कॉकरोच वहीं होते हैं, जहाँ गंदगी है

उलटबाँसी विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. कॉकरोच वहीं होते हैं, जहाँ गंदगी है            सुनो साधो! पहले कॉकरोच घर के कोनों में मिलते थे।...

उदन्त मार्तण्ड से लुप्त मेरुदण्ड तक

बादल सरोज की कलम से…. उदन्त मार्तण्ड से लुप्त मेरुदण्ड तक            यूं तो हाल के लगभग डेढ़ दशक भारतीय प्रेस – विशेषकर हिंदीभाषी प्रेस...

कॉकरोच पार्टी और बेसुरे दौर में ‘मेलोडी’ राग

व्यंग्य विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. कॉकरोच पार्टी और बेसुरे दौर में ‘मेलोडी’ राग             दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के सियासी अखाड़े...

महिला आरक्षण की अधूरी यात्रा और लोकतंत्र

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. महिला आरक्षण की अधूरी यात्रा और लोकतंत्र              भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक़त उसकी विविधता और समावेशिता...
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