दूर देस में हिन्दी के अपनों का मन-1

हिंदी की ज़मीनें… लंदन में बरसों से बसी हुई सुप्रसिद्ध साहित्यकार दिव्या माथुर जी के साथ हैरो-ऑन-हिल्स के एक कैफ़े में विवेक रंजन ने आब-ओ-हवा के लिए की साहित्यिक...

दूर देस में हिन्दी के अपनों का मन-2

हिन्दी की ज़मीनें… इस अंक के लिए आब-ओ-हवा के नियमित लेखक विवेक रंजन श्रीवास्तव ने एक प्रश्नावली तैयार कर विदेशों में बसे हिन्दी साहित्यकारों की राय जानी। यूनिवर्सिटी ऑफ़...

साहित्य जनमत बनाने के सिवा करे भी क्या: असग़र वजाहत

“साथ, यक़ीं, वाबस्तगी, बिकने थे बेदाम/ आज़ादी जो रख दिया, बंटवारे का नाम”… 1947 में विभाजन की क़ीमत पर आज़ादी मिली। आज हम कितने आज़ाद हैं और कितने विभाजित?...

सुमति अय्यर से अमृता प्रीतम की अंतरंग बातचीत

गूंज बाक़ी… हिंदी लेखक और कवि सुमति अय्यर के साथ यह साक्षात्कार प्रसिद्ध लेखक/कवि अमृता प्रीतम ने लिया था। अंतरंग संबंधों पर आधारित यह बातचीत 1978 की एक पुस्तक...

हिंदुस्तान में उर्दू अदब का हाल मायूस करता है: ज़किया मशहदी

उर्दू अफ़सानानिगारों में महिलाओं के नाम भले ही उंगलियों पर गिने जाने लायक़ हों लेकिन उनका क़द अदब में काफ़ी ऊंचा है। ये नाम बड़े ही एहतराम से लिये...
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