
- December 8, 2025
- आब-ओ-हवा
- 0
आंखों देखी विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से....
जब किसी अमेरिकी मॉल में बम मिलता है...
थैंक्स गिविंग वीक, हम जर्सी सिटी के एक मॉल में शाम का समय बिताने निकले थे, पर वहां आसपास अचानक आपाधापी देखने को मिली, हम तुरंत घर लौट गये। अनुभव हुआ कि भारत में ऐसी घटनाएं होती हैं तो जो राजनीति होती है, वैसा कुछ भी यहां नहीं होता। आम लोगों का संयत आचरण, कोई गॉसिप नहीं, कोई अफ़वाह नहीं.. प्रभावित कर गयी इस घटना के बाद में मीडिया रपट के आधार पर यह लिख रहा हूं।
29–30 नवंबर 2025 को न्यू जर्सी के जर्सी सिटी स्थित न्यू पोर्ट सेंटर मॉल में घटित बम धमकी की यह घटना अमेरिकी शॉपिंग मॉल सुरक्षा, भीड़-प्रबंधन और आतंकवाद-रोधी सतर्कता के संदर्भ में एक महत्त्वपूर्ण उदाहरण के रूप में उभरकर सामने आती है। यह घटना उस समय घटी, जब थैंक्स गिविंग वीकेंड और ब्लैक फ्राइडे के बाद मॉल में स्वाभाविक रूप से ख़रीदारों की भीड़ अधिक थी, जिससे किसी भी सुरक्षा अलर्ट का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। संदिग्ध पैकेज की सूचना मिलते ही जो घटनाक्रम शुरू हुआ, उसने न केवल वहां उपस्थित लोगों में भय और अफरा-तफरी पैदा की, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की तत्परता और समन्वय की भी स्पष्ट झलक दिखायी दी।
मॉल के भीतर एक संदिग्ध पैकेज की पहचान हुई, जिसे किसी कर्मचारी या सुरक्षाकर्मी ने नोटिस कर तत्काल अधिकारियों को सूचित किया। सूचना मिलते ही जर्सी सिटी पुलिस, बम निरोधक दस्ते और K-9 यूनिट्स को मौके पर बुलाया गया और मॉल की सामान्य गतिविधियों पर तुरंत रोक लगा दी गयी। प्रत्यक्षदर्शी विवरणों और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, देर दोपहर से शाम के बीच मॉल के भीतर अनाउंसमेंट्स और सुरक्षाकर्मियों की आवाजाही से लोगों को स्थिति की गंभीरता का आभास होने लगा, जिसके बाद इवैक्यूएशन की प्रक्रिया शुरू की गयी। सुरक्षा बलों ने संदिग्ध पैकेज को संभावित विस्फोटक मानते हुए पूरे परिसर को “संभावित बम थ्रेट” की घटना की तरह ट्रीट किया, जिससे उन्हें सबसे पहले मानव जीवन की सुरक्षा पर पूरा ध्यान केंद्रित करना पड़ा।
इवैक्यूएशन के दौरान मॉल के भीतर वातावरण अचानक सामान्य ख़रीदारी के माहौल से भय और घबराहट के माहौल में बदल गया। लोग अपने परिवारों और बच्चों को साथ लेकर तेज़ी से निकास द्वारों की ओर भागने लगे, जिसके कारण कुछ हिस्सों में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गयी और कई लोग ज़मीन पर गिरने या धक्का लगने से घायल होने की आशंका में रहे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और मॉल सुरक्षा ने मिलकर मुख्य प्रवेश और निकास बिंदुओं पर मानव शृंखला बनायी, लोगों को शांत करने की कोशिश की और उन्हें व्यवस्थित कतार बनाकर बाहर निकालने के निर्देश दिये, जिसका सबने सम्मान किया। यह पूरे शहर के लिए एक ऐसा क्षण था, जब सोशल मीडिया पर “एक्टिव शूटर” जैसी अफ़वाह बन सकती थी, पर लोगों ने बुद्धिमत्ता से और अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि घटना का स्वरूप संदिग्ध पैकेज और बम धमकी से जुड़ा है, किसी गोलीबारी से नहीं।
मॉल के बाहर सड़क और फ़ुटपाथों पर सैकड़ों लोग जमा हो गये, जिनमें से कई अपने परिचितों और परिवार के सदस्यों की कुशल-क्षेम जानने के लिए बेचैन नज़र आ रहे थे। पुलिस ने न केवल मॉल के चारों ओर घेरा बनाकर मीडिया और आम नागरिकों को एक निर्दिष्ट परिधि से आगे न जाने की चेतावनी दी, बल्कि ट्रैफ़िक को भी डायवर्ट कर इमरजेंसी वाहनों के लिए रास्ता साफ़ रखा। शहर के निर्वाचित प्रतिनिधियों, विशेषकर वार्ड E के काउंसलर ने ऑनलाइन संदेशों के माध्यम से लोगों को यह जानकारी दी कि न्यू पोर्ट सेंटर मॉल में संदिग्ध पैकेज मिलने की जांच जारी है और जब तक “ऑल क्लियर” न दे दिया जाये, तब तक नागरिकों को क्षेत्र से दूर रहने की सलाह दी जाती है। इस तरह प्रशासनिक संवाद ने अफ़वाहों पर आंशिक रूप से अंकुश लगाने और जनता को आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करने की दिशा में अहम भूमिका निभायी।
कई घंटों की जांच और सर्च ऑपरेशन के बाद भी सार्वजनिक रूप से किसी सक्रिय विस्फोटक उपकरण की पुष्टि नहीं की गयी, फिर भी इस पूरी घटना को सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत “अत्यधिक सावधानी” के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। बम स्क्वॉड और K-9 यूनिट्स द्वारा की गयी तलाशी ने यह संदेश दिया कि किसी भी संदिग्ध वस्तु या धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता, ख़ासकर तब जब स्थान भीड़भाड़ वाला शॉपिंग मॉल हो और समय त्योहारी ख़रीदारी का हो। यह घटना लोगों के लिए भी एक सीख बनकर सामने आती है कि ऐसे समय में घबराहट या अफवाहों के बजाय शांत रहकर सुरक्षाकर्मियों के निर्देशों का पालन करना, बच्चों और बुजुर्गों को अपने पास रखना और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत देना ही सबसे अच्छा विकल्प होता है। न्यू पोर्ट सेंटर मॉल की यह बम धमकी रपट अंततः इस व्यापक तथ्य को रेखांकित करती है कि आधुनिक शहरी जीवन में सुरक्षा जागरूकता, प्रशासनिक तत्परता और नागरिक ज़िम्मेदारी एक-दूसरे से गहरे रूप से जुड़ी हुई कड़ियाँ हैं।
ऐसी घटनाएं तो होती रहेंगी क्योंकि आतंकवादी भावनाएं दुनिया में बलवती होती जा रही हैं, पर उनसे निपटने के तरीक़े हमारे हाथ हैं, अमेरिका की यह व्यवस्था प्रशंसनीय है। भारत इस तरह की घटनाओं से बहुत कुछ सीख सकता है।

विवेक रंजन श्रीवास्तव
सेवानिवृत मुख्य अभियंता (विद्युत मंडल), प्रतिष्ठित व्यंग्यकार, नाटक लेखक, समीक्षक, ई अभिव्यक्ति पोर्टल के संपादक, तकनीकी विषयों पर हिंदी लेखन। इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स के फैलो, पोस्ट ग्रेजुएट इंजीनियर। 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी ब्लॉगर, साहित्यिक अभिरुचि संपन्न, वैश्विक एक्सपोज़र।
Share this:
- Click to share on Facebook (Opens in new window) Facebook
- Click to share on X (Opens in new window) X
- Click to share on Reddit (Opens in new window) Reddit
- Click to share on Pinterest (Opens in new window) Pinterest
- Click to share on Telegram (Opens in new window) Telegram
- Click to share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
- Click to share on Bluesky (Opens in new window) Bluesky
