मेरे अस्तित्व की लघुता और कमलकांत सक्सेना जी

नियमित ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. मेरे अस्तित्व की लघुता और कमलकांत सक्सेना जी              मैं इससे पहले किसी साहित्यकार से नहीं मिला...

हिन्दोस्तानी भाषा और डॉ. अख़्तर नज़्मी

पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. हिन्दोस्तानी भाषा और डॉ. अख़्तर नज़्मी महात्मा गांधी ने भाषा के मध्यम मार्ग को खोज लिया था, वो उसको हिंदी नहीं… हिन्दोस्तानी...

लफ़्ज़, सियासत और अली सरदार जाफ़री

पाक्षिक ब्लॉग सलीम सरमद की कलम से…. लफ़्ज़, सियासत और अली सरदार जाफ़री             तरक़्क़ीपसंद शायरी का ज़िक्र आते ही उन लफ़्ज़ों की दस्तकों...

ख़्वाब, हक़ीक़त और साग़र सिद्दीक़ी

ख़्वाब, हक़ीक़त और साग़र सिद्दीक़ी             ‘साग़र सिद्दीक़ी पागलों-सा गर्मी की दुपहरी में भी तन पर काला कंबल डाले एक फुटपाथ पर बैठा रहता...

अपनी बेवतनी से तबाह बूढ़ा दरवेश – ज़िया फ़ारुक़ी

अपनी बेवतनी से तबाह बूढ़ा दरवेश – ज़िया फ़ारुक़ी               एमएचके इंस्टिट्यूट की लाइब्रेरी में किताबों के दरमियान बैठे हुए बूढ़े दरवेश की...

दर्स (शिक्षा), अंदाज़ और शहरयार

दर्स (शिक्षा), अंदाज़ और शहरयार “जिसका कलाम जितना बेहतर है वह उसे उतना ही बुरा पढ़ता है”, ये कोई तयशुदा शर्त नहीं है, ये बात ज़रूर पहली बार अपने...
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