“जय-जय जननी जन्मभूमि, हम बालक हैं तेरे”

मिथलेश रॉय की कलम से…. जय-जय जननी जन्मभूमि, हम बालक हैं तेरे             समय की रहगुज़र से गुज़रते हुए हम कहां चले जा रहे...

आत्मा को झकझोरता ‘नवरंग’ का वो प्रेरक गीत

विवेक सावरीकर मृदुल की कलम से…. आत्मा को झकझोरता ‘नवरंग’ का वो प्रेरक गीत                वर्ष 1959 में प्रदर्शित शांताराम बापू की सदाबहार...
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