reading novel by rita das ram blog by namita singh
पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से....

समाज में बदलाव की कथा और एक सवाल

         लेखिका रीता दास राम की पहचान मूलत: एक संवेदनशील कवयित्री के रूप में है। उनके दो कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। कुछ वर्ष पहले उनका एक कहानी संग्रह भी प्रकाशित हुआ। इसके अलावा अन्य अनेक विधाओं में उनका लेखन पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से दिखायी देता है। दो वर्ष पहले प्रकाशित यह उपन्यास ‘पच्चीकारियों के दरकते अक्स’ आज के समाज की सच्चाइयों को प्रस्तुत करता है। एक साधारण मध्यवर्गीय परिवार को केंद्र में रखकर जो गाथा रची गयी है, वह पारिवारिक संरचना में हो रहे बदलावों को रेखांकित करती है। विभिन्न पात्रों और घटनाओं से बुनी गयी कथावस्तु में विशेषकर स्त्री पात्रों के माध्यम से लेखिका ने समाज का वृहद् चित्र प्रस्तुत किया है। नया बन रहा वातावरण परंपरागत सामाजिक ढांचे को, रूढ़िबद्ध सोच को ध्वस्त कर रहा है। अपने अस्तित्व के लिए, अपनी पहचान के लिए होने वाले नये बदलावों को स्वीकार करना आज की ज़रूरत है। आज अनेक ऐसे भी सामाजिक प्रसंग हैं, जिन्हें आसानी से साधारण जन स्वीकार नहीं कर पाते क्योंकि वे अक्सर विवादास्पद रहे हैं और वैश्विक स्तर पर भी सर्वमान्य नहीं हैं! लेखिका ने स्त्री की स्वतंत्र चेतना और स्वनिर्मित व्यक्तित्व के साथ अंतर्जातीय तथा अंतरक्षेत्रीय विवाह के साथ समलैंगिकता जैसे विषय भी उठाये हैं और उनकी स्वीकार्यता का पक्ष रखा है।

उपन्यास के केंद्र में रीना है, जो कॉलेज में पढ़ती है। एक पंजाबी शर्मा परिवार की रीना अपने एक बड़े भाई तथा दो बहनों में सबसे छोटी है। पिछले तीस-चालीस वर्षों में जो पारिवारिक बदलाव हम भारतीय समाज में देख रहे हैं, वो सभी कुछ इस परिवार के सदस्यों के माध्यम से पाठकों के सामने प्रस्तुत होता है। शर्मा जी पंजाबी समाज से हैं, गोरे-चिट्टे, लंबे और उनकी पत्नी नंदिनी बंगाली परिवार से हैं और सांवली हैं। उनकी बड़ी बेटी वीणा की शादी वैवाहिक विज्ञापन के ज़रिये हुई है लेकिन परिवार मराठी है। रीना की एक और बड़ी बहन सीमा है, जो सांवली है और उसके विवाह के लिए सब चिंतित रहते हैं। इसके विपरीत रीना, जो अभी कॉलेज में पढ़ रही है, उसके लिए अभी से रिश्ते आ रहे हैं। दिलचस्प बात है कि परिवार में सभी के बीच प्रेम और सौहार्द्र है और सभी एक-दूसरे की मदद करते हैं। यह एक आदर्श परिवार के रूप में है। बड़ा भाई रजत बैंक में नौकरी करता है और गीता से जो इंजीनियरिंग कर रही है, उससे प्रेम करता है। लंबे घटनाक्रम के बीच, जब गीता की पढ़ाई ख़त्म हो गयी है और रजत उसके माता-पिता से संपर्क करता है तो वे विपरीत आचरण करते हैं। वे शादी के ख़िलाफ़ हैं क्योंकि वे यू.पी. के ब्राह्मण परिवार से हैं और रजत का परिवार पंजाबी शर्मा है। इसी बीच शर्मा जी के पारिवारिक मित्र गुप्ता दंपत्ति रीना को अपनी बहू बनाना चाहते हैं क्योंकि वह बहुत सुंदर है और उन्हें तथा उनके बेटे को पसंद है। रीना अभी पढ़ रही है, वह पीएच.डी. करके किसी बड़े शिक्षा संस्थान में पढ़ाना चाहती है इसलिए यह विवाह आगे के लिए स्थगित कर दिया गया है।

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रीना और सीमा दोनों रजत से कहती हैं कि वो उनके विवाह होने की प्रतीक्षा न करे और गीता से अपने विवाह के लिए उसके पिता से बातचीत करे। गीता ने इंजीनियरिंग कर लिया है और उसके पिता ने उसे एक तरह से क़ैद कर लिया है कि वो रजत से न मिल सके। अंतत: रजत अपने मित्र रौनक और उसकी पत्नी की मदद से पुलिस केस करता है। गीता को थाने में बुलाकर उसकी रज़ामंदी से रजत के परिवार के लोग उसे घर ले जाते हैं और विवाह संपन्न होता है।

शर्मा परिवार के मित्र डिसूज़ा दंपत्ति सीमा को बहुत पसंद करते हैं। वहां सीमा की मुलाक़ात ब्रायन से होती है। अमरीकन दंपत्ति मिस्टर एंड मिसेज़ फ़र्नांडिस के बेटे ब्रायन का अमरीका में कारोबार है। ब्रायन सीमा को पसंद करता है और उससे शादी करना चाहता है। ब्रायन की मां तेलुगुभाषी नायडू परिवार से हैं। इस रिश्ते से सभी उत्साहित हैं। सीमा शादी के बाद अमरीका चली जाती है और परिवार द्वारा संचालित व्यापारिक गतिविधियों में सहयोग करती है। रीना अपनी पीएच.डी. पूरी करके मुंबई चली जाती है। उसे यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर का पद मिल गया है। वह बेहद प्रसन्न है और पढ़ने-लिखने में व्यस्त है। दो साल बाद उसका स्वीडन के विश्वविद्यालय में हिंदी पाठ्यक्रम पढ़ाने हेतु चयन हो जाता है और वह स्वीडन चली जाती है। वहां राम मल्होत्रा से हुई जान-पहचान प्रेम में बदल गयी और दोनों साथ रहने लगते हैं। राम का स्वीडन में व्यापार है और वे जल्द ही शादी करने वाले हैं।

इस बीच गीता और रजत अपनी दूसरी संतान के आगमन के लिए उत्साहित हैं। गीता हॉस्पिटल में है। प्रसव के बाद डॉक्टरों के बीच उहापोह की स्थिति बनती है। अंत में डॉक्टर बताते हैं कि बच्चा किन्नर है। यह एक और नया आयाम उपन्यास में है, जहां किन्नर बच्चे के पालन-पोषण पर बहस है। अंत में गीता और रजत कहते हैं कि ये उनकी संतान है और वे इसकी देखभाल पूरी ज़िम्मेदारी से करेंगे। यही पूरे परिवार की भावना है।

स्वीडन में गीता और रजत की दूसरी संतान के बारे में रीना अपने मंगेतर राम को बताती है। राम इस समाचार से विचलित हो जाता है। कुछ दिनों बाद वह रीना से कहता है कि वह शादी नहीं कर सकता! उसके माता-पिता भी अब इस विवाह से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि यह जेनेटिक दोष है। वह स्वीडन से अपना व्यापार समेटकर हिंदुस्तान वापिस चला जाता है।

इस घटनाक्रम ने रीना को भावनात्मक रूप से तोड़ दिया। उसके मित्रों ने उसे सहारा दिया। उस मित्र-मंडली में एक है मिशिता दत्ता, जो कलकत्ते की रहने वाली है। धीरे-धीरे मिशिता के साथ उसकी अंतरंगता समलैंगिक रिश्ते में बदल जाती है। वे दोनों अब साथ रहते हैं और शादी करना चाहते हैं। लेकिन मां-बाप की उपस्थिति में। लंबी बहसों और विभिन्न स्तरों पर चर्चाओं के बाद शर्मा दंपत्ति और मिशिता के परिवार के लोग स्वीडन पहुंचते हैं। संभवत: स्वीडन का क़ानून समलैंगिक विवाह को मान्यता देता है।

पूरे कथानक में लीक से हटकर, परंपराओं को ध्वस्त करते हुए लेखिका ने अनेक मुद्दे उठाये हैं और शायद समलैंगिक विवाह उसकी चरम परिणति है। शर्मा परिवार के सभी सदस्य इन नये बदलावों के भागीदार हैं। एक प्रसंग में शर्मा जी कहते भी हैं – ‘समाज में जो भी बदलाव होना है… क्या यह सब हमारे घर से ही होना है?’

सही सवाल संभवत: पाठक भी पूछेंगे।

नमिता सिंह

नमिता सिंह

लखनऊ में पली बढ़ी।साहित्य, समाज और राजनीति की सोच यहीं से शुरू हुई तो विस्तार मिला अलीगढ़ जो जीवन की कर्मभूमि बनी।पी एच डी की थीसिस रसायन शास्त्र को समर्पित हुई तो आठ कहानी संग्रह ,दो उपन्यास के अलावा एक समीक्षा-आलोचना,एक साक्षात्कार संग्रह और एक स्त्री विमर्श की पुस्तक 'स्त्री-प्रश्न '।तीन संपादित पुस्तकें।पिछले वर्ष संस्मरणों की पुस्तक 'समय शिला पर'।कुछ हिन्दी साहित्य के शोध कर्ताओं को मेरे कथा साहित्य में कुछ ठीक लगा तो तीन पुस्तकें रचनाकर्म पर भीहैं।'फ़सादात की लायानियत -नमिता सिंह की कहानियाँ'-उर्दू में अनुवादित संग्रह। अंग्रेज़ी सहित अनेक भारतीय भाषाओं में कहानियों के अनुवाद। 'कर्फ्यू 'कहानी पर दूरदर्शन द्वारा टेलीफिल्म।

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