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25 से 28 दिसंबर 2025 तक जबलपुर में सजेगा तमाम कलाओं का मेला, विमर्श और प्रस्तुतियों का राष्ट्रीय मंच यानी ‘जलम’

जलम यानी चार दिन कला चेतना के नाम

 

               जबलपुर। जलम यानी जबलपुर आर्ट लिटरेचर एण्ड म्यूज़िक फ़ेस्टिवल एक चित्रकार का सपना और दूसरे चित्रकार द्वारा उसे पूरा करने की ज़िद। साथ ही लगभग 50 युवा चित्रकारों और प्रशिक्षु चित्रकारों का समूह, जो इस सपने को पूरा करने के लिए दिन रात एक किये रहते हैं।

इत्यादि आर्ट फाउण्डेशन द्वारा 2017 में शुरू किये गये इस फेस्टिवल का यह दसवां संस्करण है। कला, साहित्य, संगीत, सिनेमा, रंगमंच एवं ललित कला की लगभग सभी विधाओं के साथ संवाद करते हुए, इन कलाओं के प्रति समृद्ध करता यह फ़ेस्टिवल अपने उद्देश्य के प्रति गंभीर है।

पिछले सालों में “जलम” ने कला, साहित्य, संगीत, रंगकर्म एवं सिनेमा प्रेमियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कम संसाधनों में होने वाला “जलम” एक पब्लिक आर्ट मूवमेंट है, जो इत्यादि आर्ट फाउण्डेशन कर्ताधताओं, शुभचिंतकों मित्रों और उन सब पर विश्वास करने वाले सहयोगियों की मदद से आयोजित होता है।

इस साल क्या कुछ ख़ास?

  • कलाकार हिम्मत शाह पर इस बार उत्सव में विशेष फोकस होगा। शाह पर केंद्रित एक वृत्तचित्र का प्रदर्शन और उसके बाद उन पर वार्ताओं का आयोजन होगा।
  • चार किताबों का लोकार्पण होगा, जिनमें अरुण रंग संदर्भ, अन्वेषण, आर्ट महाराजा और जलम वार्षिकी शामिल हैं।
  • वरिष्ठ पत्रकार एवं कवि प्रियदर्शन के सान्निध्य में समकालीन कवि अपनी रचनाओं का पाठ करेंगे।
  • कला प्रदर्शनी, आर्ट कैंप, लाइव पेंटिंग, नाटकों के मंचन, पुरस्कार समारोह, कविता पोस्टर प्रदर्शनी, नृत्य एवं सांगीतिक प्रस्तुतियां आदि बहुत कुछ।

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जलम क्यों है महत्वपूर्ण?

पिछले 9 सालों में इस फ़ेस्टिवल में तमाम स्वनामधन्य हस्तियों ने शिरकत की है। इस फ़ेस्टिवल ने कला जगत के तमाम उन महत्वपूर्ण सवालों को उठाया, जो ज़रूरी थे, प्रासंगिक रहे और जिन पर व्यापक तौर पर देश के अन्य मंचों पर चर्चाएँ प्रारंभ हुईं। प्रो. पुरुषोत्तम अग्रवाल का कबीर पर व्याख्यान हो या कमला भसीन का जेंडर विषय पर संवाद, अशोक भौमिक का कला पर गंभीर विमर्श हो या ट्रांसजेंडर को मुख्यधारा में लाने के लिए जलम द्वारा चलायी गयी मुहिम के तहत ट्रांसजेंडर धनंजय सिंह, दीपिका ठाकुर की उनके मुख से उनकी कहानी हो या जोया लोबो का संघर्ष… ये सब जलम के मंच से एक बड़ी मुहिम बन चुके हैं।

जलियांवाला बाग के शताब्दी वर्ष को जलम ने फोकस में रखा। पूरा आयोजन इस प्रयोजन को समर्पित किया। जलियांवाला बाग के सर्ववाइवर नानक सिंह के पोते नवदीय सूरी ने इस फेस्टिवल में शामिल होकर ये सब देखा, सराहा।

जलम का पिछला संस्करण प्रख्यात चित्रकार ए. रामचंद्रन को समर्पित किया गया, जिसमें उन पर व्याख्यान, प्रदर्शनी और किताब का विमोचन प्रमुख आकर्षण रहे। जलम में समकालीन आधुनिक कला के साथ लोककला का समावेश भी रहता है।

जलम में अब तक मुखि्तयार अली, कमलाशंकर, भारती बंधु, हरप्रीत, जसलीन औलख, शबनम बिरमानी, कालूराम बामनिया, प्रहलाद टिपानिया, श्रुति अधिकारी, निनाद अधिकारी, हुल्नास पुरोहित एवं अजय पोहनकर जैसे विख्यात गायक विमर्श में भागीदारी कर चुके हैं या अपनी प्रस्तुतियाँ दे चुके हैं।

द बरी डेड, अगरबत्ती, पशमीना जैसे नाटकों की प्रस्तुति ऐतिहासिक रही है। लगभग 150 जाने माने चित्रकार जलम के कला शिविरों में हिस्सा ले चुके हैं। इसके अलावा जलम में 4 सम्मान दिये जाते हैं। जिन्हें “इत्यादि सम्मान” के नाम से प्रदान किया जाता है। ये सम्मान चित्रकला, संगीत, रंगकर्म के क्षेत्र में और एक कला छात्र को भी प्रदान किया जाता है, जिन्हें 4 विशेषज्ञों की जूरी चुनती है।

पिछले वर्ष से कला के विद्यार्थियों को जलम में आमंत्रित करना भी प्रारंभ किया गया है। इस वर्ष 50 विद्यार्थी देशभर से आ रहे हैं, जो स्टूडेंट वर्कशॉप में भाग लेंगे। इस सत्र को शान्ति निकेतन के श्री कुमार जसाकिया कन्डक्ट करेंगे। 27 तारीख को 100 युवा एवं वरिष्ठ चित्रकार मिलकर जबलपुर स्थित विश्व प्रसिद्ध या यूं कहें कि यूनेस्को द्वारा संरक्षित साइट भेड़ाघाट को चित्रित करेंगे।

— प्रेस विज्ञप्ति

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