धरती से रिश्ता पनपना मेरी नियति में था: मनोज कुमार

रस उन आँखों में है, कहने को ज़रा-सा पानी. आरज़ू लखनवी का शुमार उन शायरों में होता है, जिन्होंने न सिर्फ़ अपना नाम उर्दू अदब में सुनहरे हुरूफ़ में...

कवि सम्मेलनों में ठेकेदारी आ गयी: गोपालदास नीरज

कवि सम्मेलनों में ठेकेदारी आ गयी: गोपालदास नीरज                4 जनवरी 1925 को जन्मे गोपालदास नीरज परिचय के मोहताज नहीं हैं। फ़िल्मी गीत...

दुष्यंत कुमार से बहुत ​आगे निकल चुकी आज की ग़ज़ल: नीरज

दुष्यंत कुमार से बहुत ​आगे निकल चुकी आज की ग़ज़ल: नीरज                 4 जनवरी 1925 को जन्मे गोपालदास नीरज परिचय के मोहताज...

अनुवाद में राजनीति और लेखन बनाम अनुवाद

अनुवाद में राजनीति और लेखन बनाम अनुवाद                 प्रसंगवश… कन्नड़ लेखक बानू मुश्ताक़ को अंतरराष्ट्रीय बुकर पुरस्कार मिला तो अनुवाद चर्चा में...

भाषा : राजनीति, लोक और एआई युग के मुद्दे

भाषा : राजनीति, लोक और एआई युग के मुद्दे भारत के पीपल्स लिंंग्विस्टिक सर्वे के माध्यम से 780 भाषाओं का दस्तावेज़ीकरण करने वाले गणेश नारायणदास देवी सांस्कृतिक कार्यकर्ता, साहित्य...

‘राधा और कृष्ण की आड़ में नैतिकता का हनन आख़िर कैसे हो जाएगा..!’

‘राधा और कृष्ण की आड़ में नैतिकता का हनन आख़िर कैसे हो जाएगा..!’        बहुचर्चित लेखिका उर्मिला शिरीष ने अपने कथा-साहित्य में, प्रेम के विविध रूपों की...

अच्छी शायरी ही चलती है, टिकती है

बातचीत अच्छी शायरी ही चलती है, टिकती है ‘जितनी बंटनी थी बंट चुकी ये ज़मीं/अब तो बस आसमान बाक़ी है’, ऐसे शेरों से देश व दुनिया में शिनाख़्त रखने वाले...