वैश्विक भाषाई परिदृश्य: हिंदी तथा विविध विदेशी भाषाएं

गहन पड़ताल विवेक रंजन श्रीवास्तव की कलम से…. वैश्विक भाषाई परिदृश्य: हिंदी तथा विविध विदेशी भाषाएं             भारतीय समाज में भाषा केवल संप्रेषण का...

पीटर वॉटकिन्स बने पतरस बुखारी और उर्दू हुई मालामाल

पाक्षिक ब्लॉग डॉ. आज़म की कलम से…. पीटर वॉटकिन्स बने पतरस बुखारी और उर्दू हुई मालामाल                प्रथम प्रकाशन 1930 में “मज़ामीन-ए-पतरस”। अहमद...

अथर्ववेद और औषधीय विज्ञान

पाक्षिक ब्लॉग रति सक्सेना की कलम से…. अथर्ववेद और औषधीय विज्ञान शामनिज्म में उपचार में संगीत और लयात्मक का आधार प्रकृति से घनिष्ठता है। प्रकृति में एक लय है,...

ग़ज़ल तब : महेश अनघ

संदर्भ : 14 सितंबर 1947, महेश अनघ की जयंती ग़ज़ल तब : महेश अनघ 1 मुस्कानों का आना जाना पल दो चार रहा एक पुराना छाला दिल पर पहरेदार...
  • September 14, 2025
  • आब-ओ-हवा

अंक – 35

आब-ओ-हवा – अंक – 35 भाषाओं के साथ ही साहित्य, कला और परिवेश के बीच पुल बनाने की इस कड़ी में हिंदी दिवस पर कुछ विशेष चिंतन। इधर प्रख्यात...

मौत

मोहम्मद जोकोर लिखित इंडोनेशियाई कहानी का अंग्रेज़ी से अनुवाद श्रीविलास सिंह की कलम से…. मौत               खुले मैदान के मध्य में मोड़ पर...

सितारे ज़मीं पर… सबके अलग नॉर्मल से तालमेल का पैग़ाम

फ़िल्म चर्चा ख़ुदेजा ख़ान की कलम से…. सितारे ज़मीं पर… सबके अलग नॉर्मल से तालमेल का पैग़ाम              फ़िल्म “सितारे जमीं पर” की चर्चा...

हमें ईश्वर की ज़रूरत क्यों है?

गूंज बाक़ी… पिछली पीढ़ियों के यादगार पन्ने हर गुरुवार। इस शृंखला की पहली पेशकश में अपनी भिन्न वैचारिक उष्मा के साथ ही एक प्रासंगिक विचार के संदर्भ में भी...

हिन्दी-उर्दू शायरी में ‘आबो-हवा’

‘आबो-हवा’ का सीधा मतलब जलवायु है और शायरी में यह बाहर और भीतर की कैफ़ियत के हवाले से दर्ज होता रहा है। कहीं-कहीं तो यह प्रतीक भी बन जाता...
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