वेलेस: सिनेमाई रचनात्मक स्वतंत्रता का पहला विचार
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वेलेस: सिनेमाई रचनात्मक स्वतंत्रता का पहला विचार

ऑर्सन वेलेस (Orson Welles) का नाम विश्व सिनेमा के इतिहास में उन कलाकारों में लिया जाता है, जिन्होंने यह साबित किया कि फ़िल्म केवल कहानी सुनाने का माध्यम नहीं, बल्कि कैमरा, साउंड, लाइट, संपादन और अभिनय से विचार व्यक्त करने की कला भी हो सकती है।             

उनकी कहानी एक ऐसे बच्चे से शुरू होती है, जो बहुत कम उम्र में रंगमंच और अभिनय की दुनिया में प्रवेश करता है और सिर्फ़ 25 वर्ष की उम्र में ऐसी फ़िल्म बनाता है, जिसे आज भी सिनेमा के इतिहास की महानतम फ़िल्मों में गिना जाता है – Citizen Kane।

लेकिन वेलेस की कहानी केवल सफलता की नहीं थी। यह संघर्ष, सेंसरशिप, स्टूडियो की राजनीति, अधूरी परियोजनाओं, आर्थिक परेशानियों और अपने कलात्मक दृष्टिकोण के लिए लगातार लड़ने की कहानी भी थी। आइए मिलते हैं सिनेमाई दुनिया के एक और नायक से।

6 मई 1915 को केनोशा, विस्कॉन्सिन, अमेरिका में जॉर्ज ऑर्सन वेलेस का जन्म हुआ। उनके पिता रिचर्ड हेड वेलेस एक आविष्कारक और व्यापारी थे, जबकि उनकी माँ बीट्रिस एक अनुभवी और गुणी पियानोवादक और सांस्कृतिक व्यक्तित्व की स्वामी थीं। वेलेस का परिवार आर्थिक रूप से अपेक्षाकृत सुविधाजनक था और घर में कला तथा संगीत का माहौल था। लेकिन उनका बचपन पूरी तरह सुखद नहीं था। जब वेलेस छोटे थे, उनके माता-पिता अलग हो गये। माँ का निधन 1924 में हुआ, जब वह केवल नौ वर्ष के थे। कुछ वर्षों बाद उनके पिता की भी मृत्यु हो गयी। इस तरह बहुत कम उम्र में वेलेस ने अकेलेपन के शिकार हुए।

पिता की मृत्यु के बाद उनके अभिभावक बने डॉ. मॉरिस बर्न्स्टीन, जिन्होंने उनकी शिक्षा और कलात्मक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। मॉरिस शिकागो के एक चिकित्सक थे और वेलेस परिवार के पुराने मित्र। वेलेस जब बहुत छोटे थे, तभी से मॉरिस का संबंध वेलेस परिवार से था।

ऑर्सन वेलेस उन बच्चों में नहीं थे, जिन्हें सामान्य स्कूल जीवन पसंद था। उन्हें ड्रॉइंग, पेंटिंग, रंगमंच और अभिनय में ज़बरदस्त रुचि थी। उन्होंने स्कूल में ही रंगमंच प्रोडक्शन और कलात्मक अनुभव लेने शुरू कर दिये थे। उनका एक ख़ास झुकाव था— Magic (जादू की तरफ़) – वेलेस एक कुशल जादूगर भी थे। बाद में उनकी स्टेज क्राफ़्ट में जादू की यही समझ दिखायी देती है—दर्शकों को वही दिखाना, जो वे दिखाना चाहते थे और बाक़ी चीज़ें छिपा देना, ये उनके अभिनय का एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू था।

कला जगत में प्रवेश

1931 में ऑर्सन वेलेस ने अपनी औपचारिक स्कूली शिक्षा पूरी की। मॉरिस चाहते थे कि वह शायद पेंटिंग और कला की तरफ़ जाएं। सिर्फ़ 16 वर्ष की उम्र में वेलेस आयरलैंड चले गये। वहाँ उन्होंने डबलिन के Gate रंगमंच में ख़ुद को एक सक्षम ब्रॉडवे अभिनेता बताकर ऑडिशन हासिल किया। रंगमंच के कलाकारों ने उनकी उम्र से कहीं अधिक उनकी गंभीर अभिनय क्षमता देखी और उन्हें काम मिल गया। यहाँ उन्होंने पेशेवर स्टेज पर काम किया। यानी जब अधिकांश 16 वर्षीय बच्चे स्कूल में होते हैं, वेलेस पेशेवर रंगमंच कलाकार बन चुके थे।

ऑर्सन वेलेस की अभिनय क्षमता देखकर रंगमंच के लोगों को जल्द ही समझ आ गया कि यह सामान्य युवा अभिनेता नहीं है। यह उनकी कहानी का सबसे ख़ूबसूरत विडंबना है।

यहाँ उन्होंने यूरोपियन रंगमंच और शेक्सपियरियन अभिनय को क़रीब से समझा। एक 16 वर्षीय अमेरिकी लड़का अचानक पेशेवर आइरिश रंगमंच कंपनी में काम कर रहा था—यह असाधारण व्यक्तित्व और विश्वास का पहला बड़ा प्रमाण था।

वेलेस 1932 में अमेरिका लौटे और पेशेवर रंगमंच में अवसर तलाशना शुरू किया। उन्होंने कुछ समय के लिए परंपरागत करियर के रास्तों को भी आज़माया, लेकिन रंगमंच और अभिनय की ओर उनका झुकाव लगातार मज़बूत होता गया। उनका करियर अभी छोटा था, लेकिन उनकी महत्वाकांक्षा बहुत बड़ी थी। वेलेस को केवल एक्टर बनकर संतुष्टि नहीं थी। वह निर्देशक भी बनना चाहते थे। वह शेक्सपियर और पुराने नाटकों को आधुनिक तरीक़े से प्रस्तुत करने के प्रयोग करने लगे।

1936 में उन्होंने शेक्सपियर के Macbeth का एक प्रसिद्ध प्रोडक्शन तैयार किया। इसे बाद में कहा गया: “Voodoo Macbeth” क्योंकि वेलेस ने कहानी को हैती जैसे वातावरण में स्थापित किया और व्यापक रूप से ब्लैक कास्ट का इस्तेमाल किया। यह उस समय के अमेरिका के लिए बेहद असाधारण अनुभव था। वेलेस ने दिखा दिया कि प्राचीन साहित्य को नये सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में कैसे प्रस्तुत किया जा सकता है।

वेलेस और प्रोड्यूसर जॉन हाउसमैन ने साल 1937 में मर्करी रंगमंच की स्थापना की। यह ग्रुप जल्दी ही रंगमंच के अविष्कारों के लिए प्रसिद्ध हो गया। और यहीं से वेलेस की ज़िंदगी का अगला बड़ा अध्याय शुरू हुआ— रेडियो.. उस दौर में रेडियो, अमेरिका का सबसे शक्तिशाली जन-माध्यम था। वेलेस ने रेडियो ड्रामा में अपनी आवाज़ और स्टोरीटेलिंग का इस्तेमाल करना शुरू किया।

पहली फ़िल्मी सफलता की ओर

उन्होंने The War of the Worlds नामक रेडियो रूपांतरण का निर्देशन और मंचन  किया। ब्रॉडकास्ट को इस तरह प्रस्तुत किया गया कि वह एक वास्तविक समाचार बुलेटिन जैसा महसूस हो। कुछ श्रोताओं ने इसे वास्तविक एलियन इनवेज़न समझ लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार कई लोग घबरा गये और आपातकालीन सहायता केंद्रों तथा अख़बारों के दफ्तरों को फ़ोन करने लगे। हालाँकि बाद की लोक-कथाओं ने इस घटना को “पूरे अमेरिका में मास पैनिक” की तरह बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया है। फिर भी यह ब्रॉडकास्ट इतना प्रभावशाली था कि वेलेस अचानक राष्ट्रीय सेलिब्रिटी बन गये।

अब हॉलीवुड की नज़र अब उन पर थी। उन्होंने कई स्टूडियोज़ के प्रस्ताव को आसानी से स्वीकार नहीं किया क्योंकि वह अपना रचनात्मक नियंत्रण खोना नहीं चाहते थे। फिर 1939 में हॉलीवुड स्टूडियो RKO Pictures ने वेलेस को एक बेहद विशेष प्रस्ताव दिया। यह सामान्य अभिनेता अनुबंध नहीं था। वेलेस को रचनात्मक नियंत्रण की असाधारण स्वतंत्रता दी गयी। उन्हें: लेखक, निर्देशक और एक्टर के रूप में काम करने का अवसर मिला। यह हॉलीवुड में लगभग अभूतपूर्व स्थिति थी। वेलेस हॉलीवुड पहुँचे और अब वो फ़िल्म बनाने वाले थे, जिसने सिनेमा को हमेशा के लिए बदल दिया।

साल 1941 में Welles ने Herman J. Mankiewicz के साथ मिलकर स्क्रीनप्ले विकसित किया, अपनी पहली फ़िल्म Citizen Kane तैयार की, जिसका मुख्य किरदार था: Charles Foster Kane – जो एक अत्यंत शक्तिशाली न्यूज़पेपर मैगनेट था, जिसकी ज़िंदगी और मृत्यु के माध्यम से महत्वकांक्षा, संपदा, शक्ति और अकेलेपन की कहानी बतायी जाती है। केन के किरदार को सामान्य दर्शकों ने प्रकाशन जगत के दिग्गज William Randolph Hearst से जोड़ दिया। Hearst इस फ़िल्म से बेहद नाराज़ हुए। फ़िल्म को रोकने की कोशिशें हुईं और इसके ख़िलाफ़ प्रचार अभियान भी चला। लेकिन RKO स्टूडियो ने अंततः फ़िल्म रिलीज़ की।

आज फ़िल्म Citizen Kane को फ़िल्म मेकिंग नवाचार के लिए याद किया जाता है। वेलेस और उनके कैमरामैन ग्रेग टॉलैंड ने कई तकनीकों का इस्तेमाल किया:

डीप फ़ोकस-फ़्रेम में सामने, बीच में और पार्श्व, तीनों को शार्प विज़िबल रखना।

लो-एंगल शॉट्स से किरदारों को शक्तिशाली दिखाना।

ड्रामाई लाइटिंग और परछाइयों व कॉंट्रास्ट के माध्यम से मनोवैज्ञानिक वातावरण बनाना।

ग़ैर-रैखिक पटकथा – कहानी सीधे जन्म से मृत्यु तक नहीं जाती बल्कि एक रहस्यमयी शब्द से शुरू होती है: – “Rosebud” फिर अलग-अलग लोगों की यादों के माध्यम से केन की ज़िंदगी धीरे-धीरे सामने आती है।

रेडियो से आये वेलेस ने साउंड को केवल संवाद नहीं बल्कि कहानी कहने के ज़रिये की तरह इस्तेमाल किया। आज Citizen Kane को उत्कृष्ट कृति माना जाता है। लेकिन 1941 में यह तुरंत ब्लॉकबस्टर नहीं बनी।

हॉलीवुड—यूरोप—हॉलीवुड

वेलेस की समस्या यह थी कि वे स्टूडियो सिस्टम के लिए बहुत स्वतंत्र फ़िल्म निर्माता थे। हॉलीवुड स्टुडिओज़ चाहते थे फ़िल्मकार अनुसूची और बजट के अनुसार काम करे। वेलेस चाहते थे: रचनात्मक स्वतंत्रता। यहीं टकराव शुरू हुआ। उनकी अगली फ़िल्म: The Magnificent Ambersons — 1942 में आयी एक महत्वपूर्ण फ़िल्म थी, लेकिन RKO ने वेलेस के ओरिजिनल कट में भारी संपादन कर दिया। यह वेलेस के करियर की सबसे बड़ी कुंठाओं में से एक बन गया। उनकी मूल सोच काफ़ी हद तक बदल दी गयी।

धीरे-धीरे वेलेस का हॉलीवुड करियर कठिन होता गया। उनके प्रोजेक्ट्स बार-बार मुश्किलों  में फँसते रहे। उनकी फ़िल्मों का बजट बढ़ता था। वे पूर्णतावादी थे। वे पारंपरिक उत्पादन प्रणाली के अनुसार काम करने वाले फ़िल्म निर्माता नहीं थे। परिणाम यह हुआ कि उनके कई प्रोजेक्ट्स अधूरे रह गये या स्टूडियो में बदलाव का सामना करना पड़ा।

साल 1946 में वेलेस ने The Stranger बनायी। यह उनकी पहली फ़िल्म थी, जिसने उन्हें काफ़ी हद तक पारंपरिक हॉलीवुड प्रोडक्शन माहौल में काम करने का मौक़ा दिया। फ़िल्म में उन्होंने Nazi war criminal की तलाश की कहानी प्रस्तुत की। यह व्यावसायिक रूप से उनकी सबसे सफल फ़िल्मों में से एक बनी।

हॉलीवुड में लगातार रचनात्मक टकराव से परेशान होकर वेलेस यूरोप की ओर चले गये। यहाँ उन्होंने स्वतंत्र फ़िल्म निर्माण का कार्य शुरू किया। उनके लिए यह आसान नहीं था। कभी पैसे थे, कभी नहीं। कभी फ़िल्म शुरू होती, फिर अनुदान ख़त्म हो जाता। लेकिन वेलेस ने काम करना बंद नहीं किया।

साल 1958 में वेलेस फिर हॉलीवुड लौटे और उन्होंने बनायी: Touch of Evil। यह फ़िल्म ‘फ़िल्म नॉइर’ की महान फ़िल्मों में गिनी जाती है। इसके शुरूआती शॉट को विशेष रूप से प्रसिद्ध माना जाता है। एक लंबा लगातार ट्रैकिंग शॉट – बिना पारंपरिक कट के – जो दर्शकों को पूरे सीन में धीरे-धीरे ले जाता है। वेलेस ने फिर साबित किया कि कैमरा मूवमेंट स्वयं कहानी कहने का ज़रिया बन सकता है।

वेलेस को उनके करियर में कई महत्वपूर्ण सम्मान मिले। 1942 का अकादमी पुरस्कार उन्हें Citizen Kane के लिए मिला। बाद में उन्हें: मानद ऑस्कर अवॉर्ड 1971 में मिला। इसके अलावा कान्स फ़िल्म फ़ेस्टिवल का ग्रैंड प्राइज़, वेनिस फ़िल्म फ़ेस्टिवल से पहचान और अमेरिकन फ़िल्म इंस्टीट्यूट और अन्य संस्थानों से लाइफ़टाइम सम्मान मिले।

निजी ज़िंदगी के क़िस्से

वेलेस की कुल तीन शादियाँ हुईं। उनकी पहली पत्नी वर्जीनिया निकलसन थीं। दोनों की मुलाक़ात टॉड स्कूल की नाट्य गतिविधियों के दौरान हुई। बाद में दोनों ने शादी की। ख़ासकर निकलसन परिवार, इस अचानक शादी से ख़ुश नहीं था। बाद में परिवार को संतुष्ट करने के लिए न्यू जर्सी में एक औपचारिक विवाह समारोह भी हुआ। उनके तलाक़ का सबसे बड़ा कारण था वेलेस का लगातार काम में डूबे रहना और उनके विवाहेतर संबंध।

वर्जीनिया से तलाक़ के बाद वेलेस ने रीटा हेवर्थ से विवाह किया। रीटा और वेलेस की शादी, वेलेस के व्यक्तिगत जीवन का सबसे ग्लैमरस लेकिन अंततः जटिल अध्याय था। इसमें एक महत्वपूर्ण सुधार भी है: दोनों की शादी 1943 में हुई और तलाक़ 1947 में। रीटा एक प्रोफ़ेशनल डांसर थीं, दोनों की मुलाक़ात एक स्टूडियो में हुई। दोनों अपने पिछले रिश्तों से बाहर आ चुके थे और बहुत हद तक अकेले थे। यह हॉलीवुड का बेहद आकर्षक जोड़ा था। लेकिन ये रिश्ता भी लम्बा नहीं चल सका। रीटा को एक घर और स्थिर वैवाहिक जीवन चाहिए था जबकि वेलेस बेहद महत्वाकांक्षी फ़िल्म निर्माता थे। उनके लिए रंगमंच, फ़िल्में और क्रिएटिव प्रोजेक्ट्स सबसे महत्वपूर्ण थे। वह एक जगह स्थिर होकर पारंपरिक पारिवारिक जीवन जीने वाले व्यक्ति नहीं थे।

फिर उन्होंने पाओला मोरी से शादी की। वह इटली की अभिनेत्री और एक कुलीन परिवार से थीं। दोनों की मुलाक़ात 1953 के आसपास हुई थी। उस समय पाओला इटली में फ़िल्मों में काम कर रही थीं। बाद में वेलेस ने उन्हें अपनी फिल्म Mr. Arkadin में मुख्य महिला भूमिका दी। काम के दौरान दोनों के बीच प्रेम-संबंध विकसित हुआ। 8 मई 1955 को दोनों ने लंदन के कैक्सटन हॉल में शादी की।

उस समय वेलेस 39 वर्ष के थे और पाओला लगभग 26 वर्ष की थीं। वेलेस की मृत्यु 10 अक्टूबर 1985 को हुई। उसके लगभग दस महीने बाद, 12 अगस्त 1986 को पाओला की लास वेगास में एक कार दुर्घटना में सिर में आयी गंभीर चोटों के कारण मृत्यु हो गयी। वह 57 वर्ष की थीं। वेलेस के कुल चार बच्चे थे। जो बाद में अपने पिता की विरासत आगे बढ़ाते रहे।

ऑर्सन वेलेस ने जीवन के अंतिम वर्षों में भी काम करना बंद नहीं किया। वह टेलीविज़न पर उपस्थित रहे, विज्ञापन में दिखायी दिये, वॉयस-ओवर का काम किया और अपनी फ़िल्मों के लिए अनुदान खोजते रहे। उनका सबसे बड़ा अधूरा प्रोजेक्ट The Other Side of the Wind थी। लेकिन वह इसे पूरा होते नहीं देख सके। 10 अक्टूबर 1985 को लॉस एंजिल्स, कैलिफ़ोर्निया में हार्ट अटैक की वजह से उनकी मृत्यु 70 वर्ष की उम्र में हुई।

मृत्यु के बाद भी उनकी कहानी ख़त्म नहीं हुई। उनकी अधूरी फ़िल्म: The Other Side of the Wind को कई दशकों बाद पूरा किया गया और 2018 में प्रदर्शित किया गया। यानी जिस फ़िल्म निर्माता ने हॉलीवुड में अपने जीवनकाल में अपनी रचनात्मक स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया- उसकी एक अधूरी फ़िल्म उनके मरने के 33 साल बाद दर्शकों तक पहुँची। शायद यही उनकी कहानी का बेहद अहम हिस्सा था, जो दर्शकों के प्यार के कारण हमेशा के लिए अमर हो जाने का सबूत है।

चारु शर्मा, charu sharma

चारु शर्मा

फ़िल्मकार, लेखक, प्रोड्यूसर और सांस्कृतिक क्यूरेटर। यथाकथा फ़िल्म एंड लिटरेचर फ़ेस्टिवल की संस्थापक। चारु मुख्यतः सामाजिक मुद्दों और ऐतिहासिक कथाओं संबंधी डॉक्यूमेंट्री फिल्मों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और कंटेंट पर केंद्रित हैं। व्यक्तित्वों, विचारों आदि के दस्तावेज़ीकरण से जुड़े प्रोजेक्ट्स से जुड़ी रही हैं। फ़ीचर-लेंथ डॉक्यूमेंट्री “एम्बेसडर ऑफ़ सोशलिज़्म – लाइफ एंड टाइम्स ऑफ डॉ. राममनोहर लोहिया” उनके प्रमुख कार्यों में शामिल है। संपर्क: 9082050680

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