गणतंत्र की हिन्दू राजनीति और राज्यदर्शन को देन

गणतंत्र की हिन्दू राजनीति और राज्यदर्शन को देन               ‘प्राचीन भारत में जनतंत्र’, यह एक पुस्तक नहीं बल्कि जनतंत्र की खोज का दस्तावेज़...

कृतित्व के आईने में ज्ञानरंजन

‘मान’ सहज व रोचक अंदाज़ में उस परिदृश्य को सामने लाती है, जो इस शती के पूर्वार्द्ध तक के समाज की तस्वीर रहा है। अंत में कहानी के पारंपरिक...

यतींद्रनाथ राही: विशाल अनुभव, अलग अंदाज़ व दृष्टि

अनामिका सिंह अना की कलम से…. यतींद्रनाथ राही: विशाल अनुभव, अलग अंदाज़ व दृष्टि             कैसा सुखद योग है कि 31 दिसम्बर 2025 को...

कब तक दुष्यंत की पीठ खुजाएगी ‘हिंदी ग़ज़ल’?

आलोचना ज्ञानप्रकाश पांडेय की कलम से…. कब तक दुष्यंत की पीठ खुजाएगी ‘हिंदी ग़ज़ल’?              मैं जानता हूँ दुष्यंत पर कुछ भी निगेटिव लिखकर...

वास्तविक डेमोक्रैसी तभी जब डेमोग्राफी सायास न बदले

विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. वास्तविक डेमोक्रैसी तभी जब डेमोग्राफी सायास न बदले              लोकतंत्र का आधार “जनता के लिए, जनता के द्वारा,...

गुफ़्तगू पर गुफ़्तगू: मजरूह सुल्तानपुरी के इंटरव्यू पर

गूंज बाक़ी… मजरूह सुल्तानपुरी ने पाकिस्तान में एक इंटरव्यू दिया। फिर डॉक्टर हनफ़ी ने एक लेख लिखा और खुलकर कहा कि मजरूह ने बड़बोलापन दिखाया। यह लेख माहनमा ‘शायर’...

साहित्य, समाज, सिनेमा और किन्नर

डॉ. बबीता गुप्ता की कलम से…. साहित्य, समाज, सिनेमा और किन्नर              परिवार से उपेक्षित, समाज से परित्यक्त मुख्यधारा से विलग हाशिये पर रखा...