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विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं। आब-ओ-हवा पर विशेष रूप से वैचारिकी, नोट्स, अनुभव आदि इंदराज के लिए यह कोना।
दूर देस में लेखक-3...

नववर्ष पर न्यूयॉर्क के टाइम स्क्वायर में बॉल ड्रॉप

           न्यूयॉर्क शहर का टाइम स्क्वायर कोई साधारण चौराहा नहीं है, अपने आप में एक चलता-फिरता उत्सव है, जहां दिन और रात का फ़र्क केवल घड़ी नहीं बल्कि रोशनी तय करती है। चारों ओर लगी विशाल डिजिटल स्क्रीनें, रंग बदलते विज्ञापन, हर पल बदलती तस्वीरें और लगातार बहती भीड़ इस जगह को ऐसा रूप देती है, मानो यह शहर का नहीं बल्कि समय का चौराहा हो। दुनिया के अलग-अलग देशों से आये लोग यहां आकर फ़ोटो खिंचवाते हैं, टहलते हैं, रुकते हैं और कुछ देर के लिए उसी चमक में अपने होने का प्रमाण ढूंढते हैं। यही वजह है कि टाइम स्क्वायर को दुनिया का सबसे प्रसिद्ध चौराहा कहा जाता है।

इसी चौराहे पर एक पुरानी मगर बेहद ख़ास इमारत खड़ी है, जिसे आज वन टाइम स्क्वायर के नाम से जाना जाता है। यही वह इमारत है, जिसकी छत से हर साल बाल ड्रॉप किया जाता है। यह इमारत दिखने में भले ही साधारण लगे, लेकिन इस पर पूरी दुनिया के नये साल की घड़ी टिकी होती है। इसकी ऊंचाई 363 फीट के आसपास है, यानी सौ मीटर से भी अधिक। इतनी ऊंचाई से जब वह चमकता हुआ गोला नीचे उतरता है, तो वह केवल एक इमारत से नहीं उतरता, बल्कि जैसे आकाश से समय उतरता है।

वन टाइम स्क्वायर की छत पर एक मज़बूत धातु का ढांचा बना हुआ है, जिस पर यह गोला स्थापित किया जाता है। वहां से नीचे तक एक ख़ास रेलिंग और मशीनरी लगी रहती है, जिसके सहारे वह गोला धीरे-धीरे उतरता है। यह पूरी व्यवस्था इतनी सटीक होती है कि एक सेकंड की भी चूक नहीं होती, क्योंकि यही वह पल होता है जब पूरी दुनिया अपनी घड़ियां बदलती है।

इस तरह टाइम स्क्वायर केवल एक चमकदार चौराहा नहीं, बल्कि एक वैश्विक घड़ी की तरह काम करता है और उसकी छत पर खड़ी यह सौ मीटर से ऊंची इमारत हर साल यह जिम्मेदारी निभाती है कि समय का नया अध्याय ठीक उसी पल खुले जब दुनिया की निगाहें उसी एक चमकते हुए गोले पर टिकी हों।

1907 से न्यूयॉर्क के टाइम स्क्वायर में ठीक रात्रि 12 बजे आरंभ हुआ बाल ड्रॉप अब केवल अमेरिका का स्थानीय उत्सव नहीं रह गया है, बल्कि पूरी दुनिया के लिए नये वर्ष के आगमन की सार्वभौमिक घड़ी बन चुका है। जैसे ही दुनिया के अलग-अलग कोनों में लोग अपनी अपनी रातों में उल्टी गिनती शुरू करते हैं, वैसे ही उनकी निगाहें न्यूयॉर्क में टाइम स्क्वायर पर उस चमचमाती बॉल पर टिक जाती हैं, जहां समय का गोला धीरे-धीरे नीचे उतरते हुए यह घोषणा करता है कि पुराना वर्ष अब इतिहास बन चुका है और एक नया वर्ष अपनी पहली सांस लेने जा रहा है।

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रेडियो, टेलीविज़न और मोबाइल स्क्रीन के माध्यम से यह दृश्य अरबों लोगों तक पहुंचता है। देखते ही देखते यह आयोजन सामूहिक उम्मीदों, नये संकल्पों और भविष्य के सपनों का वैश्विक प्रतीक बन चुका है।

जब हम टीवी पर उस चमकते हुए गोले को नीचे आते देखते हैं, तो अक्सर मन में यह सवाल उठता है कि यह असली होता है या केवल रोशनी का कोई जादू है। बहुत-से लोग सोचते हैं कि यह शायद किसी कंप्यूटर की बनायी हुई तस्वीर होगी, लेकिन सच्चाई यह है कि टाइम स्क्वायर का यह गोला पूरी तरह असली है। वह कोई परदे पर दिखायी देने वाली लाइट मात्र नहीं, बल्कि लोहे के मज़बूत ढांचे पर बना हुआ एक भारी भरकम पिंड होता है। उसके भीतर हज़ारों छोटे-छोटे बल्ब और आधुनिक एलईडी लाइटें लगी होती हैं। बाहरी सतह पर कांच जैसे पारदर्शी टुकड़े जड़े जाते हैं, जो रोशनी से गोले को चमकदार और रंगीन बना देते हैं। इसी वजह से वह गोला साधारण बल्ब की तरह नहीं, बल्कि किसी चमकते हुए भव्य बॉल जैसा नज़र आता है। जो दुनिया के लिए कैलेंडर बदलने के प्रतीक के रूप में शनै:-शनै: ड्रॉप होता है।

यह गोला साल भर टाइम स्क्वायर में छत पर टंगा नहीं रखा जाता। नये साल से कुछ समय पहले इसे क्रेन की मदद से ऊपर चढ़ाया जाता है और पूरी तरह जांच-परखकर सुरक्षित जगह पर फिट किया जाता है। फिर 31 दिसंबर की रात ठीक बारह बजे से पहले उसे एक ख़ास रेलिंग और मशीन की मदद से बहुत धीरे-धीरे घड़ी के अनुसार नीचे उतारा जाता है। पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर और समय से जुड़ी होती है, ताकि एक सेकंड की भी ग़फ़लत न हो।

इस गोले का वज़न सैकड़ों किलो का होता है, इसलिए इसे संभालने के लिए ख़ास इंजीनियर और तकनीकी कर्मचारी लगाये जाते हैं। ठंड, हवा और बर्फ़ जैसी, मौसम की कठिनाइयों के बावजूद यह हर साल ठीक समय पर नीचे उतरता है और दुनिया को नये साल के आने का संकेत देता है।

यह बॉल ड्रॉप केवल व्यावसायिक विज्ञापन की चकाचौंध से बढ़कर अब केवल एक धातु और रोशनी का पिंड मात्र नहीं बल्कि उसके साथ-साथ करोड़ों लोगों की नववर्ष से उम्मीदों, आने वाले कल के सपनों और नये साल की पहली शुभकामना का प्रतीक बन चुका है।

विवेक रंजन श्रीवास्तव, vivek ranjan shrivastava

विवेक रंजन श्रीवास्तव

सेवानिवृत मुख्य अभियंता (विद्युत मंडल), प्रतिष्ठित व्यंग्यकार, नाटक लेखक, समीक्षक, ई अभिव्यक्ति पोर्टल के संपादक, तकनीकी विषयों पर हिंदी लेखन। इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स के फैलो, पोस्ट ग्रेजुएट इंजीनियर। 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी ब्लॉगर, साहित्यिक अभिरुचि संपन्न, वैश्विक एक्सपोज़र।

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