
ए पिलग्रिमेज़ इन फ्रेगमेंट्स: वास्तुशिल्पी की तृष्णा और कैमरे की जुगलबंदी
50 दिन में 8 देश घूमकर लिये 8000 चित्र, स्केच व नोट्स
चंडीगढ़। दो दिवस पूर्व 9 अक्टूबर की शाम जब मैं पंजाब कला भवन पहुंचा तो आर.एस. रंधावा कलादीर्घा में वास्तुशिल्पी कीरत पंधेर की एकल प्रदर्शनी का औपचारिक समापन हो चुका था। तस्वीरें उतारी और समेटी जा रही थी। ऐसे में मुझे जल्दी-जल्दी में प्रदर्शों को समझने, कलाकार से वार्तालाप करने और दो-चार तस्वीरें ही उतारने का अवसर मिल पाया जो मैं आप सबसे शेयर करना चाहता हूं।
सुश्री कीरत पंधेर ने पांच वर्ष पूर्व वास्तुकला में स्नातक उपाधि अर्जित की और लगातार व्यावसायिक सेवा में जुट गयीं। दिन-रात मेहनत करते हुए उसे लगा जैसे कुछ छूट रहा है। फिर उसने सामान्य दिनचर्या से छुट्टी लेकर 50 दिन का आठ देशों का भ्रमण कर डाला। भ्रमण ने उसके वास्तु-शिल्पी मन की तृष्णा और कैमरे की जुगलबंदी से जहाँ दर्शकों को भाव-विभोर कर देने वाले अनुपम चित्र मिले, वहीं वास्तुकला की आश्चर्यचकित करने वाली जानकारी ने सिर्फ़ दर्शकों को ही नहीं बल्कि स्वयं उन्हें भी अभिभूत किया। यह बात स्वयं कीरत पंधेर ने मुलाक़ात दौरान बतायी।
कीरत ने कहा कि कैमरे के इस्तेमाल के बारे में तो मैने बहुत कुछ बचपन में अपने पिता और भाई से सीखा था। वह न केवल सुंदर-सुंदर तस्वीरें उतारते थे अपितु उनकी नुमाइश लगाकर भरपूर सराहना भी बटोरते थे।
कीरत पंधेर ने इटली, वेटिकन, स्विटज़रलैंड, ऑस्ट्रिया, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल के 43 नगर और कस्बों की यात्रा की। दसवीं शताब्दी से वर्ष 2017 तक निर्मित 135 वास्तुशिल्प प्रोजेक्ट्स का अवलोकन किया। ऐसे निर्माणों में गोथिक शैली वाले गिरजाघर, प्राचीन किले एवं महल आदि से लेकर आधुनिक शैली के निर्माण तथा आवासीय बसाहटों, सांस्कृतिक केंद्रों और औद्योगिक परिसरों का भी सूक्ष्म अवलोकन किया। 3880 किलोमीटर की लंबी यात्रा में 1807 किलोमीटर वायु मार्ग से और शेष यात्रा जल-थल मार्ग से। यात्रा के दौरान लगभग 8000 चित्र लिये और कुछ स्केच बनाये तथा नोट्स भी तैयार किये। यह सब भविष्य में पुस्तकाकार होकर सामने आ सकता है।
प्रदर्शनी में 35 सुंदर चित्र और हाथ से बनी पेंसिल ड्रॉइंग भी आकर्षण का केंद्र थी। यूरोपीय वास्तुकला वैसे भी अपना विशेष आकर्षण रखती है। चंडीगढ़ का निर्माण हो या फिर भोपाल में भारत भवन सहित देश की राजधानी नई दिल्ली और देश के कई अन्य भागों में यूरोपीय शैली के निर्माण भी अपना विशेष आकर्षण रखते हैं। सुश्री कीरत ने वार्तालाप में कई नामी योरपीय वास्तुकारों का नाम लिया, जो मेरे लिए उच्चारित करना भी कठिन है। ऐसी प्रदर्शनी को देखना सच में एक अलग अनुभव था। देखकर लगा कि भारतीय युवा वास्तुकारों का भविष्य भी बहुत उज्ज्वल है। कीरत पंधेर का यह प्रयास युवाओं के लिए विशेष अनुकरणीय है।
— सुभाष अरोड़ा (कलाकार), चंडीगढ़

VERY NICE I COVERD FIVE CONTRIES IN EUROP
BEST WISHES
RAJ CHAUHAN
09887050268