फ़ैज़ को गाना देशद्रोह! और क्या-क्या हम देखेंगे?

फ़ैज़ को गाना देशद्रोह! और क्या-क्या हम देखेंगे?

शेक्सपियर, ऑस्कर वाइल्ड, डब्ल्यू.एच. ऑडन, जॉर्ज ऑरवेल या थॉम्पसन को अगर आपने पढ़ा, उन पर बातचीत की तो आपको देशद्रोही माना जाएगा… क्या भारत में आप ऐसी कल्पना कर सकते हैं? तर्क यह कि ये सब अंग्रेज़ कवि/लेखक थे और अंग्रेज़ों ने भारतीयों पर सदियों ज़ुल्म किये इसलिए अंग्रेज़ों के साहित्य को पढ़ना देशद्रोह कहलाएगा। ज़ाहिर है आप भारत में इस तरह के आदेश को मज़ाक़ या पागलपन ही कहेंगे। लेकिन ऐसा कहने से पहले आप ज़रा ठहरकर सोचिए कि यह संभव हो सकता है। कारण है महाराष्ट्र से आ रही एक भयानक ख़बर।

अभिनेता और एक्टिविस्ट वीरा साथीदार की याद में पिछले हफ़्ते एक आयोजन हुआ तो नागपुर पुलिस ने सिर्फ़ इसलिए आयोजकों पर भारतीय न्याय सं​हिता के अंतर्गत सेक्शन 152 की धारा के तहत मुक़दमा दर्ज कर लिया क्योंकि उस आयोजन में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की मशहूर नज़्म ‘हम देखेंगे’ गायी गयी। ऐसा किये जाने पर पुलिस ने मुक़दमा दर्ज करते हुए न सिर्फ़ राजद्रोह की यह धारा लगायी बल्कि सामुदायिक सद्भाव बिगाड़ने की कोशिश और सार्वजनिक बलवे को भड़काने के लिए लगायी जाने वाली धाराएं भी जड़ दीं।

कोविड महामारी के दौर में 13 अप्रैल 2021 को अभिनेता, लेखक, पत्रकार और राजनीतिक टिप्पणीकार साथीदार का निधन हो गया था। उनकी स्मृति में सालाना जलसे के रूप में यह कार्यक्रम बीती 13 मई को हुआ था। द वायर की 19 मई की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इस कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता उत्तम जागीरदार को व्याख्यान के लिए बुलाया गया था। उन्होंने महाराष्ट्र​ विशेष जनसुरक्षा विधेयक 2024 पर एक्टिविस्टों और अकादमिकों की चिंताओं को लेकर बात की थी और कहा था कि अगर यह क़ानून लागू किया गया तो मानवाधिकारों का बुरी तरह हनन होगा और किसी भी असह​मति को ‘अर्बन नक्सल’ कहकर दमन की कार्रवाई करना आसान हो जाएगा।

हम देखेंगेपर ऐतराज़ क्यों?

नागपुर के ​स्थानीय निवासी दत्तात्रेय शिर्के द्वारा पुलिस में दर्ज करवायी गयी एफ़आईआर में उल्लेख किया गया है, ‘ऐसे समय में जब देश ने पाकिस्तानी बलों के साथ संघर्ष किया है, नागपुर में धुर वामपंथियों ने पाकिस्तानी शायर फ़ैज़ की नज़्म गायी। इसमें एक पंक्ति है ‘तख़्त हिलाने की ज़रूरत है’, यह पंक्ति सीधे तौर पर सरकार गिराने की धमकी प्रतीत होती है।’ एफ़आईआर में यह पंक्ति दर्ज करवायी गयी है, जबकि असल पंक्ति है, ‘सब तख़्त गिराये जाएंगे’। वायर की रिपोर्ट यह भी बताती है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह के आरोप लगाये जाने पर फ़िलहाल स्टे दे रखा है तब भी नागपुर पुलिस ने यह मुक़दमा दर्ज कर लिया है।

वीरा साथीदार और उनके साथियों के एक्टिविज़म के बारे में और जानने के लिए आप द वायर की पूरी रिपोर्ट पढ़ सकते हैं। विचारणीय यह है कि क्या अब कविताओं/साहित्य के पढ़े जाने, गाये जाने पर देशद्रोह के मामलों का सामना करना होगा? क्या किसी भी नागरिक की शिकायत को तर्क पर परखे बग़ैर ऐसे मामले दर्ज हो सकते हैं?

उल्लेखनीय है फ़ैज़ की इस नज़्म को गाये जाने पर कभी पाकिस्तान के सैन्य तानाशाह नाराज़ हुआ करते थे और गायकों, शायरों या आयोजकों को जेल में डालने की कवायद करते थे। गायिका इक़बाल बानो ने जब यह नज़्म गायी थी, तब भी पाकिस्तानी निज़ाम की पाबंदियों को लेकर भारी हंगामा हुआ था। भारत एक लोकतांत्रिक देश है। यहां इक़बाल बानो की आवाज़ भी सुनी जा सकती है और फ़ैज़ की नज़्म भी। सुनिए।

— आब-ओ-हवा डेस्क

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