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विजय कुमार स्वर्णकार की कलम से....

मात्राभार गणना: एक मनोरंजक विधि-2

             “वर्ड रिप्लेसमेंट मैथड” की उपयोगिता निर्विवाद है। पिछले भाग में हमने निम्नलिखित डमी नंबर-2 शे’र की सहायता से कुछ शब्दों के मात्राभार का सत्यापन किया था।
“ज़िंदगी का सफ़र है अनोखा सफ़र
जिस्म समझा नहीं जान समझी नहीं”

अब इसी डमी नंबर-2 से डमी नंबर-3 शे’र का सृजन करते हैं।
“आप कमज़ोर हैं शेर बलवान है
आज़माना नहीं हार जाना नहीं”

अब इसकी तकतीअ करते हैं : “आप21 कमज़ोर221 हैं2 शेर21 बलवान221 है2
आज़माना2122 नहीं12 हार21 जाना22 नहीं12″

इस डमी में “कमज़ोर” या “बलवान” की जगह अपमान, दीर्घायु, संज्ञान, गांधार आदि शब्द रखकर लय में पढ़िए। कोई गड़बड़ी नहीं होगी। यह सुनिश्चित करता है कि इन सबका का मात्राभार 221 ही है। अब यहां एक नया शब्द “सुनिश्चित” आ गया। इसका मात्राभार क्या होना चाहिए 212 या 22 या 222 या और कुछ। 212 की परख के लिए डमी नंबर-2 का पहला रुक्न पकड़िए:

इस शे’र में “ज़िंदगी” की जगह “सुनिश्चित” पढ़िए। कुछ यूं:
“सुनिश्चित का सफ़र है अनोखा सफ़र
जिस्म समझा नहीं जान समझी नहीं”

ज़ाहिर है लय बिगड़ेगी अर्थात “सुनिश्चित” का मात्राभार 212 नहीं है। अगर आपको लगता है कि मात्राभार 22 है तो “समझा” और “समझी” की जगह “सुनिश्चित” रखकर पढ़िए। कुछ यूं:
“ज़िंदगी का सफ़र है अनोखा सफ़र
जिस्म सुनिश्चित नहीं जान सुनिश्चित नहीं”

और अगर आपको लगता है कि यह 122 है तो डमी नंबर-2 में ही “अनोखा” शब्द की जगह “सुनिश्चित” रखकर पढ़िए।

“ज़िंदगी का सफ़र है सुनिश्चित सफ़र
जिस्म समझा नहीं जान समझी नहीं”

अब लय परफेक्ट है! जी हां। इस तरह आप अनेक डमी बना सकते हैं और मात्राभार की उलझन स्वयं सुलझा सकते हैं। शब्दों में मात्रा पतन कहाँ उचित है, कहाँ नहीं, इस मुद्दे पर भी यह मैथड सहायक है। एक शे’र (221 1221 1221 122 वज़्न पर) देखिए:
“अहसास बनाते हैं किसी (कविता) को कविता
वो बनती नहीं लफ़्ज़ों की बस कारीगरी से”

इस शे’र में “कविता” को 21 पर पढ़ने के लिए ज़बरदस्ती करनी पड़ेगी। इसी शब्द को डमी नंबर-2 के “जान” की जगह रखिए और शे’र पढ़िए। अगर आप डमी को लय में पढ़ पा रहे हैं तो मात्रा गिर सकती है।
“ज़िंदगी का सफ़र है अनोखा सफ़र
जिस्म समझा नहीं ‘कविता’ समझी नहीं”

हम देखते हैं कि लय बिगड़ती है अर्थात मात्रा पतन से बचिए।

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इसी तरह तीन अक्षर के शब्दों की मात्रा पतन के उदाहरण भी जांचे जा सकते हैं। कोई शब्द अगर तीन अक्षरों से बना है तो संभावित मात्रा भार की सूची ऐसी होती है: 222, 122, 212, 221,121, 112, 211 कुल सात। 111 का चलन उर्दू ने नहीं अपनाया इसलिए हिन्दी में भी प्रचलित नहीं है। इन सात में से दो मात्रा भार 112 ओर 211 विशिष्ट हैं। किसी शब्द का मात्राभार 112 कब होगा? इसे प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ायी जाने वाली विधि “स्थानीय मान” या “प्लेस वैल्यू” का सहारा लेकर समझते हैं। इकाई दहाई सैकड़ा का स्थान हमें पता है। यहां 112 में इकाई पर दीर्घ है और दहाई तथा सैकड़े के स्थान पर लघु है। यह इंगित करता है कि दहाई और सैकड़े के स्थान पर स्थित अक्षर एक लघु मात्रा (अ, इ, उ) के साथ हैं। उर्दू में अरबी और फ़ारसी से आये कुछ चुनिंदा शब्दों का उच्चारण 112 मात्राभार पर होता है जैसे रक़बा, अदबी, हरक़त आदि। हिन्दी के लगभग सभी शब्द में अक्षर अपनी मात्राओं के साथ होते हैं लेकिन खड़ी बोली की उच्चारण शैली में कुछ अक्षरों की मात्राओं का लोप हो जाता है। जैसे “समता” में “म” के “अ” का लोप करके “सम्ता” की तरह उच्चारित किया जाता है। ख़ैर, अब आते हैं अतिविशिष्ट मात्रा भार “211” पर। उर्दू में ऐसे मात्राभार के लिए कोई शब्द नहीं है। अरबी और फ़ारसी से आयातित शब्दों में ऐसा शायद ही कोई शब्द हो, जिसके अंतिम अक्षर पर कोई लघु मात्रा लगी हो। हिन्दी में ऐसे अनेक शब्द हैं जैसे सुरभि, दयालु आदि लेकिन उनका मात्राभार भी 211 नहीं होता। ऐसे मात्राभार की पूर्ति शब्द में मात्रा पतन करके या अन्य ट्रिक से की जाती है। जैसे चाहिए, कीजिए, देखते आदि में दहाई के स्थान पर पहले से लघु है। इकाई के स्थान पर स्थित अक्षर की मात्रा गिराकर उसे लघु की तरह उच्चारित करके काम चलाया जाता है।
“सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं
सो उसके शह्र में कुछ दिन ठहर के देखते हैं”

यह शे’र 1212 1122 1212 112 के वज़्न में है। शे’र में “देखते” 211 के मात्राभार पर है। जिन्हें ग़ज़ल कहने अभ्यास है उन्हें भी इस विधि से कुछ न कुछ लाभ अवश्य होता है।

विजय कुमार स्वर्णकार, vijay kumar swarnkar

विजय कुमार स्वर्णकार

विगत कई वर्षों से ग़ज़ल विधा के प्रसार के लिए ऑनलाइन शिक्षा के क्रम में देश विदेश के 1000 से अधिक नये हिन्दीभाषी ग़ज़लकारों को ग़ज़ल के व्याकरण के प्रशिक्षण में योगदान। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग में कार्यपालक अभियंता की भूमिका के साथ ही शायरी में ​सक्रिय। एक ग़ज़ल संग्रह "शब्दभेदी" भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित। दो साझा संकलनों का संपादन। कई में रचनाएं संकलित। अनेक प्रतिष्ठित संस्थाओं द्वारा सम्मानित।

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