
- February 14, 2026
- आब-ओ-हवा
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पाक्षिक ब्लॉग (गतांक से आगे) रति सक्सेना की कलम से....
कविता थेरेपी और मनोचिकित्सा
अधिकतर पोएट्री थेरेपी के प्रयोग के बारे में भ्रांति होती है। लोग सोचते हैं कि थेरेपिस्ट मनोचिकित्सक होते हैं। मनोचिकित्सक एक अलग विधा है, दरअसल मनोवैज्ञानिक भिन्न-भिन्न क्षेत्र के हो सकते हैं। एक सूचना के अनुसार क़रीब बीस प्रकार के मनोवैज्ञानिक होते हैं, जो भिन्न-भिन्न कार्यक्षेत्रों से जुड़े होते हैं। उनमें से कुछ रोगी को दवा दे सकते हैं, कुछ मात्र संवाद आदि के द्वारा सहयोग करते हैं।
पोएट्री थेरेपिस्ट इस सूची में नहीं आते हैं, क्योंकि यहां उनका सीधा संबंध समस्या के निदान से नहीं, अपितु समस्या को सही रूप में स्वीकारने में सहायता करना है। जैसा कि मैंने अपने पूर्व के लेखों में उल्लेख किया था कि हम पोएट्री थेरेपिस्ट के रूप में कैंसर वार्ड में जाते थे। थेरेपिस्ट यह समझता है कि वह उस रोगी के पास जा रहा है, जिसके सामने ऐसा भविष्य है, जो अंधकारमय हो सकता है। ऐसा नहीं है कि सभी तरह के कैंसर मृत्यु तक पहुंचाते हैं, लेकिन इतना ज़रूर है कि वह मृत्यु का कारण एक हद तक ज़रूर निश्चित कर देते हैं।
दूसरा सवाल यह भी होता है कि कैंसर का इलाज बेहद कष्टकारक होता है, उससे पार पाना इतना आसान नहीं होता है, इसलिए कभी-कभी यह सवाल भी सामने खड़ा होता है कि यदि कैंसर से मृत्यु होनी ही है, तो इतना कष्ट क्यों उठाना। तीसरा सवाल यह उठता है कि मृत्यु को स्वीकार करना भी एक कला है, और उसे भी सीखना पड़ता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमें रोगी को बची हुई ज़िंदगी को सही रूप से जीने के लिए तैयार करना है। लेकिन यहां सवाल उठता है- कविता का यहां क्या योगदान है?
सबसे पहली बात यह है कि ज़रूरी नहीं कि हर व्यक्ति कवि हो, और यह भी ज़रूरी नहीं कि प्रत्येक मनोवैज्ञानिक कवि हो। हालांकि इसमें संदेह नहीं कि कवि कविता के माध्यम से अपनी भावनाओं का निषेचन करता है, और इस तरह से उसकी पीड़ाओं को मार्ग मिल जाता है। लेकिन जो व्यक्ति कभी कविता से नहीं जुड़ा हो, उसके सामने क्या मार्ग होगा? कभी-कभी कविता के दूसरे रूप जैसे कि संगीत, भजन आदि मददगार होते हैं, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह होती है कि रोगी के भावनात्मक संबंधों को कोमल बनाया जाये। उसे उन स्मृतियों से जोड़ा जाये, जो पीड़ा से अलग हों। अधिकतर हम अपने भाग्य को दोष देते हैं, लेकिन यदि रोगी को यह याद दिलाया जाये कि उसके साथ क्या-क्या अच्छा हुआ है, और वह अपने जीवन में क्या-क्या अर्जित कर चुका है तो वह जिंदगी को अलग रूप में सोचने लगेगा।
कविता लिखवाना ज़रूरी नहीं है, क्योंकि यह क्लासरूम नहीं है, कविता पढ़कर सुनायी भी जा सकती है, कविता के अन्य रूप जैसे भजन, गीत आदि सुनाये जा सकते हैं, उसे प्रकृति के उन उपादानों को महसूस करवाने की कोशिश करनी चाहिए, जिनकी तरफ़ ज़्यादातर ध्यान नहीं जाता है। जैसा कि मैंने पहले भी लिखा था कि जब कैंसर वार्ड के सारे रोगी भविष्य के लिए चिंतित थे, उन्हें समन्दर की याद दिलवायी गयी, जो उनके जीवन का हिस्सा था, लेकिन अब वे समन्दर को नहीं देख रहे थे, उसकी स्मृति से गुज़र रहे थे। हमने जीवन में देखा भी है कि उम्र के साथ स्मृतियां ज़्यादा चमकदार बन जाती हैं। जैसे बचपन में संभवतया साधारण जीवन जिया होगा, लेकिन जब हम बड़े हो जाते हैं, वह साधारण जीवन ख़ूबसूरत लगने लगता है, बचपन में खाया गया सामान्य भोजन स्वादिष्ट लगने लगता है। इसी तरह दूर होने पर भी स्मृति मनभावक हो सकती है। उन दूर गयी ख़ूबसूरत स्मृतियों से जुड़ना मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालता है।
पोइट्री थेरेपी बेहद गंभीर विधा है, यह पांच-दस मिनिट में रोगी को निपटाना नहीं है, इसमें थेरेपिस्ट को बड़ी सावधानी से पीड़ित को सुनना, और यह देखना है कि वह अन्य चिकित्सक द्वारा दी गयी दवा का उचित प्रयोग कर रहा है कि नहीं। समय के साथ पोइट्री थेरेपी में विभिन्न अध्याय जोड़े जा सकते हैं, जैसे कि अन्य कलाओं जैसे नाटक, नृत्य, चित्रकला को देखना समझना, और संभव हो तो कुछ भी उकेरना। कविता इन कलाओं के माध्यम से प्रकट हो सकती है। यदि शारीरिक स्थिति अच्छी है तो घूमना और प्रकृति के बारे में लिखना भी कविता ही है। बहुत-से ऐसे केस देखे गये हैं कि कैंसर पीड़ित व्यक्ति लम्बी यात्रा पर जाना चाहता है, वह उन इच्छाओं को पूरा करना चाहता है जो वह पूरी नहीं कर पाया। थेरेपिस्ट का काम यह भी है कि वह रोगी को अपने बचे जीवन को अपनी तरह जीने की कोशिश करे। यह है ज़िन्दगी की कविता जो काग़ज़ पर नहीं, अपितु ज़िन्दगी के पन्ने पर लिखी जाती है।

रति सक्सेना
लेखक, कवि, अनुवादक, संपादक और वैदिक स्कॉलर के रूप में रति सक्सेना ख्याति अर्जित कर चुकी हैं। व्याख्याता और प्राध्यापक रह चुकीं रति सक्सेना कृत कविताओं, आलोचना/शोध, यात्रा वृत्तांत, अनुवाद, संस्मरण आदि पर आधारित दर्जनों पुस्तकें और शोध पत्र प्रकाशित हैं। अनेक देशों की अनेक यात्राएं, अंतरराष्ट्रीय कविता आंदोलनों में शिरकत और कई महत्वपूर्ण पुरस्कार/सम्मान आपके नाम हैं।
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