझे
– मजरूह सुल्तानपुरी

पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से.... कितनी फ़िल्मी है हमारी डिप्लोमैसी! विदेश नीति, कूटनीतिक संबंधों में हम इस क़दर कमज़ोर हैं कि एक फ़िल्म से तबाह हो सकते...
पाक्षिक ब्लॉग चारु शर्मा की कलम से.... क्रांति थी पहली कथा-फ़िल्म.. उसी की कहानी नमस्कार दोस्तो, हम फिर हाज़िर हैं पिछली कहानी को आगे ले जाने के सिलसिले...
पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से.... लद्दाख की आह और सोनम वांगचुक की आवाज़ हिमालय की धवल चोटियों और लद्दाख के सर्द मरुस्थल से उठी सोनम वांगचुक की...
पाक्षिक ब्लॉग ए. जयजीत की कलम से.... सॉफ़्टवेयर कोडिंग को ‘श्रद्धांजलि’! क्या सच में? एक वक़्त था जब सॉफ़्टवेयर कोडिंग लिखने का मतलब होता था घंटों बैठकर हर लाइन को बड़े...
21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण... पाक्षिक ब्लॉग (भाग-6) मानस की कलम से.......
पाक्षिक ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से.... सुल्तान अहमद: ख़ूबियां बनाम ख़ामियां इस बाज़ारवादी दौर में जब हर व्यक्ति अपनी क़ीमत बढ़ाने में लगा है, अपने प्रचार में लगा है,...
पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आलोक त्रिपाठी की कलम से.... HPV वैक्सीन और फर्टिलिटी: रिपोर्ट्स व दावे इधर जिस तरह सरकारी प्रचार तंत्र एचपीवी वैक्सीन के प्रचार में लगा है, वो...
पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से.... हो जंग भी अगर तो मज़ेदार जंग हो दुनिया इस वक़्त युद्धरत है। एक इंसान अपनी पूरी ज़िन्दगी में युद्धरत रहता है। वह लड़ता...
पाक्षिक ब्लॉग डॉ. संजीव जैन की कलम से.... लेखन निर्णय नहीं, आत्म-खोज है ध्वनि से अर्थ तक: लेखन की आंतरिक यात्रा का चौथा अध्याय मनुष्य जब लिखता है...
मासिक ब्लॉग निशांत कौशिक की कलम से.... आज अमेरिका और टू किल अ मॉकिंगबर्ड टू किल अ मॉकिंगबर्ड, जब हार्पर ली ने 1960 में यह उपन्यास लिखा, तब अमेरिका बड़े बदलावों...
पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... फकीरा: एक जननायक की गाथा प्रसिद्ध मराठी उपन्यास फकीरा का हिंदी अनुवाद 2025 में सेतु प्रकाशन से आया। मराठी के बहुत सम्मानित अण्णाभाऊ साठे का...
पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... इक़बाल का तराना बांगे-दरा है गोया वैसे तो शायर-ए-मशरिक़ (पूर्व का शायर) अल्लामा इक़बाल की बहुत सारी किताबें बेहद मशहूर हैं, लेकिन "बांगे-दरा" सबसे...
पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से.... शान्ति के प्रदेश ओस्लो में ओस्लो में मेरे होस्ट जॉन थे। जॉन कई वर्ष पहले भारत में नॉर्वे के राजदूत बनकर आये थे। वे...
पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से.... लोकसाहित्य में व्यंग्य परंपरा और स्वरूप किसी भी समाज की सांस्कृतिक चेतना का सबसे प्राचीन और जीवंत स्रोत लोकसाहित्य है। इसका सबसे...
पाक्षिक ब्लॉग विवेक मेहता की कलम से.... नामचीन साहित्यकारों के रोचक कटाक्ष-3 पिछली दो कड़ियों में हिंदी साहित्य जगत के स्वनामधन्य लेखकों/कलमकारों के बीच के चुटकुले/कटाक्ष/हास्य लहरियों को यहां...

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