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विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से....

युद्ध के नये मोर्चे और डिजिटल घेराबंदी

            आज के समय में युद्ध केवल सीमाओं पर टैंकों और मिसाइलों से नहीं लड़े जा रहे बल्कि इनका एक बड़ा हिस्सा अदृश्य बाइनरी कोड्स और फ़ाइबर ऑप्टिक केबल्स के जाल में भी बुना जा रहा है। ईरान के वर्तमान परिदृश्य को देखें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि आधुनिक युद्ध में संचार तंत्र ही सबसे बड़ा हथियार और सबसे बड़ी कमज़ोरी दोनों है। ईरान में इस समय वैश्विक इंटरनेट का नियंत्रण एक ऐसे मोड़ पर है जहाँ दुनिया के सबसे बड़े सर्च इंजन गूगल और अन्य अमेरिकी तकनीकी प्रणालियाँ आम नागरिकों के लिए पूरी तरह अनुपलब्ध हैं।

ईरान ने रणनीतिक रूप से ख़ुद को शेष विश्व से डिजिटल रूप में काट लिया है। वहां के आसमान में अब स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट सेवाओं के सिग्नल्स को रोकने के लिए भारी जैमिंग का सहारा लिया जा रहा है ताकि बाहरी दुनिया का कोई भी हस्तक्षेप देश की आंतरिक सूचनाओं तक न पहुँच सके। यह सैटेलाइट जैमिंग तकनीक अंतरिक्ष से आने वाले रेडियो सिग्नल्स के साथ छेड़छाड़ कर उन्हें शोर में बदल देती है जिससे उपग्रह आधारित संचार पूरी तरह ठप हो जाता है। गूगल के मानचित्र और उसकी क्लाउड सेवाएँ, जो कभी नैविगेशन का सरल साधन थीं, अब युद्ध क्षेत्र में सामरिक ख़ुफ़िया जानकारी का ज़रिया बन गयी हैं, जिसके कारण उन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। दिलचस्प बात यह है जहाँ आम ईरानी नागरिक एक साधारण ईमेल भेजने के लिए तरस रहा है, वहीं परदे के पीछे बड़े तकनीकी दिग्गजों का बुनियादी ढाँचा और क्लाउड कंप्यूटिंग शक्ति अप्रत्यक्ष रूप से सैन्य संचालन के तंत्र को गति दे रही है।

इस डिजिटल महासमर में ईरान ने अपना ख़ुद का नैशनल इन्फ़ॉर्मेशन नेटवर्क विकसित किया है जो एक तरह का घरेलू इंटरनेट है।

यह व्यवस्था सरकार को यह शक्ति देती है कि वह जब चाहे तब वैश्विक इंटरनेट का स्विच बंद कर दे और पूरे देश को एक सूचनात्मक द्वीप में बदल दे। लाल सागर की गहराइयों में बिछी हुई इंटरनेट केबल्स से लेकर अंतरिक्ष में घूमते उपग्रहों तक हर जगह नियंत्रण की एक होड़ मची है। यह युद्ध हमें बताता है भविष्य में संप्रभुता का अर्थ केवल ज़मीन की रक्षा करना नहीं बल्कि अपने डिजिटल डेटा और नेटवर्क पर पूर्ण आधिपत्य प्राप्त करना भी होगा।

विवेक रंजन श्रीवास्तव, vivek ranjan shrivastava

विवेक रंजन श्रीवास्तव

सेवानिवृत मुख्य अभियंता (विद्युत मंडल), प्रतिष्ठित व्यंग्यकार, नाटक लेखक, समीक्षक, ई अभिव्यक्ति पोर्टल के संपादक, तकनीकी विषयों पर हिंदी लेखन। इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स के फैलो, पोस्ट ग्रेजुएट इंजीनियर। 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी ब्लॉगर, साहित्यिक अभिरुचि संपन्न, वैश्विक एक्सपोज़र।

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