
- February 3, 2026
- आब-ओ-हवा
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विवेक रंजन श्रीवास्तव नवंबर से अमेरिका प्रवास पर हैं और अन्य देशों की यात्राओं पर भी जाने वाले हैं। इस दौरान वह रोज़ाना शब्दों को समय दे रहे हैं। आब-ओ-हवा पर विशेष रूप से इस वैचारिकी, नोट्स, अनुभव आदि इंदराज के लिए यह कोना।
दूर देस में लेखक-9...
अमेरिका में लिखने-पढ़ने की संस्कृति
अमेरिका में पुस्तक व्यवसाय एक परिपक्व उद्योग के रूप में विकसित हुआ है। पुस्तक प्रकाशन केवल व्यवसायिक गतिविधि नहीं बल्कि संगठित सांस्कृतिक व्यवस्था है। बड़े प्रकाशक समूह, स्वतंत्र प्रकाशन गृह, ई-बुक और ऑडियो बुक प्लेटफ़ॉर्म एक साथ सक्रिय हैं। अमेज़न जैसे ऑनलाइन विक्रेताओं ने वितरण को वैश्विक बनाया है जबकि स्थानीय बुक स्टोर अब सांस्कृतिक केंद्र की भूमिका भी निभा रहे हैं। पाठक की पसंद में विविधता है। उपन्यास के साथ साथ नॉन फ़िक्शन, आत्मकथाएँ, बिज़नेस, सेल्फ़-हेल्प, विज्ञान और बच्चों का साहित्य निरंतर लोकप्रिय है। पढ़ने की आदतें भी बदली हैं। प्रिंट के साथ डिजिटल और ऑडियो फ़ॉर्मेट समानांतर चलते हैं। सार्वजनिक परिवहन में ऑडियो बुक सुनना और घर पर ई-रीडर पर पढ़ना सामान्य व्यवहार बन चुका है।
अमेरिका में लेखक पुस्तक प्रकाशन के लिए कई रास्ते अपनाते हैं, पारंपरिक प्रकाशन में लेखक अपनी पांडुलिपि एजेंट के माध्यम से या कभी सीधे प्रकाशक को भेजता है और स्वीकृति मिलने पर अनुबंध होता है, जिसमें रॉयल्टी सामान्यतः मुद्रित पुस्तकों पर आठ से पंद्रह प्रतिशत और ई-बुक पर अधिक तय की जाती है। प्रकाशक संपादन, आवरण, मुद्रण और वितरण की ज़िम्मेदारी संभालता है। पुस्तक बुक स्टोर, ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म और पुस्तकालयों तक पहुँचती है। इसके समानांतर स्वप्रकाशन भी तेज़ी से लोकप्रिय हुआ है जहाँ लेखक स्वयं अमेज़न, किंडल, डायरेक्ट पब्लिशिंग जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर पुस्तक अपलोड करता है, लागत और नियंत्रण उसके ही हाथ में रहता है और रॉयल्टी भी कहीं अधिक होती है। इस व्यवस्था में लेखक केवल रचनाकार नहीं रहता बल्कि वह अपने लेखन का उद्यमी भी बन जाता है, जो प्रचार, पाठक संवाद और बिक्री रणनीति में सक्रिय भूमिका निभाता है।
अमेरिका में पब्लिक लाइब्रेरी प्रणाली लोकतांत्रिक ज्ञान संस्कृति की रीढ़ मानी जाती है। जर्सी सिटी की पब्लिक लाइब्रेरी प्रणाली इसका सशक्त उदाहरण है। जर्सी सिटी फ़्री पब्लिक लाइब्रेरी के अंतर्गत 12 प्रमुख लाइब्रेरी हैं, जिनमें मुख्य पुस्तकालय, कई शाखाएँ और एक मोबाइल पुस्तकालय (बुक-मोबाइल) शामिल हैं। अंग्रेज़ी के साथ स्पेनिश और अन्य भाषाओं की पुस्तकें सहज उपलब्ध हैं। यहाँ केवल पुस्तकें ही नहीं बल्कि डिजिटल डेटाबेस, ई-बुक, ऑडियो बुक, बच्चों के लिए रीडिंग प्रोग्राम, वरिष्ठ नागरिकों के लिए साक्षरता गतिविधियाँ और नौकरी खोज से जुड़े संसाधन भी उपलब्ध कराये जाते हैं। सुविधायुक्त पुस्तकालय भवन, अध्ययन, संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए खुले सार्वजनिक स्थान के रूप में उपयोग किये जाते हैं। पुस्तकालयों में बुज़ुर्गों एवं बच्चों की गतिविधियों के अनेक प्रसंग मेरे देखने में आये। पुस्तकालय निशुल्क हैं।

समग्र रूप से देखा जाये तो अमेरिका में पुस्तक व्यवसाय बाज़ार की गति से संचालित है जबकि पब्लिक लाइब्रेरी व्यवस्था सामाजिक संतुलन बनाये रखती है। जर्सी सिटी जैसे बहु-सांस्कृतिक शहर में पुस्तकालय बचपन से ही पढ़ने की अभिरुचि को विकसित करने का माध्यम है और यह सिद्ध करता है कि तकनीक के युग में भी पुस्तक और पाठक के बीच संबंध कमज़ोर नहीं पड़ा है बल्कि नये रूपों में और व्यापक हुआ है।
किताबों के बारे में यह डायरी लिखते हुए अचानक एक और जिज्ञासा कौंधी है। यह भी मुझ जैसे अनेक पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है।
तारीख़ लिखने का तरीका
भारतीय पाठकों को अक्सर अमेरिका में तारीख़ लिखने का सिस्टम हैरान कर देता है क्योंकि वहाँ क्रम हमारे देश से भिन्न चलता है। भारत में हम किसी भी तारीख़ को दिनांक से शुरू करते हैं फिर माह लिखते हैं और अंत में वर्ष आता है। यह क्रम उतना ही सहज लगता है जितना सुबह उठकर पहले आँख खोलना और फिर बाहर की धूप देखना। लेकिन अमेरिका ने इस सहजता को अपने हिसाब से उलटकर रख दिया है। वहाँ तारीख़ की शुरूआत माह से होती है, उसके बाद दिनांक और फिर वर्ष दर्ज होता है। इसीलिए 11 सितंबर की आतंकी घटना 9/11 के रूप में जानी जाती है।
अब यदि कोई भारतीय पाठक पहली बार यहां 07/12/2025 लिखा देखे तो वह इसे सात दिसंबर समझ सकता है जबकि अमेरिकी इसे बारह जुलाई पढ़ेगा।
दुनिया के अधिकांश देश तारीख़ लिखने में भारतीय क्रम पद्धति का ही पालन करते हैं क्योंकि यह समय को छोटे से बड़े क्रम में रखता है। दिन सबसे छोटा, फिर माह और अंत में वर्ष। अमेरिका का तरीक़ा उल्टा होते हुए भी उनकी जीवनशैली और ऐतिहासिक दस्तावेज़ी परंपरा से मेल खाता है। उनके कैलेंडर में महीनों को सबसे विशेष स्थान मिला है इसलिए वहाँ माह को पहले लिखना एक तरह की सांस्कृतिक आदत है।
अंतरराष्ट्रीय संवाद, यात्राओं और ऑनलाइन लेन-देन में यह अंतर कई बार भ्रम पैदा करता है। इसीलिए किसी भी अमेरिकी दस्तावेज़ या वेबसाइट पर तारीख़ पढ़ते समय थोड़ा ठहरकर सोचना ज़रूरी हो जाता है कि यह क्रम किस देश का है। एक पल की यह सावधानी कई उलझनों से बचा लेती है और तारीख़ों के इस छोटे से अंतर को समझना वैश्विक संपर्क की सरलता में एक नयी सीख जोड़ देता है।
जब UNO देशों का युद्ध उन्माद रोकने जैसे बड़े कार्य नहीं कर पा रहा तो कम से कम एक रूप तरीक़े से तारीख़ें लिखना, एक-से बिजली के सॉकेट रखना, सामान्य आदमी के लिए वीज़ा आन एराइवल की व्यवस्था आदि छोटे कामों पर तो वैश्विक समझौते कर ही सकता है।

विवेक रंजन श्रीवास्तव
सेवानिवृत मुख्य अभियंता (विद्युत मंडल), प्रतिष्ठित व्यंग्यकार, नाटक लेखक, समीक्षक, ई अभिव्यक्ति पोर्टल के संपादक, तकनीकी विषयों पर हिंदी लेखन। इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स के फैलो, पोस्ट ग्रेजुएट इंजीनियर। 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी ब्लॉगर, साहित्यिक अभिरुचि संपन्न, वैश्विक एक्सपोज़र।
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