गीत तब : कमलकांत सक्सेना

संदर्भ : 31 अगस्त, कमलकांत सक्सेना के पुण्य स्मरण का अवसर गीत तब : कमलकांत 1 दीपक जैसा जलना प्यारे...

जिन्हें नाज़ है हिंद पर वो कहां हैं?

15 अगस्त 2025 को भारत की आज़ादी को 78 बरस पूरे हुए तो यह प्रश्न उठता ही है कि सिनेमा...

पूर्वपाठ — एक कवि की डायरी : भाग-19

'मान' सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज...

अंक – 34

आब-ओ-हवा – अंक - 34 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी...

पोइट्री थेरेपी – संगीत थेरेपी और कविता थेरेपी

पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से.... पोइट्री थेरेपी - संगीत थेरेपी और कविता थेरेपी                संगीत थेरेपी एक ऐसी कला है, जिसमें मानसिक एवं शारीरिक अस्वस्था में उपचार...

कमलकांत जी, अनघ जी.. प्यास और अंधेरे से भिड़ंत

संदर्भ: आती हुई तिथियों पर कमलकांत सक्सेना (05.10.1948-31.08.2012) और महेश अनघ (14.09.1947-04.12.2012) को याद करने के अवसर विशेष.. पाक्षिक ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से.... कमलकांत जी, अनघ जी.. प्यास और अंधेरे से भिड़ंत  ...

ada jafri

अगर सच इतना ज़ालिम है तो हम से झूठ ही बोलो
हमें आता है पतझड़ के दिनों गुल-बार हो जाना
– अदा जाफ़री

मैं सच कहूँगी मगर फिर भी हार जाऊँगी
वो झूठ बोलेगा और ला-जवाब कर देगा
– परवीन शाकिर

parveen shakir

नयी शायरी : तकनीक के ज़ाविये में ढलने का हुनर

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से.... नयी शायरी : तकनीक के ज़ाविये में ढलने का हुनर            शाइरी के अपने तकाज़े रहे हैं। अपने दायरे भी। मगर वक़्त के साथ...

21वीं सदी में व्यंग्य: अभिव्यक्ति के नये उपकरण तलाशना ज़रूरी

पाक्षिक ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से.... 21वीं सदी में व्यंग्य: अभिव्यक्ति के नये उपकरण तलाशना ज़रूरी              21वीं सदी व्यंग्य के लिए वरदान बनकर आयी है। इस सदी...

राग विहाग में सुलक्षणा-भूपी की सुरीली बोलियां

पाक्षिक ब्लॉग विवेक सावरीकर 'मृदुल' की कलम से.... राग विहाग में सुलक्षणा-भूपी की सुरीली बोलियां             महान गायिका गीता दत्त के भाई और अभिनेता-संगीतकार कनू रॉय ने हिंदी की चुनिंदा...

‘हंगल साहब…’ अपने ही अंदाज़ की कहानियां

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से.... 'हंगल साहब...' अपने ही अंदाज़ की कहानियां             हरि मृदुल का कथा संग्रह 'हंगल साहब ज़रा हंस दीजिए' दो साल पहले प्रकाशित हुआ।...

कक्षा के आयाम – स्मृतियों से सीख

पाक्षिक ब्लॉग आलोक कुमार मिश्रा की कलम से.... कक्षा के आयाम - स्मृतियों से सीख             पूर्वांचल में बीते बचपन के दिनों में सर्दियों का मुकाबला हम सामूहिक रूप से...

राजिंदर सिंह बेदी का पहला और आख़िरी नॉविल

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से.... राजिंदर सिंह बेदी का पहला और आख़िरी नॉविल                'एक चादर मैली-सी' (प्रकाशन वर्ष 1962) राजिंदर सिंह बेदी का पहला और आख़िरी...

साहित्य की सकारात्मक दृष्टि

पाक्षिक ब्लॉग राजा अवस्थी की कलम से.... साहित्य की सकारात्मक दृष्टि             साहित्कार, साहित्य, दर्शन और आलोचना के लिए दृष्टि महत्वपूर्ण है। दृष्टि के साथ दिशा भी बहुत महत्वपूर्ण चीज़...

लफ़्ज़, सियासत और अली सरदार जाफ़री

पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से.... लफ़्ज़, सियासत और अली सरदार जाफ़री             तरक़्क़ीपसंद शायरी का ज़िक्र आते ही उन लफ़्ज़ों की दस्तकों की धमक सुनायी देने लगती है,...

मम्मी की फिल्मी यादें और कल्पना की दास्तान

पाक्षिक ब्लॉग मिथलेश रॉय की कलम से.... मम्मी की फिल्मी यादें और कल्पना की दास्तान            मम्मी जी ज़मींदार घर से थीं, ब्याह भी वैसे ही परिवार में हुआ, लेकिन थोड़ा...

हम तुम और वो

पाक्षिक ब्लॉग विजय स्वर्णकार की कलम से.... हम, तुम और वो             वो आये घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है             कभी हम उनको...

सुषमा जैन – परम्परा का नया रूप

पाक्षिक ब्लॉग प्रीति निगोसकर की कलम से.... सुषमा जैन - परम्परा का नया रूप              सुषमा जैन-एक सौम्य व्यक्तित्व। व्यक्तित्व की झलक उनके चित्रों में साफ़ झलकती है। शांत स्वभाव...

न वो दिल है न वो शबाब… आबरू-ए-ग़ज़ल ख़ुमार बाराबंकवी

पाक्षिक ब्लॉग ज़ाहिद ख़ान की कलम से.... न वो दिल है न वो शबाब... आबरू-ए-ग़ज़ल ख़ुमार बाराबंकवी            ख़ुमार बाराबंकवी का शुमार मुल्क के उन आलातरीन शायरों में होता है, जिनकी...