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विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं। आब-ओ-हवा पर विशेष रूप से इस वैचारिकी, नोट्स, अनुभव आदि इंदराज के लिए यह कोना।
दूर देस में लेखक-5...

हिंदी दिवस के दो उत्सव और न्यूयॉर्क में गूंज

            भारत की आत्मा उसकी भाषाओं में बसती है और उन सबमें हिंदी का स्थान केन्द्रीय है। हिंदी केवल राजभाषा नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की सांस्कृतिक पहचान, संवेदना और अभिव्यक्ति का माध्यम है। इसी गौरव को मनाने के लिए हर वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस और 14 सितंबर को राष्ट्रीय हिंदी दिवस मनाया जाता है। दोनों का उद्देश्य एक ही है, भाषा के प्रति सम्मान और उसके विस्तार के संकल्प को जन-जन में जगाना, फिर भी इनके परिप्रेक्ष्य अलग हैं।

हिंदी दिवस के राष्ट्रीय संदर्भ को देखें, 14 सितंबर, 1949 को भारत की संविधान सभा ने हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकृति दी थी। तभी से हिंदी दिवस मनाने की परंपरा शुरू हुई। यह दिन हिंदी को प्रशासन और शासन की भाषा के रूप में प्रतिष्ठित करने का प्रतीक है। विद्यालयों, विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थानों में आयोजित कार्यक्रम हिंदी के औपचारिक संवर्धन के प्रयासों को प्रेरणा देते हैं। 14 सितंबर का दिन इंगित करता है कि हिंदी केवल बोलचाल की नहीं, बल्कि शासन और संवाद की प्रमुख धारा है।

विश्व हिंदी दिवस का अंतरराष्ट्रीय अर्थ

विश्व मंच पर हिंदी की पहचान को प्रतिष्ठित करने के उद्देश्य से पहला विश्व हिंदी सम्मेलन 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित हुआ था। उसी घटना की स्मृति में प्रत्येक वर्ष 10 जनवरी को विश्व हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विदेशों में बसे भारतीय, विश्वविद्यालयों और सांस्कृतिक संस्थानों के हिंदी प्रेमी सभी मिलकर हिंदी के वैश्विक विस्तार का उत्सव मनाते हैं। यह केवल भाषा का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के विविध रंगों को साझा करने का अवसर है।

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न्यूयॉर्क काउंसलेट का रंगारंग आयोजन

विश्व हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर भारतीय वाणिज्य दूतावास, न्यूयॉर्क में एक भव्य और रंगारंग आयोजन हुआ। विदेश की धरती पर हिंदी की गूंज सुनना अपने आप में एक अनमोल अनुभव रहा। इस अवसर पर मैंने अपनी हिंदी रचना प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित जनों ने बड़े मनोयोग से सुना। कविता की कुछ पंक्तियां:

हिंदी है अस्मिता, पहचान भारतीय
परदेश में, जन-गण की शान भारतीय
भारत की राष्ट्रभाषा है, अभिमान है
विदेश की धरती पर हिंदी पूरा हिन्दुस्तान है…

यूनिकोड में हिंदी, स्क्रीन आसमान है
डिजिटल दुनिया में, हिंदी का वितान है
इंस्टा की रील डायस्पोरा की मुस्कान है
विदेश की धरती पर हिंदी नेह प्रावधान है

एकता का सूत्र, शाश्वत संचार है
“वसुधैव कुटुंबकम्” का प्रसार है
भारत के भाल की बिंदी, शृंगार है
विदेश की धरती पर हिंदी
नेह का संसार है…

कार्यक्रम में झिलमिल, हिंदी यूएसए, गुलमोहर, डॉ. सोनिया शर्मा अकादमी तथा अल्फ्रेड स्कूल जैसी संस्थाओं की सक्रिय सहभागिता रही, जिन्होंने अपनी प्रस्तुतियों से हिंदी प्रेम को स्वर दिया। सजीव मंचन, गीत-संगीत और वक्तव्यों ने वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
इस अवसर पर मेरे सुपुत्र अमिताभ और श्रीमती कल्पना श्रीवास्तव भी सहभागी रहे, जिनकी उपस्थिति ने इस क्षण को और भी आत्मीय बना दिया। रात्रिभोज के उपरांत यह प्रेरणादायक आयोजन सम्पन्न हुआ।

विदेश की भूमि पर हिंदी के प्रति ऐसा उत्साह देखकर मन में गर्व और भावुकता का संगम उमड़ पड़ा.. जय हिंदी, जय भारती।

विवेक रंजन श्रीवास्तव, vivek ranjan shrivastava

विवेक रंजन श्रीवास्तव

सेवानिवृत मुख्य अभियंता (विद्युत मंडल), प्रतिष्ठित व्यंग्यकार, नाटक लेखक, समीक्षक, ई अभिव्यक्ति पोर्टल के संपादक, तकनीकी विषयों पर हिंदी लेखन। इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स के फैलो, पोस्ट ग्रेजुएट इंजीनियर। 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी ब्लॉगर, साहित्यिक अभिरुचि संपन्न, वैश्विक एक्सपोज़र।

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