jemimah rodrigues, india cricket team women
सेमीफाइनल में रिकॉर्ड-ब्रेकिंग चेज़ और जेमिमा रोड्रिग्स की असाधारण गाथा ने भारतीय महिला क्रिकेट में नया अध्याय जोड़ा है। भारत का ऑस्ट्रेलिया को मात देकर फाइनल में पहुंचने के अर्थ क्या हैं, खेल विशेषज्ञ के मन की बात...
अरुण अर्णव खरे की कलम से....

टीम इंडिया की मानसिक जीत, भय-मुक्त क्रिकेट है संदेश

           यह जीत केवल तकनीकी नहीं, मानसिक विजय भी है। यह जीत भारतीय महिला क्रिकेट में एक नये युग की उद्घोषणा है। यह बताती है भारतीय टीम अब ‘भावनाओं के उफान’ से आगे बढ़कर ‘रणनीति के संतुलन’ तक पहुँच चुकी है। हर विकेट के बाद भी चेहरों पर न घबराहट थी, न हड़बड़ी, केवल उद्देश्य का स्पष्ट बोध था। मैच के बाद खिलाड़ियों की भावनात्मक प्रतिक्रिया अभिभूत करने वाली थी।

नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में आईसीसी महिला विश्व कप 2025 के सेमीफाइनल में जो कुछ हुआ, उसे भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। जेमिमा रॉड्रिग्स ने जब एलिस पेरी की गेंद पर चौका जड़ा, तो भारत ने केवल एक लक्ष्य ही हासिल नहीं किया बल्कि इतिहास की नियति को भी बदल दिया। भारत ने सात बार की विश्वविजेता ऑस्ट्रेलिया को पराजित कर यह करिश्मा किया। ऑस्ट्रेलिया जैसी अजेय टीम के विरुद्ध 339 रनों के लक्ष्य को हासिल कर जीतना महिला क्रिकेट इतिहास की युगांतकारी घटना है। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, यह दबाव में धैर्य, अटूट विश्वास और ‘कर दिखाने’ की दृढ़ इच्छाशक्ति का लाजवाब प्रदर्शन था। यह टीम के हौसले, बढ़ते क़द और परिपक्वता का प्रमाण है।

मानना होगा, यह जीत कई मायनों में ऐतिहासिक रही। इस जीत ने महिला क्रिकेट के इतिहास का पुनर्लेखन किया। इस जीत ने महिला विश्वकप इतिहास का सबसे बड़ा सफल रन चेज़ देखा। किसी भी एकदिवसीय विश्व कप (पुरुष व महिला नॉकआउट) में भी यह पहला अवसर था जब कोई टीम तीन सौ से अधिक रन बनाकर सफल रही। इस विजय ने विश्वकप में ऑस्ट्रेलिया के लगातार 15 मैचों के विजय रथ को भी रोक दिया।

jemimah rodrigues, india cricket team women

इस ऐतिहासिक जीत की वास्तविक नायिका 25 वर्षीय जेमिमा रोड्रिग्स रहीं, जिन्होंने 127 रनों की अविस्मरणीय नाबाद पारी खेली। शुरुआती झटकों (शेफाली और मंधाना के आउट होने) के बाद, जेमिमा ने क्रीज़ पर जो संयम और दृढ़ता दिखायी, वह अमूल्य थी। उन्होंने न केवल विकेट बचाये रखा, बल्कि स्ट्राइक रोटेट करके स्कोरबोर्ड को लगातार चलाये रखा। उनका शतक एक ऐसी बल्लेबाज़ की कहानी कहता है जो हाल के व्यक्तिगत और मानसिक संघर्षों के बावजूद, बड़े मंच पर अपने कौशल और मानसिक शक्ति पर भरोसा करती है। तीसरे नंबर पर बल्लेबाज़ी करने का अचानक मिला मौक़ा उन्होंने पूरी तरह भुनाया और अपनी पारी को अंत तक ले गयीं। कप्तान हरमनप्रीत कौर (89 रन) की पारी को भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने जेमिमा के साथ मिलकर 167 रनों की मैच-विजयी साझेदारी की। इस साझेदारी ने भारतीय टीम की ‘भय-मुक्त क्रिकेट’ खेलने की मानसिक दृढ़ता को उजागर किया।

भारतीय टीम की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी रही – रणनीतिक संयम। जब ऑस्ट्रेलिया ने 338 रन का विशाल लक्ष्य दिया, तो मैदान पर मौजूद हर खिलाड़ी को ज्ञात था कि यह केवल रनों की बात नहीं, बल्कि दबाव का पहाड़ है। पर भारत ने उस दबाव को तोड़ने के लिए धैर्य और सूझ-बूझ का सहारा लिया। स्मृति मंधाना की भरोसेमंद शुरूआत, हरमनप्रीत कौर की साहसी और जेमिमा रॉड्रिग्स की नाबाद धैर्यपूर्ण पारी ने भारतीय बल्लेबाज़ी की नयी परिभाषा लिखी। जेमिमा की पारी केवल स्ट्रोक-प्ले की नहीं, बल्कि मैच अवेयरनेस की पाठशाला थी। हर गेंद पर फ़ैसला, हर रन के पीछे सोच, यही वह बात थी जिसने विश्वविजेता टीम को मात देने की राह प्रशस्त की।

कोच अमोल मजूमदार की शांति और डेटा-आधारित तैयारी ने इस टीम को अनुशासन और आत्मविश्वास से भर दिया है। यह नयी पीढ़ी की टीम है जो प्रतिद्वंद्वी का सम्मान करती है, पर उससे डरती नहीं। इस समय भारतीय टीम अपने आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और ऐतिहासिक प्रदर्शन के साथ विश्व कप ट्रॉफी जीतने के लिए पूरी तरह तैयार नज़र आ रही है। रविवार को दक्षिण अफ़्रीका के विरुद्ध फ़ाइनल मुक़ाबले में अब नज़रें भारत पर होंगी।

(चित्र: जीत के बाद भारतीय टीम के बीच भावुक जेमिमा की तस्वीर क्रिकइन्फो से साभार)

अरुण अर्णव खरे, arun arnaw khare

अरुण अर्णव खरे

अभियांत्रिकीय क्षेत्र में वरिष्ठ पद से सेवानिवृत्त। कथा एवं व्यंग्य साहित्य में चर्चित हस्ताक्षर। बीस से अधिक प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त। अपने माता-पिता की स्मृति में 'शांति-गया' साहित्यिक सम्मान समारोह आयोजित करते हैं। दो उपन्यास, पांच कथा संग्रह, चार व्यंग्य संग्रह और दो काव्य संग्रह के साथ ही अनेक समवेत संकलनों में शामिल तथा देश भर में पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशन। खेलों से संबंधित लेखन में विशेष रुचि, इसकी भी नौ पुस्तकें आपके नाम। दो ​विश्व हिंदी सम्मेलनों में शिरकत के साथ ही मॉरिशस में 'हिंदी की सांस्कृतिक विरासत' विषय पर व्याख्यान भी।

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