
- February 11, 2026
- आब-ओ-हवा
- 0
हास्य-व्यंग्य मुकेश असीमित की कलम से....
एआई का झोला-छाप क्लिनिक
तकनीक गड़बड़झाला का एक झोल सामने आया है। अख़बार में विज्ञापनों के मायाजाल में फंसी इस ख़बर पर नज़र पड़ी- “ए.आई. नीम हकीमी..चैट जीपीटी से परामर्श लेकर खाने का नमक बदला, ख़तरे में आयी जान”! ‘नीम-हकीम ख़तरा-ए-जान’ अब महज़ नीम और हकीम के बीच का मामला नहीं रहा, क्योंकि चैट जीपीटी भी बाक़ायदा झोला-छाप डॉक्टरों की बिरादरी में शामिल हो चुका है। मरीज़ों का इलाज करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है। वो दिन दूर नहीं जब मोहल्लों की दीवारों पर रंगीन पोस्टर चिपके मिलेंगे- “दाद, खाज, खुजली, भगन्दर, पायरिया, पीलिया, पथरी, बवासीर, नपुंसकता, नामर्दी.. चैट जीपीटी से पक्का इलाज, गारंटी सहित!”
अख़बार खोलते ही पंपलेट झड़ पड़ेंगे- “आपके शहर में ही खुले चैट जीपीटी के क्लिनिक की टापरी, पहुँचे हुए वैद्य जी का 1000 बरस पुराना नुस्ख़ा… नक़लचियों से सावधान रहें।”
और फिर चमकता, बोल्ड इश्तेहार- “ग़रीब-गुरबा की पहुँच में चैट जीपीटी- खोया प्यार लौटाने से लेकर, किसी भी लड़के को वश में करने, पड़ोसी पर टोटका करने, भूत-प्रेत-चुड़ैल उतारने, ऊपरी आत्मा-ऊपरी हवा भगाने, जादू-टोना, झाड़-फूंक, मन्त्र-मशान सिद्धि तक सब बताएगा।”
मगर जनाब, नीम-हकीम बनना बच्चों का खेल नहीं। इसके लिए बरसों की साधना चाहिए। सबसे पहले तो मरीज़ों की “दुख-दर्द” वाली ज़बान सीखनी होगी। एक अदृश्य, अलिखित शब्दकोश है आंचलिक मेडिकल भाषा का, उसे पढ़ना-समझना अनिवार्य है।
और मरीज़ से जानकारी निकालना? यह तो तलवार की धार पर नाचने जैसा है। वो सीधे यह नहीं कहेगा कि “गले में दर्द है” या “दस्त लग गये हैं”। पहले बताएगा- “मेरी भैंस पड़ोसी ने खोल ली… या उस पर टोना-टोटका कर दिया… या छोरा इलाज नहीं करवा रहा… पड़ोसी ने खेत जोत दिया…” ये सब प्रस्तावना है। उसके दुखों के महाकाव्य की गाथा खोलने से पहले मंगलाचरण अनिवार्य है।

अगर आप सुनने बैठे हैं तो उसकी सारी पारिवारिक, पड़ोसन-प्रधान, जातीय और खेतिहर गाथा सुननी पड़ेगी। वो बातें भी, जो उसने अपने सगे ससुराल तक से नहीं कही होंगी। अब चैट जीपीटी भावुक होकर इन ग़ैर-चिकित्सकीय समस्याओं में उलझ जाएगा और जब इन पर अपना ए.आई. ज्ञान झोंककर कहेगा- “अब आगे और कोई समस्या?” तब मरीज़ का असली बयान आएगा:
“जी, उड़ो-उड़ो सो रहे… पेट में मइठा सा चलै… आँटो सो पड़ गयो… गोड़े बोल गओं…” तो, पहले से तैयारी रखनी होगी। इन देसी मुहावरों, इशारों और उलझी लक्षणावली को सिस्टम में फ़ीड करना अनिवार्य है। तभी तो चैट जीपीटी असली मरीज़ी की थाह पाकर, झोला-छाप डॉक्टरों की सोहबत में अपनी दुकान जमा पाएगा।
कुछ ऐसा ही हाल इस मरीज़ के साथ भी हुआ। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ, यह “benefit of doubt” वाला मामला है, इस पर कोई मुक़दमा भी नहीं चल सकता, ठीक वैसे ही जैसे नीम-हकीम पर केस नहीं चलता।
क्योंकि, आपको पता ही है, पागल कुत्ते ने आपको काटा है मित्र, जो आप किसी नीम-हकीम के दरवाज़े पर जाकर माथा टिका आये, कौन-सा आपको पीले चावल बांटकर न्योता दिया कि ‘आओ भाईसाब मेरे यहाँ ऐसी-तैसी करवाओ!”
अब हुआ यूँ कि मरीज़ ने जो बोला, चैट जीपीटी ने उसका शब्दशः अर्थ निकालकर “इलाज” बता दिया…
उदाहरण-1
मरीज़: “गोड़े बोल गओं…”
चैट जीपीटी का शब्दशः अर्थ: “घोड़े बोलने लगे हैं।”
इलाज सुझाव: “कृपया अपने घोड़ों को शांत करने के लिए कान में रूई लगाएँ और घोड़ों के अस्तबल में शोर-रोधी पर्दे लगवाएँ।”
उदाहरण-2
मरीज़: “पेट में आँटो पड़ गयो…”
चैट जीपीटी का शब्दशः अर्थ: “आंतें गिर गयी हैं।”
इलाज सुझाव: “तुरंत आंतों को वापस लगाने के लिए बढ़िया क्वालिटी का ‘फ़ेविक्विक’ इस्तेमाल करें, और पेट पर टाइट बेल्ट बाँध लें।”
उदाहरण-3
मरीज़: “उड़ो-उड़ो सो रहूं…”
चैट जीपीटी का शब्दशः अर्थ: “मैं उड़ते-उड़ते सो रहा हूँ।”
इलाज सुझाव: “सोने से पहले पंखे की स्पीड कम करें, वरना हवा में सोने से गिरने का ख़तरा है।”
उदाहरण-4
मरीज़: “पेट में मइठा सा चलै…”
चैट जीपीटी का शब्दशः अर्थ: “पेट में मिठाई चल रही है।”
इलाज सुझाव: “शायद पेट में जलेबी घूम रही है, कृपया तुरंत हाजमोला खाएँ और मिठाई का सेवन सीमित करें।”
बस मेरा तो यही कहना है, ज़्यादा भावुक होने की ज़रूरत नहीं, ‘जहाँ काम आवे सूई वहां तलवार’ का प्रयोग पहले ही गुनीजनों ने वर्जित किया है।
(कार्टून: मितेश द्वारा रचित)

डॉ. मुकेश असीमित
हास्य-व्यंग्य, लेख, संस्मरण, कविता आदि विधाओं में लेखन। हिंदी और अंग्रेज़ी में लिखे व्यंग्यों के संग्रह प्रकाशित। कुछ साझा संकलनों में रचनाएं शामिल। देश-विदेश के प्रतिष्ठित दैनिक, साप्ताहिक, मासिक, पाक्षिक, त्रैमासिक पत्र-पत्रिकाओं एवं साहित्यिक मंचों पर नियमित प्रकाशन।
Share this:
- Share on Facebook (Opens in new window) Facebook
- Share on X (Opens in new window) X
- Share on Reddit (Opens in new window) Reddit
- Share on Pinterest (Opens in new window) Pinterest
- Share on Telegram (Opens in new window) Telegram
- Share on WhatsApp (Opens in new window) WhatsApp
- Share on Bluesky (Opens in new window) Bluesky
