February 28, 2026 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें दृष्टिकोण, आंदोलन, मौलिकता और क़ैफ़ी आज़मी पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. दृष्टिकोण, आंदोलन, मौलिकता और क़ैफ़ी आज़मी ‘गूंजती आवाज़ें’ में प्रस्तुत आलेख मेरी स्मृति के पन्ने थे, जिन्हें मैं... और पढ़े
February 14, 2026 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें एक नज़्म, एक शेर, एक प्ले, एक तस्वीर, और फ़ज़ल ताबिश पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. एक नज़्म, एक शेर, एक प्ले, एक तस्वीर, और फ़ज़ल ताबिश एक नज़्म, एक शेर, एक प्ले... और पढ़े
January 30, 2026 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें इल्म, तजुर्बा, थ्योरी और अख़्तरुल ईमान पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. इल्म, तजुर्बा, थ्योरी और अख़्तरुल ईमान ज़िंदगी मुझसे कह रही थी कि उम्र सवालों की जा... और पढ़े
January 15, 2026 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें दरिया, कुहरा, मौत और नरेश कुमार शाद पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. दरिया, कुहरा, मौत और नरेश कुमार शाद पता नहीं मैं अपनी कच्ची उम्र के किस... और पढ़े
December 31, 2025 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें हवा, सफ़र और वज़ीर आग़ा साहब पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. हवा, सफ़र और वज़ीर आग़ा साहब क्या मेरा इस तरह होना तय था? पहले मैं कौन... और पढ़े
December 15, 2025 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें जुड़ती कड़ी, सिमटता हिसार और अकबर इलाहाबादी पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. जुड़ती कड़ी, सिमटता हिसार और अकबर इलाहाबादी शेर का मा’नी वक़्त और हालात के साथ... और पढ़े
November 30, 2025 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें जंगल की रात और तख़लीक़ पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद (03.12.1982) की कलम से…. जंगल की रात और तख़लीक़ पचमढ़ी की सिम्त पिपरिया नगर के आख़िरी छोर पर चूहे के... और पढ़े
November 14, 2025 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें किताब, जादू और डॉ. स्वामी श्यामानंद सरस्वती ‘रौशन’ पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. किताब, जादू और डॉ. स्वामी श्यामानंद सरस्वती ‘रौशन’ मेरे बाएं हाथ में डॉ. स्वामी श्यामानंद सरस्वती... और पढ़े
October 30, 2025 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें हस्बे-हाल, सुख़न और उबैदुल्लाह अलीम पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. हस्बे-हाल, सुख़न और उबैदुल्लाह अलीम फ़िक्र की ठोस ज़मीन अब नदारद है। अहसास की बुनियादें खोखली... और पढ़े
October 15, 2025 आब-ओ-हवा गूंजती आवाज़ें फ़ासला, भाषा, उद्देश्य और अदम गौंडवी नियमित ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. फ़ासला, भाषा, उद्देश्य और अदम गौंडवी “गर्म रोटी की महक पागल बना देती है मुझे” इस... और पढ़े