उत्तराखंड में नफ़रत के ख़िलाफ़ मोर्चा

भारत को जो हिस्सा प्राकृतिक सुंदरता का गढ़ है, वहां राजनीति की कुरूपता भयावह हो रही है! उत्तराखंड में हाल ही हुई चर्चित सांप्रदायिक घटना के बाद प्रेस के...

मोबाइल गेम्स, डार्क इकोनॉमी… रास्ता क्या है?

गाज़ियाबाद की घटना ने डिजिटल डेथ ट्रैप से जुड़े सवाल फिर उठाये हैं। मासूमों की जान जा रही है और गेम संचालक किस तरह का कुत्सित व्यापार कर रहे...

दलाई लामा के मेडिटेशन को ग्रैमी अवॉर्ड

मनोरंजन जगत के शीर्ष पुरस्कारों में से एक आध्यात्मिक गुरु को क्यों और कैसे मिला? चीन इससे क्यों बौखला गया? और स्टीवन स्पीलबर्ग भी क्यों ग्रैमी पुरस्कार समारोह की...

नौकरशाह रंधावा क्यों हैं आज भी प्रासंगिक?

नौकरशाह रंधावा क्यों हैं आज भी प्रासंगिक?             चंडीगढ़। नगर के बुद्धिजीवियों ने पंजाब कला भवन के सभागार और कला दीर्घा में आयोजित नामचीन...

कहानी के बदलते स्वरूप

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. कहानी के बदलते स्वरूप           आज ए.आई. मॉडल, डिजिटल प्रभाव, ऑनलाइन पत्रिकाएँ, सोशल मीडिया आदि कहानी लेखन और प्रसार...

अमेरिका में लिखने-पढ़ने की संस्कृति

विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं।...

मैं तुम्हारे लिए गा रही हूं… लता मंगेशकर का अंतिम इंटरव्यू

नाम ही जिनका परिचय है, वह लता मंगेशकर कोरोना काल में अस्वस्थ होने के बाद जब ठीक होकर अपने निवास ‘प्रभु कुंज’ लौटीं तो स्वास्थ्य सुरक्षा की दृष्टि से...

वो अदम जिनका दम भरती है हिंदी ग़ज़ल

पाक्षिक ब्लॉग ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से…. वो अदम जिनका दम भरती है हिंदी ग़ज़ल!             आब-ओ-हवा में जब मेरा लेख ‘कब तक दुष्यंत...

सुबह और सांझ के माथे पर ग़मों की गठरी

पाक्षिक ब्लॉग आशीष दशोत्तर की कलम से…. सुबह और सांझ के माथे पर ग़मों की गठरी             अलसुबह अरमानों को अपनी कांख में दबाकर...

राम गांगुली: ‘आग’ की शोहरत का पल भर में धुआं होना

पाक्षिक ब्लॉग विवेक सावरीकर मृदुल की कलम से…. राम गांगुली: ‘आग’ की शोहरत का पल भर में धुआं होना              दोस्तो, विगत एक वर्ष...