वैश्विक शिक्षण संस्थानों में हिंदी का भविष्य

डॉ. हंसा दीप की कलम से…. वैश्विक शिक्षण संस्थानों में हिंदी का भविष्य             भारत और विदेशी धरती पर हिंदी अध्यापन की निरंतरता मेरा...

फ़िराक़ की शायरी के रहस्य

गूंज बाक़ी… डॉ. जाफ़र रज़ा संपादित किताब ‘बज़्मे ज़िंदगी:रंगे शायरी’ की भूमिका फ़िराक़ गोरखपुरी (28.08.1896-03.03.1982) ने 12 अक्टूबर 1970 को ‘मैं और मेरी शायरी’ शीर्षक से लिखी थी। भाषा...

प्रेमचंद, सज्जाद ज़हीर और प्रगतिशील आंदोलन

31 जुलाई प्रेमचंद जयंती पर ज़ाहिद ख़ान की कलम से…. प्रेमचंद, सज्जाद ज़हीर और प्रगतिशील आंदोलन             तरक़्क़ी-पसंद अदीबों का पहला ग्रुप साल 1935...

जनसंचार शिक्षा के सामने चुनौतियां

प्रो. संजय द्विवेदी की कलम से…. जनसंचार शिक्षा के सामने चुनौतियां            शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्ति को आत्मनिर्भर, संवेदनशील और मूल्यनिष्ठ नागरिक बनाना है।...

अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल

पेज 1 से आगे………. राजेश बादल की कलम से…. अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल दूसरा खंड उर्फ़ तिलक युग बहरहाल! आगे बढ़ते हैं। तिलक युग की पत्रकारिता याने...

अख़बारनवीसी: वे एक सौ अड़सठ साल

‘हिंदी पत्रकारिता के 200 साल’ के संदर्भ में विशेष प्रस्तुति… यह आलेख ‘समग्र भारतीय पत्रकारिता’ ग्रन्थ की समीक्षा नहीं, बल्कि इस नायाब धरोहर के बहाने भारतीय पत्रकारिता के 200...

जब सिनेमा बेकरार था कि सत्यजीत रे आएं…

गूंज बाक़ी… सत्यजीत रे (02.05.1921-23.04.1992) की याद के दिन एक महत्वपूर्ण दस्तावेज़। 1980 में नैशनल बुक ट्रस्ट से छपी किताब ‘सत्यजीत राय का सिनेमा’, लेखक चिदानंद दास गुप्ता और...
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