चुनाव है, खड़े होने का नहीं बैठने का मज़ा

हास्य-व्यंग्य डॉ. मुकेश असीमित की कलम से…. चुनाव है, खड़े होने का नहीं बैठने का मज़ा              आप कहेंगे, चुनाव तो खड़े होने के...

दादी या माताजी: लोकगीतों में रचा जीवन

संस्मरण ब्रज श्रीवास्तव की कलम से…. दादी या माताजी: लोकगीतों में रचा जीवन खीर-पूड़ी खाने के लिए आये कौए छत पर श्राद्ध संपादन के लिए ब्राह्मण अतिथियों की स्मृति...

हरिऔध के काव्य में संवेदना और संदेश

निबंध विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. हरिऔध के काव्य में संवेदना और संदेश              साहित्य की दुनिया में कुछ रचनाकार ऐसे होते हैं...

डॉक्टर हड़ताल पर हैं!

हास्य-व्यंग्य डॉ. मुकेश असीमित की कलम से…. डॉक्टर हड़ताल पर हैं!              आज का दिन मेरी ज़िंदगी के सबसे मनहूस दिनों में बाक़ायदा दर्ज...

अब कहाँ मिलते हैं दादाजी जैसे लोग!

संस्मरण ब्रज श्रीवास्तव की कलम से…. अब कहाँ मिलते हैं दादाजी जैसे लोग!              दादाजी परिवार का एक अत्यंत प्रिय और गरिमामय रिश्ता होते...

एडविना-नेहरू पवित्र प्रेम की अनूठी मिसाल

आब-ओ-हवा के सिलसिले ‘गूंज बाक़ी’ के लिए एक और यादगार लेख। अक्टूबर 1991 धर्मयुग में प्रकाशित लाडलीमोहन निगम का यह लेख जवाहरलाल नेहरू और एडविना उर्फ़ लेडी माउंटबैटन के...
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