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पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आलोक त्रिपाठी की कलम से....

एचपीवी वैक्सीन: ये सवाल ज़रूर पूछें

            मुझसे पोस्ट्स और डीएम यानी इनबॉक्स में बार-बार पूछा जाता है, हमें वैक्सीन लगवानी चाहिए या नहीं? और उससे भी ज़्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि कई लोग डर में हैं क्योंकि वे अपने क़रीबी लोगों को पहले ही वैक्सीन लगवा चुके हैं।

मैं ‘हां’ या ‘नहीं’ का सीधा जवाब देने की कोशिश नहीं कर रहा हूँ क्योंकि ऐसा कोई उत्तर देने के लिए अधिकृत नहीं हूं। फिर भी मैं संदर्भ (context) देने की कोशिश कर रहा हूँ।

मैं ‘एंटी-वैक्सीन’ नहीं हूँ। लेकिन COVID वैक्सीन वाले पूरे प्रकरण के बाद, ख़ासकर वैक्सीनों पर और सामान्य तौर पर बिग फ़ार्मा पर मेरा भरोसा बुरी तरह टूट गया। फ़ार्मा इंडस्ट्री और उनके साथियों की लालच की नग्नता जब दिखी, तो फिर उसे अनदेखा करना संभव नहीं रहा।

यह भरोसा तब तक वापस नहीं आएगा, जब तक कंपनियाँ और अधिकारी ईमानदारी से पुराने डेटा के बारे में बात नहीं करते, जिसमें उनकी ग़लतियाँ और अनिश्चितताएँ भी शामिल हों।

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मेरी चिंता सिर्फ़ यह नहीं है कि अधिकारी खुलकर नहीं बता रहे, बल्कि यह है कि इस मुद्दे को दबाने का संगठित प्रयास किया जा रहा है। जब पूरा मीडिया इकोसिस्टम धोखे में सक्रिय रूप से शामिल दिखे, तो समझ लेना चाहिए हालात ठीक नहीं हैं। ऐसे माहौल में भरोसे की उम्मीद करना बहुत बड़ी मांग है।

दूसरी बात — मैं दृढ़ता से मानता हूँ कि हर स्वास्थ्य समस्या का पहला या स्वचालित समाधान वैक्सीन नहीं होना चाहिए। यह हमारी व्यक्तिगत और सामूहिक प्राकृतिक प्रतिरक्षा (natural immunity) को तबाह कर देगा। लेकिन दुर्भाग्य से, गोलपोस्ट चुपचाप खिसकायी जा रही है।

बिग फ़ार्मा का बाज़ार बढ़ाने के लिए, उपभोक्ता आधार को “सिर्फ़ बीमार लोगों” से बढ़ाकर “पूरी आबादी” तक फैलाया जा रहा है — और यह सब वैक्सीन को “रोकथाम” के नाम पर जादुई समाधान बनाकर किया जा रहा है। अतः इसका विरोध ज़रूरी है।

इसलिए वैक्सीन के मामले में आपको फ़ैसला ख़ुद करना चाहिए — मीडिया और सेलेब्रिटी-प्रेरित डर के दबाव में नहीं।

HPV के संदर्भ में एक अहम बात यह है कि ज़्यादातर HPV संक्रमण अपने-आप शरीर द्वारा साफ़ हो जाते हैं। HPV होना ≠ कैंसर होना।

कैंसर एक बहु-कारक (multi-factorial) प्रक्रिया है — जिसमें पोषण, प्रतिरक्षा, सह-संक्रमण, हार्मोनल स्थिति, जीवनशैली और सामाजिक कारक बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसे केवल एक वायरस बनाम एक वैक्सीन की कहानी बनाना जैविक वास्तविकता को बहुत सरल बना देना है।

HPV वैक्सीन जिन स्ट्रेन्स को टारगेट करती है, वे कुछ हाई-रिस्क टाइप्स हैं — लेकिन HPV के दर्जनों क्लिनिकली प्रासंगिक प्रकार मौजूद हैं। तो “HPV से सुरक्षा” कहना और “कुछ HPV टाइप्स से आंशिक जोखिम कम करना” — दोनों एक जैसी बातें नहीं हैं।

Walboomers जैसी स्टडीज़ में दिखाया गया कि वैक्सीन कुछ चुने हुए टाइप्स के ख़िलाफ़ एंटीबॉडी बनाती है — लेकिन वास्तविक जीवन में HPV का व्यवहार, संक्रमण की अवधि, क्लीयरेंस और कैंसर में प्रगति बहुत जटिल है।

प्रतिरक्षा तंत्र के सिर्फ़ एक प्रतिक्रिया को वास्तविक दुनिया में दीर्घकालिक सुरक्षा मानना मूर्खता है। इस पर कभी और बात करेंगे।

थोड़ा-सा इतिहास

वास्तव में 1999 में एकतरफ़ा आंकड़े देकर Walboomers और उनके साथ शोधकर्ताओं ने यह यह दावा किया कि 99.9% सर्वाइकल कैंसर के केस में HPV वायरस पाया गया, अतः ये वायरस ही उक्त कैंसर के लिए ज़िम्मेदार है। Walboomers, तो ज़्यादा समय दुनिया में नहीं रहे लेकिन उनके सहकर्मियों को इसका उचित लाभ आने वाले समय में मिला। सनद रहे 1999 भी ठीक वही साल जब एपस्टिन फ़ाइल में सुशोभित बिल गेट्स ने $750 मिलियन के दान (या निवेश, आप समझिए) से Gavi (Global Alliance for Vaccines and Immunization) की स्थापना की। और यह भी याद रहे कि इसकी भारतीय शाखा ने 2009 में डिमॉन्सट्रेशन के नाम पर ट्रायल किया था, जिसकी सम्यक व्याख्या 73वी संसदीय समिति ने की। जिसमें ICMR के भूमिका पर गहन प्रश्न खड़े किये गये। इसके विस्तृत विवरण के लिए आप मेरे X हैंडल (@healthschalorIN) पर देख सकते है। लेकिन एक विडंबना का ज़िक्र यहां आवश्यक है। इसी समिति में वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री भी थे, जिन्होंने इसे रोल-आउट करने की स्वीकृति पुनः 2023 में दी। ये सवाल उनसे पूछा जाना चाहिए आख़िर वैक्सीन में क्या बदला?

यह सब कहने के बाद, HPV वैक्सीन लेने से पहले अपने डॉक्टर या सलाह देने वाले व्यक्ति से ये बुनियादी सवाल ज़रूर पूछें:

1) यह वैक्सीन मुझे वास्तव में कैसे बचाती है?

यह HPV के कौन-कौन से प्रकारों (types) को कवर करती है? क्या यह संक्रमण (infection) को रोकती है, या सिर्फ़ कुछ कैंसर/मस्सों (warts) के जोखिम को कम करती है? अब तक वैज्ञानिक रूप से क्या स्थापित हुआ है?

2) मज़बूत सुरक्षा क्यों नहीं?

अगर यह वैक्सीन केवल कुछ ही HPV प्रकारों को निशाना बनाती है, तो फिर जीवन भर अनेक HPV प्रकारों के साथ होने वाला प्राकृतिक संपर्क हमें पहले से मज़बूत सुरक्षा क्यों नहीं देता?

हम इंसान रोज़मर्रा की ज़िंदगी में दर्जनों HPV प्रकारों के संपर्क में आते हैं। अधिकांश मामलों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इन संक्रमणों को अपने-आप साफ़ कर देती है।

फिर भी, इस प्राकृतिक संपर्क से कोई स्थायी, भरोसेमंद “आजन्म सुरक्षा” नहीं बनती।

तो सवाल यह है: अगर प्राकृतिक संक्रमण + प्राकृतिक प्रतिरक्षा मिलकर भी मज़बूत और लंबे समय तक चलने वाली सुरक्षा नहीं बना पाते, तो कुछ गिने-चुने HPV प्रकारों पर आधारित वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा को स्थायी और सर्वसमावेशी सुरक्षा कैसे माना जा सकता है?

यह भी समझना ज़रूरी है कि HPV एक बहुत बड़ा परिवार है, इसमें दर्जनों चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण प्रकार हैं। वैक्सीन केवल कुछ हाई-रिस्क प्रकारों को टारगेट करती है। ऐसे में “HPV से सुरक्षा” कहना भ्रामक हो सकता है — असल में यह केवल कुछ प्रकारों से आंशिक जोखिम घटाने की बात है, पूरे HPV स्पेक्ट्रम से सुरक्षा की नहीं।

और एक व्यावहारिक सवाल: अगर शरीर प्राकृतिक रूप से बार-बार HPV को देख-समझ कर भी कोई मज़बूत, आजीवन ढाल नहीं बना पाता, तो वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा को लेकर इतना ज़्यादा भरोसा किस आधार पर किया जा रहा है?

यही सवाल डॉक्टर से साफ़-साफ़ पूछने लायक़ है — बिना डर के, बिना अपराध-बोध के।

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इंसान स्वाभाविक रूप से कई HPV स्ट्रेन्स के संपर्क में आता है। अगर प्राकृतिक प्रतिरक्षा मज़बूत और लंबे समय तक चलने वाली सुरक्षा नहीं देती, तो कुछ गिने-चुने प्रकारों वाली वैक्सीन से बनी प्रतिरक्षा स्थायी कैसे होगी? यहाँ वैक्सीन-जनित प्रतिरक्षा में ऐसा क्या “ख़ास” है?

3) गंभीर दुष्प्रभाव (serious side effects) क्या हैं?

मैं हल्के साइड इफ़ेक्ट्स की बात नहीं कर रहा, जैसे बुख़ार या इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले, प्रलेखित (documented) गंभीर प्रभावों की बात कर रहा हूँ।

4) यह सुरक्षा वास्तव में कब तक रहती है?

कुछ साल, दशकों तक, या यह अभी भी अनिश्चित है? क्या सच में एक ही डोज़ काफ़ी है, जैसा प्रचार किया जा रहा है? या भविष्य में बूस्टर डोज़ की ज़रूरत पड़ेगी? (आज इसे सिंगल डोज़ बताया जा रहा है, कल दूसरा डोज़ आएगा, और फिर नियमित बूस्टर — यह एक कभी न ख़त्म होने वाला बाज़ार है)

मैं आपको भरोसा दिलाता हूँ —
या तो इन सवालों के सीधे जवाब नहीं मिलेंगे, या फिर धुँधले, मीठे-मीठे, खोखले जवाब मिलेंगे। मेरी समझ से फ़ैसला लेने के लिए यही अपने-आप में ये संकेत आपके लिए काफ़ी होंगे।

(पुन:श्च- आपकी जानकारी के लिए बता दें एचपीवी (HPV) वैक्सीन एक टीका है, जिसे ह्यूमन पैपिलोमावायरस (Human Papillomavirus) के कारण होने वाले संक्रमणों और कैंसर से सुरक्षा प्रदान करने की औषधि के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। यह मुख्य रूप से महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर) और अन्य कैंसरों (योनि, वल्वा, गुदा, गले) के साथ जननांगों पर होने वाले मस्सों के संदर्भ में है।)

डॉ. आलोक त्रिपाठी

डॉ. आलोक त्रिपाठी

2 दशकों से ज्यादा समय से उच्च शिक्षा में अध्यापन व शोध क्षेत्र में संलग्न डॉ. आलोक के दर्जनों शोध पत्र प्रकाशित हैं और अब तक वह 4 किताबें लिख चुके हैं। जीवविज्ञान, वनस्पति शास्त्र और उससे जुड़े क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले डॉ. आलोक वर्तमान में एक स्वास्थ्य एडवोकेसी संस्था फॉर्मोन के संस्थापक हैं।

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