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अमेरिका-इज़राइल के तीखे विरोध की अपील

मध्य-पूर्व एशिया में हालात तनावपूर्ण हैं और ख़बरों की मानें तो ईरान में जश्न और मातम का मिला जुला माहौल है। ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई की हत्या के बाद अनेक देशों और भारत के कई राज्यों में साम्राज्यवादी ताक़तों के ख़िलाफ़ स्वर सुनायी दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ़, अमेरिका और यूरोप के कई हिस्सों में ख़ामेनेई की हत्या को ईरान की आज़ादी के मौक़े के रूप में देखा और बताया जा रहा है।

एक रिपोर्ट की मानें तो एएफ़पी ने सत्यापित प्रत्यक्षदर्शियों और वीडियो फ़ुटेज के आधार पर दावा किया है कि ख़ामेनेई की मौत की ख़बरों के बाद कुछ इलाक़ों में ईरानी लोग ख़ुशी से झूमते हुए सड़कों पर उतरे, आतिशबाज़ी की और जश्न के गीत बजाये। हालांकि, सोशल मीडिया के अनुसार, लोग बड़ी संख्या में जश्न मनाने के लिए बाहर नहीं आये। जनवरी में सरकार विरोधी जन प्रदर्शनों पर हुई घातक कार्रवाई के बाद कई ईरानी भयभीत थे।

इसी रिपोर्ट में एएफ़पी के पत्रकारों के हवाले से कहा गया है कि तेहरान के केंद्र में जुटे हज़ारों लोग ख़ामेनेई की मृत्यु पर शोक व्यक्त कर रहे थे। ज़्यादातर काले कपड़ों में नज़र आये और एंघेलाब (क्रांति) चौक में “अमेरिका मुर्दाबाद” और “इज़राइल मुर्दाबाद” के नारे गूंजते हुए सुनायी दिये। कई प्रदर्शनकारी ईरान के झंडे और ख़ामेनेई की तस्वीरें पकड़े हुए थे।

ख़ामेनेई की हत्या के विरोध में भारत में भी प्रदर्शन जारी हैं। इस बीच ट्रेड यूनियन सेंटर ऑफ इंडिया (TUCI) की केंद्रीय समिति और भाकपा (माले) रेड स्टार ने अलग अलग विज्ञप्तियां जारी करते हुए साम्राज्यवादी अमेरिका और ज़ायोनिस्ट इज़राइल द्वारा ईरान पर किये गये हमले तथा ख़ामेनेई की हत्या की कड़ी निंदा की है।

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अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की मांग

टीयूसीआई का कहना है कि भारत सरकार को चाहिए कि वह आतंकी ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू शासन के साथ किये गये सभी व्यापारिक एवं सैन्य समझौतों को तुरंत रद्द करे। भारत को युद्धोन्मादी और वैश्विक आतंकवाद के मुख्य संचालक अमेरिका की मित्रता त्याग देनी चाहिए। TUCI मांग करता है कि भारत के प्रधानमंत्री संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से शांति वार्ता में शामिल हों।

विज्ञप्ति में आर. मानसय्या के हवाले से कहा गया कि दुनिया की समस्त संपदा और बाज़ारों पर प्रभुत्व स्थापित करने के उद्देश्य से अमेरिकी साम्राज्यवाद अब तक अनेक संप्रभु देशों पर हमला कर चुका है। उसने उन देशों की निर्वाचित सरकारों को उखाड़ फेंका है। लोकतंत्र स्थापित करने के नाम पर अमरीकी साम्राज्यवाद के नेतृत्व में साम्राज्यवादी ताक़तें इराक, अफगानिस्तान, लीबिया, सीरिया, वेनेज़ुएला और अब ईरान पर अपने हमले जारी रखे हुए है।

इन देशों की सरकारों और नागरिकों को इस हमले का प्रतिरोध करना है। साथ ही, दुनिया के सभी देशों के मेहनतकश वर्ग, विशेषकर अमेरिका की जनता को इस युद्ध के विरुद्ध उठ खड़ा होना है। टीयूसीआई की केंद्रीय समिति ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह उत्पीड़ित देशों, ख़ासकर मुस्लिम नागरिकों के समर्थन में अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की घोषणा करे।

‘राष्ट्रों का तत्काल हस्तक्षेप ज़रूरी’

एक अन्य विज्ञप्ति में भाकपा (माले) के अंतरराष्ट्रीय विभाग ने कहा आज विश्व में समस्त बुराई की जड़ अमेरिकी–ज़ायोनवादी इज़राइली धुरी ने बिना किसी उकसावे के, समस्त अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों और संधियों का उल्लंघन करते हुए, एक बार फिर एकतरफ़ा ढंग से ईरान पर हमला किया है।

सोशल मीडिया पर चर्चा में आ रही इस बेनामी विज्ञप्ति में कहा गया है, जब अमेरिका–ज़ायोनवादी इज़राइली दुष्ट धुरी इस जघन्य अपराध की तैयारियों का समन्वय कर रही थी, उसी समय भारत के प्रधानमंत्री इज़रायल की राजधानी तेल अवीव में सामरिक, वैचारिक-राजनीतिक और सैन्य संबंधों को आगे बढ़ाने में व्यस्त थे। और यह हमला मोदी के इज़राइल की संसद को संबोधित करने के कुछ ही घंटों बाद हुआ। उल्लेखनीय है मोदी की इज़राइल यात्रा की पूर्व संध्या पर भारत ने ईरान में रह रहे 10,000 से अधिक भारतीय नागरिकों को तत्काल देश छोड़ने की आपात यात्रा सलाह भी जारी की थी।

भारत सरकार को अमेरिका–ज़ायोनवादी इज़राइली आतंकवादियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय क़ानून के इस खुले उल्लंघन की निंदा करते हुए आगे आना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आगे बढ़कर इस आक्रमण को रोकने के लिए ठोस क़दम उठाने चाहिए, इससे पहले कि स्थिति किसी विनाशकारी स्तर तक पहुँच जाये।

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