हरिशंकर परसाई – राजनैतिक व्यंग्य के पुरोधा

पंकज निनाद की कलम से…. हरिशंकर परसाई – राजनैतिक व्यंग्य के पुरोधा             किशोर उम्र में बच्चे सवाल करने लगें, तर्क देने लगें और...

व्यंग्य की लोकधर्मी परंपरा: भारतेंदु से वर्तमान तक

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

जब इतिहास ही खो जाये..

मुंशी प्रेमचंद (31.07.1880-08.10.1936) की जयंती के अवसर पर यह वैचारिकी प्रेमचंद के साहित्य का ऐतिहासिक महत्व समझाती है और यह भी कि इस साहित्य को किस तरह संरक्षित किया...

नई कहानी और महिला कथाकार

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

संप्रेषण के क्रोशिए से संदेश के कशीदे काढ़ते रहे हाशमी जी

संप्रेषण के क्रोशिए से संदेश के कशीदे काढ़ते रहे हाशमी जी              अपनी सृजनात्मकता से साहित्य को समृद्ध कर विभिन्न विधाओं पर अधिकारपूर्वक लेखन...

दुष्यंत-पूर्व हिन्दी ग़ज़लकार

दुष्यंत-पूर्व हिन्दी ग़ज़लकार              कोई भी घटना अकस्मात नहीं घटती, उसके नेपथ्य में कोई-न-कोई प्रक्रिया बहुत पहले से चल रही होती है। ग़ज़ल का...

हिन्दी उर्दू का भाषाई रिश्ता

हिन्दी उर्दू का भाषाई रिश्ता हिंदोस्तान एक ऐसा बहुभाषीय देश है, जिसमें अनेक क्षेत्रीय बोलियां एवं स्थानीय भाषाएं बोली समझी एवं इस्तेमाल की जाती हैं। हिंदोस्तान को भाषाओं का...