
- October 19, 2026
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सुदिन श्रीवास्तव की कलम से....
राग यमन और राग जोग का रस-संसार
पंडित गंगाप्रसाद पाठक ललित कला न्यास के तत्वावधान में साल में दो अवसर ऐसे होते हैं, जिनमें रसिक श्रोताओं को शास्त्रीय गायन-वादन सुनने का आमंत्रण भेजा जाता ही है। 8 अप्रैल को देश के विख्यात गायक स्व. पं. गंगा प्रसाद पाठक जी के पुण्य स्मरण पर और गायक संगीताचार्य स्व. मथुरा मोहन श्रीवास्तव जी की पुण्यतिथि के अवसर पर।
स्व. मथुरा मोहन जी की पुण्यतिथि 2 अक्टूबर को होती है। अक्टूबर माह में आयोजन की तिथि तय करना हमेशा ही कठिन होता है। गणेश चतुर्थी से लेकर श्राद्ध पक्ष और फिर दीपावली सब लगभग इसी माह के आसपास आते हैं। इस बार भी श्राद्ध पक्ष के चलते कलाकारों और श्रोताओं की व्यस्तता को देखते हुए 3 अक्टूबर को कार्यक्रम तय हुआ। न्यास की मीटिंग में किराना घराने के गायक दिल्ली विश्वविद्यालय में संगीत के प्राध्यापक डॉक्टर अविनाश कुमार जी से अनुमति ली गयी और फिर अन्य व्यवस्थाओं पर भी विचार किया गया।
सर्किट हाउस में रूम बुक करवाने, कार्यक्रम के लिए नगर कोतवाली तलैया के पीछे माहेश्वरी सेवा ट्रस्ट, कार्ड, फ़ोल्डर, टेंट, साउंड, बैनर, गाड़ी पार्किंग, सभागार की बैठक व्यवस्था, मंच सज्जा, अविनाश जी के साथ तबले व हारमोनियम पर संगत आदि बातें धीरे-धीरे तेज़ी पकड़ने लगीं। इस बीच अविनाश कुमार जी, कवि श्री ब्रज श्रीवास्तव, गायिका कुमारी अवनि भार्गव, गायिका कुमारी सौम्या शर्मा, पं. प्रवीण शर्मा, श्री सुदिन श्रीवास्तव ने श्रोताओं से अनुरोध करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किये।
अविनाश जी ने बताया वे कार्यक्रम के दिन, सुबह साढ़े चार बजे भोपाल एक्सप्रेस से विदिशा आ रहे हैं। सुमधुर गायक और हारमोनियम पर अविनाश जी की संगत करने जा रहे पं. नीलेश तिवारी जी, कार्यक्रम का संचालन करने वाले पं. प्रवीण शर्मा जी, गायक श्री अतुल भार्गव जी और कुमार अभिनव चतुर्वेदी एक रात पहले ही हमारे घर पर जागते रहे। ये सभी लगातार कई रात जागने के आदी हैं। हमें इनके जागते रहने से नींद नहीं आयी।

अविनाश जी ने बीना निकलते ही फ़ोन किया। हम सब गाड़ी से रेल्वे स्टेशन पहुंचे। लगभग चार लोगों को अलसुबह स्टेशन आया देख अविनाश जी भी प्रसन्न हुए। हम लोग उनके साथ सर्किट हाउस पहुंचे और रूम नंबर 4 में उन्हें ठहराकर घर आ गये। नीलेश और प्रवीण बाबू भी अपने घर चले गये। अविनाश जी का सुबह का नाश्ता श्री नीरज तिवारी जी के साथ था।
साढ़े दस बजे न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष श्री गोविंद देवलिया, सचिव श्री सुनील जैन, कोषाध्यक्ष श्री भरत लढ्ढा, सह सचिव श्री अरविन्द द्विवेदी, श्री सतीश खत्री, पूर्व सचिव एडव्होकेट श्री चक्रवर्ती जैन, न्यास में वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री ब्रज किशोर गोयल, श्री अनंत सिंह, श्री प्रकाश पाठक एवं संगीतानुरागी छात्र सभागार में बैठक व्यवस्था करने आ गये। लगभग 2 घंटे में इस व्यवस्था के बाद भोजन का प्रबंध घर पर रहा।
घर पर अविनाश जी ने हारमोनियम देखा, तानपूरे को मिलाया, बच्चों के प्रश्नों का समाधान किया। इस बीच अवनि भार्गव से भी बात की और सर्किट हाउस चले गये। शाम को भोपाल से तबले पर संगत कर रहे डॉक्टर अशेष उपाध्याय जी का फ़ोन आया कि वो जाम्भोरकर जी के साथ भोपाल से निकल दिये हैं। पं. अनूप शर्मा जी, पं. यशवंत शर्मा जी एवं उनके मित्र कटारे जी के आने का फ़ोन आया। पं. घनश्याम शर्मा जी, पं. नारायण शर्मा जी ने भी फ़ोन पर अपने आने का समाचार दिया। विदिशा के आसपास के श्रोता भी आने लगे।
शाम 7 बजे कार्यक्रम के संचालक प्रवीण शर्मा ने श्रोताओं से संवाद शुरू किया। ज़रा देर में अविनाश जी, अशेष जी और नीलेश जी साथ आये। अवनि उन्हें सभागार में लेकर आयीं। सभागार में श्रोता आते जा रहे थे। तभी संचालक ने कलाकारों और न्यास के सदस्यों को मां सरस्वती जी की पूजन हेतु आमंत्रित किया। पूजन के बाद स्थानीय कलाकार के रूप में परिचय के साथ कुमारी अवनि भार्गव, हारमोनियम पर संगत के लिए पं. नीलेश तिवारी और तबले पर संगत के लिए पं. शशिकांत शर्मा मंच पर आये।
जब निषाद और गंधार से खिला षड्ज
अवनि भार्गव ने राग यमन की रूपरेखा बनायी और विलंबित एक ताल में रचना “करिए कृपा मोपे मोरे श्याम मुरारी” से यमन के स्वर विस्तार आरंभ किये। शनैः-शनै: निषाद और गंधार के मधुर स्पर्श से षड्ज खिलने लगा। निषाद, ऋषभ और गंधार श्रोताओं को रससिक्त करने लगे। निषाद-गंधार पर कर्णप्रिय ठहराव के साथ सभागार में तीव्र मध्यम और पंचम की चमक फैलने लगी….
स्वर विस्तार क्रमबद्ध बढ़ते हुए निषाद और तार बड़े छूने लगा। अंतरे के बोल वातावरण में घुलने लगे और अंतरे के बाद थोड़ी देर बढ़ाकर अवनि ने सहलाने और फिर सरगम कहनी शुरू की। अलग-अलग लयकारियों में सरगम और द्रुत तानों के बाद अवनि ने मध्यलय एक ताल में ही “सबके हितकारी महादेव त्रिपुरारी” की भावपूर्ण और कलात्मक प्रस्तुति से अपने गायन को विराम दिया। श्रोताओं ने नवोदित युवा गायिका अवनि और तबले पर संगत कर रहे पं. शशिकांत शर्मा और हारमोनियम पर संगत कर रहे पं. नीलेश तिवारी की सूझ-बूझ भरी संगत की मुक्त कंठ से सराहना की।
अवनि भार्गव के बाद कार्यक्रम में दिल्ली से विशेष रूप से आमंत्रित किराना घराने के गायक डॉक्टर अविनाश कुमार को मंच पर आमंत्रित किया गया। डॉक्टर अविनाश कुमार अपने साथी कलाकारों को साथ मंच पर आये। सबसे पहले उन्होंने अवनि भार्गव के गायन की मुक्त कंठ से सराहना की और नगर में शास्त्रीय संगीत का वातावरण बनाये रखने और युवाओं को शास्त्रीय संगीत से जोड़ने के लिए न्यास के प्रयासों को भी साधुवाद दिया।
सुरों में राग जोग और भैरवी
डॉक्टर अविनाश कुमार ने अपने गायन के लिए राग जोग चुना और स्वर लगाते ही अपने सुमधुर सिद्ध कंठ और एकाग्र साधना का परिचय दिया। राग जोग में विलंबित एक ताल में निबद्ध रचना “पियरवा को बिलमाये” के स्वर विस्तार में गंभीर माधुर्य रचा। स्वरों पर अद्भुत नियंत्रण और स्वरों के फैलाव और संकुचन से डॉक्टर अविनाश कुमार ने राग जोग को अप्रतिम श्रवणीय बना दिया। स्वर विस्तार में आते क्षणिक अंतराल को कभी तबले पर संगत कर रहे पं. किरण देशपांडे जी के यशस्वी शिष्य डॉक्टर अशेष उपाध्याय के बाएं (डग्गे) की गूंज सौंदर्य से भरती तो कभी हारमोनियम पर कुशलता से संगत कर रहे पं. नीलेश तिवारी की चपल उंगलियां रसपूर्ण बनातीं…
राग जोग में दोनों गंधार का कलात्मक लगाव और पंचम पर न्यास ने राग को और रोचकता प्रदान की। श्रोता भाव विभोर थे। अपनी बेहद तराशी हुई आवाज़ में सहलाने और विविधता पूर्ण सरगमों के बाद अतिद्रुत लेकिन साफ़ तानों ने श्रोताओं को चमत्कृत किया। दिल्ली विश्वविद्यालय में संगीत के प्राध्यापक डॉक्टर अविनाश कुमार ने विलंबित रचना के मध्य लय तीन ताल में “मन चाहत मिलबे को सखी श्याम सों” के बाद राग जोग में ही मध्य लय एक ताल में स्वरचित बंदिश “नाद जोग सरस” की भावपूर्ण प्रस्तुति की।

डॉक्टर अविनाश कुमार ने अपने गायन का समापन राग भैरवी में स्वरचित भजन “मां शारदे जगत जननी” में अनेक रागों की छाया दिखाते हुए भक्तिमय रूप में किया। आकाशवाणी एवं दूरदर्शन के प्रथम श्रेणी कलाकार डॉक्टर अविनाश कुमार का गायन इतना सम्मोहक था कि गायन समाप्त करने के बाद भी श्रोताओं को अपने स्थान पर बैठे देख न्यास के कार्यकारी अध्यक्ष श्री गोविंद देवलिया ने श्रोताओं और कलाकारों का आभार व्यक्त करते हुए शेर पढ़ा “अल्लाह करे आये न नाटक का दिन कभी, जी चाहता है यूं ही रिहर्सल चला करे”।
उन्होंने डॉक्टर अविनाश कुमार, डॉक्टर उपाध्याय, पं. तिवारी, कुमारी अवनि, पं. शशिकांत शर्मा के साथ दूर-दूर से आये सभी श्रोताओं को प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति शाह एवं वरिष्ठ कवि श्री कालूराम पथिक जी ने इस आयोजन में आरंभ से ही विशेष रुचि ली। कार्यक्रम से पूर्व न्यास के सचिव श्री सुनील जैन ने इन आयोजनों के पीछे न्यास की मंशा पर अपने विचार भी रखे। यह शाम एक यादगार शाम के रूप में श्रोताओं की यादों में दर्ज हो गयी।

सुदिन श्रीवास्तव
कवि और संगीत मर्मज्ञ। संगीत के अध्यापक और राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों के आयोजक के रूप में सुपरिचित। ग़ज़लों का एक संग्रह प्रकाशन के लिए तैयार। पत्र, पत्रिकाओं, मंचों और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों पर कवि के रूप में उपस्थिति। संपर्क: 98262 43337
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