
- August 14, 2025
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प्रीति निगोसकर की कलम से....
ध्यान ही कला : रीना तोमर
“कला सृजन से कलाकार को जो सुकून मिलता है, कलाकृति रचते समय जो भाव होता है, वह सही मायने मे एक कलाकार की पूजा है। अपने कला के प्रति श्रद्धा, आस्था कुछ भी कह लें.. उस समय कलाकार साधना की अवस्था में रहता है। वही सही मायने में कलाकार की ध्यान योग की स्थिति होती है। यहां कलाकार के अंतर्मन के भाव ही अपने रंगो में डूब चित्रों में झलकते हैं।”
ये शब्द हैं कलाकार रीना तोमर के, जो अपनी चित्रकला को रियलिस्टिक विधा में स्वीकारा जाना पसंद करती हैं। पद्मश्री वि.श्री. वाकणकर और अन्य मूर्धन्य कलाकारों से शिक्षा प्राप्त चित्रकार रीना चित्र बनाते समय इस बात का ध्यान रखती हैं कि उनके चित्र देखने वाले के मन को सुकून और शांति दें और सामान्य व्यक्ति सरलता से इन्हें समझ सके। रीना तोमर की इस सोच में मुझे कलाकार के भीतर के सामाजिक कर्तव्य बोध की झलक दिखायी देती है।
यह कला में बड़ा विमर्श रहा है कि कला सामाजिक सरोकार के हेतु से हो या स्वान्त: सुखाय। रीना तोमर स्वान्त: सुखाय को अपने सृजन का हेतु बताती हैं। जयपुर जैसे शहर में रहती हैं और उज्जैन जैसे सांस्कृतिक शहर मे रहकर कला की ओर आकृष्ट हुई हैं। पुरातन वास्तु सौंदर्य और नैसर्गिक सौंदर्य को सतत् जीने वाली रीना तोमर पिंक सिटी में अपने इर्द-गिर्द बिखरी प्रकृति के आकर्षण और रहस्य से प्रेरित होकर, उसे भी अपने चित्रों का प्रमुख विषय बनाती रही हैं। वह कहती हैं आप जानते हैं जयपुर एक रंगीला शहर है, जहां आज भी आम जीवन शैली मे संस्कृति का समावेश है। इस अनंत सौदर्य को, पशु पक्षी, फूल पत्ती, प्राकृतिक छटा को चटख रंगो में चित्रित करना मुझे पसंद है। फूल पत्ती बनाना पसंद करती हूं लेकिन प्रयोग करने के लिए हमेशा तत्पर भी रहती हूं।
रंगों का चयन
रीना तोमर के चित्रों का सहज माध्यम एक्रेलिक रंग हैं, परन्तु वाॅश पेंटिंग करते समय वाॅटर कलर इस्तेमाल करती हैं। उन्हीं के शब्दों में : वैसे तो मैं ब्राइट कलर पसंद करती हूं। ब्राइट कलर से मन में उमंग का संचार होता है। शहर के मिज़ाज के अनुसार चित्रों में मैंने मल्टीकलर रंगों का बहुत उपयोग किया है। कंट्रास्ट कलर्स से चित्र में एकदम उठाव आ जाता है। एक चित्र जो टिपिकल औरतों के समूह का है, यह मैंने विद्यार्थी काल में बनाया था।
रीना का चित्रकला अनुभव काफ़ी समृद्ध रहा है। उन्होंने लगातार बीस वर्ष भारतीय विद्या भवन और जवाहर कला भवन में शिक्षण कार्य किया है। स्कूल में क्राफ्ट और स्टेज डेकोरेशन किया है। शहर में समय समय पर होने वाली स्पर्धाओं के विषयानुसार चित्र बनाकर कई पुरस्कार जीत चुकी हैं। महिला दिवस पर महिला कलाकारों की प्रदर्शनी में हर साल भागीदारी करती रही हैं। वह ख़ुद बताती हैं कि उनके चित्र स्कूल के अलावा अनेक घरों की शान बढ़ा रहे हैं।
इसके अलावा, राजस्थान में कई प्रदर्शनियों में हिस्सेदारी कर चुकीं रीना तोमर न्यूयॉर्क समूह प्रदर्शनी में शामिल रही हैं। अखिल भारतीय चित्र एवम मूर्तिकला प्रदर्शनी में भागीदारी और उज्जैन में एकल प्रदर्शनी भी इनके नाम है।

प्रीति निगोसकर
पिछले चार दशक से अधिक समय से प्रोफ़ेशनल चित्रकार। आपकी एकल प्रदर्शनियां दिल्ली, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, पुणे, बेंगलुरु आदि शहरों में लग चुकी हैं और लंदन के अलावा भारत में अनेक स्थानों पर साझा प्रदर्शनियों में आपकी कला प्रदर्शित हुई है। लैंडस्केप से एब्स्ट्रैक्शन तक की यात्रा आपकी चित्रकारी में रही है। प्रख्यात कलागुरु वि.श्री. वाकणकर की शिष्या के रूप में उनके जीवन पर आधारित एक पुस्तक का संपादन, प्रकाशन भी आपने किया है। इन दिनों कला आधारित लेखन में भी आप मुब्तिला हैं।
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