तुलसी, मीरा, सूर, कबीर और बशीर

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. तुलसी, मीरा, सूर, कबीर और बशीर ज्यौं रहीम या वृंद हैं, तुलसी सूर, कबीरत्यौं संग सबके बैठ के लिखते शे’र बशीर यह...

‘दुनिया मुट्ठी में’ या मुट्ठी से फिसलती दुनिया?

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. ‘दुनिया मुट्ठी में’ या मुट्ठी से फिसलती दुनिया? इंसानी ज़िंदगी में बहुत ज़्यादा तब्दीलियां हो चुकी हैं। किसी वक़्त जब टेलीविज़न आया...

बोलती, ठहरती, दिखती, छुपती आवाज़

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. बोलती, ठहरती, दिखती, छुपती आवाज़ ग़ौर से सुनिए। कोई आवाज़ दे रहा है। यह आवाज़ तो जानी-पहचानी-सी लग रही है। कब सुनी...

सोते हुए जागना और जागते हुए सोना!

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. सोते हुए जागना और जागते हुए सोना!               अलसाई आंखें रात के अधूरे ख़्वाबों की दास्तां...

शहर की कीमत बढ़ी तो इंसान की घटी

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. शहर की कीमत बढ़ी तो इंसान की घटी     अभी वक़्त ने एक नये फ़ाइनेंशियल ईयर में क़दम रखा। इसमें यह...

हो जंग भी अगर तो मज़ेदार जंग हो

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. हो जंग भी अगर तो मज़ेदार जंग हो          दुनिया इस वक़्त युद्धरत है। एक इंसान अपनी पूरी ज़िन्दगी...

आंखें छीनकर तो रोशनी न दिखायी जाये

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. आंखें छीनकर तो रोशनी न दिखायी जाये हिंदुस्तानी परिप्रेक्ष्य में मज़हबी जलसे इस तरह होते हैं जैसे हम हर दिन उठते हैं...

परचमों में क़ैद होकर रह गया हर रंग है

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. परचमों में क़ैद होकर रह गया हर रंग है रंग ज़िन्दगी को तालीम भी देते हैं और तरबीयत भी। रंग होंठों पर...

तंग नज़रों से ही देखें इस गुज़रते दौर को

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. तंग नज़रों से ही देखें इस गुज़रते दौर को          यह समय लीडरों की बदमिज़ाजी, बेहयाई और बेशर्मी को...

सुबह और सांझ के माथे पर ग़मों की गठरी

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. सुबह और सांझ के माथे पर ग़मों की गठरी             अलसुबह अरमानों को अपनी कांख में दबाकर...
error: Content is protected !!