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विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से....

ईरान की संस्कृति

            ईरान की संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। इसे ‘फ़ारसी संस्कृति’ के रूप में भी जाना जाता है, जिसने न केवल मध्य पूर्व बल्कि मध्य एशिया और भारतीय उपमहाद्वीप के साहित्य, कला और दर्शन पर भी गहरा प्रभाव डाला है।

ईरानी संस्कृति की आत्मा उसकी कविता में बसती है। फ़ारसी साहित्य दुनिया के गौरवशाली साहित्य में गिना जाता है।

  • महान कवि: फ़िरदौसी, हाफ़िज़, रूमी और सादी जैसे कवियों की रचनाएँ आज भी विश्वभर में पढ़ी जाती हैं।
  • शाहनामा: फ़िरदौसी द्वारा रचित ‘शाहनामा’ ईरान का राष्ट्रीय महाकाव्य है, जो प्राचीन फ़ारस के इतिहास और मिथकों को संजोये हुए है।

फ़ारसी संगीत (ईरानी शास्त्रीय संगीत) अपनी प्राचीन सांस्कृतिक विरासत का पूरा इतिहास रखता है। भारत जैसे कई देशों में इस संगीत का प्रचलन सदियों से रहा है। सितार, संतूर, बरबत जैसे वाद्य यंत्रों का जन्मदाता ईरान कहा जाता है। कुछ इतिहासकार मानते हैं ईसा के बाद की सदियों में ही ईरान में विकसित 100 तारों वाला एक प्राचीन वाद्ययंत्र ‘शततंत्री वीणा’ भी प्रचलित था।

  • दस्तगाह: यह विशिष्ट प्रणाली, आध्यात्मिक सूफ़ी कवियों (हाफ़िज़, रूमी) के गीतों के उपयोग के लिए मशहूर है। फ़ारसी संगीत का आधार है, जो 12 मुख्य मोडों (Modes) का एक ढांचा है।
  • ताहरीर: गायक द्वारा गले से पैदा की गयी ‘चाह-चाह’ या कंपन वाली एक विशिष्ट ध्वनि, जो शास्त्रीय गायन का प्रमुख अंग है, फ़ारसी संगीत की विशिष्ट पहचान है।

कला और वास्तुकला

ईरानी वास्तुकला अपनी भव्यता, ज्यामितीय सटीकता और नीले रंग की टाइलों के काम के लिए प्रसिद्ध है।

  • इस्फ़हान की मस्जिदें: इस्फ़हान शहर को ‘निस्फ़-ए-जहाँ’ (आधी दुनिया) कहा जाता है, जहाँ की ‘मस्जिद-ए-शाह’ और ‘शेख़ लुत्फ़ुल्ला मस्जिद’ वास्तुकला के बेजोड़ नमूने हैं।
  • कालीन: ईरानी कालीन दुनिया भर में अपनी बुनाई, रंगों और जटिल डिज़ाइनों के लिए मशहूर हैं। यह ईरान की एक प्राचीन हस्तकला है।

त्यौहार और परंपराएँ

ईरानी संस्कृति में कई ऐसे त्यौहार हैं, जो इस्लाम के आगमन से पहले के हैं और आज भी उतनी ही धूमधाम से मनाये जाते हैं।

  • नौरोज़ : यह फ़ारसी नववर्ष है, जो वसंत ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है। यह प्रकृति के पुनर्जन्म का प्रतीक है।
  • शब-ए-यल्द: साल की सबसे लंबी रात को परिवार के साथ मिलकर फल (विशेषकर अनार और तरबूज़) खाकर और कविताएँ पढ़कर मनाया जाता है।

खान-पान

ईरानी भोजन अपने संतुलित स्वाद और सुगंध के लिए जाना जाता है। इसमें केसर, सूखे मेवे, गुलाब जल और अनार का भरपूर उपयोग होता है।

  • चेलो कबाब: यह ईरान का राष्ट्रीय व्यंजन है, जिसमें सुगंधित चावल (बेरेंज) के साथ ग्रिल्ड कबाब परोसा जाता है।
  • सब्ज़ी ख़ोरेश: विभिन्न प्रकार की हरी सब्ज़ियों और मांस से बना स्टू भी यहाँ काफ़ी लोकप्रिय है।

शिष्टाचार: ‘तारोफ़’

ईरानी संस्कृति में ‘तारोफ़’ एक अनूठी सामाजिक शिष्टाचार पद्धति है। यह अत्यधिक विनम्रता और सम्मान दिखाने की कला है, जिसमें अक्सर दुकानदार या मेज़बान पहली बार में पैसे लेने से मना कर देते हैं या मेहमान को अत्यधिक सम्मान देते हैं। यह आपसी रिश्तों में कोमलता और सम्मान बनाये रखने का एक तरीक़ा है।

ईरान की संस्कृति प्राचीन परंपराओं और आधुनिकता का एक अनूठा संगम है, जो मनुष्य को सौंदर्य, प्रेम और दर्शन की ओर प्रेरित करती है।

विवेक रंजन श्रीवास्तव, vivek ranjan shrivastava

विवेक रंजन श्रीवास्तव

सेवानिवृत मुख्य अभियंता (विद्युत मंडल), प्रतिष्ठित व्यंग्यकार, नाटक लेखक, समीक्षक, ई अभिव्यक्ति पोर्टल के संपादक, तकनीकी विषयों पर हिंदी लेखन। इंस्टीट्यूशन आफ इंजीनियर्स के फैलो, पोस्ट ग्रेजुएट इंजीनियर। 20 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। हिंदी ब्लॉगर, साहित्यिक अभिरुचि संपन्न, वैश्विक एक्सपोज़र।

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