
- February 14, 2026
- आब-ओ-हवा
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आब-ओ-हवा – अंक - 45
भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में मिर्ज़ा ग़ालिब की याद का एक ख़ास पन्ना। विश्व रेडियो दिवस गया, प्रेम का दिन आया और शिव को समझने का दिन एक बार फिर आ रहा है। प्रासंगिकता के चलते इन तीनों पहलुओं पर कुछ ख़ास बातें। सिनेमा के बदलते मिज़ाज पर एक नज़र के साथ ही रामचंद्र गुहा की चर्चित किताब की पड़ताल भी… इस अंक से लेखन क्या है? शीर्षक से डॉ. संजीव के नये कॉलम में मूलभूत सवालों का विश्लेषण शुरू हो रहा है। साहित्य, कला, स्वास्थ्य आदि पर नियमित ब्लॉग्स अपने तेवर और मिज़ाज के साथ। कलाजगत के पुरखों की याद, ग़ज़ल की क्लास, किताबों की बातें, कुछ फ़िल्मी यादें और…
प्रसंगवश
खुसरो पाती प्रेम की बिरला बांचे कोय: शशि खरे
अर्द्धनारीश्वर: डॉ. मंगला अनुजा
बदली-बदली नज़र आती है दुनिया आवाज़ की: डॉ. दिनेश पाठक
मुआयना
ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)
प्यार के दिन ख़ूनख़राबे की तस्वीर : भवेश दिलशाद
ब्लॉग : बियॉण्ड द ब्रेन
हथियार कारोबार की राह पर एआई कंपनियां? : ए. जयजीत
ब्लॉग : तत्वान्वेषण
राजस्थान में मरुस्थल रोकने में अरावली का महत्व : विवेक रंजन श्रीवास्तव
ब्लॉग : Truth in हेल्थ
आयुर्वेद पर फैसला बिना सुनवाई? : डॉ. आलोक त्रिपाठी
गुनगुनाहट
ब्लॉग : पोइट्री थेरेपी
कविता थेरेपी और मनोचिकित्सा : रति सक्सेना
ब्लॉग : गूंजती आवाज़ें
एक नज़्म, एक शेर, एक प्ले, एक तस्वीर, और फ़ज़ल ताबिश : सलीम सरमद
ग़ज़ल रंग
ब्लॉग : जो है सो है
कसौटी पर कितने खरे माधव कौशिक? : ज्ञानप्रकाश पांडेय
ब्लॉग : ग़ज़ल: लौ और धुआं
तंग नज़रों से ही देखें इस गुज़रते दौर को : आशीष दशोत्तर
किताब कौतुक
ब्लॉग : क़िस्सागोई
इतिहास से कम नहीं रामचंद्र गुहा के संस्मरण : नमिता सिंह
ब्लॉग : उर्दू के शाहकार
सिल्क गौहर, इंशा का अजीबो-गरीब प्रयोग : डॉ. आज़म
सदरंग
ब्लॉग : कला कोलाज
सोनाबाई और उनके मौन का विस्तार : शम्पा शाह
ब्लॉग : लेखन क्या है?
ध्वनि से अर्थ तक: लेखन की आंतरिक यात्रा : डॉ. संजीव
ब्लॉग : पक्का चिट्ठा
पंचवाक्य: जहाँ ठहरकर चोट करता है व्यंग्य : अरुण अर्णव खरे
ब्लॉग : मैं हूं मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश के यादगार चेहरे : दीक्षा मनीष
ब्लॉग : 25 बरस 25 फ़िल्में
मक़बूल… फ़िल्म की ज़मीन और आसमान : मानस
