रति सक्सेना, rati saxena
पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से....

पोइट्री थेरेपी - संगीत थेरेपी और कविता थेरेपी

               संगीत थेरेपी एक ऐसी कला है, जिसमें मानसिक एवं शारीरिक अस्वस्था में उपचार के लिए संगीतमय ध्वनियों का उपयोग किया जाता है।
 
जिस तरह हमारे प्राचीन शास्त्रों में आध्यात्मिक ध्वनि ‘ओम’ की तरह, अफ़्रीकी संस्कृतियों में हू (HUI) का जाप होता है, माना जाता है कि यह ध्वनि पूरे ब्रह्मांड का साक्षात्‍कार कराती है। इसका ध्वनि कंपन वातावरण को पवित्र करता है। बौद्ध धर्म में भी अनेक ध्वनियों का उपयोग एकाग्रता के लिए किया जाता है। अफ़्रीका में आज भी अनेक थेरेपिस्ट  संगीत का उपयोग करते हैं। केरल में भी अनेक लोककला नृत्य हैं, जिनका उपयोग थेरेपी के रूप में होता था, आजकल वे मनोंरंजन के भीतर माने जा रहे हैं। 
 
अर्थात संगीत में ध्वनियों की प्रधानता होती है, लेकिन कविता में भावों की होती है। कविता  भी गायी जा सकती है, प्रार्थना के रूप में।
 
poetry therapy
 
आदिवासी मैक्सिकन और मूल अमेरिकी संस्कृति में गीत व प्रार्थनाएँ उपचार प्रणाली का प्रतीक हैं। अभी भी कुछ स्थानों पर ये परंपराएं जीवित हैं। जब यूरोपीयन इन इलाक़ों में आये तो आरंभ में वे इन आदिवासी अनुष्ठानों और आत्मा संबंधी उनकी सोच से घबराते थे। अरसा बाद उन्हें समझ आया कि इनके आत्मबोध और आध्यात्मिकता में जीवन का एक सरल दर्शन है।
 
जैसा कि नेटिव अमेरिकन कहते हैं- उन्होंने हमारी भाषा को बोली बनाया, हमारे  चिकित्सकों को जादूगर बताया, हमारी प्रार्थनाओं को काला जादू बताया। 
 
नेटिव अमेरिकन अपने पूर्वजों की आत्माओं की मदद से और कभी-कभार बुरी आत्माओं से छुटकारा पाकर उपचार करने में भी विश्वास करते थे। यूरोपीय लोग उनके धर्म को पिछड़ा मानते थे क्योंकि यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से आगे बढ़ा था और इसका दस्तावेज़ीकरण नहीं हुआ था। चेरोकी जनजाति की तरह बहुत कम आदिवासी जनजातियों की अपनी लिखित भाषा थी।
 
500 साल पहले जब यूरोपीय लोग पहली बार संयुक्त राज्य अमेरिका पहुंचे, तो यह देखकर हैरान हुए कि मूल अमेरिकी बीमारी और चोटों से कैसे आसानी से उबर रहे थे, जो उनकी नज़र में घातक था। आदिवासियों लोगों द्वारा प्रयुक्त नेटिव उपचार इन नये प्रवासियों के ज्ञात उपचारों से बेहतर थे। लेकिन आदिवासी लोगों को बाहरी लोगों के साथ आयी बीमारियों जैसे चेचक, खसरा आदि का पता नहीं था। इसलिए जब उन्हें नयी बीमारियाँ हुईं, तो वे उनका निदान नहीं ढूंढ़ सके और फलस्वरूप वे जनजातियाँ ख़त्म होती चली गयीं। आधुनिक उपचार पद्धतियों पर निर्भर रहने को वे मजबूर होते गये। 1978 तक संयुक्त राज्य अमेरिका में उनके आध्यात्मिक अनुष्ठानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया, लेकिन सौभाग्य से अपने कुछ उपचार अनुष्ठानों को बचाने में वे सफल रहे और आज भी वे उन्हें पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके लिए ये प्रथाएं पवित्र थीं और अपने समुदाय के बाहर के लोगों से वे इन्हें बचा रहे हैं।
 
कहा जाता है संयुक्त राज्य अमेरिका का पहला अस्पताल पेनसिल्वेनिया अस्पताल था, जिसकी स्थापना 1751 में डॉ. थॉमस बॉन्ड और बेंजामिन फ्रैंकलिन ने की थी। उन्होंने अपने मानसिक रोगियों के लिए कई तरह के उपचार अपनाये, जिसमें पढ़ना, लिखना और उनके लेखों को प्रकाशित करना शामिल था। “अमेरिकी मनोचिकित्सा के जनक” डॉ. बेंजामिन रश पहले व्यक्ति थे जिन्होंने माना कि मानसिक बीमारी मन की बीमारी है न कि “दानवों का कब्ज़ा।”
 
अथर्ववेद में जो औषध सूक्त हैं, उनमें ऋषि भेषज वनस्पति की प्रार्थना करता है, दिव्य शक्ति के लिए प्रार्थना करता है, और रोगी के लिए प्रार्थना करता है। एक तरह से वह रोग को मन्तर बाधित करता है। उदाहरण के लिए कुष्ठ रोग आसुरी नामक औषध के लिए सुन्दर प्रार्थना है। कुष्ठ रोग से लड़ने के लिए आसुरी नामक वनस्पति का वर्णन इस प्रकार मिलता है:
 
सुपर्णा है तू प्रथम जात
तूने ही पित्त पाया
युद्ध से जीती गयी तू
हे वनस्पति दे दे 
सुन्दर रूप सभी को। 
 
आसुरी बनी सबसे पहले
यह है किलास की भेषज
करती नष्ट किलास को
बनाती त्वचा सुन्दर
 
माता तेरी सरूपा
पिता भी सरूपा
तू सुन्दरता देने वाली
इन सबको दे दे सुन्दर रूप। 
 
हे श्यामा! तू सरूपकारिणी
विस्तृत पृथ्वी पर पसरी
साध अपने कर्म को भली-भाँति
पुन: बना दे इस पुरुष को सुन्दर
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“सुपर्णो जातः प्रथमस्तस्य त्वं पित्तमासिथ।
तदासुरी युधा जिता रूपं चक्रे वनस्पतीन्॥” 
 
इसका अर्थ है कि हे सुपर्ण (गरुड़), तू पहले उत्पन्न हुआ था, तू उसका पित्त (रस) था।
 
“परि त्वा रोहितैर्वर्णैर्दीर्घायुत्वाय दध्मसि।
यथायमरपा असदथो अहरितो भुवत्॥” 
“या रोहिणीर्देवत्या गावो या उत रोहिणीः।
रूपंरूपं वयोवयस्ताभिष्ट्वा परि दध्मसि॥” 
(अथर्ववेद 12वें काण्ड के 24वें सूक्त) 
 
ये प्रार्थनाएं अधिकतर गायी जाती थीं, अथर्ववेद के छठे कांड में बड़ा रोचक मन्त्र है, जिसमें ऋषि कहते हैं, हम हम सविता देवता के महत्व को गाते हैं तो दोष को भी गाते हैं..
 
दोष गाएं, महत्व गाएं, हे ऋषि पुत्र अथर्वण!
हम सविता देव की स्तुति गाएं।
सिन्धु के मध्य समुद्र पुत्र सत्यवादी युवा
सुष्टु वाणी वाले सविता।।
वह देव सविता महान अमृत स्थल में 
हम दोनों को धारण करें
हम दोनों उनकी प्रशंसा के गीत गाएं।
(अथर्ववेद-6-1-1-3)
 
समकालीन कवि जो आदिवासी समाज से आते थे, आज भी आध्यात्मिक रूप से अपनी कविताओं से जुड़े हैं।
 

शामनिज़म (शैमनिज़्म) 

 
शामनिज़म प्रकृति से जुड़ी एक प्राचीन उपचार परंपरा जिसका संबन्ध पूरे पर्यावरण सहित संपूर्ण समुदाय की भलाई से संबंधित रहा है। यह एक प्राचीन आध्यात्मिकता है, जो भौतिक पर्यावरण से जुड़ी है। शब्द “शमन” साइबेरिया की तुंगस जनजाति से आया है, जिसका अर्थ आध्यात्मिक गुरु के लिए होता है। इसकी स्थिति अनेक देशों में देखी जा सकती थी, जैसे कि उत्तरी अमेरिकी, मैक्सिकन, दक्षिण अमेरिकी, यूरोपीय और कुछ एशियाई जनजातियां। इनके प्रमुख बिन्दु रहे हैं- प्रकृति से घनिष्ठता, स्वयं और समुदाय का उपचार, आध्यात्मिक अभ्यास, दरअसल यह जीने का एक कलात्मक तरीक़ा माना जा सकता है।
 
आरंभ से मनुष्य यह समझने लगा था कि प्रकृति की विभिन्न प्रजातियों के बीच एक मजबूत अंतर्संबंध है। इन सबसे संबंधों के बिना जीना संभव नहीं है। उपचार व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं हो सकता। यह एक संयुक्त प्रयास है। उदाहरण के लिए, यदि मनुष्य किसी बीमारी से संक्रमित होता है तो पूरा समुदाय संक्रमित हो जाता है। प्रकृति के साथ अपने लंबे रिश्ते के कारण, मनुष्य ने यह जाना कि कुछ ऐसे तत्व हैं, जो केवल अनूभूत किये जा सकते हैं। उदाहरण के लिए पानी मनुष्य या जानवर की तरह जीवित शरीर नहीं है, फिर भी, नदी की लहरें एक तरह का संगीत बनाती हैं, जो सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं। वहीं, बाढ़ जैसे विशाल जल स्‍फोट भय पैदा करते हैं। मनुष्य ने हमेशा प्रकृति से सीखा है कि प्रकृति या ब्रह्मांड के हर तत्व में एक लय या संगीत होता है। समस्त ग्रह लयबद्ध और व्यवस्थित तरीक़े से चलते हैं। लय संगीत का अनुसरण करती है और संगीत शब्दों का अनुसरण करता है और इस तरह कविता आकार लेती है और इस तरह मनुष्य की काव्यात्मक अभिव्यक्ति उसे ब्रह्मांड से जोड़ती है।
 
संगीत शैमनिज़्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह माना जाता है कि संगीत में आत्मा को नियंत्रित करने की शक्ति होती है। ड्रम और पाइप यहाँ ज़्यादातर इस्तेमाल होने वाले वाद्य हैं और ऐसा माना जाता है कि बाक़ी सरंजामों की तुलना में संगीत आत्मा तक  आसानी से पहुँचता है। इसी तरह ध्वनि की शरीर और वातावरण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
 
शमन उपचार में पोएट्री थेरेपी और संगीत थेरपी दोनों का उपयोग होता है।
रति सक्सेना, rati saxena

रति सक्सेना

लेखक, कवि, अनुवादक, संपादक और वैदिक स्कॉलर के रूप में रति सक्सेना ख्याति अर्जित कर चुकी हैं। व्याख्याता और प्राध्यापक रह चुकीं रति सक्सेना कृत कविताओं, आलोचना/शोध, यात्रा वृत्तांत, अनुवाद, संस्मरण आदि पर आधारित दर्जनों पुस्तकें और शोध पत्र प्र​काशित हैं। अनेक देशों की अनेक यात्राएं, अंतरराष्ट्रीय कविता आंदोलनों में शिरकत और कई महत्वपूर्ण पुरस्कार/सम्मान आपके नाम हैं।

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