स्त्री-त्रासदी की शाश्वत गाथा फुलिया…

पाक्षिक ब्लॉग नमिता सिंह की कलम से…. स्त्री-त्रासदी की शाश्वत गाथा फुलिया…        आलोचना और कहानी लेखन के क्षेत्र में अस्मिता सिंह का जाना-माना नाम है। लघु-पत्रिकाओं...

जल-जंगल-ज़मीन-हवा और हम

पाक्षिक ब्लॉग विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से… जल-जंगल-ज़मीन-हवा और हम        जल, जंगल, ज़मीन और हवा के सवाल आज जीवन और अर्थव्यवस्था की धमनियों के प्रश्न...

हिन्दी ग़ज़ल में दृश्य चित्रण की बानगी-2

विजय कुमार स्वर्णकार की कलम से…. हिन्दी ग़ज़ल में दृश्य चित्रण की बानगी-2            पिछले भाग में हमने कुछ ऐसे अशआर की पड़ताल की जिनमें...

तो क्या इंसानी दिमाग़ की उल्टी गिनती शुरू?

पाक्षिक ब्लॉग जयजीत अकलेचा की कलम से…. तो क्या इंसानी दिमाग़ की उल्टी गिनती शुरू?             कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने हाल...

कृतित्व के आईने में ज्ञानरंजन

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

कविता को नये संदर्भों में समझना होगा: रति सक्सेना

रति सक्सेना साहित्य की दुनिया में भली-भांति पहचानी जाती हैं। वर्ल्ड पोएट्री मूवमेंट और कृत्या पोएट्री फ़ेस्टिवल उनकी शख़्सियत के पर्याय बन चुके हैं। ratisaxena.com पर उनके व्यक्तित्व व...

कैसे ट्रीट करता है एक पोएट्री थेरेपिस्ट?-2

पाक्षिक ब्लॉग (गतांक से आगे) रति सक्सेना की कलम से…. कैसे ट्रीट करता है एक पोएट्री थेरेपिस्ट?-2               मैंने ग्लेन कॉलेजा से सवाल...

ज्ञानरंजन का जाना

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...
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