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कटाक्ष श्रीकांत आप्टे की कलम से....

नीट: इतना वबाल क्यों है भाई?

            वबाल मचा हुआ है कि नीट 2026 परीक्षा पेपर लीक हो जाने से नेशनल टेस्ट एजेंसी ने कैंसल कर दी है। इसमें हैरानी की क्या बात है? पहली बार तो ऐसा नहीं हुआ है। 2024 में भी तो हुई थी। 2024 में पहली बार हुई थी। यूं समझ लो वो प्रेक्टिस मैच था। हैरानी की बात तो तब होती जब 2024 के बाद 2026 में परीक्षा बिना पेपर लीक के कैंसल हुए बिना सफलतापूर्वक हो जाती।

आरएसएस और भाजपा दोनों परंपराओं का बहुत सम्मान करने वाले। 2024 की पेपर लीक और पेपर कैंसलेशन की शानदार परंपरा का पालन 2026 में भी किया गया।

2024 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा तो ज़रूर था कि नीट परीक्षा कैंसल होने की वो ज़िम्मेदारी लेते हैं। मैं तब भी हैरान हुआ था कि शिक्षा मंत्री जी ज़िम्मेदारी लेकर भाजपा सरकार की ज़िम्मेदारी न लेने वाली परंपरा तोड़ने पर क्यों आमादा हैं।

लगता है कहने के बाद लेना भूल गये या ज़िम्मेदारी लेकर किसी ऐसी जगह रख दी कि अब मिल ही नहीं रही, वो वाली ज़िम्मेदारी।

सीबीआई से जांच कराने की बात भी मंत्रीजी ने कही थी। सीबीआई वालों ने मंत्रीजी से शिकायत भी की थी कि विपक्ष के यहां छापों के बोझ से हम वैसे ही मरे जा रहे हैं। ऊपर से एक काम और लाद दिया आपने। मंत्रीजी ने सीबीआई वालों को दिलासा दिया कि हमने कह दिया इसका मतलब यह नहीं कि तुम शुरू हो जाओ। मंत्रीजी की बात सीबीआई वालों ने मानी। आज तक रिपोर्ट का पता ही नहीं कि क्या हुआ।

वबाल मचा है कि लगभग 23 लाख छात्रों की तैयारी और उम्मीदों पर पानी फिर गया। भाईसाहब पिछले दस सालों में अस्सी परीक्षाएं कैंसल हुईं और तीन करोड़ युवाओं की उम्मीदों और भविष्य पर पानी फिर गया। दस साल, भाईसाहब पूरे दस साल, सरकार ने आपको यही बात समझाने में खर्च किये कि सरकार से कोई उम्मीद मत रखो। रखोगे तो गारंटीड पानी फिरेगा। लेकिन युवा हैं कि उम्मीद रखे चले जा रहे हैं। अजीब ज़िद्दी या सनकी हैं। ऐसे में सरकार का क्या कसूर? सरकार को ज़िम्मेदार ठहराना उचित नहीं। कमरे का भाड़ा, खाने के ख़र्च का सवाल भी सरकार के सामने उठाना उचित नहीं। कमरे में रहे छात्र और खाना भी उन्होंने ही खाया। इसके लिए एनटीए की कैसी ज़िम्मेदारी? आप तो एनटीए की उदारता देखिए कि दोबारा रजिस्ट्रेशन और परीक्षा फ़ीस न लेने की घोषणा कर दी है। अब क्या जान लोगे बच्चे की!

श्रीकांत आप्टे, shrikant apte

श्रीकांत आप्टे

चार दशकों से व्यंग्य लेखन में सक्रिय। रंगमंच पर भी लेखन, अभिनय और निर्देशन। 150 से अधिक रेडियो नाटक प्रसारित। फ़िल्मों के लिए पटकथा एवं संवाद लेखन के साथ कविताओं एवं साहित्य के पोस्टरों पर भी काम। संपर्क: 91799 90388।

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