भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में पहली जयंती के उपलक्ष्य पर विशेष तौर से पढ़िए फ़िल्मकार मनोज कुमार के साक्षात्कारों के अंश… ‘हम बोलेंगे’ में फ़हमीदा रियाज़ की याद भी। इस अंक से तीन नये ब्लॉग। प्रतिष्ठित साहित्कार रति सक्सेना काव्य के अनछुए पहलू का विश्लेषण करेंगी। ग़ज़ल के हाले-हाज़रा का जायज़ा लेंगे आशीष दशोत्तर तो वरिष्ठ लेखक अरुण अर्णव खरे व्यंग्य की यात्रा और वर्तमान का। साहित्य, कला, शिक्षा आदि से संबद्ध शेष सभी नियमित ब्लॉग अपने तेवर और वैचारिक उष्मा के साथ हैं ही।