कहानी- अंडे वाले मौली साब

बीते जीवन की स्मृतियों से गलबहियाँ करना अर्थात अतीत-राग सुखद अहसास होता है, नॉस्टैल्जिया साहित्य के लिए अत्यंत उपजाऊ विषय है क्योंकि यह रचनात्मकता को जन्म देता है। समकालीन...

मछली का मायका

पंजाबी और हिंदी दोनों में समानाधिकार से लिखने वाले कथाकार गुलबीर सिंह भाटिया की कहानियाँ मानवीय रिश्तों की, आम ज़िंदगी की छोटी-बड़ी किन्तु गहरा प्रभाव डालने वाली उलझनों और...

वॉन गॉग का कान

देश की विभिन्न गंभीर समस्याओं, देश के विकास की राह और सामाजिक विडंबनाओं पर चिंतन व विमर्श के लिए, दिशा दर्शन के लिए कलाकार का, लेखक का कोई दायित्व...

जादू

प्रकृति जब अपने विराट् रूप में खुलती है, तब दरअसल मन के भीतर के रहस्यों के खुलने की घटना होती है। कथा साहित्य में पहचान बना रहीं शशि खरे...

सज़ा

लोकरंग की लघुकथा पंकज निनाद की कलम से…. सज़ा              जबसे उसने होश संभाला था, वो तीन सरकारें बदलते देख चुका था। सब कुछ...

तिड़ककर टूटना

कहानी सूक्ष्म संवेदनशीलता और अभूतपूर्व चित्रात्मकता के कारण प्रभावित करती है। सृजन करने की नैसर्गिक चाह एवं अभिव्यक्ति की इच्छा मिलकर स्वरा के रूप में लेखिका के अंतर्मन से...

दरवाज़ा

मुंशी प्रेमचंद ने शुरू में (और उसके बाद भी) ‘नवाबराय’ नाम से उर्दू में विशद लेखन किया। हालांकि अब के हिंदी पाठकों तक उनकी उर्दू कहानियां कम ही पहुंचीं।...

मान

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

बेटी बहुत रुलाती है

डॉ. सतीश ‘बब्बा’ की इस कहानी में सरल आम जीवन का कथानक है, इसमें उल्लेख के लायक़ नया कुछ नहीं है। फिर भी प्रस्तुत कहानी का आकर्षण उसकी अत्यंत...

कहानी :- एक प्रोफेसर की हत्या

विक्रम सिंह लिखित कहानी “प्रोफ़ेसर की हत्या” की मज़बूत नींव उसके आरंभ में ही है। हिंदी कहानी में नया-सा अलग हटकर प्रयोग किया है, जो कथा-घटित के प्रति, पात्रों...
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