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पेंटर उकेरता यादें और फोटोग्राफर क्षणभंगुरता!

             चंडीगढ़। छायाकार विरले क्षणों का सौदागर और पेन्टर होता स्मृतियों का सौदाई, संवेदनशील द्वय रचते हैं निःशब्द कविता..! ऐसा ही कुछ मैंने समझा, गत दिनों चंडीगढ़ के पंजाब कला भवन में अद्वितीय नौकरशाह डाक्टर एम.एस. रंधावा स्मृति कार्यक्रम के अंतर्गत हुए प्रख्यात पेंटर मदनलाल और इस वर्ष के पंजाब गौरव अलंकरण से विभूषित छायाकार देव-इन्दर की कलाधर्मिता पर कला-विमर्श में। विमर्श के सूत्रधार अमरजीत ग्रेवाल तथा सुभाष परिहार के साथ-साथ श्रोता एवं दर्शक बतौर शामिल नगर के ख्यातिलब्ध पंजाबी साहित्यकार कलाकार और छायाकारों की सक्रिय भागीदारी ने इस कला-वार्ता में चार चाँद लगा दिये। मां बोली पंजाबी में हुई लम्बी कला वार्ता में ज़मीनी स्तर की पंजाबियत का परचम हिलोरें लेता प्रतीत हुआ।

विमर्श के प्रथम चरण में ख्याति नाम पेंटर मदनलाल ने अपने कार्यों का स्लाइड प्रदर्शन करते हुए अपनी ग्रामीण पृष्ठभूमि व कला उपलब्धियों के साथ-साथ सृजन प्रक्रिया पर भी बेबाकी से प्रकाश डाला, जिसे हम आत्मकथ्य की संज्ञा भी दे सकते हैं। आत्मकथ्य में सादगीपूर्ण स्पष्टता से उन्होंने पेंटिंग और छायांकन के भेद को सहज स्वीकारा। कहा कि स्केचिंग का दीर्घकालीन अभ्यास, कलाकार का युगबोध और अमूर्त स्मृतियां उसकी समावेशी कलाकृतियों में उजागर होती हैं। वहीं, फ़ोटोग्राफर जीवंत तात्कालिक आभास से अभिप्रेरित होकर इतिहास बनाता है।

इसी चरण के अगले क्रम में देव-इन्दर ने अपने कार्य को 6 मिनट की एक वीडियो प्रस्तुति में समेटकर प्रस्तुत किया। मितभाषी देव-इन्दर ने कहा ‘मैं जब अपने निरन्तर चालीस बरसों के काम को लेकर बैठा तो महत्वपूर्ण चुनते-चुनते महज़ 6 मिनट से भी कम काम ही हाथ में आया, जिन्हें मैंने आज आप सबके समक्ष प्रस्तुत किया। दरअसल यही क्षणभंगुरता छायांकन की सच्चाई है। उन्होंने आगे कहा कि बस उन्ही बिम्बों की उम्र होती है, जो आपके दिलों में धंस जाते हैं!’

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कला-विमर्श के सूत्रधार विद्वान अमरजीत ग्रेवाल ने देव-इन्दर की फ़ोटोग्राफ़ी के विविध आयामों को उजागर करने वाले अपने शोध निबंध का वाचन किया। उन्होंने कहा कि देव-‌इन्दर ने हरित क्रांति के संधिकाल के ग्रामीण पंजाब का फ़ोटोग्राफ़्स के माध्यम से लाजवाब दस्तावेज़ीकरण किया है। यह पंजाब के बदलते ग्रामीण परिवेश और परम्परागत जीवन की सच्चाई को दर्शाता है। उन्होंने शोध पत्र में अमूर्त छायांकन के विविध आयामों की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए देव-इन्दर के श्याम-श्वेत फ़ोटोग्राफ़ी को विशिष्ट दर्जा दिया।

एक चित्र विशेष का उल्लेख करते उन्होंने (बीम ऑफ़ लाइट) के दख़ल से उजागर तथ्यों पर पैनी दृष्टि से विश्लेषण करते हुए वैशिष्ट्य को दार्शनिक विभिन्नता लिये उजागर किया। सूत्रधार सुभाष परिहार, जो स्वयं भी सिद्ध फ़ोटोग्राफ़र हैं, ने देव-इन्दर के छायांकन की मुक्त कंठ से प्रशंसा की तथा उनकी मौलिकता की बात उठायी।

इस अवसर पर जिज्ञासु दर्शक श्रोताओं ने भी प्रश्न किये, जिनका यथासंभव निराकरण किया गया। पूरा विमर्श मेरे मन में ‘हीगल के तर्कवाद’ और ‘शाॅपनहावर की अंधी इच्छा’ के पैमाने पर तुलता रहा।

कार्यक्रम के प्रारंभ में डॉक्टर योगराज ने डॉक्टर रंधावा पर केंद्रित अपने शोध पत्र का वाचन किया। उन्होंने डॉक्टर रंधावा की कला केंद्रित पुस्तकों सहित सांस्कृतिक संरक्षण आदि का विस्तृत उल्लेख किया। कार्यक्रम के अंत में पंजाबी कैलीग्राफ़ी के विजेताओं को पुरस्कार भी तक्सीम किये गये।

अध्यक्ष पंजाब कला परिषद् स्वर्णजीत सिंह सवी, अध्यक्ष ललित कला अकादमी पंजाब गुरदीप धीमान, उपाध्यक्ष सुमित दुआ सहित नाटक अकादमी के अध्यक्ष एवं अन्य सांस्कृतिक संस्थाओं के पदाधिकारी, साहित्यकार, कलाकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

रिपोर्ट — सुभाष अरोड़ा (चित्रकार, लेखक)

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