सहमति का लोकतंत्र

#नयेसुर… इस अंक में नियमित ब्लॉग्स के अलावा जो भी सृजन है, सब बाक़ायदा विद्यार्थियों के द्वारा। इस अंक में चार पीढ़ियों के वो रचनाकार शामिल हैं, जो उम्र...

लोकगीतों में गांधी

भवेश दिलशाद की कलम से…. लोकगीतों में गांधी             बौद्ध स्तूप आपने सुने हैं, गया में बताते हैं गांधी की भस्म को सहेजने वाला...

गांधी और हिंदी सिनेमा: एक यात्रा

प्रसंगवश… मूलत: ‘गांधी के जीवनादर्शों का हिंदी सिनेमा पर प्रभाव’ शीर्षक वाले इस लेख में गांधी के विचारों को परदे पर लाती फ़िल्मों का समाजशास्त्रीय ​विश्लेषण पर्याप्त है। अनहद...

डीकोडिंग गांधी वाया हिंद स्वराज

प्रसंगवश… मूलत: ‘हिंद स्वराज और महात्मा गांधी’ शीर्षक वाले इस लेख में गांधी के गहन विचारों का अध्ययन एवं ​विश्लेषण पर्याप्त गहनता से है। ‘हिन्द स्वराज’ के शताब्दी वर्ष...

वैश्विक शिक्षण संस्थानों में हिंदी का भविष्य

डॉ. हंसा दीप की कलम से…. वैश्विक शिक्षण संस्थानों में हिंदी का भविष्य             भारत और विदेशी धरती पर हिंदी अध्यापन की निरंतरता मेरा...

फ़िराक़ की शायरी के रहस्य

गूंज बाक़ी… डॉ. जाफ़र रज़ा संपादित किताब ‘बज़्मे ज़िंदगी:रंगे शायरी’ की भूमिका फ़िराक़ गोरखपुरी (28.08.1896-03.03.1982) ने 12 अक्टूबर 1970 को ‘मैं और मेरी शायरी’ शीर्षक से लिखी थी। भाषा...

प्रेमचंद, सज्जाद ज़हीर और प्रगतिशील आंदोलन

31 जुलाई प्रेमचंद जयंती पर ज़ाहिद ख़ान की कलम से…. प्रेमचंद, सज्जाद ज़हीर और प्रगतिशील आंदोलन             तरक़्क़ी-पसंद अदीबों का पहला ग्रुप साल 1935...

जनसंचार शिक्षा के सामने चुनौतियां

प्रो. संजय द्विवेदी की कलम से…. जनसंचार शिक्षा के सामने चुनौतियां            शिक्षा का मूल उद्देश्य व्यक्ति को आत्मनिर्भर, संवेदनशील और मूल्यनिष्ठ नागरिक बनाना है।...
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