हॉलैंड टनल, holland tunnel, new york, america
विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं। आब-ओ-हवा पर विशेष रूप से वैचारिकी, नोट्स, अनुभव आदि इंदराज के लिए यह कोना।
दूर देस में लेखक-4...

मानव संकल्प की प्रतीक ऐतिहासिक हॉलैंड टनल

              हॉलैंड टनल (तस्वीर में देखें) हडसन नदी के नीचे मैनहैटन को न्यू जर्सी से जोड़ने वाली दुनिया की पहली यांत्रिक वेंटिलेशन वाली वाहन सुरंग है। इसका निर्माण 1920 में शुरू हुआ था और 1927 में इसका उद्घाटन हुआ। पोर्ट अथॉरिटी ऑफ न्यूयॉर्क एंड न्यू जर्सी द्वारा संचालित यह सुरंग न्यूयॉर्क शहर के हडसन स्क्वायर को जर्सी सिटी से जोड़ती है।

हॉलैंड टनल, holland tunnel, new york, america

इतिहास देखें तो हडसन नदी पर वाहन क्रॉसिंग की योजना 1906 से चली आ रही थी, लेकिन विभिन्न चर्चाओं एवं विवादों के बाद 1919 में टनल निर्माण पर सहमति बनी। मुख्य इंजीनियर क्लिफ़र्ड मिल्बर्न हॉलैंड के डिज़ाइन पर 1920 में काम शुरू हुआ, जो 1924 में उनकी मृत्यु से पूर्व तक पूरा न हो सका। उनके बाद मिल्टन फ़्रीमैन और ओले सिंगस्टाड ने इस परियोजना को पूरा किया।

13 नवंबर 1927 को इस महत्वपूर्ण टनल मार्ग का उद्घाटन हुआ, जब यह दुनिया की सबसे लंबी जलमग्न वाहन सुरंग बनी।

लंबाई और संरचना

हॉलैंड टनल ढाई किलोमीटर से ज़्यादा रिवरबेड के भीतर, एक सदी से यातायात की सफल संरचना है। अप्रोच रोड्स सहित इसकी लंबाई और भी ज़्यादा हो जाती है। टनल की ऊंचाई 12.6 फीट है तथा यह अधिकतम जलस्तर से 93 फीट नीचे की अधिकतम गहराई में बनायी गयी है। स्टील रिंग्स पर 19 इंच कंक्रीट लेप है तथा दोनों ट्यूब्स आपस में 15 फीट की दूरी पर हैं।

यह पहली सुरंग है, जिसमें पार्श्विक (ट्रांसवर्स) वेंटिलेशन प्रणाली है, जिसमें चार वेंटिलेशन टावर्स (दो-दो प्रत्येक तट पर) हैं। 84 पंखे (42 इनटेक, 42 एग्जॉस्ट) हर 90 सेकंड में सुरंग की हवा बदल देते हैं, जो लगातार वाहनों की आवाजाही से होते कार्बन मोनोऑक्साइड को नियंत्रित रखते हैं। नदी में शाफ़्ट्स 107 फीट ऊंचे हैं तथा आपातकालीन निकास भी प्रदान करते हैं।

परिचालन और प्रतिबंध

यह इंटरस्टेट 78 का हिस्सा है तथा प्रतिदिन लगभग 90,000 वाहन इस टनल मार्ग से गुज़रते हैं। पूर्व दिशा में ही टोल है तथा हेजमैट वाले वाहन, तीन से अधिक एक्सल ट्रक तथा ट्रेलर प्रतिबंधित हैं। वाहनों की चौड़ाई सीमा 8 फीट है। आपात सेवाएं पोर्ट अथॉरिटी पुलिस द्वारा दी जाती हैं।

हॉलैंड टनल का निर्माण कार्य 1920 में शुरू हुआ, जब मुख्य इंजीनियर क्लिफ़र्ड मिल्बर्न हॉलैंड के नेतृत्व में शील्ड मेथड (टनलिंग शील्ड) का उपयोग कर हडसन नदी के तल पर दो समांतर ट्यूबों की खुदाई की गयी। इसमें कास्ट आयरन रिंग्स (प्रत्येक 14 स्टील सेगमेंट्स वाली) लगायी गयीं, जिन्हें हाइड्रोलिक जैक्स से आगे धकेला गया; चट्टान में 2.5 फीट प्रतिदिन और कीचड़ में 5-6 फीट प्रतिदिन की गति से खुदाई का काम चला। 1923 में कैसलस नदी में उतारे गये और 19 इंच मोटी कंक्रीट लेयर से लेपित ट्यूब्स को 1927 तक पूरा किया गया, जिसमें वेंटिलेशन के लिए चार टावर्स भी बनाये गये।

दुनिया में अन्य नदियों के नीचे इस तरह की यातायात व्यवस्था कम ही है। चैनल टनल (इंग्लैंड-फ्रांस) सबसे लंबी रेल सुरंग है, जिसकी जलमग्न लंबाई 37.9 किमी है और यह 1988-94 में बनी है। इसी तरह नॉर्वे की राइफ़ास्ट टनल (14.3 किमी, 293 मीटर गहराई) सबसे गहरी कार सुरंग है, जबकि बांग्लादेश की बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान टनल (3.32 किमी) दक्षिण एशिया की पहली नदी-नीचे सड़क सुरंग है। जर्मनी की एल्बे टनल (3.3 किमी, 1975) और कनाडा की जॉर्ज मैसी टनल (0.629 किमी) इमर्स्ड ट्यूब तकनीक पर आधारित सुरंगें हैं।

हडसन नदी के गर्भ में छिपी हॉलैंड टनल न केवल दो महानगरीय क्षेत्रों को जोड़ती है, बल्कि इंजीनियरिंग की एक अनुपम कृति है, जो सदी भर पहले से असंभव को संभव बनाती चली आ रही है। 1920 के दशक में जब न्यू यॉर्क और न्यू जर्सी के बीच नदी पार करना घंटों का सफ़र था, तब क्लिफ़र्ड हॉलैंड जैसे दूरदर्शी इंजीनियरों ने इसकी कल्पना की। नदी के तल पर दो समांतर ट्यूबें खोदने का काम शुरू हुआ, जहां विशालकाय शील्ड मशीनें कीचड़ और चट्टानों से जूझती, हाइड्रोलिक जैक्स से स्टील रिंग्स को आगे सरकातीं। चार वर्षों की कठिन मेहनत के बाद 1927 में यह उद्घाटित हुई, दुनिया की पहली सुरंग, जहां वाहनों की ज़हरीली गैसों को बाहर निकालने के लिए यांत्रिक वेंटिलेशन प्रणाली बनी।

यह टनल केवल एक यातायात मार्ग नहीं, बल्कि मानव संकल्प की प्रतीक है, जहां तकनीक ने प्रकृति की बाधाओं को परास्त कर दिया। दुनिया के अन्य नदी-तले बने चमत्कारों से तुलना करें तो हॉलैंड ही अग्रणी टनल दिखती है। चैनल टनल की भव्य लंबाई या नॉर्वे की राइफ़ास्ट की गहनता भले ही आकर्षित करें, पर हॉलैंड टनल की वेंटिलेशन क्रांति ने ही आधुनिक सुरंगों का आधार तैयार किया। बंगबंधु सुरंग दक्षिण एशिया में नया अध्याय है, तो एल्बे की बहु-उपयोगिता प्रेरणा देती है, मगर इस हॉलैंड की कहानी सबसे पुरानी और प्रेरक है। एक युग की आवश्यकता ने कैसे स्थायी विरासत गढ़ी। आज जब हम इससे गुज़रते हैं, तो लगता है मानो इतिहास के तकनीकी गलियारों से होकर भविष्य की ओर बढ़ रहे हों।

विवेक रंजन श्रीवास्तव, vivek ranjan shrivastava

विवेक रंजन श्रीवास्तव

सेवानिवृत मुख्य अभियंता (विद्युत मंडल), प्रतिष्ठित व्यंग्यकार, नाटक लेखक, समीक्षक, ई अभिव्यक्ति पोर्टल के संपादक, तकनीकी विषयों पर हिंदी लेखन। इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स के फैलो, पोस्ट ग्रेजुएट इंजीनियर। 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी ब्लॉगर, साहित्यिक अभिरुचि संपन्न, वैश्विक एक्सपोज़र।

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