महिला आरक्षण की अधूरी यात्रा और लोकतंत्र

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. महिला आरक्षण की अधूरी यात्रा और लोकतंत्र              भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक़त उसकी विविधता और समावेशिता...

साहित्य की आत्मा और सिनेमा का पर्दा

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. साहित्य की आत्मा और सिनेमा का पर्दा              लेखकीय भावना के साथ न्याय या निर्देशक का व्यवसायिक रूपांतरण,...

एपिस्टीन फाइल की गूंज बनाम भयंकर धमाके

आदित्य की कलम से…. एपिस्टीन फ़ाइल की गूंज बनाम भयंकर धमाके              विदेशी मीडिया द्वारा एपिस्टीन को एक घृणित अपराधी के रूप में बताया...

एनसीईआरटी बनाम न्यायपालिका

​आदित्य की कलम से…. एनसीईआरटी बनाम न्यायपालिका              सर्वोच्च न्यायालय ने जमकर लताड़ लगायी। एनसीईआरटी जैसी नख-दंत-विहीन संस्थान की ऐसी हिमाकत! कि न्यायालय का...

मोदी जी की उपलब्धियां

हास्य-व्यंग्य श्रीकांत आप्टे की कलम से…. मोदी जी की उपलब्धियां            बारह साल हो गये मोदीजी को प्रधानमंत्री बनकर। तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ...

“मैं कुछ नहीं करती..”

संदर्भ-अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस, प्रमोद दीक्षित मलय की कलम से…. “मैं कुछ नहीं करती..”             गत वर्ष फरवरी के उत्तरार्ध में शिक्षकों के एक तीन-दिवसीय...

इज़रायल बनाम हमास: नाइंसाफ़ी से लड़तीं आइदा से चर्चा

अपनी संक्षिप्त फ़लीस्तीन यात्रा के दौरान विनीत तिवारी ने आयदा टूमा सुलेमान के साथ जेरूसलम में बातचीत की, यात्रा से लौटकर उसे लिपिबद्ध किया है। लेखक द्वारा उपलब्ध करवाया...

समर शेष है… और चुप्पी विशेष?

प्रतिरोध पंकज निनाद की कलम से…. समर शेष है…               विगत 7 जनवरी को बिलासपुर में गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय और साहित्य अकादमी...
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