ओदवे क्लिवे, Odveig Klyve
अनुवाद: रति सक्सेना की कलम से....

नॉर्वे की क​वि ओदवे क्लिवे की कविताएं- गेंदत्व (Ballistic)

ओदवे क्लिवे (Odveig Klyve) से मेरा परिचय कृत्या के कारण 2008 में हुआ। कवि, फ़िल्म निर्माता एवं अनुवादक ओदवे नॉर्वे की समकालीन काव्य धारा में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। पहले परिचय में मुझे उनका संवेदनशील रूप दिखायी दिया। ओदवे की शैली है नन्ही-नन्ही कविताओं में गंभीर दर्शन और ज़िन्दगी को पिरोती हुई-सी। फुटबॉल जैसा लोकप्रिय विषय एक महिला कवि की लेखनी से इस तरह व्याख्यायित हुआ है कि पूरा खेल ज़िन्दगी और मौत के खेल में परिवर्तित हो जाता है। इन कविताओं की विशेषताएँ मात्र इतनी नहीं कि फुटबॉल जैसे पुरुषोचित खेल पर किसी महिला ने कलम चलायी है, बल्कि इसलिए भी कि ओदवे ने न केवल खेल को देखा बल्कि इतिहास को टटोलते हुए तथ्यों और इतिहास के माध्यम से खेल के मनोरंजन, तकनीकी और मैनैजमेंट जैसे पक्षों को बेहतर समझा। यही नहीं वे खेल में सफल खिलाड़ियों की मनोवृत्ति को बेहतर समझ पायीं। सबसे बड़ी बात यह है कि वे फुटबॉल के खेल को ज़िन्दगी से जोड़ते हुए अध्यात्म पक्ष को भी बेहतर प्रस्तुत कर पायीं।

ओदवे क्लिवे, Odveig Klyve

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तुम गेंद हो, तुम पाँव भी,
दूब तुम, श्वेत-श्याम के विरोध में, तुम
हवा, तुम गति हो, समय भी
वृत्त तुम, रेखा भी और बिन्दु
तुम नीचे से ऊपर और ऊपर उठती
एक विशाल सन्नाटे की ओर
फिर उछाल मारती विराट शोर में
एक चमकीली मेहराब बनाती हुई
हवा में, दिमाग़ के कोषों में

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तुम, लुढ़कती, ऊँची कूद लगाती,
देखती, गुरुत्वाकर्षण से भारहीनता की ओर
असंभव के बाहर छलांग लगाती
अचंभा बनती किसी दिन
मापों को दरकिनार करती हुई
सीमा विखंडन करती असीम की

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दूब पर पगडण्डी, हवा में राह
रेत पर चिह्नित एक कंधा, एक एड़ी
अनजान को मापते हुए
क्षणिक पूर्व क्षणिक पश्चात्

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सन्तुलन साधते हुए
ज़रा जल्दी या बहुत देरी
के बीच
तलवों के नीचे कंकड़
जूतों में पत्थर
नाखूनों में छिपी आशाएँ
दिशाओं का मापन
आसमान में घूमते हुए

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गुरुत्वाकर्षण पर शोध
घण्टों की गुप्तचरी
क्षणों में गिरते हुए
फेफड़े, धमनियाँ
माँसपेशियों, हड्डियों और
सपनों के वज़न के साथ

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क्या है जो उठाता है इस गोलक को
प्रकाशवान आभा वाले
झटित क्षण या वैचारिक मंथन?
क्रीड़ा या युद्ध? जाल में फँसी गेंद
हार है या फिर जीत?
क्रीड़ा या युद्ध?
झटित निर्णय या सोची-समझी रणनीति
या फिर ईश्वर के हाथ, ईश्वर के पैर?

रति सक्सेना, rati saxena

रति सक्सेना

लेखक, कवि, अनुवादक, संपादक और वैदिक स्कॉलर के रूप में रति सक्सेना ख्याति अर्जित कर चुकी हैं। व्याख्याता और प्राध्यापक रह चुकीं रति सक्सेना कृत कविताओं, आलोचना/शोध, यात्रा वृत्तांत, अनुवाद, संस्मरण आदि पर आधारित दर्जनों पुस्तकें और शोध पत्र प्र​काशित हैं। अनेक देशों की अनेक यात्राएं, अंतरराष्ट्रीय कविता आंदोलनों में शिरकत और कई महत्वपूर्ण पुरस्कार/सम्मान आपके नाम हैं।

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