edition-33
  • August 13, 2025
  • आब-ओ-हवा
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edition-33

आब-ओ-हवा – अंक - 33

भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में आज़ादी के दिन के मौक़े पर प्रचुर सामग्री। साहित्य, कला, शिक्षा आदि से संबद्ध अधिकतर नियमित ब्लॉग्स में इस बार 15 अगस्त के संदर्भ का समावेश है। हां, रंग और तेवर सबका अपना-अपना ही है। 1975 एकाधिक महत्वपूर्ण फ़िल्मों का वर्ष रहा और शोले तो 15 अगस्त पर ही सिनेमाघरों में आयी थी। इस संदर्भ से एक विस्तृत लेख। आख़िरश, भारत के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या विभाजन की त्रासदी थी, इसी याद में एक अविस्मरणीय कविता का अनुवाद…

प्रसंगवश

मुआयना

ब्लॉग : हम बोलेंगे (संपादकीय)
आज़ादी बचाने का वक़्त : भवेश दिलशाद

ब्लॉग : तख़्ती
आज़ादी का संदेश : आलोक कुमार मिश्रा

गुनगुनाहट

ब्लॉग : पोइट्री थेरेपी
पोइट्री थेरेपी – शास्त्र, साहित्य और लोक : रति सक्सेना

ब्लॉग : समकाल का गीत विमर्श
कविता की आज़ादी का पर्व? : राजा अवस्थी

ब्लॉग : गूंजती आवाज़ें
शहीद सफ़दर हाशमी के नाम : सलीम सरमद

ब्लॉग : तरक़्क़ीपसंद तहरीक की कहकशां
आवाज़ दो हम एक हैं : जाहिद ख़ान

ग़ज़ल रंग

ब्लॉग : शेरगोई
मात्रा पतन: शहरों के नाम : विजय स्वर्णकार

ब्लॉग : ग़ज़ल: लौ और धुआं
वतन की सांसों से वाबस्ता तहरीरों की शायरी : आशीष दशोत्तर

किताब कौतुक

सदरंग

ब्लॉग : उड़ जाएगा हंस अकेला
आत्मा को झकझोरता ‘नवरंग’ का वो प्रेरक गीत : विवेक सावरीकर ‘मृदुल’

ब्लॉग : पक्का चिट्ठा
भारतीय व्यंग्य इतिहास का प्रस्थान बिंदु “शिवशंभू के चिट्ठे” : अरुण अर्णव खरे

ब्लॉग : कला चर्चा
ध्यान ही कला : रीना तोमर : प्रीति निगोसकर

ब्लॉग : कुछ फ़िल्म कुछ इल्म
“जय-जय जननी जन्मभूमि, हम बालक हैं तेरे” : मिथलेश रॉय

काव्य
हिंदी में पढ़िए डब्ल्यू.एच. ऑडेन रचित कविता ‘बंटवारा’

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