
- September 30, 2025
- आब-ओ-हवा
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नियमित ब्लॉग प्रीति निगोसकर की कलम से....
कलाकार का सपना- चित्र देख सब कहें, यह सुनीला का है
इस कलाकार की चित्रकारी में आकारों का टूट-टूटकर बनना-सा दिखायी पड़ता है। जैसे टूटे कांच में कोई परछाईं दिखायी पड़ती है। हर चित्र, अलग विषय, अलग तरह का टेक्स्चर और रंगों का साथ अर्थात इनके चित्रों की विचित्रता की अपनी पहचान है। इनके रंगीन चित्रों की बात करें तो इनके चित्र हमें निसर्ग के पास ले जाते हैं। फूल, पेड़, घने जंगल, यहां तक कि एक सिर्फ़ पत्ते का चित्र लीजिए। कलाकार ने नारंगी और काले रंग से अपने विशिष्ट टेक्स्चर से बहुत ही सुंदर गढ़ा है जबकि बैकग्राऊंड काला है, फिर भी यह चित्र बहुत ही सुन्दर बन पड़ा है। पत्ते के ऊपर की लकीरें भी पनियल रंग के शेड्स से बख़ूबी उतर आयी हैं।
काफ़ी सुंदर फूलों के चित्र भी बने हैं। लंबे-लंबे वृक्षों के तने और उन पर फैला पत्तों का आभास बहुत ही ख़ूबसूरत टेक्स्चर से दर्शाया गया है। पत्तों में हरे रंग का उपयोग कम ही किया है फिर भी वह बहुत ही आकर्षक बना है। पत्तों का आभास लाल, काले, नारंगी रंगों मे फैलाया-सा लगता है। फूल भी अलग-अलग आकार और रंगों में अपने पूरे यौवन से खिले दिखते हैं। पत्तों के चित्रित झुंड अपने सौंदर्य की अलग ही कहानी सुनाते-से दिखते हैं।

चित्रों की एक अलग-सी शृंखला पेश करती कलाकार सुनीला खंडेलवाल उज्जैन में रहती हैं। वही उज्जैन जो कलाकारों का गढ़ कहा जाता है। चित्रकला में स्नातकोत्तर सुनीला का मन चित्र प्रदर्शनियां देख-देख रंगों में उलझ गया और उनके हाथों से चित्र बनने लगे।पूरी तन्मयता के साथ सुनीला बड़े-छोटे कैनवास, विभिन्न माध्यम और रंगाकारों में सिरजने लगीं। धीरे-धीरे प्रदर्शनियों में भागीदारी और आगे प्रतियोगिताओं में भी इनके चित्र प्रदर्शित होने लगे।
असाधारण आकार और टेक्स्चर का कमाल इनकी विशेषता है। भिन्न-भिन्न माध्यमों का उपयोग कर अलग-अलग टेक्स्चर बनाकर इन्होंने अपनी चित्रकला क्षेत्र में पहचान बनायी और आज शहर की जानी-मानी चित्रकार हैं। इनके श्वेत-श्याम चित्र भी बहुत पसन्द किये जाते हैं। अपनी ही तरह के अनूठे आकारों को बहुत ही मनमोहक रुप में प्रस्तुत करती हैं। मनमोहक रंगों से बने चित्रों में विभिन्न विषय शामिल हैं। इनके पोर्ट्रेट और संयोजन को काफ़ी पसंद किया जाता है। यही कारण है अनेक घरों में इनके चित्र दीवारों की शोभा बढ़ाते हुए दिखते हैं। होटल निर्वाणा, इंदौर और होटल ले अमोर, कोटा में भी इनके चित्रों की शृंखला प्रदर्शित है।

इस कलाकार को अपने चित्रों में लाल और काले रंगों का उपयोग करना बहुत पसंद है। इनकी एक एकल प्रदर्शनी उज्जैन में लग चुकी है। चित्रकला कैम्पस में तो दर्जनों जगह आपकी उपस्थिति देखी गयी है। इंदौर, उज्जैन के अलावा जमशेदपुर कैम्प में नाम दर्ज है। ललित कला अकादमी, नई दिल्ली, इंदौर, उज्जैन ग्रुप शो में आप शामिल रही हैं। कई राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में भी आपकी हिस्सेदारी रही।
कुल मिलाकर सुनीला के चित्रों में बैकग्राउंड कन्ट्रास्ट रंगों से भरा दिखायी पड़ता है। इनके चित्रों में विचित्र कहें या अद्भभुत, रंग का मेल और विचित्र आकार लुभाते ज़रूर हैं। कलाकार सुनीला का सपना है कि उनकी अपनी शैली हो, जिससे कलाक्षेत्र में उनके चित्र देख लोग कहें कि यह सुनीला का चित्र है। सुनीला अपने सपने की तरफ़ सही मायनों में बढ़ती दिख रही हैं। उनको शुभकामनाएं।

प्रीति निगोसकर
पिछले चार दशक से अधिक समय से प्रोफ़ेशनल चित्रकार। आपकी एकल प्रदर्शनियां दिल्ली, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, पुणे, बेंगलुरु आदि शहरों में लग चुकी हैं और लंदन के अलावा भारत में अनेक स्थानों पर साझा प्रदर्शनियों में आपकी कला प्रदर्शित हुई है। लैंडस्केप से एब्स्ट्रैक्शन तक की यात्रा आपकी चित्रकारी में रही है। प्रख्यात कलागुरु वि.श्री. वाकणकर की शिष्या के रूप में उनके जीवन पर आधारित एक पुस्तक का संपादन, प्रकाशन भी आपने किया है। इन दिनों कला आधारित लेखन में भी आप मुब्तिला हैं।
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