भाषा का रोब

आदित्य की कलम से…. भाषा का रोब                इंसानों ने लाखों सालों के जंगली जीवन के दौरान आवाज़ निकालने की अपनी क्षमता का...

यादें और सपने… गुरु-शिष्या की पेंटिंग्स ने जमाया रंग

यादें और सपने… गुरु-शिष्या की पेंटिंग्स ने जमाया रंग                चंडीगढ़। पंजाब कला भवन की एम.एस. रंधावा कला दीर्घा में कला गुरु मुकेश...

‘वाद’ के आधार पर नहीं रचा जाता साहित्य: नमिता सिंंह

नमिता सिंह (4 अक्टूबर 1943) … कथा साहित्य का सुपरिचित एवं स्थापित नाम। जनवादी लेखक संघ की पदाधिकारी, प्राध्यापक, ‘वर्तमान साहित्य’ जैसी पत्रिकाओं की संपादक जैसे दायित्वों के बीच...

मेरे अस्तित्व की लघुता और कमलकांत सक्सेना जी

नियमित ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. मेरे अस्तित्व की लघुता और कमलकांत सक्सेना जी              मैं इससे पहले किसी साहित्यकार से नहीं मिला...

व्यंग्य में फैंटेसी- प्रभावकारी व्यंजना

नियमित ब्लॉग अरुण अर्णव खरे की कलम से…. व्यंग्य में फैंटेसी- प्रभावकारी व्यंजना                  फैंटेसी-साहित्य एक सशक्त और बहुआयामी विधा है, जिसमें...

राजेश रोशन का राग पहाड़ी में संगीतबद्ध अनूठा भजन

नियमित ब्लॉग वि​वेक सावरीकर मृदुल की कलम से…. राजेश रोशन का राग पहाड़ी में संगीतबद्ध अनूठा भजन            वर्ष 1975 में राजेश रोशन के संगीत...

द्वितीय विश्वयुद्ध का कथानक और आज के संदर्भ

नियमित ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से…. द्वितीय विश्वयुद्ध के कथानक में आज के संदर्भ                  मेरे एक मित्र ने, जो हमारे...

इतने साहित्य उत्सव..! तमाशा मेरे आगे

नियमित ब्लॉग भवेश दिलशाद की कलम से…. इतने साहित्य उत्सव..! तमाशा मेरे आगे               साहित्य उत्सव क्या बला हैं? कुछ बरस पहले की...

खिड़की में दीवार बनाने की ख़ुराफ़ात में लोग

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...
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