लंदन-भारत के रिश्तों की यादें वाया डाक टिकट

भोपाल निवासी साहित्यकार विवेक रंजन श्रीवास्तव लंदन प्रवास पर हैं। नियमित लेखन के अभ्यास व स्वभाव के चलते वह उन विचारों/अनुभवों/दृश्यों आदि को दर्ज कर रहे हैं, जो लंदन...

डिग्री मेरी, संघर्ष मेरा… सवाल पूरी व्यवस्था से

#नयेसुर… इस अंक में नियमित ब्लॉग्स के अलावा जो भी सृजन है, सब बाक़ायदा विद्यार्थियों के द्वारा। इस अंक में चार पीढ़ियों के वो रचनाकार शामिल हैं, जो उम्र...

झूठ का दुःख

व्यंग्य ललन चतुर्वेदी की कलम से…. झूठ का दुःख            मैं अपने अध्ययन-कक्ष में शब्दों की साधना में संलग्न होने को प्रस्तुत हुआ ही था...

किताबों की दुनिया में बच्चों की पहली दस्तक

भोपाल निवासी साहित्यकार विवेक रंजन श्रीवास्तव इन दिनों लंदन प्रवास पर हैं। नियमित लेखन के अभ्यास व स्वभाव के चलते वह उन विचारों/अनुभवों/दृश्यों आदि को दर्ज कर रहे हैं,...

निर्मला: एक स्त्री या कई स्त्रियों की कहानी

तेजनारायण श्रीवास्तव की कलम से…. निर्मला: एक स्त्री या कई स्त्रियों की कहानी           नाम में ही जैसे एक सहजता है, एक निर्मलता। और उनके...

तीन क़िस्से: गांधीजी की दूरदृष्टि, स्पर्श व परिहास

गूंज बाक़ी… साहित्य के ऐतिहासिक पन्नों से नायाब और दिलचस्प क़िस्से खोज लाते हैं विवेक मेहता। आब-ओ-हवा के लिए ‘रंग-बिरंगी’ ब्लॉग की प्रस्तुति ऐसे ही पन्नों की देन है।...

नज़र रोकिए, पुराने घरों की दीवारों को सुनिए

भोपाल निवासी साहित्यकार विवेक रंजन श्रीवास्तव इन दिनों लंदन प्रवास पर हैं। नियमित लेखन के अभ्यास व स्वभाव के चलते वह उन विचारों/अनुभवों/दृश्यों आदि को दर्ज कर रहे हैं,...

पुरस्कार का पुलिस वेरिफिकेशन

हास्य-व्यंग्य डॉ. मुकेश असीमित की कलम से…. पुरस्कार का पुलिस वेरिफिकेशन              जिस प्रकार आजकल पुरस्कार के पुरुषत्व पर चिंतन चल रहा है, मुझे...

सपने, हुनर, क़िस्मत और लगन

मेरे हिस्से का क़िस्सा… आब-ओ-हवा पर विशेष शृंखला। उम्र और सृजन का यादगार कथानक लिख चुके हस्ताक्षरों की कहानी, उन्हीं की जुबानी। तीसरी दास्तान एक ऐसे फ़नकार की जो...

चर्च में मतदान केंद्र और ब्रिटिश लोकतंत्र की सहजता

भोपाल निवासी साहित्यकार विवेक रंजन श्रीवास्तव इन दिनों लंदन प्रवास पर हैं। नियमित लेखन के अभ्यास व स्वभाव के चलते वह उन विचारों/अनुभवों/दृश्यों आदि को दर्ज कर रहे हैं,...
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