साहित्य जनमत बनाने के सिवा करे भी क्या: असग़र वजाहत

“साथ, यक़ीं, वाबस्तगी, बिकने थे बेदाम/ आज़ादी जो रख दिया, बंटवारे का नाम”… 1947 में विभाजन की क़ीमत पर आज़ादी मिली। आज हम कितने आज़ाद हैं और कितने विभाजित?...

सुमति अय्यर से अमृता प्रीतम की अंतरंग बातचीत

गूंज बाक़ी… हिंदी लेखक और कवि सुमति अय्यर के साथ यह साक्षात्कार प्रसिद्ध लेखक/कवि अमृता प्रीतम ने लिया था। अंतरंग संबंधों पर आधारित यह बातचीत 1978 की एक पुस्तक...

हिंदुस्तान में उर्दू अदब का हाल मायूस करता है: ज़किया मशहदी

उर्दू अफ़सानानिगारों में महिलाओं के नाम भले ही उंगलियों पर गिने जाने लायक़ हों लेकिन उनका क़द अदब में काफ़ी ऊंचा है। ये नाम बड़े ही एहतराम से लिये...

मैं तुम्हारे लिए गा रही हूं… लता मंगेशकर का अंतिम इंटरव्यू

नाम ही जिनका परिचय है, वह लता मंगेशकर कोरोना काल में अस्वस्थ होने के बाद जब ठीक होकर अपने निवास ‘प्रभु कुंज’ लौटीं तो स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से...

कविता को नये संदर्भों में समझना होगा: रति सक्सेना

रति सक्सेना साहित्य की दुनिया में भली-भांति पहचानी जाती हैं। वर्ल्ड पोएट्री मूवमेंट और कृत्या पोएट्री फ़ेस्टिवल उनकी शख़्सियत के पर्याय बन चुके हैं। ratisaxena.com पर उनके व्यक्तित्व व...

धर्म के नाम पर अलगाना अपराध, मेरी कथाएं प्रतिकार: प्रीत

अवधेश प्रीत (13.01.1958-12.11.2025) का नाम समकालीन कथा साहित्य में परिचय का मोहताज नहीं। इसी 12 नवंबर को उनका देहांत साहित्य जगत को झकझोर गया है। यहां उनका वह साक्षात्कार...

‘वाद’ के आधार पर नहीं रचा जाता साहित्य: नमिता सिंंह

नमिता सिंह (4 अक्टूबर 1943) … कथा साहित्य का सुपरिचित एवं स्थापित नाम। जनवादी लेखक संघ की पदाधिकारी, प्राध्यापक, ‘वर्तमान साहित्य’ जैसी पत्रिकाओं की संपादक जैसे दायित्वों के बीच...
error: Content is protected !!