bhavna chaudhary, bhavna chaudhary painting
पाक्षिक ब्लॉग प्रीति निगोसकर की कलम से....

कैनवास पर छाप छोड़ने को बेताब भावना

              भोपाल जैसे कलाधर्मी शहर से ताल्लुक रखने वाली भावना प्रसिद्ध चित्रकार सुरेश चौधरी जी की सुपुत्री हैं। कह सकते हैं कि कला के संस्कार वह अपने साथ लेकर ही पैदा हुईं। मूर्धन्य कलाकारों का घर में आना-जाना होने से इनका बचपन कला परिदृश्य के बीच गुज़रा। आगे चलकर सारे कलाकारों के मार्गदर्शन ने भावना के भीतर के कला बीज को सींचा।

ज़्यादातर कलाकारों की मुख्य प्रेरणास्रो सच में प्रकृति रही है। भावना भी उसी से प्रभावित हो पेड़, पौधे, चिड़िया, गिलहरी अपने कैनवास पर उतारने लगीं। नूतन कॉलेज से चित्रकला में एम.ए. करने के बाद ताज आर्ट गैलरी और जहांगीर आर्ट गैलरी, मुंबई में अपने चित्रों की एकल प्रदर्शनी भी लगा चुकी हैं।

प्रकृति के पांच तत्त्व हवा, पानी, आकाश, मिट्टी और आग जैसे तत्वों का अहसास अपने चित्रों में रंगने की कोशिश का नाम भावना है। रंगों की बात करें तो आप चित्र में रंगों को बहुत ही स्वाभाविक तौर पर कैनवास पर रखती हैं। एकदम विपरीत रंगों का चयन होते हुए भी चित्र में कहीं भी ओवरलैपिंग या मंडीनेस दिखायी नहीं पड़ती है। शुद्ध और विपरीत रंग का ताना-बाना बुन कैनवास में स्वस्थ आकारों से कैनवास भरा रहता है। रंगों को लगाने का तरीक़ा ऐसा कि आकार अपने-आप बनते चले जाते हैं और एक दूसरे के साथ रंगों का समूह एक ख़ूबसूरत कैनवास हमारे सामने रखता है।

भावना चौधरी की पेंटिंग, bhavna chaudhary painting

लाल रंग के पास नीला रंग कहीं, हल्का-सा है या कहीं गहरा है, दो रंग के बीच सफ़ेद एक आकार उभरता है। ब्रश भी कलाकार ऐसे लगाती हैं, जिससे कैनवास पर एक माहौल-सा बनने लगता है। इन चित्रों को अगर आप कुछ देर निहारें तो ये आपसे बातें करने लगते हैं, शांति और ख़ुशी जैसा सकारात्मक फ़ील देने लगते हैं। ब्रशेज़ के डायरेक्शन से ग़ज़ब ऐसा होता है कि मूर्त अहसासों की अमूर्त कविता ही मानो रंगों में व्यक्त होती है।

इनका एक चित्र है, गाय चराती लड़की। उसमें गांव भी है, लड़की गाय के साथ दिखती है। पेड़, बादल भी हैं, पर दूर पहाड़ी पर बैठी चिड़िया ग़ज़ब ढंग से चित्रित कविता है, जिसे हम सहज पढ़ सकते हैं। बिना लाग-लपेट सीधे शब्दों की तरह विषय कैनवास पर सीधे दिखायी देते हैं।

भावना के पसंदीदा रंग ब्लू और ब्लू के शेड्स पर्शियन और अल्ट्रामराईन हैं। चित्र शुरू वरमिलियन से करती हैं। इनसे बातचीत बहुत ही रोचक रही। आप भी सुनिए:

“चित्र बनाते समय सामने एक कैनवास होता है, जिसे हम ब्लैंक कैनवास कहते हैं। मैं किसी कहानी को, किसी के साथ की अच्छी बातचीत की अनुभूति को (जो मन में खुशनुमा लहर दौड़ा जाती है) बिल्कुल वैसे ही व्यक्त करने बैठती हूं तो कैनवास का हर एक ग्रेन मेरे अपने रोम-रोम का-सा आभास होता है।

सुनी, देखी, पढ़ी या किसी भी तरह की सुखद अनुभूति, जिसका असर मेरे ऊपर सकारात्मक होता है, इसी सकारात्मकता के साथ मैं चित्र बनाती हूं। चित्रित अपनी अनुभूतियों के साथ जब किसी दर्शक की अनुभूति में तारतम्य बन जाता है, तो जो ख़ुशी की लहर दौड़ती है, वह अवर्णनीय है।

कोई सपना या क्षण पुनः अनुभूति भर देता है, तो वो दूसरे चित्र की रूपरेखा होती है। इस तरह हर एक चित्र संतुष्ट करता है पर आगे और अच्छे की होड़ मन में चलती रहती है। कुछ और हासिल करने की अदम्य इच्छा के साथ् आगे बढ़ती मेरी यात्रा बहुत अच्छी और उत्साहवर्धक चल रही है। मेरा छोटा-सा ड्रीम है दुनिया के नामचीन कलाकारों की तरह मेरा नाम भी हो। मेरे चित्र पसंद किये जाएं और कलाप्रेमी कहें ये भावना चौधरी की पेंटिंग है।”

bhavna chaudhary, bhavna chaudhary painting

कलाकार ने दिल खोलकर बात की और अंत में यह प्यारा सा वाक्य भी कहा कि आपको मेरा यह कहना छोटा मुंह बड़ी बात लग सकती है पर दिल की बात यही है। इनके चित्र वाक़ई लगते हैं, हमारा अंतर्मन ब्रह्मांड की सैर कर रहा है। भावना को शुभकामनाएं देने को जी चाहता है।

प्रीति निगोसकर, preeti nigoskar

प्रीति निगोसकर

पिछले चार दशक से अधिक समय से प्रोफ़ेशनल चित्रकार। आपकी एकल प्रदर्शनियां दिल्ली, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, पुणे, बेंगलुरु आदि शहरों में लग चुकी हैं और लंदन के अलावा भारत में अनेक स्थानों पर साझा प्रदर्शनियों में आपकी कला प्रदर्शित हुई है। लैंडस्केप से एब्स्ट्रैक्शन तक की यात्रा आपकी चित्रकारी में रही है। प्रख्यात कलागुरु वि.श्री. वाकणकर की शिष्या के रूप में उनके जीवन पर आधारित एक पुस्तक का संपादन, प्रकाशन भी आपने किया है। इन दिनों कला आधारित लेखन में भी आप मुब्तिला हैं।

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