‘क्वीन’ के बाद: हिंदी सिनेमा में स्त्री का पुनर्लेखन

‘हिंदी की ज़मीनें’ अंक में प्रसंगवश… इस स्तंभ में 21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की...

‘मुल्क’ से बदलते सिनेमा का अनुभव

सिनेमा जगत में एक ख़ास तरह की फ़िल्मों के लिए पूरी आज़ादी का माहौल है तो दूसरी ख़ास तरह की फ़िल्मों के लिए पूरी पाबंदी का। इस बीच एक...

लगान: क्या है उपलब्धि और विरासत?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण… पाक्षिक...

विक्की डोनर: एक फ़िल्म से बनी कई की राह

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण …...

दुर्लभ भारतीय फिल्म क्यों है ‘आँखों देखी’?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण… पाक्षिक...

फिल्म नहीं केस स्टडी है ‘कोई मिल गया’

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण …...

क्यों प्रासंगिक बनी हुई है ‘हज़ारों ख़्वा​हिशें ऐसी’?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण… पाक्षिक...

रंग दे बसंती: समाज व लोकतंत्र की ताकत

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण… पाक्षिक...

क्यों ख़ास है ‘हासिल’? और यह न होती तो?

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो एक टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से ​चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण…...

मुन्नाभाई MBBS और हिरानी की दुनिया

21वीं सदी के 25 वर्षों में से वो 25 भारतीय फ़िल्में, जो एक टर्निंग पॉइंट साबित हुईं। एक युवा फ़िल्मकार की दृष्टि से ​चयन और इन फ़िल्मों का दस्तावेज़ीकरण…...
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